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राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल के रिजॉर्ट ले जाने की तैयारी चंडीगढ़/शिमला: हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के एक रिजॉर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है। यह कदम संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है।  सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने हरियाणा के सभी 37 विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश के सुरक्षित स्थान पर ठहराने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विधायकों को ले जाने के लिए दो लग्जरी बसों की बुकिंग भी की गई है और वहां पहुंचने पर पुलिस सुरक्षा भी दी जाएगी।  दरअसल, हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। बीजेपी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के चुनाव लड़ने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।  राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होती है। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, इसलिए गणित के अनुसार पार्टी अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। हालांकि, पिछले चुनावों में क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।  राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायकों को रिजॉर्ट में रखने की रणनीति को आम तौर पर “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” कहा जाता है, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले विधायकों को विपक्ष के संपर्क से दूर रखना और पार्टी एकजुटता बनाए रखना होता है। राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल के रिजॉर्ट ले जाने की तैयारी चंडीगढ़/शिमला: हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के एक रिजॉर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है। यह कदम संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है।  सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने हरियाणा के सभी 37 विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश के सुरक्षित स्थान पर ठहराने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विधायकों को ले जाने के लिए दो लग्जरी बसों की बुकिंग भी की गई है और वहां पहुंचने पर पुलिस सुरक्षा भी दी जाएगी।  दरअसल, हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। बीजेपी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के चुनाव लड़ने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।  राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होती है। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, इसलिए गणित के अनुसार पार्टी अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। हालांकि, पिछले चुनावों में क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।  राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायकों को रिजॉर्ट में रखने की रणनीति को आम तौर पर “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” कहा जाता है, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले विधायकों को विपक्ष के संपर्क से दूर रखना और पार्टी एकजुटता बनाए रखना होता है।

1 hr ago
user_MINAKSHII BHARDWAJ
MINAKSHII BHARDWAJ
रामपुर, शिमला, हिमाचल प्रदेश•
1 hr ago

राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल के रिजॉर्ट ले जाने की तैयारी चंडीगढ़/शिमला: हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के एक रिजॉर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है। यह कदम संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है।  सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने हरियाणा के सभी 37 विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश के सुरक्षित स्थान पर ठहराने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विधायकों को ले जाने के लिए दो लग्जरी बसों की बुकिंग भी की गई है और वहां पहुंचने पर पुलिस सुरक्षा भी दी जाएगी।  दरअसल, हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। बीजेपी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के चुनाव लड़ने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।  राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होती है। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, इसलिए गणित के अनुसार पार्टी अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। हालांकि, पिछले चुनावों में क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।  राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायकों को रिजॉर्ट में रखने की रणनीति को आम तौर पर “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” कहा जाता है, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले विधायकों को विपक्ष के संपर्क से दूर रखना और पार्टी एकजुटता बनाए रखना होता है। राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल के रिजॉर्ट ले जाने की तैयारी चंडीगढ़/शिमला: हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के एक रिजॉर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है। यह कदम संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है।  सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने हरियाणा के सभी 37 विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश के सुरक्षित स्थान पर ठहराने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विधायकों को ले जाने के लिए दो लग्जरी बसों की बुकिंग भी की गई है और वहां पहुंचने पर पुलिस सुरक्षा भी दी जाएगी।  दरअसल, हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। बीजेपी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के चुनाव लड़ने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।  राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होती है। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, इसलिए गणित के अनुसार पार्टी अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। हालांकि, पिछले चुनावों में क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।  राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायकों को रिजॉर्ट में रखने की रणनीति को आम तौर पर “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” कहा जाता है, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले विधायकों को विपक्ष के संपर्क से दूर रखना और पार्टी एकजुटता बनाए रखना होता है।

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  • राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल के रिजॉर्ट ले जाने की तैयारी चंडीगढ़/शिमला: हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के एक रिजॉर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है। यह कदम संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है।  सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने हरियाणा के सभी 37 विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश के सुरक्षित स्थान पर ठहराने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विधायकों को ले जाने के लिए दो लग्जरी बसों की बुकिंग भी की गई है और वहां पहुंचने पर पुलिस सुरक्षा भी दी जाएगी।  दरअसल, हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। बीजेपी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के चुनाव लड़ने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।  राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होती है। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, इसलिए गणित के अनुसार पार्टी अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। हालांकि, पिछले चुनावों में क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।  राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायकों को रिजॉर्ट में रखने की रणनीति को आम तौर पर “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” कहा जाता है, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले विधायकों को विपक्ष के संपर्क से दूर रखना और पार्टी एकजुटता बनाए रखना होता है।
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    राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल के रिजॉर्ट ले जाने की तैयारी
चंडीगढ़/शिमला:
हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के एक रिजॉर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है। यह कदम संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है।  
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने हरियाणा के सभी 37 विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश के सुरक्षित स्थान पर ठहराने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि विधायकों को ले जाने के लिए दो लग्जरी बसों की बुकिंग भी की गई है और वहां पहुंचने पर पुलिस सुरक्षा भी दी जाएगी।  
दरअसल, हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। बीजेपी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के चुनाव लड़ने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।  
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होती है। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, इसलिए गणित के अनुसार पार्टी अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। हालांकि, पिछले चुनावों में क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।  
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायकों को रिजॉर्ट में रखने की रणनीति को आम तौर पर “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” कहा जाता है, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले विधायकों को विपक्ष के संपर्क से दूर रखना और पार्टी एकजुटता बनाए रखना होता है।
    user_MINAKSHII BHARDWAJ
    MINAKSHII BHARDWAJ
    रामपुर, शिमला, हिमाचल प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Dev Raj Thakur
    1
    Post by Dev Raj  Thakur
    user_Dev Raj  Thakur
    Dev Raj Thakur
    Farmer निरमंड, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    10 hrs ago
  • farming working
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    farming working
    user_Farming
    Farming
    Farmer रामपुर, शिमला, हिमाचल प्रदेश•
    10 hrs ago
  • 13 मार्च, बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। सैंज (कुल्लू): सैंज घाटी के मुख्य व्यापारिक और शैक्षिक केंद्र सैंज बाजार में पिछले दस महीनों से जारी गंभीर पेयजल संकट और अनियमित जलापूर्ति के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। शुक्रवार को सैंज वैली विकास समिति ने इस समस्या के स्थाई समाधान हेतु उपायुक्त कुल्लू को तहसीलदार सैंज के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा।
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    13 मार्च, बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज।
सैंज (कुल्लू):
सैंज घाटी के मुख्य व्यापारिक और शैक्षिक केंद्र सैंज बाजार में पिछले दस महीनों से जारी गंभीर पेयजल संकट और अनियमित जलापूर्ति के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। शुक्रवार को सैंज वैली विकास समिति ने इस समस्या के स्थाई समाधान हेतु उपायुक्त कुल्लू को तहसीलदार सैंज के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा।
    user_Budhi Singh Thakur
    Budhi Singh Thakur
    Local News Reporter Sainj, Kullu•
    3 hrs ago
  • शिमला में तिब्बती विमेंस एसोसिएशन ने 67वें तिब्बती महिला राष्ट्रीय विद्रोह दिवस पर चीन की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन 67वें तिब्बती नेशनल विमेंस अपराइजिंग डे ( Tibetan Women's Uprising Day) के मौके पर, तिब्बती विमेंस एसोसिएशन ने गुरुवार को शिमला में तिब्बती समुदाय ने चीन की दमनकारी नीतियों के विरोध में आक्रोश रैली निकाली। यह रैली शेर-ए-पंजाब चौक से उपायुक्त कार्यालय तक निकाली गई. रैली के बाद आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इस दौरान तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई। तिब्बतियन वुमेन एसोसिएशन प्रतिनिधियों ने चीन सरकार की नीतियों की निंदा करते हुए तिब्बत की आजादी की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता न केवल तिब्बती लोगों के लिए बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और विश्व समुदाय से तिब्बत आंदोलन को समर्थन देने की अपील की गई। गौरतलब है कि यह पहला प्रोटेस्ट 10 मार्च को हुआ था, जब वे नोरबुलिंगका के बाहर इकट्ठा हुईं और 12 तारीख को तिब्बती महिलाएं सड़कों पर उतरीं और कई तिब्बती महिलाओं ने तिब्बत के लिए अपनी जान दे दी। इसलिए यह एक बहुत ही अहम और ऐतिहासिक पल है।उसी घटना की स्मृति में हर वर्ष 12 मार्च को तिब्बती समुदाय विश्वभर में जनक्रांति दिवस मनाता है। यह उस दिन को याद करने का इवेंट है जब तिब्बत के तीनों प्रोविंस की तिब्बती महिलाएं, तिब्बत के इतिहास में पहली बार, एक साथ खड़ी हुईं और 1959 में तिब्बत पर कब्ज़ा कर रही क्रूर चीनी मिलिट्री फोर्स के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई।
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    शिमला में तिब्बती विमेंस एसोसिएशन ने 67वें तिब्बती महिला राष्ट्रीय विद्रोह दिवस पर चीन की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन
67वें तिब्बती नेशनल विमेंस अपराइजिंग डे ( Tibetan Women's Uprising Day)
के मौके पर, तिब्बती विमेंस एसोसिएशन ने गुरुवार को शिमला में तिब्बती समुदाय ने चीन की दमनकारी नीतियों के विरोध में आक्रोश रैली निकाली। यह रैली शेर-ए-पंजाब चौक से उपायुक्त कार्यालय तक निकाली गई.
रैली के बाद आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इस दौरान तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई।
तिब्बतियन वुमेन एसोसिएशन प्रतिनिधियों ने चीन सरकार की नीतियों की निंदा करते हुए तिब्बत की आजादी की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता न केवल तिब्बती लोगों के लिए बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और विश्व समुदाय से तिब्बत आंदोलन को समर्थन देने की अपील की गई।
गौरतलब है कि यह पहला प्रोटेस्ट 10 मार्च को हुआ था, जब वे नोरबुलिंगका के बाहर इकट्ठा हुईं और 12 तारीख को तिब्बती महिलाएं सड़कों पर उतरीं और कई तिब्बती महिलाओं ने तिब्बत के लिए अपनी जान दे दी। इसलिए यह एक बहुत ही अहम और ऐतिहासिक पल है।उसी घटना की स्मृति में हर वर्ष 12 मार्च को तिब्बती समुदाय विश्वभर में जनक्रांति दिवस मनाता है।
यह उस दिन को याद करने का इवेंट है जब तिब्बत के तीनों प्रोविंस की तिब्बती महिलाएं, तिब्बत के इतिहास में पहली बार, एक साथ खड़ी हुईं और 1959 में तिब्बत पर कब्ज़ा कर रही क्रूर चीनी मिलिट्री फोर्स के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई।
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    13 hrs ago
  • Kurtis Business
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    Kurtis Business
    user_Reporter Ravinder
    Reporter Ravinder
    Business management consultant Deha, Shimla•
    22 hrs ago
  • एनएमएमएस परीक्षा में अक्षित कुमार ने 98 अंक प्राप्त कर राजकीय आदर्श माध्यमिक विद्यालय चंडी की प्रतिष्ठा बढ़ाई
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    एनएमएमएस परीक्षा में अक्षित कुमार ने 98 अंक प्राप्त कर राजकीय आदर्श माध्यमिक विद्यालय चंडी की प्रतिष्ठा बढ़ाई
    user_Journalist Pawan Kumar Singh
    Journalist Pawan Kumar Singh
    कुनिहार, सोलन, हिमाचल प्रदेश•
    2 hrs ago
  • हिमाचल में एक साथ मई में होंगे पंचायत चुनाव, भाजपा हो रही परेशान सुखविंद्र सिंह सूक्खू
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    हिमाचल में एक साथ मई में होंगे पंचायत चुनाव, भाजपा हो रही परेशान 
सुखविंद्र सिंह सूक्खू
    user_MINAKSHII BHARDWAJ
    MINAKSHII BHARDWAJ
    रामपुर, शिमला, हिमाचल प्रदेश•
    1 hr ago
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