रायपुर ब्रेकिंग: पत्रकार पर झूठी FIR और मारपीट के विरोध में तेलीबांधा थाने के सामने डटे शहर के पत्रकार, निलंबन की मांग रायपुर के तेलीबांधा थाने से एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा सामने आया है, जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली और मीडिया के बीच की तल्खी को एक बार फिर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुर्खियों में एक बार फिर वही नाम है, जो अपनी 'खास कार्यशैली' के लिए हमेशा चर्चा में रहता है—अजय झा। जी हां, बलौदाबाजार में अपनी तैनाती के दौरान जनता और पत्रकारों के साथ 'विशेष' व्यवहार के लिए मशहूर रहे पूर्व थाना प्रभारी अजय झा अब रायपुर के तेलीबांधा में अपनी नई 'पारी' खेल रहे हैं, और विवादों ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा है। इस बार मामला सीधे चौथे स्तंभ यानी मीडिया से टकरा गया है, जिसके बाद तेलीबांधा थाना परिसर आधी रात को किसी राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। शराब के नशे में धुत्त आरक्षक पर लगा मारपीट का आरोप पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रायपुर के एक स्थानीय पत्रकार और तेलीबांधा थाने में पदस्थ आरक्षक रमेश वर्मा के बीच आमना-सामना हुआ। आरोप है कि आरक्षक रमेश वर्मा ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पूरी तरह धुत्त थे। बात इतनी बढ़ी कि आरक्षक ने अपनी वर्दी की हनक दिखाते हुए पत्रकार के साथ न केवल बदतमीजी की, बल्कि उसके साथ जमकर मारपीट भी कर डाली। हैरानी की बात तो यह है कि पीड़ित पत्रकार जब न्याय की आस में थाने पहुंचा, तो वहां के 'मिजाज' से वाकिफ लोगों को जो डर था, वही हुआ। मारपीट के शिकार पत्रकार की सुनने के बजाय, पुलिसिया रसूख का इस्तेमाल करते हुए उल्टा पत्रकार के ऊपर ही आनन-फानन में FIR दर्ज कर दी गई। पुलिस की थ्योरी: "साहब, हमारे शासकीय कार्य में बाधा डाली गई!" इधर, आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा और पुलिस महकमे ने इस पूरी कहानी को एक अलग ही रंग देने की कोशिश की है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में आरक्षक ने बयान दिया है कि पत्रकार महोदय ने उनके "शासकीय कार्य में बाधा" पहुंचाई है। आरक्षक का दावा है कि वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे और पत्रकार ने न सिर्फ उनके काम में टांग अड़ाई, बल्कि उन्हें देख लेने और भुगत लेने की खुली धमकी भी दी। अब इस 'शासकीय कार्य' में कितनी सच्चाई थी और कितनी शराब की 'अमरबेल', यह तो जांच का विषय है, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पत्रकार को ही आरोपी बना डाला। थाने के सामने 'दंगल': आधी रात को धरने पर बैठे शहर के सारे पत्रकार जैसे ही यह खबर रायपुर के मीडिया जगत में फैली, पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा। अपने साथी के साथ हुई इस बर्बरता और ऊपर से फर्जी FIR की कार्रवाई से नाराज रायपुर के तमाम प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकार एकजुट होकर तेलीबांधा थाने पहुंच गए। "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सच दिखाने वाले को ही सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी हो, तो चुप बैठना गुनाह है।" इसी आक्रोश के साथ पत्रकारों ने थाने के सामने ही डेरा डाल दिया और जबरदस्त धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। आधी रात को थाने के बाहर गूंजते नारों और पत्रकारों के तीखे तेवरों ने पुलिस प्रशासन के हाथ-पैर फुला दिए। पत्रकारों की साफ मांग है कि आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा को तत्काल निलंबित किया जाए और पत्रकार पर की गई झूठी FIR को बिना शर्त वापस लिया जाए। अजय झा का 'बलौदाबाजार वाला अंदाज' रायपुर में भी बरकरार! इस पूरे विवाद के केंद्र में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वह है थाना प्रभारी अजय झा का। बलौदाबाजार के लोग आज भी उनके कार्यकाल को याद कर मुस्कुरा देते हैं या फिर अपना सिर पकड़ लेते हैं। बलौदाबाजार में रहते हुए जनता और पत्रकारों के साथ तमीज से बात न करना और हमेशा एक अकड़ में रहना मानो उनकी आदत का हिस्सा बन चुका था। वहां तो यह बातें आम हो चुकी थीं, लेकिन रायपुर की जागरूक मीडिया के सामने उनका यह पुराना 'बलौदाबाजार वाला ढर्रा' इस बार भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। बड़ा सवाल: क्या तेलीबांधा पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगी? या फिर अपने रसूखदार आरक्षक और थाना प्रभारी के पुराने ढर्रे को बचाने के लिए चौथे स्तंभ की आवाज को दबा दिया जाएगा? फिलहाल, थाने के बाहर डटे पत्रकारों के हौसले यह साफ कर रहे हैं कि वे इस बार बिना 'न्याय' के पीछे हटने वाले नहीं हैं।
रायपुर ब्रेकिंग: पत्रकार पर झूठी FIR और मारपीट के विरोध में तेलीबांधा थाने के सामने डटे शहर के पत्रकार, निलंबन की मांग रायपुर के तेलीबांधा थाने से एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा सामने आया है, जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली और मीडिया के बीच की तल्खी को एक बार फिर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुर्खियों में एक बार फिर वही नाम है, जो अपनी 'खास कार्यशैली' के लिए हमेशा चर्चा में रहता है—अजय झा। जी हां, बलौदाबाजार में अपनी तैनाती के दौरान जनता और पत्रकारों के साथ 'विशेष' व्यवहार के लिए मशहूर रहे पूर्व थाना प्रभारी अजय झा अब रायपुर के तेलीबांधा में अपनी नई 'पारी' खेल रहे हैं, और विवादों ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा है। इस बार मामला सीधे चौथे स्तंभ यानी मीडिया से टकरा गया है, जिसके बाद तेलीबांधा थाना परिसर आधी रात को किसी राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। शराब के नशे में धुत्त आरक्षक पर लगा मारपीट का आरोप पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रायपुर के एक स्थानीय पत्रकार और तेलीबांधा थाने में पदस्थ आरक्षक रमेश वर्मा के बीच आमना-सामना हुआ। आरोप है कि आरक्षक रमेश वर्मा ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पूरी तरह धुत्त थे। बात इतनी बढ़ी कि आरक्षक ने अपनी वर्दी की हनक दिखाते हुए पत्रकार के साथ न केवल बदतमीजी की, बल्कि उसके साथ जमकर मारपीट भी कर डाली। हैरानी की बात तो यह है कि पीड़ित पत्रकार जब न्याय की आस में थाने पहुंचा, तो वहां के 'मिजाज' से वाकिफ लोगों को जो डर था, वही हुआ। मारपीट के शिकार पत्रकार की सुनने के बजाय, पुलिसिया रसूख का इस्तेमाल करते हुए उल्टा पत्रकार के ऊपर ही आनन-फानन में FIR दर्ज कर दी गई। पुलिस की थ्योरी: "साहब, हमारे शासकीय कार्य में बाधा डाली गई!" इधर, आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा और पुलिस महकमे ने इस पूरी कहानी को एक अलग ही रंग देने की कोशिश की है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में आरक्षक ने बयान दिया है कि पत्रकार महोदय ने उनके "शासकीय कार्य में बाधा" पहुंचाई है। आरक्षक का दावा है कि वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे और पत्रकार ने न सिर्फ उनके काम में टांग अड़ाई, बल्कि उन्हें देख लेने और भुगत लेने की खुली धमकी भी दी। अब इस 'शासकीय कार्य' में कितनी सच्चाई थी और कितनी शराब की 'अमरबेल', यह तो जांच का विषय है, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पत्रकार को ही आरोपी बना डाला। थाने के सामने 'दंगल': आधी रात को धरने पर बैठे शहर के सारे पत्रकार जैसे ही यह खबर रायपुर के मीडिया जगत में फैली, पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा। अपने साथी के साथ हुई इस बर्बरता और ऊपर से फर्जी FIR की कार्रवाई से नाराज रायपुर के तमाम प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकार एकजुट होकर तेलीबांधा थाने पहुंच गए। "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सच दिखाने वाले को ही सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी हो, तो चुप बैठना गुनाह है।" इसी आक्रोश के साथ पत्रकारों ने थाने के सामने ही डेरा डाल दिया और जबरदस्त धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। आधी रात को थाने के बाहर गूंजते नारों और पत्रकारों के तीखे तेवरों ने पुलिस प्रशासन के हाथ-पैर फुला दिए। पत्रकारों की साफ मांग है कि आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा को तत्काल निलंबित किया जाए और पत्रकार पर की गई झूठी FIR को बिना शर्त वापस लिया जाए। अजय झा का 'बलौदाबाजार वाला अंदाज' रायपुर में भी बरकरार! इस पूरे विवाद के केंद्र में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वह है थाना प्रभारी अजय झा का। बलौदाबाजार के लोग आज भी उनके कार्यकाल को याद कर मुस्कुरा देते हैं या फिर अपना सिर पकड़ लेते हैं। बलौदाबाजार में रहते हुए जनता और पत्रकारों के साथ तमीज से बात न करना और हमेशा एक अकड़ में रहना मानो उनकी आदत का हिस्सा बन चुका था। वहां तो यह बातें आम हो चुकी थीं, लेकिन रायपुर की जागरूक मीडिया के सामने उनका यह पुराना 'बलौदाबाजार वाला ढर्रा' इस बार भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। बड़ा सवाल: क्या तेलीबांधा पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगी? या फिर अपने रसूखदार आरक्षक और थाना प्रभारी के पुराने ढर्रे को बचाने के लिए चौथे स्तंभ की आवाज को दबा दिया जाएगा? फिलहाल, थाने के बाहर डटे पत्रकारों के हौसले यह साफ कर रहे हैं कि वे इस बार बिना 'न्याय' के पीछे हटने वाले नहीं हैं।
- रायपुर ब्रेकिंग: पत्रकार पर झूठी FIR और मारपीट के विरोध में तेलीबांधा थाने के सामने डटे शहर के पत्रकार, निलंबन की मांग रायपुर के तेलीबांधा थाने से एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा सामने आया है, जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली और मीडिया के बीच की तल्खी को एक बार फिर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुर्खियों में एक बार फिर वही नाम है, जो अपनी 'खास कार्यशैली' के लिए हमेशा चर्चा में रहता है—अजय झा। जी हां, बलौदाबाजार में अपनी तैनाती के दौरान जनता और पत्रकारों के साथ 'विशेष' व्यवहार के लिए मशहूर रहे पूर्व थाना प्रभारी अजय झा अब रायपुर के तेलीबांधा में अपनी नई 'पारी' खेल रहे हैं, और विवादों ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा है। इस बार मामला सीधे चौथे स्तंभ यानी मीडिया से टकरा गया है, जिसके बाद तेलीबांधा थाना परिसर आधी रात को किसी राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। शराब के नशे में धुत्त आरक्षक पर लगा मारपीट का आरोप पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रायपुर के एक स्थानीय पत्रकार और तेलीबांधा थाने में पदस्थ आरक्षक रमेश वर्मा के बीच आमना-सामना हुआ। आरोप है कि आरक्षक रमेश वर्मा ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पूरी तरह धुत्त थे। बात इतनी बढ़ी कि आरक्षक ने अपनी वर्दी की हनक दिखाते हुए पत्रकार के साथ न केवल बदतमीजी की, बल्कि उसके साथ जमकर मारपीट भी कर डाली। हैरानी की बात तो यह है कि पीड़ित पत्रकार जब न्याय की आस में थाने पहुंचा, तो वहां के 'मिजाज' से वाकिफ लोगों को जो डर था, वही हुआ। मारपीट के शिकार पत्रकार की सुनने के बजाय, पुलिसिया रसूख का इस्तेमाल करते हुए उल्टा पत्रकार के ऊपर ही आनन-फानन में FIR दर्ज कर दी गई। पुलिस की थ्योरी: "साहब, हमारे शासकीय कार्य में बाधा डाली गई!" इधर, आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा और पुलिस महकमे ने इस पूरी कहानी को एक अलग ही रंग देने की कोशिश की है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में आरक्षक ने बयान दिया है कि पत्रकार महोदय ने उनके "शासकीय कार्य में बाधा" पहुंचाई है। आरक्षक का दावा है कि वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे और पत्रकार ने न सिर्फ उनके काम में टांग अड़ाई, बल्कि उन्हें देख लेने और भुगत लेने की खुली धमकी भी दी। अब इस 'शासकीय कार्य' में कितनी सच्चाई थी और कितनी शराब की 'अमरबेल', यह तो जांच का विषय है, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पत्रकार को ही आरोपी बना डाला। थाने के सामने 'दंगल': आधी रात को धरने पर बैठे शहर के सारे पत्रकार जैसे ही यह खबर रायपुर के मीडिया जगत में फैली, पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा। अपने साथी के साथ हुई इस बर्बरता और ऊपर से फर्जी FIR की कार्रवाई से नाराज रायपुर के तमाम प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकार एकजुट होकर तेलीबांधा थाने पहुंच गए। "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सच दिखाने वाले को ही सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी हो, तो चुप बैठना गुनाह है।" इसी आक्रोश के साथ पत्रकारों ने थाने के सामने ही डेरा डाल दिया और जबरदस्त धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। आधी रात को थाने के बाहर गूंजते नारों और पत्रकारों के तीखे तेवरों ने पुलिस प्रशासन के हाथ-पैर फुला दिए। पत्रकारों की साफ मांग है कि आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा को तत्काल निलंबित किया जाए और पत्रकार पर की गई झूठी FIR को बिना शर्त वापस लिया जाए। अजय झा का 'बलौदाबाजार वाला अंदाज' रायपुर में भी बरकरार! इस पूरे विवाद के केंद्र में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वह है थाना प्रभारी अजय झा का। बलौदाबाजार के लोग आज भी उनके कार्यकाल को याद कर मुस्कुरा देते हैं या फिर अपना सिर पकड़ लेते हैं। बलौदाबाजार में रहते हुए जनता और पत्रकारों के साथ तमीज से बात न करना और हमेशा एक अकड़ में रहना मानो उनकी आदत का हिस्सा बन चुका था। वहां तो यह बातें आम हो चुकी थीं, लेकिन रायपुर की जागरूक मीडिया के सामने उनका यह पुराना 'बलौदाबाजार वाला ढर्रा' इस बार भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। बड़ा सवाल: क्या तेलीबांधा पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगी? या फिर अपने रसूखदार आरक्षक और थाना प्रभारी के पुराने ढर्रे को बचाने के लिए चौथे स्तंभ की आवाज को दबा दिया जाएगा? फिलहाल, थाने के बाहर डटे पत्रकारों के हौसले यह साफ कर रहे हैं कि वे इस बार बिना 'न्याय' के पीछे हटने वाले नहीं हैं।1
- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलारी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय मदनलाल ठेठवार की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता उनके स्वागत में उपस्थित थे, जिससे बुधवार का दिन नगर पंचायत पलारी के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण बन गया। बाजार चौक पलारी में आयोजित इस समारोह में नगर भवन प्रथम तल का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया प्रमुख अतिथि के रूप में मौजूद थे, जबकि कसडोल विधानसभा विधायक संदीप साहू ने अध्यक्षता की। स्वर्गीय मदनलाल ठेठवार ने महात्मा गांधी के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य राष्ट्र सेवा के उनके आदर्श को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है, ताकि यह क्षेत्र के युवाओं के लिए देशभक्ति, त्याग और समर्पण का प्रेरणा स्रोत बन सके। नगर पंचायत अध्यक्ष गोपी साहू ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल प्रतिमा का अनावरण नहीं है, बल्कि क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने यह भी कहा कि नगर भवन के लोकार्पण से नगरवासियों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं मिलेंगी और नगर के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।4
- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पलारी में आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने भाजपा सरकार पर किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो रही है। भूपेश बघेल ने दावा किया कि किसान सोसायटियों में खाद के लिए परेशान हैं, जबकि खुले बाजार में वही खाद अधिक कीमत पर उपलब्ध हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे फसलों की उपज प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सोसायटियों में खाद उपलब्ध नहीं है, तो बाजार में खाद कैसे पहुंच रही है। बघेल ने बताया कि लगभग 1350 रुपये में मिलने वाली खाद किसानों को बाजार में 1900 रुपये तक में खरीदनी पड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने जोर दिया कि किसानों की समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और कृषि कार्यों के लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। बघेल ने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।1
- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश में बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई, डीज़ल-पेट्रोल की क़ीमतों और किसानों को खाद न मिलने जैसे मुद्दों पर चिंता ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ाए जा रहे बिजली बिलों के लिए भी सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़िम्मेदार हैं। बघेल ने इन सभी समस्याओं के लिए सीधे तौर पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाबदेह ठहराया।1
- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के पलारी में जहरीली शराब पीने से 8 लोगों की मौत के मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बघेल ने इस घटना को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी, लेकिन मौजूदा सरकार में उन्हें संरक्षण मिल रहा है। पूर्व सीएम ने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में जहरीली शराब से मौत की कोई घटना नहीं हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आने के बाद अवैध शराब का कारोबार फिर से फल-फूल रहा है। बघेल ने जोर देकर कहा कि इस मामले में तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।1
- मुंगेली जिले के पथरिया स्थित एक कृषि केंद्र पर कृषि विभाग ने छापामार कार्रवाई करते हुए उर्वरक विक्रय पर तत्काल रोक लगा दी है। यह कार्रवाई किसानों को निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने और अन्य सामग्री जबरन देने की शिकायतों की जाँच में सही पाए जाने के बाद की गई। विभाग ने कृषि केंद्र के संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है।1
- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पलारी पहुँचने पर हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भव्य और गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में उत्साह और उत्सव का माहौल देखने को मिला, जहाँ लोगों ने "काका जिंदा है" के नारे भी लगाए, जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा। कार्यक्रम के दौरान, पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मदन राम ठेठवार की प्रतिमा का विधिवत अनावरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान देश के लिए प्रेरणास्रोत है और नई पीढ़ी को उनके संघर्ष एवं त्याग से सीख लेनी चाहिए। इसी कार्यक्रम में कसडोल विधानसभा के विधायक संदीप साहू का जन्मदिन भी उत्साहपूर्वक मनाया गया, जहाँ कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने केक काटकर उन्हें शुभकामनाएं दीं।4
- बिलासपुर जिले के बिल्हा थाना अंतर्गत केशला में बुधवार शाम एक ट्रैक्टर की चपेट में आने से पैदल चल रहे एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। बिल्हा पुलिस से गुरुवार दोपहर 1 बजे मिली जानकारी के अनुसार, कैलाश कोसले (49), निवासी केशला बिल्हा, ने बुधवार रात 10:06 बजे बिल्हा थाने में रिपोर्ट और मर्ग इंटीमेशन दर्ज कराया कि उनके भाई शंकर कोसले (47) की मौत वाहन ट्रेक्टर इंजन क्रमांक CG 10 AC 5669 के चालक द्वारा वाहन को तेज और लापरवाहीपूर्वक चलाकर ठोकर मारने से हुई है। कैलाश कोसले के अनुसार, बुधवार 17/06/2026 की शाम लगभग 6:15 बजे उनके भतीजे सतकुमार ने फोन कर बताया कि उनके भाई शंकर कोसले का एक्सीडेंट बिल्हा केशला प्राथमिक शाला पानी टंकी के पास सीसी रोड पर हो गया है और उन्हें सीने में चोट लगी है। मौके पर पहुंचने पर कैलाश ने देखा कि भीड़ लगी थी और उनके भाई शंकर कोसले वहीं पड़े थे, जिन्हें सीने में चोट आई थी। लोगों के सहयोग से उन्हें ई-रिक्शा से बिल्हा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने प्रार्थी की रिपोर्ट पर वाहन चालक के विरुद्ध अपराध धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना की सूचना मिलने के बाद रात में ही बिल्हा पुलिस बिल्हा अस्पताल पहुंची और मृतक के शव को बिल्हा के चिर घर में रखवाया। गुरुवार दोपहर 1 बजे शव का पीएम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है और मामले की विवेचना जारी है।1