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गंगोलीहाट में आशा कार्यकत्रियों ने अपनी मांगों को लेकर खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन गंगोलीहाट में आशा कार्यकत्रियों ने अपनी मांगों को लेकर खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। 'उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन' और 'ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन' के आह्वान पर गंगोलीहाट क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकत्रियों ने प्रभारी चिकित्साधिकारी गंगोलीहाट के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अविलंब न्यूनतम वेतन, पेंशन तथा नियमितीकरण की मांग उठाई है। आशा कार्यकत्रियों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा राजकीय चिकित्सालयों में कामकाज ठप रखकर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग उनके श्रम के बल पर चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन, कर्मचारी दर्जा और पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ जहां सरकार विधायकों और जन प्रतिनिधियों के वेतनों में लगातार बढ़ोतरी कर रही है, वहीं दिन-रात मातृ शिशु सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी आशा कार्यकत्रियों को दैनिक मजदूरों से भी कम मानदेय दिया जा रहा है। यूनियन ने स्मरण दिलाया कि पूर्व में खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा आशाओं को 11,500 रुपये प्रति माह मानदेय देने तथा डीजी हेल्थ द्वारा नियत मानदेय का प्रस्ताव लागू करने का वादा किया गया था। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो सका है। ज्ञापन के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं ने प्रमुख रूप से मांग रखी है कि 11,500 रुपये मानदेय देने के वादे को तत्काल लागू किया जाए, आशाओं को राज्य कर्मचारी घोषित कर उनका नियमितीकरण किया जाए, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन व एकमुश्त धनराशि का प्रावधान किया जाए और सभी अस्पतालों में उनके सम्मानजनक व्यवहार के साथ सुरक्षित कार्य माहौल सुनिश्चित किया जाए। आशा कार्यकर्ता संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष उमा मेहरा एवम् आशा कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि आगामी चुनाव से पूर्व उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

12 hrs ago
user_Champawat news
Champawat news
Local News Reporter चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
12 hrs ago

गंगोलीहाट में आशा कार्यकत्रियों ने अपनी मांगों को लेकर खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन गंगोलीहाट में आशा कार्यकत्रियों ने अपनी मांगों को लेकर खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। 'उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन' और 'ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन' के आह्वान पर गंगोलीहाट क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकत्रियों ने प्रभारी चिकित्साधिकारी गंगोलीहाट के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अविलंब न्यूनतम वेतन, पेंशन तथा नियमितीकरण की मांग उठाई है। आशा कार्यकत्रियों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा राजकीय चिकित्सालयों में कामकाज ठप रखकर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग उनके श्रम के बल पर चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन, कर्मचारी दर्जा और पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ जहां सरकार विधायकों और जन प्रतिनिधियों के वेतनों में लगातार

बढ़ोतरी कर रही है, वहीं दिन-रात मातृ शिशु सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी आशा कार्यकत्रियों को दैनिक मजदूरों से भी कम मानदेय दिया जा रहा है। यूनियन ने स्मरण दिलाया कि पूर्व में खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा आशाओं को 11,500 रुपये प्रति माह मानदेय देने तथा डीजी हेल्थ द्वारा नियत मानदेय का प्रस्ताव लागू करने का वादा किया गया था। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो सका है। ज्ञापन के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं ने प्रमुख रूप से मांग रखी है कि 11,500 रुपये मानदेय देने के वादे को तत्काल लागू किया जाए, आशाओं को राज्य कर्मचारी घोषित कर उनका नियमितीकरण किया जाए, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन व एकमुश्त धनराशि का प्रावधान किया जाए और सभी अस्पतालों में उनके सम्मानजनक व्यवहार के साथ सुरक्षित कार्य माहौल सुनिश्चित किया जाए। आशा कार्यकर्ता संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष उमा मेहरा एवम् आशा कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि आगामी चुनाव से पूर्व उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

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    पहाड़ की फटाफट खबरें | Pithoragarh–Champawatपहाड़ की फटाफट खबरें | Pithoragarh–Champawat
पहाड़ की फटाफट खबरें | Pithoragarh–Champawat
    user_The Public Matter
    The Public Matter
    पत्रकार चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    13 hrs ago
  • समस्याओं को लेकर गरजे प्रधान, विकास भवन में किया धरना-प्रदर्शन अल्मोड़ा। ग्राम प्रधानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर जिलेभर के ग्राम प्रधान मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन किया। इससे पूर्व ग्राम प्रधानों ने विकास भवन तिराहे से विकास भवन तक रैली निकाली। प्रधानों ने विकास भवन का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के समाधान की मांग किए जाने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान गांवों के विकास की धुरी हैं। वे ग्रामीणों के सुख-दुख में 24 घंटे साथ खड़े रहते हैं और गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रधानों ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन से वार्ता और पत्राचार के माध्यम से समाधान की मांग की जाती रही है। अगस्त माह में मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया था कि अगस्त के अंत तक अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक प्रधानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रदेशभर के प्रधान धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं। प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने ग्राम प्रधानों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने, वार्ड सदस्यों को बैठक भत्ता देने तथा मानदेय के लिए पृथक फंड की व्यवस्था करने की मांग की। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्य एवं केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान में वृद्धि, 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप ग्राम पंचायतों को 29 विभागों का हस्तांतरण और विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर पंचायत निधि गठित करने की मांग उठाई गई। प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाए जाने, सभी ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य बीमा कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वेक्षण में छूटे पात्र परिवारों के नाम ग्राम पंचायतों की आम बैठकों के माध्यम से जोड़ने का अधिकार देने की मांग भी की। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने सरकार से पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की। धरने के बाद सीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। यहाँ धरना प्रदर्शन में सुनील जोशी, देवेंद्र सिंह नयाल, सुनील बाराकोटी, उमेश मेहरा, दीपक सिंह, प्रीति पंत, सुरेश भट्ट, भूपाल बोरा, इन्दर सिंह मनराल, विनोद जोशी, देवेन्द्र मेहरा, चंद्रिका तिवारी, नंदन सिंह फर्त्याल, नवीन भट्ट, बची बोरा, टीका सिंह, मदन सिंह बिष्ट, प्रिया भोज, पंकज रौतेला सहित बड़ी संख्या में प्रधान विभिन्न विकासखण्डों से मौजूद रहे।
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    समस्याओं को लेकर गरजे प्रधान, विकास भवन में किया धरना-प्रदर्शन
अल्मोड़ा। ग्राम प्रधानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर जिलेभर के ग्राम प्रधान मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन किया।  इससे पूर्व ग्राम प्रधानों ने विकास भवन तिराहे से विकास भवन तक रैली निकाली। प्रधानों ने विकास भवन का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के समाधान की मांग किए जाने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान गांवों के विकास की धुरी हैं। वे ग्रामीणों के सुख-दुख में 24 घंटे साथ खड़े रहते हैं और गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रधानों ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन से वार्ता और पत्राचार के माध्यम से समाधान की मांग की जाती रही है। अगस्त माह में मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया था कि अगस्त के अंत तक अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक प्रधानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रदेशभर के प्रधान धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं। प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने ग्राम प्रधानों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने, वार्ड सदस्यों को बैठक भत्ता देने तथा मानदेय के लिए पृथक फंड की व्यवस्था करने की मांग की। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्य एवं केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान में वृद्धि, 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप ग्राम पंचायतों को 29 विभागों का हस्तांतरण और विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर पंचायत निधि गठित करने की मांग उठाई गई। प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाए जाने, सभी ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य बीमा कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वेक्षण में छूटे पात्र परिवारों के नाम ग्राम पंचायतों की आम बैठकों के माध्यम से जोड़ने का अधिकार देने की मांग भी की। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने सरकार से पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की। धरने के बाद सीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। यहाँ धरना प्रदर्शन में सुनील जोशी, देवेंद्र सिंह नयाल, सुनील बाराकोटी, उमेश मेहरा, दीपक सिंह, प्रीति पंत, सुरेश भट्ट, भूपाल बोरा, इन्दर सिंह मनराल, विनोद जोशी, देवेन्द्र मेहरा, चंद्रिका तिवारी, नंदन सिंह फर्त्याल, नवीन भट्ट, बची बोरा, टीका सिंह, मदन सिंह बिष्ट, प्रिया भोज, पंकज रौतेला सहित बड़ी संख्या में प्रधान विभिन्न विकासखण्डों से मौजूद रहे।
    user_Vinod Joshi
    Vinod Joshi
    Local News Reporter Almora, Uttarakhand•
    3 hrs ago
  • प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने संभाला कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार नैनीताल। प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने मंगलवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभाल लिया है। राजभवन से नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने विश्वविद्यालय के डीन, निदेशकों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय पुस्तकालय का निरीक्षण कर ई-संसाधनों का जायजा लिया। प्रो. बिष्ट ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और उच्च स्तरीय अनुसंधान को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों की पर्वतीय पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
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    प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने संभाला कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार
नैनीताल। प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने मंगलवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभाल लिया है। राजभवन से नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने विश्वविद्यालय के डीन, निदेशकों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय पुस्तकालय का निरीक्षण कर ई-संसाधनों का जायजा लिया। प्रो. बिष्ट ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और उच्च स्तरीय अनुसंधान को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों की पर्वतीय पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
    user_Nainital news
    Nainital news
    नैनीताल, नैनीताल, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
  • नंदा देवी महोत्सव के पावन अवसर पर एसपी क्राइम ट्रैफिक नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र ने नैनी झील में किया दीपदान आज सायंकाल सरोवर नगरी नैनीताल में आयोजित नंदा देवी महोत्सव के पावन अवसर पर *एसपी नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र द्वारा नैनी झील में श्रद्धा एवं आस्था के साथ दीपदान* किया गया। इस अवसर पर एसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने दीपदान कर *समस्त प्रदेशवासियों एवं नंदा देवी के भक्तों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य* की कामना की। नंदा देवी महोत्सव उत्तराखंड की *समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक* है।
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    नंदा देवी महोत्सव के पावन अवसर पर एसपी क्राइम ट्रैफिक नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र ने नैनी झील में किया दीपदान
आज सायंकाल सरोवर नगरी नैनीताल में आयोजित नंदा देवी महोत्सव के पावन अवसर पर *एसपी नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र द्वारा नैनी झील में श्रद्धा एवं आस्था के साथ दीपदान* किया गया।
इस अवसर पर एसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने दीपदान कर *समस्त प्रदेशवासियों एवं नंदा देवी के भक्तों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य* की कामना की।
नंदा देवी महोत्सव उत्तराखंड की *समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक* है।
    user_Local khabre NTL
    Local khabre NTL
    Local News Reporter Nainital, Uttarakhand•
    6 hrs ago
  • सफेद एम्बेसेडर का वह गुप्त पड़ाव: दशकों तक बीहड़ के सीने में दफन रहा माँ अवन्तिका और नीम करौली महाराज का यह महा-साक्षात्कार लालकुआं। आज की आधुनिक चकाचौंध, गाड़ियों के अनवरत शोर और व्यस्त बाजारों के पीछे लालकुआं की धरा पर दशकों पुराना एक ऐसा अलौकिक रहस्य छिपा है, जिसकी गूँज आज भी यहाँ की हवाओं में महसूस की जा सकती है। यह वृत्तांत है कैंची धाम के सिद्ध संत बाबा नीम करौली महाराज की गुप्त साधना, माँ अवन्तिका देवी के पुरातन शक्ति स्थल और उनके एक अनन्य साधक स्वर्गीय मदन नारायण पंत के उस अटूट संबंध का, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर भी आज जन-जन के लिए विस्मय और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। जब सूरज भी डरता था बीहड़ में झांकने से दशकों पूर्व का लालकुआं आज की तरह आबाद और विकसित नहीं था। चारों ओर घने, अभेद्य जंगलों का ऐसा साम्राज्य था जहाँ दोपहर के समय भी सूर्य की किरणें धरती को बमुश्किल छू पाती थीं। खूंखार वन्यजीवों और सन्नाटे से घिरे इसी निर्जन जंगल के बीच स्थित था माँ अवन्तिका देवी का एक अत्यंत प्राचीन, छोटे पत्थरों से निर्मित देवालय। उस दौर में किसी आम इंसान के लिए इस निर्जन अरण्य में अकेले पैर रखने की कल्पना भी रूह कंपा देने वाली थी। किंतु, इसी बीहड़ के सीने में एक महा-रहस्य छिपा था। उस समय जब भी एक सफेद एम्बेसेडर कार जंगलों को चीरती हुई लालकुआं से गुजरती, तो अचानक इस निर्जन शक्ति स्थल के बाहर उसके पहिये थम जाते थे। सन्नाटे में घंटों समाधिस्थ रहते थे महायोगी कार से उतरते थे दिव्य शक्तियों के स्वामी बाबा नीम करौली महाराज। वन के भयावह सन्नाटे की परवाह किए बिना, बाबा सीधे माँ अवन्तिका के सम्मुख पत्थरों के उस छोटे से मंदिर में जा बैठते। वहाँ वे घंटों गहरे ध्यान और महा-समाधि में लीन हो जाते थे। जंगल के उस एकांत में एक सिद्ध संत का माँ जगदम्बा के सम्मुख इस तरह मौन बैठना, वास्तव में आने वाले एक स्वर्णिम आध्यात्मिक युग का गुप्त संकेत था। कोई नहीं जानता था कि माँ अवन्तिका और कैंची धाम के संत के बीच मौन की कौन सी दिव्य भाषा में यह साक्षात्कार चल रहा था। पेट्रोल पंप से शुरू हुई वह जादुई कड़ी इस आध्यात्मिक गाथा का सबसे विस्मयकारी पहलू लालकुआं के एक स्थानीय पेट्रोल पंप से जुड़ा है। मूल रूप से जनपद पिथौरागढ़ के सुदूर पभ्या गाँव के निवासी और लालकुआं में प्रकांड विद्वान के रूप में सम्मानित, उच्च कुलीन ब्राह्मण स्वर्गीय मदन नारायण पंत का आवास उसी पेट्रोल पंप के ठीक पास था जहाँ बाबा की एम्बेसेडर कार में ईंधन भरा जाता था। यह कोई साधारण संयोग नहीं, बल्कि दो उच्च आत्माओं का पूर्व-निर्धारित मिलन था। जैसे ही बाबा की गाड़ी रुकती, पंत जी अपने सारे सांसारिक और व्यावसायिक कार्यों को बिसराकर बाबा की सेवा में समर्पित हो जाते थे। गाड़ी के पास घंटों तक बाबा और पंत जी के बीच धर्म, अध्यात्म और गूढ़ रहस्यों पर गंभीर चर्चा होती। मदन नारायण पंत जी के इस निश्छल समर्पण और सेवा भावना के कारण स्वयं महाराज जी उन पर पुत्रवत स्नेह और असीम कृपा बरसाते थे। वह चमत्कारी रात: जब माँ अवन्तिका ने दिया स्वप्नादेश मदन नारायण पंत जी केवल बाबा के प्रिय सहयोगी ही नहीं, बल्कि माँ भगवती के अनन्य उपासक भी थे। इसी निष्काम साधना के दौर में एक रात उनके जीवन में वह रहस्यमयी मोड़ आया, जिसने पूरे क्षेत्र की नियति बदल दी। घोर सन्नाटे के बीच माँ भगवती अवन्तिका ने साक्षात स्वप्न में दर्शन दिए। उस अविकसित और बीहड़ दौर में माँ ने आदेश दिया कि उसी निर्जन स्थान पर उनके पावन शक्तिपीठ का भव्य पुनरुत्थान किया जाए। स्वप्न से जागते ही पंत जी विस्मय और रोमांच से भर उठे। उन्होंने इसे कोई सामान्य कल्पना नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वरीय अधिदेश मानकर अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बना लिया। इस पुनीत कार्य में उन्हें अपने निष्ठावान सहयोगी स्वर्गीय योगेश गोयल और स्थानीय श्रद्धालुओं का साथ मिला। पंत जी के नेतृत्व में पत्थरों के उस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ। इस नव-निर्माण के दौरान स्वयं बाबा नीम करौली महाराज कई बार मंदिर प्रांगण में पधारे। वे वहाँ मदन नारायण पंत और भक्तों के संग बैठकर माँ अवन्तिका की महिमा का गुणगान करते और अपने दिव्य आशीर्वाद से इस धरा को अभिसिंचित करते। वही पत्थरों का छोटा सा ढांचा आज लाखों की आस्था का भव्य, जाग्रत तीर्थ बन चुका है। प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी: "वह दृश्य आज भी आँखों में तैरता है" स्वर्गीय मदन नारायण पंत जी के ७८ वर्षीय सुपुत्र सुमित्रानंदन पंत आज भी उन अलौकिक पलों को याद करते हुए भाव-विभोर हो उठते हैं। वे बताते हैं: > "बचपन में हमने पूज्य पिताजी की उस अगाध निष्ठा को बहुत करीब से देखा है। जब भी महाराज जी लालकुआं पधारते, हमारे पैतृक आवास पर उनका आगमन एक पावन उत्सव बन जाता था। बाबा घर आते, आध्यात्मिक चर्चा करते और फिर माँ अवन्तिका के मंदिर जाकर ध्यानमग्न हो जाते। पिताजी सब कुछ छोड़कर केवल बाबा की सेवा में रम जाते और कई बार तो बाबा के साथ ही सीधे कैंची धाम चले जाते थे। कैंची धाम का वह दिव्य वातावरण, मंदिर की गतिविधियाँ और महाराज जी का सान्निध्य आज भी मेरे अंतःकरण में उतना ही सजीव है, मानो यह सब कल ही घटा हो।" > लालकुआं की आत्मा में रची-बसी सनातन धरोहर इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर की पुष्टि करते हुए लालकुआं के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कैलाश चंद्र पंत साझा करते हैं कि बाबा नीम करौली महाराज की दिव्य छवि और उनकी असीम करुणा आज भी लालकुआं की आत्मा में गहराई से स्पंदित हो रही है। उनके अनुसार, बाबा नीम करौली महाराज और उनके परम भक्त स्वर्गीय मदन नारायण पंत की यह गाथा केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि लालकुआं की सांस्कृतिक चेतना की रीढ़ है। घने बीहड़ के सीने में रुकने वाली वह सफेद एम्बेसेडर, माँ अवन्तिका का वह रहस्यमयी स्वप्नादेश और पंत परिवार का अटूट समर्पण—यह महा-साक्षात्कार आज भी नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, निश्छल सेवा और गुरु-भक्ति के शाश्वत प्रकाश से आलोकित कर रहा है। @ रमाकान्त पन्त
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    सफेद एम्बेसेडर का वह गुप्त पड़ाव: दशकों तक बीहड़ के सीने में दफन रहा माँ अवन्तिका और नीम करौली महाराज का यह महा-साक्षात्कार
लालकुआं। आज की आधुनिक चकाचौंध, गाड़ियों के अनवरत शोर और व्यस्त बाजारों के पीछे लालकुआं की धरा पर दशकों पुराना एक ऐसा अलौकिक रहस्य छिपा है, जिसकी गूँज आज भी यहाँ की हवाओं में महसूस की जा सकती है। यह वृत्तांत है कैंची धाम के सिद्ध संत बाबा नीम करौली महाराज की गुप्त साधना, माँ अवन्तिका देवी के पुरातन शक्ति स्थल और उनके एक अनन्य साधक स्वर्गीय मदन नारायण पंत के उस अटूट संबंध का, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर भी आज जन-जन के लिए विस्मय और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
जब सूरज भी डरता था बीहड़ में झांकने से
दशकों पूर्व का लालकुआं आज की तरह आबाद और विकसित नहीं था। चारों ओर घने, अभेद्य जंगलों का ऐसा साम्राज्य था जहाँ दोपहर के समय भी सूर्य की किरणें धरती को बमुश्किल छू पाती थीं। खूंखार वन्यजीवों और सन्नाटे से घिरे इसी निर्जन जंगल के बीच स्थित था माँ अवन्तिका देवी का एक अत्यंत प्राचीन, छोटे पत्थरों से निर्मित देवालय। उस दौर में किसी आम इंसान के लिए इस निर्जन अरण्य में अकेले पैर रखने की कल्पना भी रूह कंपा देने वाली थी।
किंतु, इसी बीहड़ के सीने में एक महा-रहस्य छिपा था। उस समय जब भी एक सफेद एम्बेसेडर कार जंगलों को चीरती हुई लालकुआं से गुजरती, तो अचानक इस निर्जन शक्ति स्थल के बाहर उसके पहिये थम जाते थे।
सन्नाटे में घंटों समाधिस्थ रहते थे महायोगी
कार से उतरते थे दिव्य शक्तियों के स्वामी बाबा नीम करौली महाराज। वन के भयावह सन्नाटे की परवाह किए बिना, बाबा सीधे माँ अवन्तिका के सम्मुख पत्थरों के उस छोटे से मंदिर में जा बैठते। वहाँ वे घंटों गहरे ध्यान और महा-समाधि में लीन हो जाते थे।
जंगल के उस एकांत में एक सिद्ध संत का माँ जगदम्बा के सम्मुख इस तरह मौन बैठना, वास्तव में आने वाले एक स्वर्णिम आध्यात्मिक युग का गुप्त संकेत था। कोई नहीं जानता था कि माँ अवन्तिका और कैंची धाम के संत के बीच मौन की कौन सी दिव्य भाषा में यह साक्षात्कार चल रहा था।
पेट्रोल पंप से शुरू हुई वह जादुई कड़ी
इस आध्यात्मिक गाथा का सबसे विस्मयकारी पहलू लालकुआं के एक स्थानीय पेट्रोल पंप से जुड़ा है। मूल रूप से जनपद पिथौरागढ़ के सुदूर पभ्या गाँव के निवासी और लालकुआं में प्रकांड विद्वान के रूप में सम्मानित, उच्च कुलीन ब्राह्मण स्वर्गीय मदन नारायण पंत का आवास उसी पेट्रोल पंप के ठीक पास था जहाँ बाबा की एम्बेसेडर कार में ईंधन भरा जाता था।
यह कोई साधारण संयोग नहीं, बल्कि दो उच्च आत्माओं का पूर्व-निर्धारित मिलन था। जैसे ही बाबा की गाड़ी रुकती, पंत जी अपने सारे सांसारिक और व्यावसायिक कार्यों को बिसराकर बाबा की सेवा में समर्पित हो जाते थे। गाड़ी के पास घंटों तक बाबा और पंत जी के बीच धर्म, अध्यात्म और गूढ़ रहस्यों पर गंभीर चर्चा होती। मदन नारायण पंत जी के इस निश्छल समर्पण और सेवा भावना के कारण स्वयं महाराज जी उन पर पुत्रवत स्नेह और असीम कृपा बरसाते थे।
वह चमत्कारी रात: जब माँ अवन्तिका ने दिया स्वप्नादेश
मदन नारायण पंत जी केवल बाबा के प्रिय सहयोगी ही नहीं, बल्कि माँ भगवती के अनन्य उपासक भी थे। इसी निष्काम साधना के दौर में एक रात उनके जीवन में वह रहस्यमयी मोड़ आया, जिसने पूरे क्षेत्र की नियति बदल दी।
घोर सन्नाटे के बीच माँ भगवती अवन्तिका ने साक्षात स्वप्न में दर्शन दिए। उस अविकसित और बीहड़ दौर में माँ ने आदेश दिया कि उसी निर्जन स्थान पर उनके पावन शक्तिपीठ का भव्य पुनरुत्थान किया जाए। स्वप्न से जागते ही पंत जी विस्मय और रोमांच से भर उठे। उन्होंने इसे कोई सामान्य कल्पना नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वरीय अधिदेश मानकर अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बना लिया।
इस पुनीत कार्य में उन्हें अपने निष्ठावान सहयोगी स्वर्गीय योगेश गोयल और स्थानीय श्रद्धालुओं का साथ मिला। पंत जी के नेतृत्व में पत्थरों के उस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ। इस नव-निर्माण के दौरान स्वयं बाबा नीम करौली महाराज कई बार मंदिर प्रांगण में पधारे। वे वहाँ मदन नारायण पंत और भक्तों के संग बैठकर माँ अवन्तिका की महिमा का गुणगान करते और अपने दिव्य आशीर्वाद से इस धरा को अभिसिंचित करते। वही पत्थरों का छोटा सा ढांचा आज लाखों की आस्था का भव्य, जाग्रत तीर्थ बन चुका है।
प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी: "वह दृश्य आज भी आँखों में तैरता है"
स्वर्गीय मदन नारायण पंत जी के ७८ वर्षीय सुपुत्र सुमित्रानंदन पंत आज भी उन अलौकिक पलों को याद करते हुए भाव-विभोर हो उठते हैं। वे बताते हैं:
> "बचपन में हमने पूज्य पिताजी की उस अगाध निष्ठा को बहुत करीब से देखा है। जब भी महाराज जी लालकुआं पधारते, हमारे पैतृक आवास पर उनका आगमन एक पावन उत्सव बन जाता था। बाबा घर आते, आध्यात्मिक चर्चा करते और फिर माँ अवन्तिका के मंदिर जाकर ध्यानमग्न हो जाते। पिताजी सब कुछ छोड़कर केवल बाबा की सेवा में रम जाते और कई बार तो बाबा के साथ ही सीधे कैंची धाम चले जाते थे। कैंची धाम का वह दिव्य वातावरण, मंदिर की गतिविधियाँ और महाराज जी का सान्निध्य आज भी मेरे अंतःकरण में उतना ही सजीव है, मानो यह सब कल ही घटा हो।"
> 
लालकुआं की आत्मा में रची-बसी सनातन धरोहर
इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर की पुष्टि करते हुए लालकुआं के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कैलाश चंद्र पंत साझा करते हैं कि बाबा नीम करौली महाराज की दिव्य छवि और उनकी असीम करुणा आज भी लालकुआं की आत्मा में गहराई से स्पंदित हो रही है। उनके अनुसार, बाबा नीम करौली महाराज और उनके परम भक्त स्वर्गीय मदन नारायण पंत की यह गाथा केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि लालकुआं की सांस्कृतिक चेतना की रीढ़ है।
घने बीहड़ के सीने में रुकने वाली वह सफेद एम्बेसेडर, माँ अवन्तिका का वह रहस्यमयी स्वप्नादेश और पंत परिवार का अटूट समर्पण—यह महा-साक्षात्कार आज भी नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, निश्छल सेवा और गुरु-भक्ति के शाश्वत प्रकाश से आलोकित कर रहा है।
@ रमाकान्त पन्त
    user_शैल शक्ति
    शैल शक्ति
    Local News Reporter लालकुआँ, नैनीताल, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • UP Weather Update Today: यूपी में मौसम का बड़ा यू-टर्न! बारिश थमी, 4°C तक बढ़ेगा तापमान | 22 सितंबर IMD उत्तर प्रदेश में मौसम ने बड़ा यू-टर्न ले लिया है। कई दिनों तक लगातार हुई बारिश अब कमजोर पड़ चुकी है और 22 सितंबर से पूरे प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। इस वीडियो में जानिए UP Weather Update Today, IMD Weather Forecast, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश का ताजा मौसम अपडेट, बढ़ते तापमान का अनुमान और आने वाले 3 से 4 दिनों में मौसम कैसा रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार आज प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क रहने की संभावना है। बादलों के हटने के बाद तेज धूप निकल सकती है, जिससे अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं हवा में नमी बने रहने के कारण उमस भी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। अगर आप उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले—लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, गाजियाबाद, अयोध्या, बरेली, झांसी, अलीगढ़, मथुरा या अन्य शहरों—का मौसम जानना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है। G Express पर आपको हर दिन सबसे तेज और भरोसेमंद मौसम अपडेट मिलते हैं। वीडियो पसंद आए तो Like करें, Share करें और Channel को Subscribe करना न भूलें। कमेंट में जरूर बताइए—आपके शहर में आज मौसम कैसा है?
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    UP Weather Update Today: यूपी में मौसम का बड़ा यू-टर्न! बारिश थमी, 4°C तक बढ़ेगा तापमान | 22 सितंबर IMD
उत्तर प्रदेश में मौसम ने बड़ा यू-टर्न ले लिया है। कई दिनों तक लगातार हुई बारिश अब कमजोर पड़ चुकी है और 22 सितंबर से पूरे प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। इस वीडियो में जानिए UP Weather Update Today, IMD Weather Forecast, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश का ताजा मौसम अपडेट, बढ़ते तापमान का अनुमान और आने वाले 3 से 4 दिनों में मौसम कैसा रहने वाला है।
मौसम विभाग के अनुसार आज प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क रहने की संभावना है। बादलों के हटने के बाद तेज धूप निकल सकती है, जिससे अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं हवा में नमी बने रहने के कारण उमस भी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
अगर आप उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले—लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, गाजियाबाद, अयोध्या, बरेली, झांसी, अलीगढ़, मथुरा या अन्य शहरों—का मौसम जानना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है।
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    G EXPRESS
    Local News Reporter दुगनाकुरी, बागेश्वर, उत्तराखंड•
    16 hrs ago
  • बेरीनाग में पौराणिक रात्रि मेले की तैयारियों पर मंथन, व्यवस्थाओं को लेकर बनी रूपरेखा बेरीनाग (पिथौरागढ़)। पौराणिक रात्रि मेले के भव्य और सफल आयोजन को लेकर सोमवार को लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मेले की तैयारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष हेमवंती पंत ने की। इस दौरान मेले के पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखते हुए आयोजन को भव्य स्वरूप देने पर विचार-विमर्श किया गया। श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था समेत अन्य व्यवस्थाओं को लेकर उपस्थित लोगों ने अपने सुझाव रखे। बैठक में मेले की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर प्रस्ताव तैयार किए गए। कार्यक्रम का संचालन मेला संयोजक इन्द्र धानिक ने किया। इस अवसर पर नाग मंदिर बेरीनाग के अध्यक्ष ललित पंत, सेवानिवृत्त अनुसचिव एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य करम राम, गंगा सिंह सामंत, आरएसएस जिला संघचालक गोविंद खाती, भूपेश पंत, पूर्व मंडल महामंत्री विमलेश पंत, वरिष्ठ पत्रकार जीवन धानिक, गोविंद भंडारी, कैलाश चन्याल, राजीव शर्मा, मोती सिंह धानिक, नगर भाजपा बेरीनाग के सोशल मीडिया प्रभारी निखिल पंत सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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    बेरीनाग में पौराणिक रात्रि मेले की तैयारियों पर मंथन, व्यवस्थाओं को लेकर बनी रूपरेखा
बेरीनाग (पिथौरागढ़)। पौराणिक रात्रि मेले के भव्य और सफल आयोजन को लेकर सोमवार को लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मेले की तैयारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष हेमवंती पंत ने की। इस दौरान मेले के पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखते हुए आयोजन को भव्य स्वरूप देने पर विचार-विमर्श किया गया। श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था समेत अन्य व्यवस्थाओं को लेकर उपस्थित लोगों ने अपने सुझाव रखे।
बैठक में मेले की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर प्रस्ताव तैयार किए गए। कार्यक्रम का संचालन मेला संयोजक इन्द्र धानिक ने किया।
इस अवसर पर नाग मंदिर बेरीनाग के अध्यक्ष ललित पंत, सेवानिवृत्त अनुसचिव एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य करम राम, गंगा सिंह सामंत, आरएसएस जिला संघचालक गोविंद खाती, भूपेश पंत, पूर्व मंडल महामंत्री विमलेश पंत, वरिष्ठ पत्रकार जीवन धानिक, गोविंद भंडारी, कैलाश चन्याल, राजीव शर्मा, मोती सिंह धानिक, नगर भाजपा बेरीनाग के सोशल मीडिया प्रभारी निखिल पंत सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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    Champawat news
    Local News Reporter चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    12 hrs ago
  • आशा कार्यकर्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी, कर्मचारी दर्जे और पेंशन की मांग उत्तराखंड के नैनीताल में आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है। यूनियन ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में न्यूनतम वेतन निर्धारित करना, निश्चित मानदेय देना, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था और राज्य कर्मचारी का दर्जा शामिल है। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रही हैं, लेकिन सरकार उनकी आर्थिक सुरक्षा की अनदेखी कर रही है। यदि सरकार ने इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगी।
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    आशा कार्यकर्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी, कर्मचारी दर्जे और पेंशन की मांग
उत्तराखंड के नैनीताल में आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है। यूनियन ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में न्यूनतम वेतन निर्धारित करना, निश्चित मानदेय देना, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था और राज्य कर्मचारी का दर्जा शामिल है। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रही हैं, लेकिन सरकार उनकी आर्थिक सुरक्षा की अनदेखी कर रही है। यदि सरकार ने इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगी।
    user_Nainital news
    Nainital news
    नैनीताल, नैनीताल, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
  • ⚠️ कपकोट में बड़ा सड़क हादसा कार खाई में गिरी, 1 की मौत...4 घायल ⚠️ कपकोट में बड़ा सड़क हादसा कार खाई में गिरी, 1 की मौत...4 घायल
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    ⚠️ कपकोट में बड़ा सड़क हादसा कार खाई में गिरी, 1 की मौत...4 घायल
⚠️ कपकोट में बड़ा सड़क हादसा कार खाई में गिरी, 1 की मौत...4 घायल
    user_The Public Matter
    The Public Matter
    पत्रकार चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    13 hrs ago
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