रामपुर में जय अम्बे ओवरबर्डन कंपनी के कर्मचारी आलोक त्रिपाठी पर नौकरी दिलाने के नाम पर गरीबों से लाखों रुपये ठगने का सनसनीखेज आरोप लगा है। जब इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश होने लगा, तो कथित तौर पर मामले को दबाने और पुलिस-प्रशासन का ध्यान भटकाने के लिए इलाके में 'गोलीबारी' की झूठी अफवाह फैला दी गई। हमारी टीम द्वारा ग्राउंड जीरो पर पड़ताल करने पर इस अफवाह की सच्चाई सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय ग्रामीण श्रीराम विश्वकर्मा ने कैमरे पर बताया कि आलोक त्रिपाठी ने करीब दो महीने पहले उनसे और उनके छोटे भाई से नौकरी लगवाने के नाम पर ₹5 लाख की बड़ी रकम ली थी। नौकरी न मिलने और पैसे वापस मांगने पर, आलोक त्रिपाठी ने उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि आलोक त्रिपाठी ने अपनी चमड़ी बचाने और ₹5 लाख की राशि हड़पने के लिए यह पूरी साजिश रची, जिसमें पीड़ितों के दबाव बनाने पर मामले को दूसरा मोड़ देने के लिए 'गोली चलने' का झूठा नाटक और अफवाह फैलाई गई ताकि ग्रामीण डर जाएं। इस धोखाधड़ी और मानसिक प्रताड़ना के कारण श्रीराम विश्वकर्मा और अन्य ग्रामीण आर्थिक व मानसिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस रसूखदार कर्मचारी के सामने घुटने नहीं टेकेंगे और जल्द ही पुलिस प्रशासन को लिखित रूप से अवगत कराएंगे कि कैसे नौकरी के नाम पर इलाके के गरीबों से पैसे ऐंठे जा रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पैसे लेकर नौकरी न देना और मांगने पर गोली चलने जैसी झूठी अफवाहें फैलाकर डराना अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि क्या रामपुर पुलिस इस कथित रसूखदार कर्मचारी के 'अफवाह तंत्र' और 'ठगी' की परतों को बेनकाब कर पाएगी? साथ ही, आर्थिक और मानसिक तंगी से जूझ रहे इन गरीब ग्रामीणों को उनके ₹5 लाख कब वापस मिलेंगे?
रामपुर में जय अम्बे ओवरबर्डन कंपनी के कर्मचारी आलोक त्रिपाठी पर नौकरी दिलाने के नाम पर गरीबों से लाखों रुपये ठगने का सनसनीखेज आरोप लगा है। जब इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश होने लगा, तो कथित तौर पर मामले को दबाने और पुलिस-प्रशासन का ध्यान भटकाने के लिए इलाके में 'गोलीबारी' की झूठी अफवाह फैला दी गई। हमारी टीम द्वारा ग्राउंड जीरो पर पड़ताल करने पर इस अफवाह की सच्चाई सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय ग्रामीण श्रीराम विश्वकर्मा ने कैमरे पर बताया कि आलोक त्रिपाठी ने करीब दो महीने पहले उनसे और उनके छोटे भाई से नौकरी लगवाने के नाम पर ₹5 लाख की बड़ी रकम ली थी। नौकरी न मिलने और पैसे वापस मांगने पर, आलोक त्रिपाठी ने उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि आलोक त्रिपाठी ने अपनी चमड़ी बचाने और ₹5 लाख की राशि हड़पने के लिए यह पूरी साजिश रची, जिसमें पीड़ितों के दबाव बनाने पर मामले को दूसरा मोड़ देने के लिए 'गोली चलने' का झूठा नाटक और अफवाह फैलाई गई ताकि ग्रामीण डर जाएं। इस धोखाधड़ी और मानसिक प्रताड़ना के कारण श्रीराम विश्वकर्मा और अन्य ग्रामीण आर्थिक व मानसिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस रसूखदार कर्मचारी के सामने घुटने नहीं टेकेंगे और जल्द ही पुलिस प्रशासन को लिखित रूप से अवगत कराएंगे कि कैसे नौकरी के नाम पर इलाके के गरीबों से पैसे ऐंठे जा रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पैसे लेकर नौकरी न देना और मांगने पर गोली चलने जैसी झूठी अफवाहें फैलाकर डराना अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि क्या रामपुर पुलिस इस कथित रसूखदार कर्मचारी के 'अफवाह तंत्र' और 'ठगी' की परतों को बेनकाब कर पाएगी? साथ ही, आर्थिक और मानसिक तंगी से जूझ रहे इन गरीब ग्रामीणों को उनके ₹5 लाख कब वापस मिलेंगे?
- डिंडोरी जनसुनवाई में मजियाखार संगम टोला में निवास कर रही एक बेसहारा साध्वी माता जी ने अपनी सुरक्षा को लेकर कलेक्टर से गुहार लगाई है। साध्वी माता जी ने बताया कि उन्हें असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार सताया जा रहा है, जिसके कारण उन्होंने कलेक्टर से सुरक्षा प्रदान करने की अपील की है।3
- मध्य प्रदेश के डिंडोरी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत रकरिया में भीषण पेयजल संकट से आक्रोशित ग्रामीण, बच्चे और महिलाएं सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए। पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे इन लोगों ने रकरिया-चौरा-छिंदगांव मुख्य मार्ग पर खाली बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक आवागमन बाधित रहा और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। यह घटना सरकार के 'हर घर स्वच्छ पेयजल' पहुंचाने के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि पंचायत द्वारा 4 जून से टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसका लाभ पूरे गांव को नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि टैंकर अधिकतर समय सरपंच के घर के पास खड़ा रहता है, जिससे अन्य मोहल्लों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता और लोग भीषण गर्मी में प्यास से जूझने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हैंडपंप और कुएं लगभग सूख चुके हैं, और जो थोड़े-बहुत जल स्रोत बचे हैं, उनमें भी नाममात्र का ही पानी है। लोगों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है, जो न तो साफ है और न ही पीने योग्य, लेकिन मजबूरी में उसी से गुजारा किया जा रहा है। जब इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच सुशीला बाई मरावी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनके घर पर मौजूद बच्चों ने बताया कि सरपंच घर पर नहीं हैं, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा किया है कि गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका पहले से होने के बावजूद पंचायत और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की। करोड़ों रुपये की जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद यदि ग्रामीणों को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़ रहा है, तो यह केवल स्थानीय व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है। पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए महिलाओं और बच्चों का यूं सड़क पर उतरना बताता है कि योजनाओं की चमकदार रिपोर्टों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को केवल एक दिन की घटना मानकर भूल जाता है या फिर रकरिया के प्यासे लोगों को स्थायी समाधान देने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, क्योंकि “जब जनता को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़े, तो समझ लीजिए समस्या सिर्फ पानी की नहीं, व्यवस्था की भी है।”3
- डिंडोरी जिले के रकरिया गांव में रविवार को गहराते जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने शाहपुर-छिंदगांव मार्ग पर बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन गांव में पानी की गंभीर कमी को लेकर था। लगभग 1900 की आबादी वाले इस गांव में कुएं और हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है, जिससे ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए दूर जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत द्वारा स्वीकृत पानी का टैंकर गांव में नहीं आता, बल्कि सरपंच सुशीला मरावी के घर पर ही खड़ा रहता है। हालांकि, सरपंच ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि टैंकर चालक के उपलब्ध न होने के कारण देरी हुई। घटना की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी केवल सिंह परते मौके पर पहुंचे। उन्होंने सरपंच से बात की और शाम 4 बजे तक पानी के टैंकर की व्यवस्था करवाई, जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त कर दिया।2
- गौरेला में मीना बाजार लगा हुआ है, जहाँ उम्मीद के मुताबिक पब्लिक और भीड़ बहुत कम देखने को मिली।1
- उमरिया जिले के नौरोजाबाद क्षेत्र में स्थित खेर माता मंदिर में चोरी की एक घटना सामने आई है, जहाँ अज्ञात चोरों ने मंदिर की दान पेटी पर हाथ साफ कर दिया। आमतौर पर घरों और दुकानों में चोरी की वारदातें होती हैं, लेकिन अब चोर धार्मिक स्थलों को भी निशाना बना रहे हैं। मंदिर के पुजारी ने जानकारी दी कि बीते दो दिन पहले कुछ अज्ञात लोग दिन के समय मंदिर में घुस आए और दान पेटी लेकर फरार हो गए। घटना के समय पुजारी मंदिर परिसर में आराम कर रहे थे। उनके अनुसार, दान पेटी में लगभग 9,500 से 10,000 रुपये की नकद राशि मौजूद थी। इस घटना की सूचना मिलने पर मंदिर प्रबंधन ने तत्काल नौरोजाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद नौरोजाबाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस मामले में आगे की जाँच कर रही है और अन्य पहलुओं पर भी गौर कर रही है।1
- चिरमिरी नगर पालिक निगम कार्यालय के आसपास आज तक पीने के पानी और यूरिनल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इस स्थिति के कारण कार्यालय आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे NH45 पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। यह दर्दनाक दुर्घटना एक पिकअप वाहन और मोटरसाइकिल के बीच हुई टक्कर के कारण हुई।1