झारखंड के गढ़वा जिले के शाहपुर-गढ़वा रोड स्थित किन्नी गांव में मंगलवार दोपहर 4 बजे तक स्वर्गीय अनिल चौरसिया की 14वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्वर्गीय अनिल चौरसिया की आदमकद प्रतिमा के समक्ष एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। डालटनगंज के विधायक आलोक चौरसिया के पिता अनिल चौरसिया को याद करने के लिए भीषण गर्मी के बावजूद हजारों समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ मौके पर जुटी रही। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अतिरिक्त, पलामू सांसद विष्णु दयाल राम, विधायक आलोक चौरसिया, विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता, मेयर अरुणा शंकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हजारों समर्थकों ने स्वर्गीय अनिल चौरसिया की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर और माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विधायक आलोक चौरसिया ने भी नम आंखों से अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। रघुवर दास ने इस अवसर पर कहा कि स्वर्गीय अनिल चौरसिया गरीबों, दलितों और शोषितों की आवाज थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा उनके हक के लिए लड़ाई लड़ी। विधायक आलोक चौरसिया ने अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने गरीबों पर जुल्म के खिलाफ संघर्ष कर अपनी पहचान बनाई थी और वह उनके संघर्ष को पूरा करने का संकल्प लेते हैं। बताया गया कि अनिल चौरसिया ने 14 जून 2012 को गढ़वा के भंडरिया प्रखंड के बोडरी गांव में चिलचिलाती धूप में अपनी अंतिम जनसभा की थी, जिसके बाद वे बीमार पड़े और 16 जून 2012 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन को 14 साल बीत चुके हैं, और हर साल उनके पुत्र विधायक आलोक चौरसिया उन्हें याद करने के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित करते हैं और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेते हैं। कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण भी किया गया।
झारखंड के गढ़वा जिले के शाहपुर-गढ़वा रोड स्थित किन्नी गांव में मंगलवार दोपहर 4 बजे तक स्वर्गीय अनिल चौरसिया की 14वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्वर्गीय अनिल चौरसिया की आदमकद प्रतिमा के समक्ष एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। डालटनगंज के विधायक आलोक चौरसिया के पिता अनिल चौरसिया को याद करने के लिए भीषण गर्मी के बावजूद हजारों समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ मौके पर जुटी रही। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अतिरिक्त, पलामू सांसद विष्णु दयाल राम, विधायक आलोक चौरसिया, विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता, मेयर अरुणा शंकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हजारों समर्थकों ने स्वर्गीय अनिल चौरसिया की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर और माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विधायक आलोक चौरसिया ने भी नम आंखों से अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। रघुवर दास ने इस अवसर पर कहा कि स्वर्गीय अनिल चौरसिया गरीबों, दलितों और शोषितों की आवाज थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा उनके हक के लिए लड़ाई लड़ी। विधायक आलोक चौरसिया ने अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने गरीबों पर जुल्म के खिलाफ संघर्ष कर अपनी पहचान बनाई थी और वह उनके संघर्ष को पूरा करने का संकल्प लेते हैं। बताया गया कि अनिल चौरसिया ने 14 जून 2012 को गढ़वा के भंडरिया प्रखंड के बोडरी गांव में चिलचिलाती धूप में अपनी अंतिम जनसभा की थी, जिसके बाद वे बीमार पड़े और 16 जून 2012 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन को 14 साल बीत चुके हैं, और हर साल उनके पुत्र विधायक आलोक चौरसिया उन्हें याद करने के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित करते हैं और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेते हैं। कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण भी किया गया।
- गढ़वा जिले के रंका में एक जमीन विवाद ने गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस या सूचना के पुलिस की मौजूदगी में अपना घर खाली करने पर मजबूर किया गया। परिवार का दावा है कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका भी नहीं दिया गया। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और वे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। मामले की सच्चाई क्या है, यह अब जांच का विषय बन गया है।1
- गढ़वा जिले के गिजना गांव में 28 जनवरी 2026 को खुले राधा राइस मिल से निकल रहे प्रदूषित पानी, कचरा और जहरीली हवा के कारण आसपास के गांवों के लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। इस राइस मिल से निकल रहा जहरीला और दुर्गंधयुक्त पानी मानव के साथ-साथ पशु-पक्षियों के अस्तित्व के लिए भी खतरा बन गया है, जिससे ग्रामीणों में राइस मिल प्रबंधन के प्रति भारी आक्रोश है। दर्जनों ग्रामीणों ने गढ़वा पूर्वी क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य अमृतांजलि दुबे के नेतृत्व में उपायुक्त गढ़वा पशुपतिनाथ मिश्रा से मुलाकात कर राधा राइस मिल को तत्काल बंद करने की लिखित शिकायत की और उसकी मांग की। जिला परिषद सदस्य अमृतांजलि दुबे ने बताया कि राइस मिल खोलने से पहले प्रबंधन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि इससे किसानों को लाभ मिलेगा, उनके धान अच्छे मूल्य पर खरीदे जाएंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। हालांकि, प्रबंधन ने धान क्रय केंद्र को ही राइस मिल में बदल दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि राइस मिल से निकलने वाली केमिकल युक्त जहरीली गैस और प्रदूषित पानी आसपास के खेतों में फैल रहा है, जिससे हजारों एकड़ खेत बंजर हो सकते हैं। साथ ही, जहरीली हवा के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कतें आ रही हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस राइस मिल को तुरंत बंद नहीं किया, तो वे अपना अस्तित्व बचाने के लिए सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं और एक बड़ा आंदोलन कर सकते हैं।1
- गुरहा कला पंचायत में जमीन विवाद को लेकर हुई मारपीट में एक व्यक्ति घायल,मामला थाना में दर्ज रेहला थाना क्षेत्र के गुरहा कला गांव में जमीन विवाद को लेकर मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़ित अजय सिंह ने गुरहा गांव के ही कृष्ण मुरारी सिंह व सुनील सिंह के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है।1
- पुणे में काम करने गए रंका खुर्द के मजदूर की संदिग्ध मौत, परिजनों ने ठेकेदार और कंपनी पर लगाया सच छिपाने का आरोप, न्याय की मांग आज गुरुवार दश बजे दिन में मृतक के का शव घर पे आते ही मचा कोहराम इस संबंध मे ग्रामीणों ने बताया कि रंका प्रखंड के कंचनपुर पंचायत अंतर्गत रंका खुर्द गांव के एक प्रवासी मजदूर की पुणे में हुई मौत को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। मृतक की पहचान सुखाड़ी भुइयां (उम्र लगभग 40 वर्ष) के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि सुखाड़ी भुइयां की मौत कंपनी में काम करने के दौरान ऊंचाई से गिरने के कारण हुई है, जबकि कंपनी प्रबंधन इस घटना को शराब के नशे में बाहर हुई मौत बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। मृतक के परिजनों ने बताया कि सुखाड़ी भुइयां अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए गांव से बाहर महाराष्ट्र के पुणे शहर में मजदूरी करने गए थे। वहां एक कंपनी में कार्यरत रहने के दौरान अचानक उनकी मौत की सूचना परिवार को मिली। सूचना मिलने के बाद परिजनों ने कंपनी से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि सुखाड़ी भुइयां शराब के नशे में कंपनी परिसर के बाहर कहीं घायल हुए थे, जिसके कारण उनकी मौत हुई। हालांकि, मृतक के बेटे-बेटियों और अन्य परिजनों ने कंपनी के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की मौत केवल शराब पीकर गिरने से हुई होती, तो उसके हाथ-पैर नहीं टूटते और सिर पर इतनी गंभीर चोटें नहीं होतीं। परिजनों का आरोप है कि सुखाड़ी भुइयां की मौत कार्यस्थल पर काम करने के दौरान गिरने से हुई है, लेकिन कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए वास्तविक तथ्यों को छिपा रही है। परिजनों ने स्थानीय ठेकेदार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वही ठेकेदार सुखाड़ी भुइयां को काम दिलाने के लिए पुणे लेकर गया था। अब वह भी कंपनी के साथ मिलकर मौत के वास्तविक कारणों को छिपाने और मामले की लीपापोती करने में लगा हुआ है। परिजनों का आरोप है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। गांव के कई ग्रामीणों ने भी परिजनों के आरोपों का समर्थन किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सुखाड़ी भुइयां शराब के कारण नहीं बल्कि ऊंचाई से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनका तर्क है कि शरीर पर मिले चोटों के निशान, हाथ-पैर की क्षति और सिर की गंभीर चोटें किसी साधारण घटना की ओर इशारा नहीं करतीं। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की1
- बेसरी सड़क हादसे में घायल बुजुर्ग ने तोड़ा दम, गुरुवार को नम आंखों से हुआ अंतिम संस्कार हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनिया थाना क्षेत्र के बेसरी गांव में बुधवार को हुए भीषण सड़क हादसे में घायल 66 वर्षीय बुटन भुइयां की इलाज के दौरान रांका सामुदायिक केंद्र में मौत हो गई। बताते चले की रंका थाना क्षेत्र के बांदु गांव निवासी बुटन भुइयां और भरत भुइयां मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी बेता रोड स्थित ताहिर अंसारी के घर के समीप उनकी बाइक की आमने-सामने हाइड्रा से जोरदार टक्कर हो गई थी। हादसे के बाद दोनों घायलों को इलाज के लिए रंका सामुदायिक अस्पताल पहुंचाया गया था। जहां गंभीर रूप से घायल बुटन भुइयां की इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं भरत भुइयां अब भी गंभीर हालत में इलाजरत हैं। वही आज गढ़वा सदर अस्पताल के शोक का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सोपा गया फिर मृतक बुटन भुइयां का अंतिम संस्कार आज दोपहर दोपहर बांदु गांव के समीप स्थित श्मशान घाट मुक्तिधाम में किया गया। अंतिम यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। गांव में शोक का माहौल बना हुआ है तथा परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उधर, घटना की सूचना पर पहुंची चिनिया पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त हाइड्रा को जब्त कर लिया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।1
- पंडवा। पलामू। उत्क्रमित मध्य बिद्यालय गाड़िखास के दीवाल पर काले धब्बे उचित रख रखाव मे कमी का संकेत। पंडवा। पलामू। उत्क्रमित मध्य बिद्यालय गाड़िखास के दीवाल पर काले धब्बे उचित रख रखाव मे कमी का संकेत।1
- पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत हरभोंगा गांव के निवासी पवन कुमार यादव ने अपने मुहल्ले की एक गली को 'सबसे कचरा गली' बताया है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग को एक शिकायत वीडियो भेजा है। पवन कुमार यादव ने इस वीडियो के माध्यम से इस गली में पक्की सड़क के निर्माण की मांग की है, ताकि स्थानीय लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके।1
- झारखंड के गढ़वा जिले के शाहपुर-गढ़वा रोड स्थित किन्नी गांव में मंगलवार दोपहर 4 बजे तक स्वर्गीय अनिल चौरसिया की 14वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्वर्गीय अनिल चौरसिया की आदमकद प्रतिमा के समक्ष एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। डालटनगंज के विधायक आलोक चौरसिया के पिता अनिल चौरसिया को याद करने के लिए भीषण गर्मी के बावजूद हजारों समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ मौके पर जुटी रही। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अतिरिक्त, पलामू सांसद विष्णु दयाल राम, विधायक आलोक चौरसिया, विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता, मेयर अरुणा शंकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हजारों समर्थकों ने स्वर्गीय अनिल चौरसिया की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर और माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विधायक आलोक चौरसिया ने भी नम आंखों से अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। रघुवर दास ने इस अवसर पर कहा कि स्वर्गीय अनिल चौरसिया गरीबों, दलितों और शोषितों की आवाज थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा उनके हक के लिए लड़ाई लड़ी। विधायक आलोक चौरसिया ने अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने गरीबों पर जुल्म के खिलाफ संघर्ष कर अपनी पहचान बनाई थी और वह उनके संघर्ष को पूरा करने का संकल्प लेते हैं। बताया गया कि अनिल चौरसिया ने 14 जून 2012 को गढ़वा के भंडरिया प्रखंड के बोडरी गांव में चिलचिलाती धूप में अपनी अंतिम जनसभा की थी, जिसके बाद वे बीमार पड़े और 16 जून 2012 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन को 14 साल बीत चुके हैं, और हर साल उनके पुत्र विधायक आलोक चौरसिया उन्हें याद करने के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित करते हैं और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेते हैं। कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण भी किया गया।1