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जनपद जौनपुर की ग्राम पंचायत हिसामपुर में भगत श्रीराम पूजारी जी ने माता रानी जी की पूजा संपन्न कराई। इस दौरान भगत श्रीराम पूजारी जी ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की।
अच्छेलाल राजभर पत्रकार
जनपद जौनपुर की ग्राम पंचायत हिसामपुर में भगत श्रीराम पूजारी जी ने माता रानी जी की पूजा संपन्न कराई। इस दौरान भगत श्रीराम पूजारी जी ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की।
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- जनपद जौनपुर में, होटल रिवर व्यू में राज्यमंत्री के नेतृत्व में 'मन की बात' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के संबोधन को डिजिटल टेलीविजन के माध्यम से सुना गया। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग मंत्री गिरिश चन्द्र यादव सहित हजारों कार्यकर्ता और सैकड़ों वरिष्ठ लोग उपस्थित रहे।1
- जौनपुर जिले के पुरव बाजार में स्थापित नया यूनियन बैंक अपने ग्राहकों को अच्छी सुविधाएँ प्रदान कर रहा है। बैंक की इस पहल से ग्राहकों को बेहतर सेवाएँ मिल रही हैं।1
- वाराणसी में लंबे समय से सफाई न होने से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यहां के स्थानीय नेता भी इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मौजूदा गंदगी के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भाजपा की सरकार में भी इतनी गंदगी मौजूद है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने और जल्द से जल्द सफाई करवाने की अपील की है।1
- वाराणसी में 31 मई 2026 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रमों और जनजागरण अभियानों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों के दौरान, लोगों को तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया, साथ ही स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवन अपनाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि तंबाकू केवल एक बुरी आदत नहीं है, बल्कि यह अनेक घातक बीमारियों की जड़ है। इसके सेवन से कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की गंभीर बीमारियां, उच्च रक्तचाप और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष लाखों लोग तंबाकू जनित रोगों के कारण अपनी जान गंवाते हैं, इसलिए इस लत से समय रहते छुटकारा पाना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर युवाओं और विद्यार्थियों को विशेष रूप से जागरूक करते हुए उन्हें किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने और अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया। समाजसेवियों ने लोगों से अपील की कि वे स्वयं तंबाकू का सेवन न करें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी इसके गंभीर दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करें। मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों ने जोर दिया कि स्वस्थ नागरिक ही मजबूत समाज और राष्ट्र की नींव होते हैं, और इसलिए सभी को मिलकर नशामुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए। सूर्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा रिपोर्ट किए गए इस कार्यक्रम का समापन 'तंबाकू छोड़ें, जीवन जोड़ें — स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें' के सशक्त संदेश के साथ हुआ।1
- कर्तव्य और अनुशासन की मिसाल के रूप में पहचाने जाने वाले अशोक पाण्डेय सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी विदाई के अवसर पर एक भावभीना समारोह आयोजित किया गया, जहाँ उन्हें सम्मानित किया गया।1
- राजस्थान के अलवर जिले के तिजारा क्षेत्र स्थित पालपुर गाँव में इंसानियत को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक नवजात बच्ची को लगभग 70 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद वह मासूम ज़िंदा बच गई। यह घटना सोमवार सुबह तब सामने आई जब स्कूल जा रहे कुछ बच्चों को कुएं के अंदर से रोने की आवाज़ सुनाई दी। पहले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन ध्यान से सुनने पर उन्होंने तुरंत गाँव वालों को इसकी सूचना दी। ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रस्सियों की मदद से कुएं में उतरकर बच्ची को बाहर निकाला। बच्ची को बाहर निकालते ही ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बच्ची की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर नवजात को कुएं में किसने और क्यों फेंका। पुलिस आस-पास के इलाकों में बच्ची के माता-पिता की तलाश भी कर रही है। इस घटना से पूरे इलाके में भारी आक्रोश है, और लोग सवाल उठा रहे हैं कि कोई इतनी निर्दयी हरकत कैसे कर सकता है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्कूल जा रहे बच्चों ने समय रहते रोने की आवाज़ न सुनी होती, तो मासूम की जान बचाना संभव नहीं था। यह घटना क्रूरता और मानवता, दोनों की मिसाल बन गई है, जहाँ एक तरफ किसी ने नवजात को मौत के कुएं में फेंक दिया, तो दूसरी तरफ बच्चों की सतर्कता और ग्रामीणों की बहादुरी ने उसे नया जीवन प्रदान किया।1