सफेद एम्बेसेडर का वह गुप्त पड़ाव: दशकों तक बीहड़ के सीने में दफन रहा माँ अवन्तिका और नीम करौली महाराज का यह महा-साक्षात्कार लालकुआं। आज की आधुनिक चकाचौंध, गाड़ियों के अनवरत शोर और व्यस्त बाजारों के पीछे लालकुआं की धरा पर दशकों पुराना एक ऐसा अलौकिक रहस्य छिपा है, जिसकी गूँज आज भी यहाँ की हवाओं में महसूस की जा सकती है। यह वृत्तांत है कैंची धाम के सिद्ध संत बाबा नीम करौली महाराज की गुप्त साधना, माँ अवन्तिका देवी के पुरातन शक्ति स्थल और उनके एक अनन्य साधक स्वर्गीय मदन नारायण पंत के उस अटूट संबंध का, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर भी आज जन-जन के लिए विस्मय और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। जब सूरज भी डरता था बीहड़ में झांकने से दशकों पूर्व का लालकुआं आज की तरह आबाद और विकसित नहीं था। चारों ओर घने, अभेद्य जंगलों का ऐसा साम्राज्य था जहाँ दोपहर के समय भी सूर्य की किरणें धरती को बमुश्किल छू पाती थीं। खूंखार वन्यजीवों और सन्नाटे से घिरे इसी निर्जन जंगल के बीच स्थित था माँ अवन्तिका देवी का एक अत्यंत प्राचीन, छोटे पत्थरों से निर्मित देवालय। उस दौर में किसी आम इंसान के लिए इस निर्जन अरण्य में अकेले पैर रखने की कल्पना भी रूह कंपा देने वाली थी। किंतु, इसी बीहड़ के सीने में एक महा-रहस्य छिपा था। उस समय जब भी एक सफेद एम्बेसेडर कार जंगलों को चीरती हुई लालकुआं से गुजरती, तो अचानक इस निर्जन शक्ति स्थल के बाहर उसके पहिये थम जाते थे। सन्नाटे में घंटों समाधिस्थ रहते थे महायोगी कार से उतरते थे दिव्य शक्तियों के स्वामी बाबा नीम करौली महाराज। वन के भयावह सन्नाटे की परवाह किए बिना, बाबा सीधे माँ अवन्तिका के सम्मुख पत्थरों के उस छोटे से मंदिर में जा बैठते। वहाँ वे घंटों गहरे ध्यान और महा-समाधि में लीन हो जाते थे। जंगल के उस एकांत में एक सिद्ध संत का माँ जगदम्बा के सम्मुख इस तरह मौन बैठना, वास्तव में आने वाले एक स्वर्णिम आध्यात्मिक युग का गुप्त संकेत था। कोई नहीं जानता था कि माँ अवन्तिका और कैंची धाम के संत के बीच मौन की कौन सी दिव्य भाषा में यह साक्षात्कार चल रहा था। पेट्रोल पंप से शुरू हुई वह जादुई कड़ी इस आध्यात्मिक गाथा का सबसे विस्मयकारी पहलू लालकुआं के एक स्थानीय पेट्रोल पंप से जुड़ा है। मूल रूप से जनपद पिथौरागढ़ के सुदूर पभ्या गाँव के निवासी और लालकुआं में प्रकांड विद्वान के रूप में सम्मानित, उच्च कुलीन ब्राह्मण स्वर्गीय मदन नारायण पंत का आवास उसी पेट्रोल पंप के ठीक पास था जहाँ बाबा की एम्बेसेडर कार में ईंधन भरा जाता था। यह कोई साधारण संयोग नहीं, बल्कि दो उच्च आत्माओं का पूर्व-निर्धारित मिलन था। जैसे ही बाबा की गाड़ी रुकती, पंत जी अपने सारे सांसारिक और व्यावसायिक कार्यों को बिसराकर बाबा की सेवा में समर्पित हो जाते थे। गाड़ी के पास घंटों तक बाबा और पंत जी के बीच धर्म, अध्यात्म और गूढ़ रहस्यों पर गंभीर चर्चा होती। मदन नारायण पंत जी के इस निश्छल समर्पण और सेवा भावना के कारण स्वयं महाराज जी उन पर पुत्रवत स्नेह और असीम कृपा बरसाते थे। वह चमत्कारी रात: जब माँ अवन्तिका ने दिया स्वप्नादेश मदन नारायण पंत जी केवल बाबा के प्रिय सहयोगी ही नहीं, बल्कि माँ भगवती के अनन्य उपासक भी थे। इसी निष्काम साधना के दौर में एक रात उनके जीवन में वह रहस्यमयी मोड़ आया, जिसने पूरे क्षेत्र की नियति बदल दी। घोर सन्नाटे के बीच माँ भगवती अवन्तिका ने साक्षात स्वप्न में दर्शन दिए। उस अविकसित और बीहड़ दौर में माँ ने आदेश दिया कि उसी निर्जन स्थान पर उनके पावन शक्तिपीठ का भव्य पुनरुत्थान किया जाए। स्वप्न से जागते ही पंत जी विस्मय और रोमांच से भर उठे। उन्होंने इसे कोई सामान्य कल्पना नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वरीय अधिदेश मानकर अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बना लिया। इस पुनीत कार्य में उन्हें अपने निष्ठावान सहयोगी स्वर्गीय योगेश गोयल और स्थानीय श्रद्धालुओं का साथ मिला। पंत जी के नेतृत्व में पत्थरों के उस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ। इस नव-निर्माण के दौरान स्वयं बाबा नीम करौली महाराज कई बार मंदिर प्रांगण में पधारे। वे वहाँ मदन नारायण पंत और भक्तों के संग बैठकर माँ अवन्तिका की महिमा का गुणगान करते और अपने दिव्य आशीर्वाद से इस धरा को अभिसिंचित करते। वही पत्थरों का छोटा सा ढांचा आज लाखों की आस्था का भव्य, जाग्रत तीर्थ बन चुका है। प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी: "वह दृश्य आज भी आँखों में तैरता है" स्वर्गीय मदन नारायण पंत जी के ७८ वर्षीय सुपुत्र सुमित्रानंदन पंत आज भी उन अलौकिक पलों को याद करते हुए भाव-विभोर हो उठते हैं। वे बताते हैं: > "बचपन में हमने पूज्य पिताजी की उस अगाध निष्ठा को बहुत करीब से देखा है। जब भी महाराज जी लालकुआं पधारते, हमारे पैतृक आवास पर उनका आगमन एक पावन उत्सव बन जाता था। बाबा घर आते, आध्यात्मिक चर्चा करते और फिर माँ अवन्तिका के मंदिर जाकर ध्यानमग्न हो जाते। पिताजी सब कुछ छोड़कर केवल बाबा की सेवा में रम जाते और कई बार तो बाबा के साथ ही सीधे कैंची धाम चले जाते थे। कैंची धाम का वह दिव्य वातावरण, मंदिर की गतिविधियाँ और महाराज जी का सान्निध्य आज भी मेरे अंतःकरण में उतना ही सजीव है, मानो यह सब कल ही घटा हो।" > लालकुआं की आत्मा में रची-बसी सनातन धरोहर इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर की पुष्टि करते हुए लालकुआं के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कैलाश चंद्र पंत साझा करते हैं कि बाबा नीम करौली महाराज की दिव्य छवि और उनकी असीम करुणा आज भी लालकुआं की आत्मा में गहराई से स्पंदित हो रही है। उनके अनुसार, बाबा नीम करौली महाराज और उनके परम भक्त स्वर्गीय मदन नारायण पंत की यह गाथा केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि लालकुआं की सांस्कृतिक चेतना की रीढ़ है। घने बीहड़ के सीने में रुकने वाली वह सफेद एम्बेसेडर, माँ अवन्तिका का वह रहस्यमयी स्वप्नादेश और पंत परिवार का अटूट समर्पण—यह महा-साक्षात्कार आज भी नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, निश्छल सेवा और गुरु-भक्ति के शाश्वत प्रकाश से आलोकित कर रहा है। @ रमाकान्त पन्त
सफेद एम्बेसेडर का वह गुप्त पड़ाव: दशकों तक बीहड़ के सीने में दफन रहा माँ अवन्तिका और नीम करौली महाराज का यह महा-साक्षात्कार लालकुआं। आज की आधुनिक चकाचौंध, गाड़ियों के अनवरत शोर और व्यस्त बाजारों के पीछे लालकुआं की धरा पर दशकों पुराना एक ऐसा अलौकिक रहस्य छिपा है, जिसकी गूँज आज भी यहाँ की हवाओं में महसूस की जा सकती है। यह वृत्तांत है कैंची धाम के सिद्ध संत बाबा नीम करौली महाराज की गुप्त साधना, माँ अवन्तिका देवी के पुरातन शक्ति स्थल और उनके एक अनन्य साधक स्वर्गीय मदन नारायण पंत के उस अटूट संबंध का, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर भी आज जन-जन के लिए विस्मय और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। जब सूरज भी डरता था बीहड़ में झांकने से दशकों पूर्व का लालकुआं आज की तरह आबाद और विकसित नहीं था। चारों ओर घने, अभेद्य जंगलों का ऐसा साम्राज्य था जहाँ दोपहर के समय भी सूर्य की किरणें धरती को बमुश्किल छू पाती थीं। खूंखार वन्यजीवों और सन्नाटे से घिरे इसी निर्जन जंगल के बीच स्थित था माँ अवन्तिका देवी का एक अत्यंत प्राचीन, छोटे पत्थरों से निर्मित देवालय। उस दौर में किसी आम इंसान के लिए इस निर्जन अरण्य में अकेले पैर रखने की कल्पना भी रूह कंपा देने वाली थी। किंतु, इसी बीहड़ के सीने में एक महा-रहस्य छिपा था। उस समय जब भी एक सफेद एम्बेसेडर कार जंगलों को चीरती हुई लालकुआं से गुजरती, तो अचानक इस निर्जन शक्ति स्थल के बाहर उसके पहिये थम जाते थे। सन्नाटे में घंटों समाधिस्थ रहते थे महायोगी कार से उतरते थे दिव्य शक्तियों के स्वामी बाबा नीम करौली महाराज। वन के भयावह सन्नाटे की परवाह किए बिना, बाबा सीधे माँ अवन्तिका के सम्मुख पत्थरों के उस छोटे से मंदिर में जा बैठते। वहाँ वे घंटों गहरे ध्यान और महा-समाधि में लीन हो जाते थे। जंगल के उस एकांत में एक सिद्ध संत का माँ जगदम्बा के सम्मुख इस तरह मौन बैठना, वास्तव में आने वाले एक स्वर्णिम आध्यात्मिक युग का गुप्त संकेत था। कोई नहीं जानता था कि माँ अवन्तिका और कैंची धाम के संत के बीच मौन की कौन सी दिव्य भाषा में यह साक्षात्कार चल रहा था। पेट्रोल पंप से शुरू हुई वह जादुई कड़ी इस आध्यात्मिक गाथा का सबसे विस्मयकारी पहलू लालकुआं के एक स्थानीय पेट्रोल पंप से जुड़ा है। मूल रूप से जनपद पिथौरागढ़ के सुदूर पभ्या गाँव के निवासी और लालकुआं में प्रकांड विद्वान के रूप में सम्मानित, उच्च कुलीन ब्राह्मण स्वर्गीय मदन नारायण पंत का आवास उसी पेट्रोल पंप के ठीक पास था जहाँ बाबा की एम्बेसेडर कार में ईंधन भरा जाता था। यह कोई साधारण संयोग नहीं, बल्कि दो उच्च आत्माओं का पूर्व-निर्धारित मिलन था। जैसे ही बाबा की गाड़ी रुकती, पंत जी अपने सारे सांसारिक और व्यावसायिक कार्यों को बिसराकर बाबा की सेवा में समर्पित हो जाते थे। गाड़ी के पास घंटों तक बाबा और पंत जी के बीच धर्म, अध्यात्म और गूढ़ रहस्यों पर गंभीर चर्चा होती। मदन नारायण पंत जी के इस निश्छल समर्पण
और सेवा भावना के कारण स्वयं महाराज जी उन पर पुत्रवत स्नेह और असीम कृपा बरसाते थे। वह चमत्कारी रात: जब माँ अवन्तिका ने दिया स्वप्नादेश मदन नारायण पंत जी केवल बाबा के प्रिय सहयोगी ही नहीं, बल्कि माँ भगवती के अनन्य उपासक भी थे। इसी निष्काम साधना के दौर में एक रात उनके जीवन में वह रहस्यमयी मोड़ आया, जिसने पूरे क्षेत्र की नियति बदल दी। घोर सन्नाटे के बीच माँ भगवती अवन्तिका ने साक्षात स्वप्न में दर्शन दिए। उस अविकसित और बीहड़ दौर में माँ ने आदेश दिया कि उसी निर्जन स्थान पर उनके पावन शक्तिपीठ का भव्य पुनरुत्थान किया जाए। स्वप्न से जागते ही पंत जी विस्मय और रोमांच से भर उठे। उन्होंने इसे कोई सामान्य कल्पना नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वरीय अधिदेश मानकर अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बना लिया। इस पुनीत कार्य में उन्हें अपने निष्ठावान सहयोगी स्वर्गीय योगेश गोयल और स्थानीय श्रद्धालुओं का साथ मिला। पंत जी के नेतृत्व में पत्थरों के उस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ। इस नव-निर्माण के दौरान स्वयं बाबा नीम करौली महाराज कई बार मंदिर प्रांगण में पधारे। वे वहाँ मदन नारायण पंत और भक्तों के संग बैठकर माँ अवन्तिका की महिमा का गुणगान करते और अपने दिव्य आशीर्वाद से इस धरा को अभिसिंचित करते। वही पत्थरों का छोटा सा ढांचा आज लाखों की आस्था का भव्य, जाग्रत तीर्थ बन चुका है। प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी: "वह दृश्य आज भी आँखों में तैरता है" स्वर्गीय मदन नारायण पंत जी के ७८ वर्षीय सुपुत्र सुमित्रानंदन पंत आज भी उन अलौकिक पलों को याद करते हुए भाव-विभोर हो उठते हैं। वे बताते हैं: > "बचपन में हमने पूज्य पिताजी की उस अगाध निष्ठा को बहुत करीब से देखा है। जब भी महाराज जी लालकुआं पधारते, हमारे पैतृक आवास पर उनका आगमन एक पावन उत्सव बन जाता था। बाबा घर आते, आध्यात्मिक चर्चा करते और फिर माँ अवन्तिका के मंदिर जाकर ध्यानमग्न हो जाते। पिताजी सब कुछ छोड़कर केवल बाबा की सेवा में रम जाते और कई बार तो बाबा के साथ ही सीधे कैंची धाम चले जाते थे। कैंची धाम का वह दिव्य वातावरण, मंदिर की गतिविधियाँ और महाराज जी का सान्निध्य आज भी मेरे अंतःकरण में उतना ही सजीव है, मानो यह सब कल ही घटा हो।" > लालकुआं की आत्मा में रची-बसी सनातन धरोहर इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर की पुष्टि करते हुए लालकुआं के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कैलाश चंद्र पंत साझा करते हैं कि बाबा नीम करौली महाराज की दिव्य छवि और उनकी असीम करुणा आज भी लालकुआं की आत्मा में गहराई से स्पंदित हो रही है। उनके अनुसार, बाबा नीम करौली महाराज और उनके परम भक्त स्वर्गीय मदन नारायण पंत की यह गाथा केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि लालकुआं की सांस्कृतिक चेतना की रीढ़ है। घने बीहड़ के सीने में रुकने वाली वह सफेद एम्बेसेडर, माँ अवन्तिका का वह रहस्यमयी स्वप्नादेश और पंत परिवार का अटूट समर्पण—यह महा-साक्षात्कार आज भी नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, निश्छल सेवा और गुरु-भक्ति के शाश्वत प्रकाश से आलोकित कर रहा है। @ रमाकान्त पन्त
- Dr, dr Dr, drधारी, नैनीताल, उत्तराखंडजय हो नीम करोली बाबा10 hrs ago
- नैनीताल पुलिस की नई पहल नंदा देवी महोत्सव में जनता को साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा एवं डायल-112 के प्रति किया जागरूक नंदा देवी महोत्सव के दौरान नैनीताल पुलिस द्वारा श्रद्धालुओं एवं आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष *जनजागरूकता पहल शुरू* की गई। मेला परिसर में स्टॉल लगाकर जनता को *साइबर अपराध से बचाव, महिला सुरक्षा, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग एवं डायल-112 इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम* के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। *एसपी संचार नैनीताल श्री रेवाधर मठपाल* के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा स्टॉल के माध्यम से आमजन को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने, महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा से संबंधित हेल्पलाइन एवं पुलिस सेवाओं तथा आपात स्थिति में *डायल-112* के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान पुलिस टीम द्वारा जागरूकता संबंधी *पंपलेट भी वितरित* किए गए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सुरक्षा एवं पुलिस सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाई जा सके। कार्यक्रम के दौरान *श्री राजकुमार बिष्ट, निरीक्षक पुलिस दूरसंचार, श्रीमती नीशू गौतम, प्रभारी साइबर सेल, श्री रमेश चंद्र पाठक, प्रभारी डायल-112,कानि0 गोविंद सिंह मेहरा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल* सहित पुलिस टीम मौजूद रही।1
- समस्याओं को लेकर गरजे प्रधान, विकास भवन में किया धरना-प्रदर्शन अल्मोड़ा। ग्राम प्रधानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर जिलेभर के ग्राम प्रधान मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन किया। इससे पूर्व ग्राम प्रधानों ने विकास भवन तिराहे से विकास भवन तक रैली निकाली। प्रधानों ने विकास भवन का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के समाधान की मांग किए जाने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान गांवों के विकास की धुरी हैं। वे ग्रामीणों के सुख-दुख में 24 घंटे साथ खड़े रहते हैं और गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रधानों ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन से वार्ता और पत्राचार के माध्यम से समाधान की मांग की जाती रही है। अगस्त माह में मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया था कि अगस्त के अंत तक अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक प्रधानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रदेशभर के प्रधान धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं। प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने ग्राम प्रधानों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने, वार्ड सदस्यों को बैठक भत्ता देने तथा मानदेय के लिए पृथक फंड की व्यवस्था करने की मांग की। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्य एवं केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान में वृद्धि, 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप ग्राम पंचायतों को 29 विभागों का हस्तांतरण और विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर पंचायत निधि गठित करने की मांग उठाई गई। प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाए जाने, सभी ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य बीमा कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वेक्षण में छूटे पात्र परिवारों के नाम ग्राम पंचायतों की आम बैठकों के माध्यम से जोड़ने का अधिकार देने की मांग भी की। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने सरकार से पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की। धरने के बाद सीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। यहाँ धरना प्रदर्शन में सुनील जोशी, देवेंद्र सिंह नयाल, सुनील बाराकोटी, उमेश मेहरा, दीपक सिंह, प्रीति पंत, सुरेश भट्ट, भूपाल बोरा, इन्दर सिंह मनराल, विनोद जोशी, देवेन्द्र मेहरा, चंद्रिका तिवारी, नंदन सिंह फर्त्याल, नवीन भट्ट, बची बोरा, टीका सिंह, मदन सिंह बिष्ट, प्रिया भोज, पंकज रौतेला सहित बड़ी संख्या में प्रधान विभिन्न विकासखण्डों से मौजूद रहे।1
- खटीमा स्कूल में बच्चों को “आंखें निकालने” का डर दिखाने का मामला 🔎 फैक्टचेक: खटीमा स्कूल में बच्चों को “आंखें निकालने” का डर दिखाने का मामला वायरल दावा: उत्तराखंड के खटीमा के एक निजी स्कूल में बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए एक बच्चे की आंखें निकालने का नाटक किया गया। फैक्ट: दावा मुख्य रूप से सही है, लेकिन “डॉक्टर ने सच में आंखें निकाल दीं” कहना गलत है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, खटीमा के बिरिया मझोला स्थित आदर्श इंडिया मोंटेसरी स्कूल में मोबाइल के अधिक इस्तेमाल के खिलाफ एक डरावनी गतिविधि कराई गई। एक बच्चे की आंखों पर पट्टी और लाल रंग का इस्तेमाल कर ऐसा दिखाया गया कि उसकी आंखों को नुकसान हुआ है। बच्चे ने कथित तौर पर अन्य विद्यार्थियों से कहा कि ज्यादा मोबाइल चलाने के कारण डॉक्टर ने उसकी आंखें निकाल दीं। इसके बाद कई बच्चे डरकर रोने-चिल्लाने लगे। वीडियो सामने आने के बाद उधम सिंह नगर के जिला शिक्षा अधिकारी हरेंद्र कुमार मिश्रा ने जांच के निर्देश दिए, जबकि खटीमा के एसडीएम तुषार सैनी के अनुसार ऐसी गतिविधियों से बच्चों में भय पैदा हो सकता है और स्कूल प्रबंधन को ऐसे कार्यक्रमों से बचने की सलाह दी गई। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है। 📱 Instagram News Copy “मोबाइल चलाओगे तो डॉक्टर आंखें निकाल देंगे!” 😱 स्कूल की डरावनी एक्टिविटी से सहमे बच्चे उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा स्थित एक निजी स्कूल में बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए कराई गई एक गतिविधि का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक बच्चे की आंखों पर पट्टी और लाल रंग का इस्तेमाल कर ऐसा दृश्य बनाया गया, मानो उसकी आंखों को गंभीर नुकसान हुआ हो। बच्चे ने अपने साथियों से कहा कि ज्यादा मोबाइल चलाने के कारण डॉक्टर ने उसकी आंखें निकाल दीं। इसके बाद कई बच्चे डरकर रोने और चिल्लाने लगे। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने संज्ञान लिया है। अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि बच्चों को जागरूक करने के नाम पर ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए जिनसे उनमें भय पैदा हो। ⚠️ फैक्टचेक: बच्चे की आंखें वास्तव में नहीं निकाली गई थीं। यह मोबाइल के इस्तेमाल के खिलाफ कराई गई नाटकीय/प्रतीकात्मक गतिविधि थी। #Uttarakhand #Khatima #UdhamSinghNagar #SchoolNews #ViralVideo #FactCheck #MobileAddiction #Children #SchoolNews #ViralNews #PilibhitDarpan1
- नेहरू कॉलोनी पुलिस ने सार्वजनिक स्थान पर मारपीट कर शांति व्यवस्था भंग करने वाले अभियुक्त को गिरफ्तार किया हुड़दंगियों पर दून पुलिस की सख्ती..! नेहरू कॉलोनी पुलिस ने सार्वजनिक स्थान पर मारपीट कर शांति व्यवस्था भंग करने वाले अभियुक्त को गिरफ्तार किया। शराब के नशे में अभियुक्त ने जोमैटो डिलीवरी बॉय से मारपीट की थी।1
- देवीधुरा में बारिश के साथ जमके गिरे ओले देवीधुरा/पाटी। सितंबर माह के अंतिम दिनों में भी पहाड़ी इलाकों में बारिश का दौर जारी है मंगलवार को मां बाराही धाम देवीधुरा में बारिश के साथ जमकर ओले गिरे, देवीधुरा/पाटी। सितंबर माह के अंतिम दिनों में भी पहाड़ी इलाकों में बारिश का दौर जारी है मंगलवार को मां बाराही धाम देवीधुरा में बारिश के साथ जमकर ओले गिरे, करीब 1घंटे तक बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बारिश व ओलावृष्टि ने सितंबर माह के अंतिम दिनों में ठंड का एहसास करा दिया।1
- पीलीभीत में पूर्व मंत्री सपा नेता ने कहा वो लोग वारूद के ढेर पर बैठे हैं वीडियो वायरल। पीलीभीत । सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पूर्व मंत्री सपा नेता हेमराज वर्मा कह रहे हैं कि उनके कार्यकर्ता और नेता बारूद के ढेर पर बैठे हैं एक पीआईएल लगते ही जेल में नजर आएंगे।1
- देवभूमि उत्तराखंड जिला चंपावत बनबसा कैनाल में बाइक टैक्सी यूनियन की संगठन बैठक में लोगों ने अपने अपने पद को संभाला, देवभूमि उत्तराखंड जिला चंपावत बनबसा कैनाल में बाइक टैक्सी यूनियन की संगठन बैठक में लोगों ने अपने अपने पद को संभाला, नमस्कार आप देख रहे हैं भारत पब्लिक न्यूज़, देवभूमि उत्तराखंड जिला चंपावत बनबसा में बाइक टैक्सी यूनियन की संगठन बैठक में लोगों ने अपने अपने पद को संभाला, और जिसमें बाइक टैक्सी यूनियन का नाम रखा गया ,बनबसा बाइक टैक्सी यूनियन सोमवार को 21 तारीख 9 महीना 2026 को, बनबसा की समस्त टैक्सी बाइक चालको की एक बैठक की गई है, जिसमें कई विषयों पर चर्चा की गई , जिसके उपरांत सर्व सहमति से उपरोक्त पदों पर चुने गए नाम, अध्यक्ष भारत सिंह, उपाध्यक्ष प्रकाश चंद, कोषाध्यक्ष कमलेश, उर्फ बिट्टू , महामंत्री घनश्याम सिंह, उर्फ मिन्टू ,संरक्षक सोहन सिंह, सचिव इमरोज खान, संचालक सचिन पांडे को कैनाल और पुल की जिम्मेदारी दी गई है, और साथी विनय कुमार पटनी तिराहा की जिम्मेदारी संभालेंगे , प्रकाश चंद बस स्टैंड की जिम्मेदारी संभालेंगे, बनबसा में एक नया टैक्सी यूनियन बनाया जा रहा है , बनबसा के अंदर लगभग 52 से 54 टैक्सी बाइक के है, बनबसा से गड्ढा चौकी 7 नंबर पिलर तक टैक्सी बाइक का किराया प्रत्येक सवारी का ₹100 लिया जाएगा, और गड्ढा चौकी से बनबसा कैनाल तक का किराया प्रत्येक सवारी ₹100 लिया जाएगा बनबसा से गड्ढा चौकी की दूरी सात किलोमीटर दूर है , संवाददाता उमेश विश्वकर्मा, आप बने रहिए है भारत पब्लिक न्यूज़ चैनल के साथ, चैनल को लाइक सब्सक्राइब शेयर करें तब तक के लिए नमस्कार1
- खिमरिया में खेल सुविधाओं की बड़ी सौगात, 9.23 करोड़ से बनेगा ग्रामीण स्टेडियम। कांट - खिमरिया गांव में सोमवार को ग्रामीण स्टेडियम और ओपन जिम की आधारशिला रखी गई। ददरौल विधायक अरविंद कुमार सिंह की पहल पर 9 करोड़ 23 लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट से ददरौल, कांट और मदनापुर क्षेत्र के युवाओं को खेल सुविधाएं मिलेंगी। शिलान्यास कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना मुख्य अतिथि रहे।कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने विधायक अरविंद कुमार सिंह की क्षेत्र में सक्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि वह लगातार जनता के बीच रहकर विकास कार्यों के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों को लेकर विधायक की सक्रियता दिखाई देती है।विधायक अरविंद सिंह ने कहा कि स्टेडियम बनने से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और छात्रों को खेलों के लिए बेहतर मंच मिलेगा। ओपन जिम का निर्माण 2 जून 2026 से शुरू है और इसे 2 जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि खिमरिया तीन ब्लाकों के बीच स्थित है, इसलिए इसका सीधा लाभ बड़ी संख्या में युवाओं को मिलेगा।विधायक ने अपने संबोधन में क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का भी ब्यौरा रखा। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में विधानसभा क्षेत्र में 261 सड़कों का निर्माण कराया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में 43 करोड़ रुपये की लागत से सर्वोदय विद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में एक और सर्वोदय विद्यालय की मांग वित्त मंत्री के सामने रखी।उन्होंने डिग्री कॉलेज को अपने पिता मानवेंद्र सिंह के नाम पर दिए जाने का भी उल्लेख किया। साथ ही क्षेत्र में बिना टोल की 224 लेन सड़कें बनने और करीब 1100 लोगों को रोजगार मिलने की बात कही। विधायक ने कहा कि नौ एकड़ जमीन से जुड़े विवाद का समाधान होने के बाद क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।कार्यक्रम का संचालन भाजपा नेता आनंद प्रताप सिंह पंकज ने किया। इस दौरान जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह, सांसद अरुण सागर, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष डीपीएस राठौर, महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता, भाजपा नेता अरुण गुप्ता, ब्लॉक प्रमुख महेश पाल सिंह, श्रीदत्त शुक्ला, मुनेश्वर दयाल वर्मा, विमल सिंह, हरजीत चौहान समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।1
- आज की ताज़ा अहम बड़ी खबर सामने से निकल कर आ रही हैं #@ बिहार के जमुई जिले में एक लड़की पढ़ने के बहाने अपने आशिक से मिलने गई और उसके साथ घूमने निकली तभी कुछ लोगों ने उन लोगों को घेर कर छेड़ना शुरू कर दिया अब आप ही बताओ इन लोगों के हौसले कौन बुलंद करता हैं क्या इन लोगों के ख़िलाफ एक्शन नहीं लिया जा सकता क्या इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती इसका जवाब सरकार को देना होगा जिससे ऐसे किसी के साथ ऐसी कोई घटना ना हो #@_ आप देख रहे हैं क्राईम इंडिया न्यूज़ में मैं हूं आपके साथ अरुन राना की रिपोर्ट यूपी तक1