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सुल्तानपुर में जनता की समस्याओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर बढ़ती लूटमार, चोरी और छिनैती की घटनाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सच बोलना या गरीबों की मदद करना अब अपराध की श्रेणी में आता है। आरोप है कि अधिकारी किसी की फरियाद सुनने को तैयार नहीं हैं, जिससे आमजन बेहाल और परेशान है। व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह भी कहा गया है कि वर्तमान में सरकार न्यायपालिका की भूमिका निभा रही है, जबकि न्यायपालिका पूरी तरह से मूक बनी हुई है। पुलिस तंत्र पर भी मिलीभगत का आरोप लगा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि पुलिस अपराधियों के साथ मिलकर मलाई खा रही है और सरकार अपनी मनमर्जी से काम कर रही है।
Anil Kumar Pathak
सुल्तानपुर में जनता की समस्याओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर बढ़ती लूटमार, चोरी और छिनैती की घटनाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सच बोलना या गरीबों की मदद करना अब अपराध की श्रेणी में आता है। आरोप है कि अधिकारी किसी की फरियाद सुनने को तैयार नहीं हैं, जिससे आमजन बेहाल और परेशान है। व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह भी कहा गया है कि वर्तमान में सरकार न्यायपालिका की भूमिका निभा रही है, जबकि न्यायपालिका पूरी तरह से मूक बनी हुई है। पुलिस तंत्र पर भी मिलीभगत का आरोप लगा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि पुलिस अपराधियों के साथ मिलकर मलाई खा रही है और सरकार अपनी मनमर्जी से काम कर रही है।
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- गुरुवार को हुई हल्की बारिश ने सुल्तानपुर के लंभुआ विकास खंड परिसर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कुछ ही देर की वर्षा के बाद पूरा ब्लॉक परिसर पानी से लबालब भर गया और तालाब में तब्दील हो गया। कार्यालय आने वाले कर्मचारियों, फरियादियों और आम नागरिकों को जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ा, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा और सरकारी कार्यालयों तक पहुँचना भी मुश्किल हो गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने और नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण हर साल बरसात में ऐसी ही समस्या उत्पन्न होती है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हल्की बारिश में यह स्थिति है, तो लगातार या मूसलाधार बारिश होने पर हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत नालियों की सफाई कराने और ब्लॉक परिसर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। हल्की बारिश में ही विकास खंड परिसर के जलमग्न होने से लोगों में गहरी नाराजगी है और वे प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत झांसी में एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने बड़ागांव चौकी इंचार्ज ओंकार सिंह और उनके साथ एक सिपाही को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि एक व्यापारी के बेटों के खिलाफ दर्ज मारपीट के मामले से उनका नाम हटाने के एवज में ओंकार सिंह ने 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह रकम तीन किश्तों में तय की गई थी, जिसमें से 50 हजार रुपये की राशि पहले ही ली जा चुकी थी। अंतिम किश्त के 10 हजार रुपये लेते समय टीम ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एंटी करप्शन टीम मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस वसूली में अन्य कोई पुलिसकर्मी भी शामिल था या नहीं। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई की गई है।2
- सुल्तानपुर जिले के प्रतापपुर कमैचा विकासखंड अंतर्गत धौरहरा ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गांव में नालियां चोक पड़ी हैं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी नियमित रूप से गांव नहीं पहुंचते हैं, जिससे मानसून के दौरान संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस अव्यवस्था के संबंध में जब पत्रकारों ने तैनात सफाईकर्मी राकेश वर्मा से सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर असहयोगपूर्ण व्यवहार करते हुए कहा, "इस संबंध में मुझसे बात मत करो।" सफाईकर्मी के इस रवैये ने ग्रामीणों के असंतोष को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल धौरहरा ही नहीं, बल्कि ब्लॉक की कई पंचायतों में सफाईकर्मी गांव आने के बजाय ब्लॉक एवं अन्य कार्यालयों के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इस पूरे मामले की जानकारी जब खंड विकास अधिकारी निशा तिवारी को दी गई, तो उन्होंने कथित तौर पर "उसे बात करती हूं" कहकर मामले को टाल दिया, जिससे ग्रामीणों में और अधिक रोष है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। अब यह मामला जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के संज्ञान में पहुंच चुका है, जिसके बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है ताकि गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके।4
- अमेठी में देर रात से शुरू हुई बारिश का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा, जिससे भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है। इस वर्षा के चलते जिले का तापमान गिरकर करीब 28 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे मौसम सुहावना बना हुआ है। लगातार हो रही इस बारिश के कारण नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन पर असर पड़ा है, जहां लोग इस मौसम का आनंद लेते दिखाई दिए। कृषि के लिहाज से यह बारिश अत्यंत लाभकारी साबित हुई है, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने से किसान अब धान की रोपाई और बेड़न के कार्यों में युद्धस्तर पर जुट गए हैं। किसानों का मानना है कि समय पर हुई यह वर्षा खरीफ की फसलों के लिए वरदान है और इससे सिंचाई पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र के अनुसार, सक्रिय मानसूनी प्रणाली और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण यह बारिश हो रही है। उन्होंने अगले 24 घंटों के दौरान अमेठी सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ वर्षा की संभावना जताई है। साथ ही, किसानों को जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने की सलाह भी दी गई है। दूसरी ओर, लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। मिट्टी की दीवारों और जर्जर मकानों में दरारें पड़ने लगी हैं, जिससे ग्रामीणों में अपने घरों के गिरने की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की हिदायत दी है। विशेष रूप से कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने को कहा गया है, साथ ही किसानों से भी मौसम के अनुरूप कृषि कार्यों में सावधानी बरतने का आग्रह किया गया है।1
- सुल्तानपुर जिले के लम्भुआ में वकीलों ने उपजिलाधिकारी प्रीति जैन पर अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामसागर पाठक ने बताया कि उपजिलाधिकारी ने अधिवक्ता भएन्द्र जीत यादव के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें कोर्ट से बाहर निकल जाने के लिए कहा। इस घटना से आक्रोशित वकीलों ने 'उपजिलाधिकारी लम्भुआ मुर्दाबाद' के नारे लगाए और प्रदर्शन किया। अधिवक्ता सुषमा पाल और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उपजिलाधिकारी पर उचित कार्यवाही नहीं की जाती, तब तक सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे। बार एसोसिएशन के सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी के न्यायालय में आदेश पारित होने के बावजूद महीनों तक कोई कार्यवाही नहीं होती है, जिससे आम जनता को बेवजह परेशान होना पड़ता है। वकीलों ने इसे घोर लापरवाही बताते हुए न्याय की मांग की है।1
- सिविल अस्पताल बड़वाह में 9 जुलाई 2026 को सीबीएमओ डॉ. राजेंद्र मिमरोट की अध्यक्षता में एक बैठक संपन्न हुई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में सेक्टर मेडिकल ऑफिसर, सेक्टर सुपरवाइजर, सीएचओ और एएनएम शामिल हुए। बैठक के दौरान सीबीएमओ ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशिक्षण सत्र के दौरान अरविंद वर्मा, वंदना सोलंकी, जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण अधिकारी और प्रमोद जी जोशी ने प्रतिभागियों का प्री-टेस्ट लिया, जिसके बाद एचएमआईएस (HMIS) पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया और फिर पोस्ट-टेस्ट लिया गया। बीपीएम दिनेश यादव ने दस्तक अभियान पर जानकारी दी। बैठक में गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, एएनसी जांच, हाई रिस्क एएनसी, टीकाकरण, परिवार कल्याण कार्यक्रम, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, एनसीडी और सिकल सेल जांच जैसे महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई। इस अवसर पर जनसंख्या स्तरीकरण पखवाड़ा 11 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक मनाए जाने की घोषणा की गई, जिसमें परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी साधनों के बारे में जानकारी दी जाएगी। बैठक में डॉ. अनिल घोड़ेला, डॉ. आनंद बघेल, समस्त मेडिकल ऑफिसर, बीईई जगदीश खेडेकर, बीसीएम प्रीती पाटील, मलेरिया निरीक्षक उस्मान पठान, और सेक्टर सुपरवाइजर अंतर सिंह चौहान, अखिलेश चतुर्वेदी, अनिल श्रीमाली व महेश चौहान सहित कई सीएचओ और एएनएम उपस्थित रहे।1
- सुल्तानपुर जिले के गोसाईगंज थाना क्षेत्र में दिनांक 29-6-26 को वादी बादल वर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के आधार पर दी गई तहरीर पर पुलिस ने जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान यह सामने आया कि मृतक आज़ाद वर्मा अपने तीन साथियों—अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा उर्फ कल्लू (लगभग 21 वर्ष), अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा (लगभग 23 वर्ष), और अमन वर्मा पुत्र दिलीप वर्मा—के साथ अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा की काली स्कॉर्पियो में एक नई अवैध पिस्टल लेकर आए थे। पिस्टल चलाने के प्रयास में अभिषेक पुत्र विजय बहादुर द्वारा गलती से हुई फायरिंग में एक गोली गाड़ी की सीट से आर-पार होकर आज़ाद वर्मा की कमर में लग गई, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद अमन वर्मा का बाकी तीनों से विवाद हो गया, जिसके बाद उसे गाड़ी से उतार दिया गया। खून तेज़ी से बहता देख, तीनों अभियुक्त आज़ाद को स्कॉर्पियो से सुल्तानपुर ले गए और वहां पुलिस को सूचना देने के बाद लखनऊ रवाना हो गए। लखनऊ में उन्होंने पूर्व प्रचलित क्रॉस अभियोगों से संबंधित अभियुक्त/वादी और गवाहों का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिससे मामले को गुमराह करने का प्रयास किया गया। विश्वसनीय और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर की गई पड़ताल में पता चला कि घटना के बाद तीनों आरोपी गांव से फरार हो गए थे। दिनांक 8-9, 7-26 की रात को मिली विश्वसनीय सूचना पर थाना पीजीआई, लखनऊ के वृंदावन योजना सेक्टर 16 से अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा और अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उनकी निशानदेही पर घटना से संबंधित अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा की काली स्कॉर्पियो को बाईपास रेलवे ओवरब्रिज पकरौली से बरामद किया गया। फील्ड यूनिट की तलाशी में वाहन से घटना में प्रयुक्त हथियार, खोखा कारतूस और खून के निशान मिले हैं, साथ ही ड्राइविंग सीट के बगल वाली सीट पर गोली के प्रवेश और निकास के छेद भी मौजूद हैं। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है, और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई प्रचलित है।1
- सुल्तानपुर जीआरपी की कार्यशैली इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था से ज़्यादा चर्चाएँ वसूली, दबंगई और अनुशासनहीनता की हो रही हैं। आरोप है कि पश्चिम से आए कुछ सिपाहियों ने जीआरपी की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सब बिना विभागीय संरक्षण के संभव है। चर्चा है कि जीआरपी प्रभारी भोलाशंकर का इन पर पूरा संरक्षण प्राप्त है। यह संरक्षण स्टेशन के बाहर टेम्पो स्टैंड, वेंडरों और कथित टिकट दलालों से होने वाली कथित वसूली के खेल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान सिपाही योगेश कुमार यादव के हाथों में है, जो बिना वर्दी के भी दो वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ ऐसे घूमता है, मानो उसे व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए सरकारी एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया गया हो। यदि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे दृश्य वास्तविक हैं, तो तस्वीर और भी चिंताजनक है, जहाँ एक व्यक्ति को जानवरों की तरह बेरहमी से पीटा जा रहा है। ऐसे दृश्य न केवल पुलिस की छवि पर दाग लगाते हैं, बल्कि आम नागरिक के मन में कानून के प्रति भरोसा भी कमजोर करते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में दहशत का माहौल है और लोग शिकायत करने से बचते हैं। इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर भी अनुशासनहीनता देखने को मिली है, जहाँ सिपाही नितिन कुमार मलिक का आचरण सलामी समारोह के दौरान वर्दी की गरिमा और तिरंगे के सम्मान के अनुरूप नहीं था। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुल्तानपुर जीआरपी में कानून का राज है या कुछ लोगों की मनमानी का। यदि लगाए जा रहे आरोपों और सीसीटीवी फुटेज में दम है, तो संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए, क्योंकि वर्दी सम्मान का प्रतीक है, भय और बदनामी का नहीं।1