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पूर्व में आर्मी में रहे मेजर के पुत्र का पीसीएस में हुआ चयन, बबेरू में हुआ जोरदार स्वागत बांदा जनपद के बबेरू तहसील क्षेत्र अंतर्गत मियां बरौली गांव निवासी युवक का यूपी पीसीएस में चयन होने पर क्षेत्र के लोगों ने बबेरू कस्बे में जोरदार स्वागत किया गया है।

6 hrs ago
user_JSB NEWS UP
JSB NEWS UP
पत्रकारिता Baberu, Banda•
6 hrs ago

पूर्व में आर्मी में रहे मेजर के पुत्र का पीसीएस में हुआ चयन, बबेरू में हुआ जोरदार स्वागत बांदा जनपद के बबेरू तहसील क्षेत्र अंतर्गत मियां बरौली गांव निवासी युवक का यूपी पीसीएस में चयन होने पर क्षेत्र के लोगों ने बबेरू कस्बे में जोरदार स्वागत किया गया है।

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  • बांदा जनपद के बबेरू तहसील क्षेत्र अंतर्गत मियां बरौली गांव निवासी युवक का यूपी पीसीएस में चयन होने पर क्षेत्र के लोगों ने बबेरू कस्बे में जोरदार स्वागत किया गया है।
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    बांदा जनपद के बबेरू तहसील क्षेत्र अंतर्गत मियां बरौली गांव निवासी युवक का यूपी पीसीएस में चयन होने पर क्षेत्र के लोगों ने बबेरू कस्बे में जोरदार स्वागत किया गया है।
    user_JSB NEWS UP
    JSB NEWS UP
    पत्रकारिता Baberu, Banda•
    6 hrs ago
  • बांदा: राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद रजि० की बांदा इकाई की नवीन कार्यकारिणी का गठन गुरुवार, 02 अप्रैल 2026 को किया गया। इस अवसर पर परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा के निर्देशन में कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें कई पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई। इस बैठक का आयोजन नगर क्षेत्र के मंडलायुक्त कार्यालय के सामने राज निवास परिषद जिला कार्यालय में किया गया। बैठक में परिषद के सभी सदस्य, अन्य पत्रकार संगठन के पदाधिकारी और पत्रकार साथी उपस्थित रहे। सभी उपस्थित सदस्यों की सर्वसम्मति से नवीन कार्यकारिणी का गठन किया गया।नवनियुक्त पदाधिकारी: अनवर रजा रानू – मंडल महासचिव नीरज निगम – जिलाध्यक्ष आसिफ अली – जिला प्रभारी श्रीकांत श्रीवास्तव – युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष अमोद कुमार – युवा प्रकोष्ठ जिला प्रभारी सत्यनारायण निषाद – जिला उपाध्यक्ष मितेश कुमार – जिला महासचिव एवं मीडिया प्रभारी नंदूराम चतुर्वेदी – जिला महासचिव गौरव सिंह चौहान – जिला सचिव प्रभंजन कुमार – तहसील प्रभारी, बबेरू अन्य सदस्यों और पदाधिकारियों के पद पूर्ववत रखे गए। नवनियुक्त पदाधिकारियों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया। सभी ने परिषद की सफलता और विकास के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त की।नवनियुक्त पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा द्वारा जताया गया विश्वास उनके लिए प्रेरणास्रोत है। वे परिषद की नीतियों के तहत मिलकर इसे और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास करेंगे।राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को उत्साहवर्धन करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं और सभी से अपेक्षा की कि वे पत्रकारों के हितों की रक्षा में सदैव तत्पर रहें। उन्होंने कहा कि परिषद हमेशा पत्रकारों के हितों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगी और सभी को एकजुट होकर परिषद को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करना होगा।इस अवसर पर परिषद के तमाम पदाधिकारी, सदस्यगण एवं अन्य पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
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    बांदा: राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद रजि० की बांदा इकाई की नवीन कार्यकारिणी का गठन गुरुवार, 02 अप्रैल 2026 को किया गया। इस अवसर पर परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा के निर्देशन में कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें कई पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई।
इस बैठक का आयोजन नगर क्षेत्र के मंडलायुक्त कार्यालय के सामने राज निवास परिषद जिला कार्यालय में किया गया। बैठक में परिषद के सभी सदस्य, अन्य पत्रकार संगठन के पदाधिकारी और पत्रकार साथी उपस्थित रहे। सभी उपस्थित सदस्यों की सर्वसम्मति से नवीन कार्यकारिणी का गठन किया गया।नवनियुक्त पदाधिकारी:
अनवर रजा रानू – मंडल महासचिव नीरज निगम – जिलाध्यक्ष आसिफ अली – जिला प्रभारी श्रीकांत श्रीवास्तव – युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष
अमोद कुमार – युवा प्रकोष्ठ जिला प्रभारी सत्यनारायण निषाद – जिला उपाध्यक्ष मितेश कुमार – जिला महासचिव एवं मीडिया प्रभारी नंदूराम चतुर्वेदी – जिला महासचिव गौरव सिंह चौहान – जिला सचिव प्रभंजन कुमार – तहसील प्रभारी, बबेरू अन्य सदस्यों और पदाधिकारियों के पद पूर्ववत रखे गए। नवनियुक्त पदाधिकारियों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया। सभी ने परिषद की सफलता और विकास के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त की।नवनियुक्त पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा द्वारा जताया गया विश्वास उनके लिए प्रेरणास्रोत है। वे परिषद की नीतियों के तहत मिलकर इसे और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास करेंगे।राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को उत्साहवर्धन करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं और सभी से अपेक्षा की कि वे पत्रकारों के हितों की रक्षा में सदैव तत्पर रहें। उन्होंने कहा कि परिषद हमेशा पत्रकारों के हितों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगी और सभी को एकजुट होकर परिषद को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करना होगा।इस अवसर पर परिषद के तमाम पदाधिकारी, सदस्यगण एवं अन्य पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    39 min ago
  • Post by Raj dwivedi
    1
    Post by Raj dwivedi
    user_Raj dwivedi
    Raj dwivedi
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by Rammilan,yadav
    2
    Post by Rammilan,yadav
    user_Rammilan,yadav
    Rammilan,yadav
    अतर्रा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • जनवादी कवि बाबू केदारनाथ अग्रवाल के जन्मदिवस के अवसर पर डॉ. सबीहा रहमानी के“नवचेतना परामर्श केन्द्र” का किया शुभारंभ।
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    जनवादी कवि बाबू केदारनाथ अग्रवाल के जन्मदिवस के अवसर पर डॉ. सबीहा रहमानी के“नवचेतना परामर्श केन्द्र” का किया शुभारंभ।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • #Apkiawajdigital ​● मरौली खदानों में पोकलैंड मशीनों ने जलधारा को किया लहूलुहान, अप्रैल में ही जून जैसी तपिश और बूंद-बूंद को तरसते हलक ● 10 अप्रैल को अशोक लाट पर होगा महा-आंदोलन, STF जांच और खदानें तत्काल बंद करने की उठी मांग ​बांदा। बुंदेलखंड की जीवनदायिनी कही जाने वाली केन नदी आज अपने अस्तित्व की सबसे करुण लड़ाई लड़ रही है। एक तरफ सरकार करोड़ों रूपये खर्च कर 'हर घर नल, हर घर जल' का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर बांदा के सीने पर पल रहे बालू माफिया प्रशासन की नाक के नीचे नदी का गला घोंट रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठन 'बुंदेलखंड इंसाफ सेना' ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। ​नदी नहीं, नाला बना दी गई केन ​संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.एस. नोमानी ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में रोंगटे खड़े कर देने वाली जमीनी हकीकत बयां की। उन्होंने कहा कि मरौली खदान खंड संख्या 4, 5 और 6 के संचालकों ने सारी मर्यादाएं ताक पर रख दी हैं। भारी-भरकम पोकलैंड मशीनें दिन-रात नदी की जलधारा के बीच से 'जिंदा बालू' निकाल रही हैं। आलम यह है कि कभी कल-कल बहने वाली केन नदी अब एक गंदे नाले में तब्दील होती जा रही है। जब मुख्य स्रोत ही सूख जाएगा, तो जल संस्थान शहर की प्यास कैसे बुझाएगा ? ​पाताल में जा रहा जलस्तर, अप्रैल में ही अकाल जैसे हालात ​ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि अवैध खनन की वजह से भूगर्भ जलस्तर (Ground Water Level) तेजी से धरातल की ओर जा रहा है। इसका सीधा असर शहर के हैंडपंपों और कुओं पर पड़ा है, जो अप्रैल की शुरुआत में ही जवाब देने लगे हैं। चंद बाहरी मुनाफाखोरों की अंधी कमाई की भूख ने पूरे जनपद को प्यासा मरने पर मजबूर कर दिया है। आखिर क्या वजह है कि खनिज विभाग और जिला प्रशासन इन खदानों पर पाबंदी लगाने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है ? ​STF जांच और 10 अप्रैल का अल्टीमेटम ​बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने मांग की है कि जनपद में गहराते जल संकट को देखते हुए इन खदानों की निगरानी तत्काल एस.टी.एफ. (STF) के माध्यम से कराई जाए। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि स्थानीय स्तर पर जांच महज औपचारिकता बनकर रह गई है। ​"अगर प्रशासन ने समय रहते संज्ञान नहीं लिया और इन खदानों को तत्काल प्रभाव से बंद नहीं किया, तो 10 अप्रैल 2026 को बांदा की सड़कों पर जन-सैलाब उमड़ेगा। हम अशोक लाट तिराहे पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।" — ए.एस. नोमानी, राष्ट्रीय अध्यक्ष (बुंदेलखंड इंसाफ सेना) ​प्रशासन से तीखे सवाल: ​सरकार के पेयजल मिशन को खनन माफिया क्यों दे रहे हैं चुनौती? ​जलधारा को रोककर मशीनों से खनन करना क्या प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम नहीं है? ​क्या बांदा की जनता की प्यास से ज्यादा कीमती माफियाओं की तिजोरियां हैं ? ​इस ज्ञापन ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह है कि क्या बांदा की जीवनदायिनी को बचाने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर 10 अप्रैल को बांदा एक बड़े जन-आंदोलन का गवाह बनेगा।
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    #Apkiawajdigital
​● मरौली खदानों में पोकलैंड मशीनों ने जलधारा को किया लहूलुहान, अप्रैल में ही जून जैसी तपिश और बूंद-बूंद को तरसते हलक
● 10 अप्रैल को अशोक लाट पर होगा महा-आंदोलन, STF जांच और खदानें तत्काल बंद करने की उठी मांग
​बांदा। बुंदेलखंड की जीवनदायिनी कही जाने वाली केन नदी आज अपने अस्तित्व की सबसे करुण लड़ाई लड़ रही है। एक तरफ सरकार करोड़ों रूपये खर्च कर 'हर घर नल, हर घर जल' का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर बांदा के सीने पर पल रहे बालू माफिया प्रशासन की नाक के नीचे नदी का गला घोंट रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठन 'बुंदेलखंड इंसाफ सेना' ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
​नदी नहीं, नाला बना दी गई केन
​संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.एस. नोमानी ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में रोंगटे खड़े कर देने वाली जमीनी हकीकत बयां की। उन्होंने कहा कि मरौली खदान खंड संख्या 4, 5 और 6 के संचालकों ने सारी मर्यादाएं ताक पर रख दी हैं। भारी-भरकम पोकलैंड मशीनें दिन-रात नदी की जलधारा के बीच से 'जिंदा बालू' निकाल रही हैं। आलम यह है कि कभी कल-कल बहने वाली केन नदी अब एक गंदे नाले में तब्दील होती जा रही है। जब मुख्य स्रोत ही सूख जाएगा, तो जल संस्थान शहर की प्यास कैसे बुझाएगा ?
​पाताल में जा रहा जलस्तर, अप्रैल में ही अकाल जैसे हालात
​ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि अवैध खनन की वजह से भूगर्भ जलस्तर (Ground Water Level) तेजी से धरातल की ओर जा रहा है। इसका सीधा असर शहर के हैंडपंपों और कुओं पर पड़ा है, जो अप्रैल की शुरुआत में ही जवाब देने लगे हैं। चंद बाहरी मुनाफाखोरों की अंधी कमाई की भूख ने पूरे जनपद को प्यासा मरने पर मजबूर कर दिया है। आखिर क्या वजह है कि खनिज विभाग और जिला प्रशासन इन खदानों पर पाबंदी लगाने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है ?
​STF जांच और 10 अप्रैल का अल्टीमेटम
​बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने मांग की है कि जनपद में गहराते जल संकट को देखते हुए इन खदानों की निगरानी तत्काल एस.टी.एफ. (STF) के माध्यम से कराई जाए। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि स्थानीय स्तर पर जांच महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
​"अगर प्रशासन ने समय रहते संज्ञान नहीं लिया और इन खदानों को तत्काल प्रभाव से बंद नहीं किया, तो 10 अप्रैल 2026 को बांदा की सड़कों पर जन-सैलाब उमड़ेगा। हम अशोक लाट तिराहे पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।"
— ए.एस. नोमानी, राष्ट्रीय अध्यक्ष (बुंदेलखंड इंसाफ सेना)
​प्रशासन से तीखे सवाल:
​सरकार के पेयजल मिशन को खनन माफिया क्यों दे रहे हैं चुनौती?
​जलधारा को रोककर मशीनों से खनन करना क्या प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम नहीं है?
​क्या बांदा की जनता की प्यास से ज्यादा कीमती माफियाओं की तिजोरियां हैं ?
​इस ज्ञापन ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह है कि क्या बांदा की जीवनदायिनी को बचाने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर 10 अप्रैल को बांदा एक बड़े जन-आंदोलन का गवाह बनेगा।
    user_ApkiAwajDigital
    ApkiAwajDigital
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • Post by Devendra Kumar
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    Post by Devendra Kumar
    user_Devendra Kumar
    Devendra Kumar
    Interior designer खागा, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by Rammilan,yadav
    2
    Post by Rammilan,yadav
    user_Rammilan,yadav
    Rammilan,yadav
    अतर्रा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
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