आज़ादी के 78 साल बाद भी विकास को तरसता झिरपानी: सड़क और पुलिया न होने से झोली में इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण आज़ादी के 78 साल बाद भी विकास को तरसता झिरपानी: सड़क और पुलिया न होने से झोली में इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण K K R News ब्लॉक ब्यूरो चीफ नोमान खान कादरी की रिपोर्ट तामिया (छिंदवाड़ा)। एक तरफ सरकारें विकास का दावा करती हैं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए करोड़ों रुपयों की योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जाता है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर तस्वीरें कुछ और ही बयां करती हैं। तामिया जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चोपना के ग्राम झिरपानी की स्थिति आज भी बेहद दयनीय है। आजादी के दशकों बाद भी यह गांव विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। गांव में पक्की सड़क और पुलिया न होने के कारण आपात स्थिति में कोई भी चारपहिया या दुपहिया वाहन गांव के भीतर तक नहीं पहुंच पाता। सबसे विकट स्थिति तब बनती है जब गांव में कोई बीमार होता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़ता है। एम्बुलेंस या अन्य गाड़ियां न आ पाने के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में मरीज को 'जोंगा' (बांस और कपड़े से बनी झोली) में लादकर पैदल ही कई किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। इसके बाद ही उन्हें दूसरे गांव या शहर ले जाकर इलाज मिल पाता है। ट्राइबल फंड और योजनाओं का क्या हुआ? ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन द्वारा ट्राइबल (आदिवासी) कल्याण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये की योजनाएं मंजूर की जाती हैं, लेकिन झिरपानी जैसे पिछड़े आदिवासी गांवों तक इन योजनाओं का लाभ कभी नहीं पहुंचता। मूलभूत सुविधाओं का अभाव: गांव में न पक्की सड़क है और न ही नदी-नालों पर पुलिया, जिससे बारिश के दिनों में गांव पूरी तरह कट जाता है। इलाज के अभाव में खतरा: समय पर वाहन न मिलने से कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। नेताओं और अधिकारियों से निराशा: ग्रामीणों ने कई बार जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। स्थानीय निवासियों की मांग है कि गांव में जल्द से जल्द पक्की सड़क और पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें इस कष्टदायी स्थिति से निजात मिल सके और झिरपानी के आदिवासियों को भी आजादी के असली विकास का अनुभव हो सके।
आज़ादी के 78 साल बाद भी विकास को तरसता झिरपानी: सड़क और पुलिया न होने से झोली में इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण आज़ादी के 78 साल बाद भी विकास को तरसता झिरपानी: सड़क और पुलिया न होने से झोली में इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण K K R News ब्लॉक ब्यूरो चीफ नोमान खान कादरी की रिपोर्ट तामिया (छिंदवाड़ा)। एक तरफ सरकारें विकास का दावा करती हैं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए करोड़ों रुपयों की योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जाता है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर तस्वीरें कुछ और ही बयां करती हैं। तामिया जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चोपना के ग्राम झिरपानी की स्थिति आज भी बेहद दयनीय है। आजादी के दशकों बाद भी यह गांव विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। गांव में पक्की सड़क और पुलिया न होने के कारण आपात स्थिति में कोई भी चारपहिया या दुपहिया वाहन गांव के भीतर तक नहीं पहुंच पाता। सबसे विकट स्थिति तब बनती है जब गांव में कोई बीमार होता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़ता है। एम्बुलेंस या अन्य गाड़ियां न आ पाने के कारण ग्रामीणों को मजबूरी
में मरीज को 'जोंगा' (बांस और कपड़े से बनी झोली) में लादकर पैदल ही कई किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। इसके बाद ही उन्हें दूसरे गांव या शहर ले जाकर इलाज मिल पाता है। ट्राइबल फंड और योजनाओं का क्या हुआ? ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन द्वारा ट्राइबल (आदिवासी) कल्याण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये की योजनाएं मंजूर की जाती हैं, लेकिन झिरपानी जैसे पिछड़े आदिवासी गांवों तक इन योजनाओं का लाभ कभी नहीं पहुंचता। मूलभूत सुविधाओं का अभाव: गांव में न पक्की सड़क है और न ही नदी-नालों पर पुलिया, जिससे बारिश के दिनों में गांव पूरी तरह कट जाता है। इलाज के अभाव में खतरा: समय पर वाहन न मिलने से कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। नेताओं और अधिकारियों से निराशा: ग्रामीणों ने कई बार जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। स्थानीय निवासियों की मांग है कि गांव में जल्द से जल्द पक्की सड़क और पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें इस कष्टदायी स्थिति से निजात मिल सके और झिरपानी के आदिवासियों को भी आजादी के असली विकास का अनुभव हो सके।
- आज़ादी के 78 साल बाद भी विकास को तरसता झिरपानी: सड़क और पुलिया न होने से झोली में इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण आज़ादी के 78 साल बाद भी विकास को तरसता झिरपानी: सड़क और पुलिया न होने से झोली में इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण K K R News ब्लॉक ब्यूरो चीफ नोमान खान कादरी की रिपोर्ट तामिया (छिंदवाड़ा)। एक तरफ सरकारें विकास का दावा करती हैं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए करोड़ों रुपयों की योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जाता है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर तस्वीरें कुछ और ही बयां करती हैं। तामिया जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चोपना के ग्राम झिरपानी की स्थिति आज भी बेहद दयनीय है। आजादी के दशकों बाद भी यह गांव विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। गांव में पक्की सड़क और पुलिया न होने के कारण आपात स्थिति में कोई भी चारपहिया या दुपहिया वाहन गांव के भीतर तक नहीं पहुंच पाता। सबसे विकट स्थिति तब बनती है जब गांव में कोई बीमार होता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़ता है। एम्बुलेंस या अन्य गाड़ियां न आ पाने के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में मरीज को 'जोंगा' (बांस और कपड़े से बनी झोली) में लादकर पैदल ही कई किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। इसके बाद ही उन्हें दूसरे गांव या शहर ले जाकर इलाज मिल पाता है। ट्राइबल फंड और योजनाओं का क्या हुआ? ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन द्वारा ट्राइबल (आदिवासी) कल्याण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये की योजनाएं मंजूर की जाती हैं, लेकिन झिरपानी जैसे पिछड़े आदिवासी गांवों तक इन योजनाओं का लाभ कभी नहीं पहुंचता। मूलभूत सुविधाओं का अभाव: गांव में न पक्की सड़क है और न ही नदी-नालों पर पुलिया, जिससे बारिश के दिनों में गांव पूरी तरह कट जाता है। इलाज के अभाव में खतरा: समय पर वाहन न मिलने से कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। नेताओं और अधिकारियों से निराशा: ग्रामीणों ने कई बार जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। स्थानीय निवासियों की मांग है कि गांव में जल्द से जल्द पक्की सड़क और पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें इस कष्टदायी स्थिति से निजात मिल सके और झिरपानी के आदिवासियों को भी आजादी के असली विकास का अनुभव हो सके।2
- छिंदवाड़ा बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर डंपर एवं ट्रैक्टर यूनियन द्वारा कलेक्ट कार्यालय पहुंचकर जमकर प्रदर्शन किया छिंदवाड़ा बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर डंपर एवं ट्रैक्टर यूनियन द्वारा कलेक्ट कार्यालय पहुंचकर जमकर प्रदर्शन किया अपनी मांगों को लेकर रैली निकाल कर आज हमारे बाजी करते हुए कलेक्ट्रेट करने पहुंचे उनका मानना है कि निगम के अंदर ट्रैक्टरों पर कार्रवाई नहीं होना चाहिए क्योंकि वहां पर हम बड़े ट्रक नहीं चला सकते इसलिए ट्रैक्टरों से माल सप्लाई करनी होती है लेकिन राजस्व विभाग में ट्रैक्टरों पर चलने करवाई न करने के बजाय उन्हें आरटीओ को भेज देता है जिससे हमें लंबे समय तक परेशान होना पड़ रहा है और हमारे काम का प्रभावित हो रहे हैं1
- सिंगोड़ी में दीनी सवाल-जवाब का आयोजन, 12 साल के यतीम बच्चे को निकला उमराह का पहला इनाम, पूरे गांव ने दिखाई इंसानियत सिंगोड़ी:- विगत दिनों आशिक-ए-रसूल कमेटी द्वारा मस्जिद परिसर में एक दिवसीय दीनी तालीम एवं सवाल-जवाब कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उन बच्चों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने-अपने स्कूलों में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए हैं। साथ ही इस्लामिक दीनी सवाल-जवाब में अव्वल आने वाले लोगों को कमेटी द्वारा इनामात देकर सम्मानित किया गया। इसमें सबसे बड़ा इनाम मक्का-मदीना शरीफ की यात्रा का टिकट था। पहला इनाम सिंगोड़ी के 12 वर्षीय बालक फहीम अंसारी के नाम निकला। फहीम के पिता का कई साल पहले इंतकाल हो चुका है। घर में मां और एक दिव्यांग भाई है। बच्चे की स्थिति को देखते हुए मौजूद लोगों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। सभी ने तय किया कि फहीम अकेला नहीं जाएगा, मां और भाई को भी उमराह कराया जाएगा। तीनों के उमराह टिकट, पासपोर्ट और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी मुस्तफा टूर एंड ट्रेवल्स के अब्दुल रज्जाक गोलू भाई, यूसुफ भाई टैंकर, शाहिद भाई भूरा, सलमान भाई, अफसार भाई आफताब भाई, साहिल भाई, मुबीन भाई, साहिल अंसारी, तौफीक अंसारी, ताजुल भाई, दिलनवाज खान ने अन्य ने तीन टिकट का, खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली। वहीं अन्य 11 बड़े इनामों में वाशिंग मशीन - इसराईल भाई हार्डवेयर, सायकल - शराफत हुसैन रिजवी एडवोकेट, आलमारी - सोनू ऑटो, सहित अनवारुल हक, फरहान मिस्कीनी, नसीम भाई, राजिक भाई, एजाज मंसूरी, मकदूम साबरी, हाजी मोईनुद्दीन, हाजी अब्दुल समद साहब, नजीर भाई बाबा मंसूरी, हाजी अय्यूब साहब द्वारा दिए गए। अंत में आशिक-ए-रसूल कमेटी के वरिष्ठ इलमन भाई ने सभी ताऊन करने वाले हजरात का शुक्रिया अदा किया। सिंगोड़ी में दीनी सवाल-जवाब का आयोजन, 12 साल के यतीम बच्चे को निकला उमराह का पहला इनाम, पूरे गांव ने दिखाई इंसानियत सिंगोड़ी:- विगत दिनों आशिक-ए-रसूल कमेटी द्वारा मस्जिद परिसर में एक दिवसीय दीनी तालीम एवं सवाल-जवाब कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उन बच्चों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने-अपने स्कूलों में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए हैं। साथ ही इस्लामिक दीनी सवाल-जवाब में अव्वल आने वाले लोगों को कमेटी द्वारा इनामात देकर सम्मानित किया गया। इसमें सबसे बड़ा इनाम मक्का-मदीना शरीफ की यात्रा का टिकट था। पहला इनाम सिंगोड़ी के 12 वर्षीय बालक फहीम अंसारी के नाम निकला। फहीम के पिता का कई साल पहले इंतकाल हो चुका है। घर में मां और एक दिव्यांग भाई है। बच्चे की स्थिति को देखते हुए मौजूद लोगों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। सभी ने तय किया कि फहीम अकेला नहीं जाएगा, मां और भाई को भी उमराह कराया जाएगा। तीनों के उमराह टिकट, पासपोर्ट और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी मुस्तफा टूर एंड ट्रेवल्स के अब्दुल रज्जाक गोलू भाई, यूसुफ भाई टैंकर, शाहिद भाई भूरा, सलमान भाई, अफसार भाई आफताब भाई, साहिल भाई, मुबीन भाई, साहिल अंसारी, तौफीक अंसारी, ताजुल भाई, दिलनवाज खान ने अन्य ने तीन टिकट का, खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली। वहीं अन्य 11 बड़े इनामों में वाशिंग मशीन - इसराईल भाई हार्डवेयर, सायकल - शराफत हुसैन रिजवी एडवोकेट, आलमारी - सोनू ऑटो, सहित अनवारुल हक, फरहान मिस्कीनी, नसीम भाई, राजिक भाई, एजाज मंसूरी, मकदूम साबरी, हाजी मोईनुद्दीन, हाजी अब्दुल समद साहब, नजीर भाई बाबा मंसूरी, हाजी अय्यूब साहब द्वारा दिए गए। अंत में आशिक-ए-रसूल कमेटी के वरिष्ठ इलमन भाई ने सभी ताऊन करने वाले हजरात का शुक्रिया अदा किया।1
- संत गजानन महाराज की पुण्यतिथि पर होंगे भव्य आयोजन* परमात्मा की असीम कृपा से संत गजानन गुणगान मंडल द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी ऋषि पंचमी के पावन पर्व पर गजानन महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर भव्य एवं दिव्य आयोजन किया जाएगा। संत गजानन गुणगान मंडल के संचालक आनंद बक्षी ने बताया कि *१५ सितंबर* दिन मंगलवार को प्रातः *७:३० बजे* पंडित किशोर तातेकर द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार से देवी-देवताओं एवं गजानन महाराज का अभिषेक किया जाएगा। *प्रातः १० बजे* से जय जय रघुवीर समर्थ मंडल द्वारा भजनों की सुमधुर प्रस्तुति दी जाएगी। *प्रातः ११ बजे महाआरती* होगी। *११:३० बजे से दोपहर ३:३० बजे तक* महाराज के अत्यंत प्रिय भोजन बेसन भाकर का महाप्रसाद भंडारा होगा। *शाम ६:३० बजे* संत भेट हेतु गजानन महाराज की पालकी विवेकानंद कॉलोनी के विभिन्न मार्गों से होती हुई श्री शिरडी साईं मंदिर तक निकाली जाएगी। संजय औरंगाबादकर एवं सुभाष स्मार्थ ने पुण्यतिथि महोत्सव को सफल बनाने हेतु धन, धान्य एवं वस्तु दान का आग्रह किया है। संत गजानन गुणगान मंडल के रजनीकांत वाजपेयी, सौ. श्रुति सायखेड़कर, सुधीर सायखेड़कर, सौ. वर्षा पाठक, विजया धोटे, सौ. अमृता जोशी, सौ. मोना कस्तूरे, श्याम मोहरे, कृष्णा मंगरूलकर, प्रदीप मूले, संदीप फिरके ने सभी धर्मप्रेमी समुदाय एवं मातृशक्ति से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर पुण्यार्जन करने का आग्रह किया है1
- 15 सूत्रीय मांगों को लेकर सफाई मित्रों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, चरमराई शहर की सफाई व्यवस्था बनखेड़ी नगर से रोजाना निकलता है 15-20 ट्रॉली कचरा बनखेड़ी। नगर परिषद बनखेड़ी में कार्यरत सफाई मित्र अपनी 15 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर मंगलवार दोपहर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। बुधवार को सफाई मित्र नगर परिषद कार्यालय के समीप धरने पर बैठे रहे। हड़ताल के चलते शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। सफाई मित्रों ने बताया कि आमरण अनशन पर बैठे रविशंकर वाल्मीकि, अजाक्स जिलाध्यक्ष के समर्थन में स्थानीय शाखा पिपरिया के कर्मचारी 8 सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी के समर्थन में बनखेड़ी के सफाई मित्रों ने सीएमओ निशांत श्रीवास्तव, थाना प्रभारी विजय कुमार सनस एवं तहसीलदार मनोज नागवंशी को सामूहिक रूप से लिखित सूचना दी है। *दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने की मांग-* सफाई मित्र राजू खरे और चिरोंजी लाल विशोपीया ने बताया कि लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई है। राजू खरे ने बताया कि दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने के लिए शासन स्तर से कई बार जानकारी मांगी गई, लेकिन अब तक नियमितीकरण नहीं हुआ है। बनखेड़ी नगर परिषद में करीब 60 सफाई मित्र कार्यरत हैं, जिनमें 25 दैनिक वेतनभोगी हैं। इसके अलावा 14 मानदेय कर्मियों को कलेक्टर दर के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है। सफाई मित्रों ने इन सहित 15 सूत्रीय मांगों के निराकरण की मांग की है। *हड़ताल खत्म होते ही शुरू होगी सफाई-* नगर परिषद के स्वच्छता निरीक्षक मदन मोहन चौकसे ने बताया कि सफाई मित्रों ने रविशंकर वाल्मीकि के समर्थन में हड़ताल की सूचना दी है। हड़ताल समाप्त होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था पूर्व की तरह नियमित रूप से शुरू करा दी जाएगी। *रोज निकलता है 15 से 20 ट्रॉली कचरा-* बनखेड़ी बाजार सहित नगर के विभिन्न वार्डों से प्रतिदिन करीब 15 से 20 मैजिक-ट्रॉली कचरा निकलता है। ऐसे में यदि सफाई मित्रों की हड़ताल लंबी खिंची तो शहर में जगह-जगह कचरा जमा होने की स्थिति बन सकती है। नागरिकों का कहना है कि हड़ताल के दौरान जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद को स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों से कचरा निर्धारित स्थान पर डालने की अपील करनी चाहिए, ताकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था को पूरी तरह बिगड़ने से बचाया जा सके।1
- साइबर सुरक्षा को लेकर जन जागरूकता अभियान चलाया जन जागरूकता अभियान में बचाव के तरीके 1930 पर शिकायत की अपील बनखेड़ी पुलिस द्वारा गोविंद पैलेस में साइबर सुरक्षा को लेकर जन जागरूकता अभियान चलाया गया1
- पिपरिया में राहगीर से लूट करने वाले चार बदमाश गिरफ्तार, तीन लाख का माल किया बरामद नर्मदापुरम - जिले के स्टेशन रोड थाना पिपरिया पुलिस ने राहगीर से लूट की वारदात का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 3 लाख 4 हजार 700 रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण, 4700 रुपये नकद और फरियादी का आधार कार्ड बरामद किया है । प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसडीओपी पिपरिया मोहित यादव ओर स्टेशन रोड थाना प्रभारी निरीक्षक मदन पवार ने जानकारी देते हुए बताया कि राइखेड़ा निवासी रामविलास ठाकुर 6 सितंबर को आभूषण गिरवी रखने पिपरिया आया था लकी होटल के पास गली में चार युवकों ने उसके साथ मारपीट कर आभूषण और नकदी लूट ली फरियादी की रिपोर्ट पर स्टेशन रोड थाने में मामला दर्ज किया गया । पुलिस अधीक्षक साई कृष्ण थोटा के निर्देशन में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हेमंत उर्फ मुट्टा, राहुल उर्फ लंगड़ा, दीपक उर्फ टशन और राधे कहार को गिरफ्तार किया, पूछताछ में आरोपियों ने वारदात स्वीकार की, चोरी का सामान खरीदने वाले गोल्डी नाथ को भी गिरफ्तार किया गया । इस कार्यवाही में स्टेशन रोड थाना प्रभारी निरीक्षक मदन पवार के साथ प्रधान आरक्षक हरिओम रजक, आरक्षक अजय सिंह चौहान, प्रभाकर चौधरी, मोनू ओर सत्यम की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।3
- छिंदवाड़ा में भगवा ध्वज उतारे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में सकल हिंदू समाज और विश्व हिंदू परिषद समेत अन्य हिंदू संगठनों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और चक्का जाम कर दिया। मामला मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने स्थित मेजर अमित ठेंगे स्मारक का है। नगर निगम के कुछ कर्मचारी हाईमास्ट पर लहराते भगवा ध्वज को उतारने पहुंचे थे। इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में हिंदू संगठन मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने निगम कमिश्नर के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ती देख निगम कमिश्नर सीपी राय, कोतवाली टीआई आशीष धुर्वे, जिला पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में हिंदू संगठनों से जुड़े युवाओं ने भगवा ध्वज दोबारा फहराया। इस दौरान जय श्रीराम, वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारे लगाए गए।4