चिनिया में जंगली हाथियों का आतंक जारी, घर की दीवार तोड़ी, धान की फसल रौंदी, वन विभाग ने लोगों से किया अपील चिनिया। प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथी लगातार किसानों की फसल बर्बाद करने के साथ घरों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग की टीम सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ रही है। ताजा घटना में गुरुवार तड़के करीब 4:30 बजे सेमरतन टोला निवासी भिखारी अंसारी के घर की पक्की दीवार को हाथी ने सूंड से क्षतिग्रस्त कर दिया। वहीं चिनिया मुख्यालय निवासी प्रताप यादव की धान की फसल को भी हाथियों ने रौंदकर बर्बाद कर दिया। पीड़ित ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द मुआवजा देने तथा हाथियों के आतंक से स्थायी निजात दिलाने की मांग की है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही विभाग को तत्काल जानकारी दें। हाथियों के करीब न जाएं, उन्हें छेड़ने या भगाने का प्रयास न करें और सुरक्षित स्थान पर रहें।
चिनिया में जंगली हाथियों का आतंक जारी, घर की दीवार तोड़ी, धान की फसल रौंदी, वन विभाग ने लोगों से किया अपील चिनिया। प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथी लगातार किसानों की फसल बर्बाद करने के साथ घरों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग की टीम सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ रही है। ताजा घटना में गुरुवार तड़के करीब 4:30 बजे सेमरतन टोला निवासी भिखारी अंसारी के घर की पक्की दीवार को हाथी ने सूंड से क्षतिग्रस्त कर दिया। वहीं चिनिया मुख्यालय निवासी प्रताप यादव की धान की फसल को भी हाथियों ने रौंदकर बर्बाद कर दिया। पीड़ित ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द मुआवजा देने तथा हाथियों के आतंक से स्थायी निजात दिलाने की मांग की है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही विभाग को तत्काल जानकारी दें। हाथियों के करीब न जाएं, उन्हें छेड़ने या भगाने का प्रयास न करें और सुरक्षित स्थान पर रहें।
- Sharwan KumarNabinagar, Indore🛕1 hr ago
- 4 September से 12 बजे के बाद payment नहीं होगा उसके 1 घंटा बाद होगा1
- चिनिया में जंगली हाथियों का आतंक जारी, घर की दीवार तोड़ी, धान की फसल रौंदी, वन विभाग ने लोगों से किया अपील चिनिया। प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथी लगातार किसानों की फसल बर्बाद करने के साथ घरों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग की टीम सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ रही है। ताजा घटना में गुरुवार तड़के करीब 4:30 बजे सेमरतन टोला निवासी भिखारी अंसारी के घर की पक्की दीवार को हाथी ने सूंड से क्षतिग्रस्त कर दिया। वहीं चिनिया मुख्यालय निवासी प्रताप यादव की धान की फसल को भी हाथियों ने रौंदकर बर्बाद कर दिया। पीड़ित ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द मुआवजा देने तथा हाथियों के आतंक से स्थायी निजात दिलाने की मांग की है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही विभाग को तत्काल जानकारी दें। हाथियों के करीब न जाएं, उन्हें छेड़ने या भगाने का प्रयास न करें और सुरक्षित स्थान पर रहें।1
- रंका चुतरु मेन रोड से कन्हर नदी तक जर्जर सड़क, ग्रामीणों को आवागमन में हो रही है परेशानी रंका प्रखंड के अंतर्गत चुतरु पंचायत के मेन रोड से कन्हर नदी तक जाने वाली सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क की खराब स्थिति के कारण ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो गई है। सड़क पर जगह-जगह पानी जमा होने से कीचड़ हो गया है, जिससे पैदल चलने के साथ-साथ दोपहिया और अन्य वाहनों के आवागमन में भी कठिनाई हो रही है। इस संबंध में गुरुवार शाम करीब चार बजे चुतरु पंचायत के उपमुखिया जियाउद्दीन ने बताया कि यह सड़क काफी दिनों से खराब पड़ी हुई है। बारिश होने के बाद सड़क की स्थिति और बदतर हो जाती है। जगह-जगह गड्ढे और जलजमाव के कारण ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। सड़क पर फिसलन बढ़ जाने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब रहने के कारण सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को होती है। कई स्थानों पर सड़क की स्थिति ऐसी हो गई है कि वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है। बारिश के दौरान कन्हर नदी की ओर जाने वाले ग्रामीणों को कीचड़ और जलजमाव के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क का निर्माण या पक्कीकरण होने से पंचायत के लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी। ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है। इसके बावजूद लंबे समय से सड़क का पक्कीकरण नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग के अधिकारियों से सड़क की स्थिति का निरीक्षण कर जल्द पक्कीकरण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो बरसात के दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है।1
- भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा रिफार्म मंच भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा रिफार्म मंच1
- पूरे समाज या सैकड़ों लोगों को बुलाकर बड़ा मृत्यु भोज कराना शास्त्रों का नियम नहीं है। यह बाद में बनी एक सामाजिक परंपरा है। महाभारत और अन्य ग्रंथों में भी दुख के समय किसी परिवार पर आर्थिक बोझ डालकर विशाल भोज कराने को अनुचित बताया गया है। शास्त्रों, सामाजिक परंपराओं और नेपाल एवं भारत की प्रथाओं के आधार पर इस विषय की सरल और सादी जानकारी नीचे दी गई है। १. शास्त्रों में मृत्यु भोज और ब्राह्मण भोजन का नियम हिंदू शास्त्रों जैसे गरुड़ पुराण और मनुस्मृति में मृत्यु के बाद होने वाले संस्कारों के बारे में बताया गया है। देहांत के बाद दसवें से तेरहवें दिन तक श्राद्ध और पिंड दान की प्रक्रिया होती है। इस दौरान आत्मा की शांति के लिए केवल एक या कुछ सात्विक ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान देने का विधान है। पूरे समाज या सैकड़ों लोगों को बुलाकर बड़ा मृत्यु भोज कराना शास्त्रों का नियम नहीं है। यह बाद में बनी एक सामाजिक परंपरा है। महाभारत और अन्य ग्रंथों में भी दुख के समय किसी परिवार पर आर्थिक बोझ डालकर विशाल भोज कराने को अनुचित बताया गया है। २. नेपाल की परंपरा और शवयात्रा में जाने वालों को भोजन नेपाल में मृत्यु संस्कारों की व्यवस्था थोड़ी अलग और व्यावहारिक है। नेपाल में जो लोग दाह संस्कार या शमशान घाट में जाते हैं, उन्हें मलमी कहा जाता है। दाह संस्कार के बाद या तेरहवें दिन शुद्धि के बाद इन सहयोगियों को भोजन कराने का रिवाज है। इसके पीछे की सोच यह है कि जो लोग दुख की घड़ी में साथ खड़े रहे और कंधा दिया, उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाए। नेपाल में भी तेरहवें दिन पूजा संपन्न कराने वाले कुल पुरोहित या ब्राह्मण को भोजन और दान दिया जाता है। लेकिन भारत के कुछ हिस्सों की तरह सैकड़ों लोगों को बड़े स्तर पर मृत्यु भोज देने का चलन वहाँ नहीं है। ३. यह अंतर क्यों है धर्मशास्त्रों में स्थानीय परंपराओं और देशकाल का सम्मान किया गया है। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में तेरहवीं ने एक बड़े सामाजिक भोज का रूप ले लिया, जिसे अब कई लोग एक सामाजिक बोझ भी मानते हैं। इसके विपरीत नेपाल में शास्त्रों के मूल रूप को बनाए रखा गया, जहाँ केवल पुरोहित द्वारा श्राद्ध कराया जाता है और दुख में साथ देने वाले नजदीकी लोगों को सादगी से भोजन कराया जाता है। निष्कर्ष शास्त्रों में मृत्यु के बाद केवल पूजा कराने वाले ब्राह्मणों को श्राद्ध के हिस्से के रूप में भोजन कराने की बात कही गई है, न कि पूरे समाज को खाना खिलाने की। नेपाल में शवयात्रा में जाने वाले लोगों को भोजन कराना एक सामाजिक आभार और व्यावहारिक परंपरा है, जो परिवार को बेवजह के दिखावे और बड़े खर्च से बचाती है।1
- ग्राम बाजना थाना अंतर्गत खेत विवाद को लेकर मारपीट, पांच लोगों पर मामला दर्ज1
- मेरी आधी चाय पी गए अंकुर गोस्वामी , अंकुर के हाथों में मिला कप1
- विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) का बकाया था, जिसे लेकर वह मार्च 2016 में देश छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। कुल बकाया कर्ज: किंगफिशर एयरलाइंस पर कुल मूलधन और ब्याज मिलाकर लगभग 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। वसूली (Recovery): प्रवर्तन निदेशालय (ED) और बैंकों के अनुसार, माल्या की संपत्ति को बेचकर अब तक 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकवरी की जा चुकी है, जिसके आंकड़े Dainik Bhaskar और अन्य रिपोर्ट्स में भी बताए गए हैं। माल्या का पक्ष: विजय माल्या का दावा है कि उन्होंने बैंकों का मूलधन चुकाने की पेशकश की थी और उनकी संपत्तियों से बैंकों द्वारा पर्याप्त से अधिक पैसा वसूला जा चुका है। विजय माल्या के बैंक लोन और रिकवरी से जुड़े मामलों को समझने के लिए इस वीडियो को देखें:1