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शिक्षा मंत्री ने म प्र के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालो का बनाया मजाक मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का शिक्षा मंत्री ने उड़ाया माखोल मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के बिगड़े बोल मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में सम्मिलित होकर पहुंचे थे वर वधु को आशीर्वाद देने लेकिन इसके उलट उनपर तंज कसते हुए अपमान कर आए ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने बेटे का विवाह भी सम्मेलन में ही किया था लेकिन उनके मंत्री का इस तरह का अपमान जनक वक्तव्य उनकी मंशा पर पानी फेरते नजर आता है जब किसी गरीब की बहन बेटी किसी की पत्नी को आपस में ना बदलने का भद्दा बयान वह सार्वजनिक मंच से दे रहे थे जबकि वह मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री है ऐसे में मध्यप्रदेश की नींव की मिट्टी पलीत करते नजर आए मंत्री उदय प्रताप
Shrikant Dubay पत्रकार
शिक्षा मंत्री ने म प्र के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालो का बनाया मजाक मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का शिक्षा मंत्री ने उड़ाया माखोल मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के बिगड़े बोल मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में सम्मिलित होकर पहुंचे थे वर वधु को आशीर्वाद देने लेकिन इसके उलट उनपर तंज कसते हुए अपमान कर आए ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने बेटे का विवाह भी सम्मेलन में ही किया था लेकिन उनके मंत्री का इस तरह का अपमान जनक वक्तव्य उनकी मंशा पर पानी फेरते नजर आता है जब किसी गरीब की बहन बेटी किसी की पत्नी को आपस में ना बदलने का भद्दा बयान वह सार्वजनिक मंच से दे रहे थे जबकि वह मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री है ऐसे में मध्यप्रदेश की नींव की मिट्टी पलीत करते नजर आए मंत्री उदय प्रताप
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- प्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलन करेली में दिए गए वक्तव्य के विरोध में कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन हाथों में तख्तियां लहराते हुए महिलाएं पहुंची पुलिस अधीक्षक कार्यालय। महिला शक्तियों ने की नारेबाजी शिक्षा मंत्री होश में आओ। सड़कों पर उतरी महिलाएं कहां नारी का अपमान नहीं सहेंगे।1
- नरसिंहपुर के करेली में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन के दौरान मंत्री उदय प्रताप सिंह के कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नाराज़ लोगों ने एसपी के नाम ज्ञापन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्यक्रम में दिए गए बयान से महिलाओं की भावनाएं आहत हुईं और आयोजन की गरिमा को ठेस पहुंची। ।।।।मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है, वहीं गोटेगांव निवासी पूर्व पार्षद राजेश चौकसे ने महिलाओं के साथ ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।4
- सिद्धांतहीन हैं पार्टियां नरसिंहपुर। भारत में चुनावी सरगर्मी के बीच अक्सर जातिगत राजनीति का मुद्दा गरमाया रहता है। हाल ही में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने इस विषय पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने राजनीतिक दलों के दोहरे चरित्र के मीडिया के सवालों पर राजनीतिक दलों को सिद्धांतहीन करार दिया है। शंकराचार्य ने कहा कि पिछले 78 वर्षों से देश में जाति-पाति मिटाओ के नारे गूंज रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। उन्होंने सरकारों और राजनीतिक दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ पार्टियां जातिवाद खत्म करने की बात करती हैं, तो दूसरी तरफ जाति के आधार पर ही आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव में उम्मीदवारों का चयन भी योग्यता के बजाय उनकी जाति और क्षेत्र के समीकरणों को देखकर किया जाता है। नगर पालिका के पार्षद से लेकर मेयर और चेयरमैन तक के पदों पर जातिगत राजनीति का गहरा प्रभाव है। शंकराचार्य ने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि जब हम शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो उनका एक निश्चित अर्थ होना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर कोई कहे कि बगीचे को आग से सींच दो, तो बगीचा सींचेगा नहीं बल्कि जल जाएगा। इसी प्रकार, जब पार्टियां जातिवाद मिटाने का नारा देकर उसी के आधार पर नीतियां बनाती हैं, तो यह उनके वैचारिक दिवालियेपन को दर्शाता है। मीडिया के स्वाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि जातिवाद देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इस पर असहमति जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कई ऐसे देश हैं जहाँ जाति व्यवस्था नहीं है, जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान, लेकिन क्या वे विकसित हो गए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश के विकास में जाति-पाति बाधक नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार सबसे बड़ी बाधा है। शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत जनगणना और आरक्षण को लेकर बहस तेज है। उनके अनुसार, जब तक राजनीतिक दल अपने कथनी और करनी में अंतर रखेंगे, तब तक सामाजिक सुधार के नारे केवल चुनावी जुमले ही बने रहेंगे।6
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