समस्याओं को लेकर गरजे प्रधान, विकास भवन में किया धरना-प्रदर्शन अल्मोड़ा। ग्राम प्रधानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर जिलेभर के ग्राम प्रधान मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन किया। इससे पूर्व ग्राम प्रधानों ने विकास भवन तिराहे से विकास भवन तक रैली निकाली। प्रधानों ने विकास भवन का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के समाधान की मांग किए जाने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान गांवों के विकास की धुरी हैं। वे ग्रामीणों के सुख-दुख में 24 घंटे साथ खड़े रहते हैं और गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रधानों ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन से वार्ता और पत्राचार के माध्यम से समाधान की मांग की जाती रही है। अगस्त माह में मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया था कि अगस्त के अंत तक अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक प्रधानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रदेशभर के प्रधान धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं। प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने ग्राम प्रधानों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने, वार्ड सदस्यों को बैठक भत्ता देने तथा मानदेय के लिए पृथक फंड की व्यवस्था करने की मांग की। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्य एवं केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान में वृद्धि, 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप ग्राम पंचायतों को 29 विभागों का हस्तांतरण और विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर पंचायत निधि गठित करने की मांग उठाई गई। प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाए जाने, सभी ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य बीमा कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वेक्षण में छूटे पात्र परिवारों के नाम ग्राम पंचायतों की आम बैठकों के माध्यम से जोड़ने का अधिकार देने की मांग भी की। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने सरकार से पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की। धरने के बाद सीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। यहाँ धरना प्रदर्शन में सुनील जोशी, देवेंद्र सिंह नयाल, सुनील बाराकोटी, उमेश मेहरा, दीपक सिंह, प्रीति पंत, सुरेश भट्ट, भूपाल बोरा, इन्दर सिंह मनराल, विनोद जोशी, देवेन्द्र मेहरा, चंद्रिका तिवारी, नंदन सिंह फर्त्याल, नवीन भट्ट, बची बोरा, टीका सिंह, मदन सिंह बिष्ट, प्रिया भोज, पंकज रौतेला सहित बड़ी संख्या में प्रधान विभिन्न विकासखण्डों से मौजूद रहे।
समस्याओं को लेकर गरजे प्रधान, विकास भवन में किया धरना-प्रदर्शन अल्मोड़ा। ग्राम प्रधानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर जिलेभर के ग्राम प्रधान मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन किया। इससे पूर्व ग्राम प्रधानों ने विकास भवन तिराहे से विकास भवन तक रैली निकाली। प्रधानों ने विकास भवन का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के समाधान की मांग किए जाने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान गांवों के विकास की धुरी हैं। वे ग्रामीणों के सुख-दुख में 24 घंटे साथ खड़े रहते हैं और गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रधानों ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन से वार्ता और पत्राचार के माध्यम से समाधान की मांग की जाती रही है। अगस्त माह में मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया था कि अगस्त के अंत तक अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक प्रधानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रदेशभर के प्रधान धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं। प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने ग्राम प्रधानों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने, वार्ड सदस्यों को बैठक भत्ता देने तथा मानदेय के लिए पृथक फंड की व्यवस्था करने की मांग की। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्य एवं केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान में वृद्धि, 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप ग्राम पंचायतों को 29 विभागों का हस्तांतरण और विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर पंचायत निधि गठित करने की मांग उठाई गई। प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाए जाने, सभी ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य बीमा कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वेक्षण में छूटे पात्र परिवारों के नाम ग्राम पंचायतों की आम बैठकों के माध्यम से जोड़ने का अधिकार देने की मांग भी की। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने सरकार से पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की। धरने के बाद सीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। यहाँ धरना प्रदर्शन में सुनील जोशी, देवेंद्र सिंह नयाल, सुनील बाराकोटी, उमेश मेहरा, दीपक सिंह, प्रीति पंत, सुरेश भट्ट, भूपाल बोरा, इन्दर सिंह मनराल, विनोद जोशी, देवेन्द्र मेहरा, चंद्रिका तिवारी, नंदन सिंह फर्त्याल, नवीन भट्ट, बची बोरा, टीका सिंह, मदन सिंह बिष्ट, प्रिया भोज, पंकज रौतेला सहित बड़ी संख्या में प्रधान विभिन्न विकासखण्डों से मौजूद रहे।
- आशा कार्यकर्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी, कर्मचारी दर्जे और पेंशन की मांग उत्तराखंड के नैनीताल में आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है। यूनियन ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में न्यूनतम वेतन निर्धारित करना, निश्चित मानदेय देना, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था और राज्य कर्मचारी का दर्जा शामिल है। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रही हैं, लेकिन सरकार उनकी आर्थिक सुरक्षा की अनदेखी कर रही है। यदि सरकार ने इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगी।1
- नैनीताल पुलिस की नई पहल नंदा देवी महोत्सव में जनता को साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा एवं डायल-112 के प्रति किया जागरूक नंदा देवी महोत्सव के दौरान नैनीताल पुलिस द्वारा श्रद्धालुओं एवं आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष *जनजागरूकता पहल शुरू* की गई। मेला परिसर में स्टॉल लगाकर जनता को *साइबर अपराध से बचाव, महिला सुरक्षा, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग एवं डायल-112 इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम* के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। *एसपी संचार नैनीताल श्री रेवाधर मठपाल* के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा स्टॉल के माध्यम से आमजन को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने, महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा से संबंधित हेल्पलाइन एवं पुलिस सेवाओं तथा आपात स्थिति में *डायल-112* के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान पुलिस टीम द्वारा जागरूकता संबंधी *पंपलेट भी वितरित* किए गए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सुरक्षा एवं पुलिस सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाई जा सके। कार्यक्रम के दौरान *श्री राजकुमार बिष्ट, निरीक्षक पुलिस दूरसंचार, श्रीमती नीशू गौतम, प्रभारी साइबर सेल, श्री रमेश चंद्र पाठक, प्रभारी डायल-112,कानि0 गोविंद सिंह मेहरा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल* सहित पुलिस टीम मौजूद रही।1
- किच्छा में शांतिपूर्वक जारी है नगर निकाय चुनाव का मतदान, जोश और उत्साह के साथ हो रहा है मतदान किच्छा में शांतिपूर्वक जारी है नगर निकाय चुनाव का मतदान किच्छा, 22 सितंबर। किच्छा में नगर निकाय चुनाव के लिए मंगलवार सुबह से मतदान शांतिपूर्वक जारी है। विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाता उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। पंत कॉलोनी और उतरांचल कॉलोनी स्थित बूथ संख्या 67 पर मतदाता कतार में खड़े होकर मतदान करते नजर आए। कार्यालय वरिष्ठ विपणन अधिकारी स्थित बूथ संख्या 22 एवं 23 तथा सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड स्थित बूथ संख्या 14, 15, 16 और 17 पर भी शांतिपूर्ण ढंग से मतदान जारी है। मतदान केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से निगरानी की जा रही है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने नवीन फल मंडी स्थित मतदान केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मतदान प्रक्रिया और केंद्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी ली। जिले में मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो रही है।1
- 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय चम्पावत में संवादात्मक संगोष्ठी आयोजित, एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर एलोपैथिक व आयुर्वेद चिकित्सकों ने किया मंथन। 11वें आयुर्वेद दिवस के पूर्व कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत मंगलवार को जिला चिकित्सालय चम्पावत के सभागार में Integrative Healthcare for Better Health Outcomes (बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल) विषय पर एक विशेष संवादात्मक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य दोनों चिकित्सा पद्धतियों के मध्य वैज्ञानिक संवाद, बेहतर तालमेल तथा रोगी-केंद्रित समन्वित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान आयुर्वेद को लेकर समाज तथा विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के मध्य प्रचलित भ्रांतियों एवं अवधारणाओं पर खुलकर वैज्ञानिक चर्चा की गई। एलोपैथिक चिकित्सकों द्वारा आयुर्वेद की वैज्ञानिक प्रामाणिकता, औषधियों की गुणवत्ता, पंचकर्म, क्षारसूत्र तथा आधुनिक उपचार के साथ आयुर्वेदिक दवाओं के समन्वय एवं विभिन्न रोगों में आयुर्वेद की भूमिका से संबंधित प्रश्न रखे गए। इन सभी जिज्ञासाओं का समाधान आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों एवं व्यावहारिक चिकित्सकीय अनुभवों के आधार पर किया गया। मंथन के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि किसी भी चिकित्सा पद्धति में रोगी के उपचार का निर्णय वैज्ञानिक प्रमाण, मरीज की स्थिति, सुरक्षा एवं चिकित्सकीय विवेक के आधार पर होना चाहिए। आवश्यकतानुसार दोनों पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मरीजों को अधिक सुरक्षित, प्रभावी एवं समग्र स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं। अंत में भविष्य में भी ऐसे अंतर-विभागीय संवाद एवं संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने पर सहमति व्यक्त की गई। आयोजित संगोष्ठी में आयुर्वेद एवं एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों, फार्मेसी अधिकारियों, नर्सिंग अधिकारियों तथा जिला चिकित्सालय के कार्मिकों ने सहभागिता की। संगोष्ठी में जिला चिकित्सालय चम्पावत के प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेंकटेश द्विवेदी, डॉ. सोनाली मंडल, फिजिशियन डॉ. अजय कुमार, डॉ. गौरांग जोशी, डॉ. गौरव, डॉ. सिद्धार्थ त्यागी, डॉ. इरम, मुख्य फार्मेसी अधिकारी श्री विष्णु गिरी, फार्मेसी अधिकारी श्री मनोज पुनेठा, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक नागरकोटी, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद सिंह गुसाईं, राष्ट्रीय आयुष मिशन के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुधाकर गंगवार, डॉ. गिरेंद्र चौहान, डॉ. ज़ेबा मलिक एवं डॉ. भास्कर मेहंदीरत्ता सहित अनेक चिकित्सक व अधिकारी उपस्थित रहे।2
- सफेद एम्बेसेडर का वह गुप्त पड़ाव: दशकों तक बीहड़ के सीने में दफन रहा माँ अवन्तिका और नीम करौली महाराज का यह महा-साक्षात्कार लालकुआं। आज की आधुनिक चकाचौंध, गाड़ियों के अनवरत शोर और व्यस्त बाजारों के पीछे लालकुआं की धरा पर दशकों पुराना एक ऐसा अलौकिक रहस्य छिपा है, जिसकी गूँज आज भी यहाँ की हवाओं में महसूस की जा सकती है। यह वृत्तांत है कैंची धाम के सिद्ध संत बाबा नीम करौली महाराज की गुप्त साधना, माँ अवन्तिका देवी के पुरातन शक्ति स्थल और उनके एक अनन्य साधक स्वर्गीय मदन नारायण पंत के उस अटूट संबंध का, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर भी आज जन-जन के लिए विस्मय और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। जब सूरज भी डरता था बीहड़ में झांकने से दशकों पूर्व का लालकुआं आज की तरह आबाद और विकसित नहीं था। चारों ओर घने, अभेद्य जंगलों का ऐसा साम्राज्य था जहाँ दोपहर के समय भी सूर्य की किरणें धरती को बमुश्किल छू पाती थीं। खूंखार वन्यजीवों और सन्नाटे से घिरे इसी निर्जन जंगल के बीच स्थित था माँ अवन्तिका देवी का एक अत्यंत प्राचीन, छोटे पत्थरों से निर्मित देवालय। उस दौर में किसी आम इंसान के लिए इस निर्जन अरण्य में अकेले पैर रखने की कल्पना भी रूह कंपा देने वाली थी। किंतु, इसी बीहड़ के सीने में एक महा-रहस्य छिपा था। उस समय जब भी एक सफेद एम्बेसेडर कार जंगलों को चीरती हुई लालकुआं से गुजरती, तो अचानक इस निर्जन शक्ति स्थल के बाहर उसके पहिये थम जाते थे। सन्नाटे में घंटों समाधिस्थ रहते थे महायोगी कार से उतरते थे दिव्य शक्तियों के स्वामी बाबा नीम करौली महाराज। वन के भयावह सन्नाटे की परवाह किए बिना, बाबा सीधे माँ अवन्तिका के सम्मुख पत्थरों के उस छोटे से मंदिर में जा बैठते। वहाँ वे घंटों गहरे ध्यान और महा-समाधि में लीन हो जाते थे। जंगल के उस एकांत में एक सिद्ध संत का माँ जगदम्बा के सम्मुख इस तरह मौन बैठना, वास्तव में आने वाले एक स्वर्णिम आध्यात्मिक युग का गुप्त संकेत था। कोई नहीं जानता था कि माँ अवन्तिका और कैंची धाम के संत के बीच मौन की कौन सी दिव्य भाषा में यह साक्षात्कार चल रहा था। पेट्रोल पंप से शुरू हुई वह जादुई कड़ी इस आध्यात्मिक गाथा का सबसे विस्मयकारी पहलू लालकुआं के एक स्थानीय पेट्रोल पंप से जुड़ा है। मूल रूप से जनपद पिथौरागढ़ के सुदूर पभ्या गाँव के निवासी और लालकुआं में प्रकांड विद्वान के रूप में सम्मानित, उच्च कुलीन ब्राह्मण स्वर्गीय मदन नारायण पंत का आवास उसी पेट्रोल पंप के ठीक पास था जहाँ बाबा की एम्बेसेडर कार में ईंधन भरा जाता था। यह कोई साधारण संयोग नहीं, बल्कि दो उच्च आत्माओं का पूर्व-निर्धारित मिलन था। जैसे ही बाबा की गाड़ी रुकती, पंत जी अपने सारे सांसारिक और व्यावसायिक कार्यों को बिसराकर बाबा की सेवा में समर्पित हो जाते थे। गाड़ी के पास घंटों तक बाबा और पंत जी के बीच धर्म, अध्यात्म और गूढ़ रहस्यों पर गंभीर चर्चा होती। मदन नारायण पंत जी के इस निश्छल समर्पण और सेवा भावना के कारण स्वयं महाराज जी उन पर पुत्रवत स्नेह और असीम कृपा बरसाते थे। वह चमत्कारी रात: जब माँ अवन्तिका ने दिया स्वप्नादेश मदन नारायण पंत जी केवल बाबा के प्रिय सहयोगी ही नहीं, बल्कि माँ भगवती के अनन्य उपासक भी थे। इसी निष्काम साधना के दौर में एक रात उनके जीवन में वह रहस्यमयी मोड़ आया, जिसने पूरे क्षेत्र की नियति बदल दी। घोर सन्नाटे के बीच माँ भगवती अवन्तिका ने साक्षात स्वप्न में दर्शन दिए। उस अविकसित और बीहड़ दौर में माँ ने आदेश दिया कि उसी निर्जन स्थान पर उनके पावन शक्तिपीठ का भव्य पुनरुत्थान किया जाए। स्वप्न से जागते ही पंत जी विस्मय और रोमांच से भर उठे। उन्होंने इसे कोई सामान्य कल्पना नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वरीय अधिदेश मानकर अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बना लिया। इस पुनीत कार्य में उन्हें अपने निष्ठावान सहयोगी स्वर्गीय योगेश गोयल और स्थानीय श्रद्धालुओं का साथ मिला। पंत जी के नेतृत्व में पत्थरों के उस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ। इस नव-निर्माण के दौरान स्वयं बाबा नीम करौली महाराज कई बार मंदिर प्रांगण में पधारे। वे वहाँ मदन नारायण पंत और भक्तों के संग बैठकर माँ अवन्तिका की महिमा का गुणगान करते और अपने दिव्य आशीर्वाद से इस धरा को अभिसिंचित करते। वही पत्थरों का छोटा सा ढांचा आज लाखों की आस्था का भव्य, जाग्रत तीर्थ बन चुका है। प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी: "वह दृश्य आज भी आँखों में तैरता है" स्वर्गीय मदन नारायण पंत जी के ७८ वर्षीय सुपुत्र सुमित्रानंदन पंत आज भी उन अलौकिक पलों को याद करते हुए भाव-विभोर हो उठते हैं। वे बताते हैं: > "बचपन में हमने पूज्य पिताजी की उस अगाध निष्ठा को बहुत करीब से देखा है। जब भी महाराज जी लालकुआं पधारते, हमारे पैतृक आवास पर उनका आगमन एक पावन उत्सव बन जाता था। बाबा घर आते, आध्यात्मिक चर्चा करते और फिर माँ अवन्तिका के मंदिर जाकर ध्यानमग्न हो जाते। पिताजी सब कुछ छोड़कर केवल बाबा की सेवा में रम जाते और कई बार तो बाबा के साथ ही सीधे कैंची धाम चले जाते थे। कैंची धाम का वह दिव्य वातावरण, मंदिर की गतिविधियाँ और महाराज जी का सान्निध्य आज भी मेरे अंतःकरण में उतना ही सजीव है, मानो यह सब कल ही घटा हो।" > लालकुआं की आत्मा में रची-बसी सनातन धरोहर इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर की पुष्टि करते हुए लालकुआं के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कैलाश चंद्र पंत साझा करते हैं कि बाबा नीम करौली महाराज की दिव्य छवि और उनकी असीम करुणा आज भी लालकुआं की आत्मा में गहराई से स्पंदित हो रही है। उनके अनुसार, बाबा नीम करौली महाराज और उनके परम भक्त स्वर्गीय मदन नारायण पंत की यह गाथा केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि लालकुआं की सांस्कृतिक चेतना की रीढ़ है। घने बीहड़ के सीने में रुकने वाली वह सफेद एम्बेसेडर, माँ अवन्तिका का वह रहस्यमयी स्वप्नादेश और पंत परिवार का अटूट समर्पण—यह महा-साक्षात्कार आज भी नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, निश्छल सेवा और गुरु-भक्ति के शाश्वत प्रकाश से आलोकित कर रहा है। @ रमाकान्त पन्त2
- “नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव में शामिल होंगे CM धामी”“नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव में शामिल होंगे CM धामी” “नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव में शामिल होंगे CM धामी”1
- गंगोलीहाट में आशा कार्यकत्रियों ने अपनी मांगों को लेकर खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन गंगोलीहाट में आशा कार्यकत्रियों ने अपनी मांगों को लेकर खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। 'उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन' और 'ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन' के आह्वान पर गंगोलीहाट क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकत्रियों ने प्रभारी चिकित्साधिकारी गंगोलीहाट के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अविलंब न्यूनतम वेतन, पेंशन तथा नियमितीकरण की मांग उठाई है। आशा कार्यकत्रियों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा राजकीय चिकित्सालयों में कामकाज ठप रखकर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग उनके श्रम के बल पर चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन, कर्मचारी दर्जा और पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ जहां सरकार विधायकों और जन प्रतिनिधियों के वेतनों में लगातार बढ़ोतरी कर रही है, वहीं दिन-रात मातृ शिशु सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी आशा कार्यकत्रियों को दैनिक मजदूरों से भी कम मानदेय दिया जा रहा है। यूनियन ने स्मरण दिलाया कि पूर्व में खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा आशाओं को 11,500 रुपये प्रति माह मानदेय देने तथा डीजी हेल्थ द्वारा नियत मानदेय का प्रस्ताव लागू करने का वादा किया गया था। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो सका है। ज्ञापन के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं ने प्रमुख रूप से मांग रखी है कि 11,500 रुपये मानदेय देने के वादे को तत्काल लागू किया जाए, आशाओं को राज्य कर्मचारी घोषित कर उनका नियमितीकरण किया जाए, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन व एकमुश्त धनराशि का प्रावधान किया जाए और सभी अस्पतालों में उनके सम्मानजनक व्यवहार के साथ सुरक्षित कार्य माहौल सुनिश्चित किया जाए। आशा कार्यकर्ता संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष उमा मेहरा एवम् आशा कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि आगामी चुनाव से पूर्व उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।2
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- जनता की सबसे बड़ी ताकत वोट है उसी वोट से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विकास और परिवर्तन होगा। #गैरसैंण #कर्णप्रयाग #viralpost #postoftheday #PostViral1