सुल्तानपुर जिले के प्रतापपुर कमैचा विकासखंड अंतर्गत धौरहरा ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गांव में नालियां चोक पड़ी हैं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी नियमित रूप से गांव नहीं पहुंचते हैं, जिससे मानसून के दौरान संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस अव्यवस्था के संबंध में जब पत्रकारों ने तैनात सफाईकर्मी राकेश वर्मा से सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर असहयोगपूर्ण व्यवहार करते हुए कहा, "इस संबंध में मुझसे बात मत करो।" सफाईकर्मी के इस रवैये ने ग्रामीणों के असंतोष को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल धौरहरा ही नहीं, बल्कि ब्लॉक की कई पंचायतों में सफाईकर्मी गांव आने के बजाय ब्लॉक एवं अन्य कार्यालयों के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इस पूरे मामले की जानकारी जब खंड विकास अधिकारी निशा तिवारी को दी गई, तो उन्होंने कथित तौर पर "उसे बात करती हूं" कहकर मामले को टाल दिया, जिससे ग्रामीणों में और अधिक रोष है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। अब यह मामला जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के संज्ञान में पहुंच चुका है, जिसके बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है ताकि गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके।
सुल्तानपुर जिले के प्रतापपुर कमैचा विकासखंड अंतर्गत धौरहरा ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गांव में नालियां चोक पड़ी हैं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी नियमित रूप से गांव नहीं पहुंचते हैं, जिससे
मानसून के दौरान संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस अव्यवस्था के संबंध में जब पत्रकारों ने तैनात सफाईकर्मी राकेश वर्मा से सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर असहयोगपूर्ण व्यवहार करते हुए कहा, "इस संबंध में मुझसे बात मत करो।" सफाईकर्मी के इस रवैये ने ग्रामीणों के असंतोष को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल धौरहरा
ही नहीं, बल्कि ब्लॉक की कई पंचायतों में सफाईकर्मी गांव आने के बजाय ब्लॉक एवं अन्य कार्यालयों के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इस पूरे मामले की जानकारी जब खंड विकास अधिकारी निशा तिवारी को दी गई, तो उन्होंने कथित तौर पर "उसे बात करती हूं" कहकर मामले को टाल दिया, जिससे ग्रामीणों में और अधिक रोष है। शिकायतकर्ताओं का कहना है
कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। अब यह मामला जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के संज्ञान में पहुंच चुका है, जिसके बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है ताकि गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके।
- पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देब और प्रकाश चिक बड़ाईक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन तीनों नेताओं ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की उपस्थिति में पार्टी का दामन थामा। भाजपा ने इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल में अपने संगठन के विस्तार और अपनी विचारधारा के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बताया है। भाजपा नेताओं का मानना है कि इन नए सदस्यों के अनुभव से आगामी चुनावों में पार्टी को मजबूती मिलेगी। दूसरी ओर, टीएमसी के लिए इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है और राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस बदलाव से राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।1
- प्रतापगढ़ के पट्टी कोतवाली क्षेत्र में स्कूल गेट के बाहर युवक को धमकाने, गाली-गलौज करने और मोबाइल छीनने का प्रयास करने के मामले में करीब एक महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने रामकोला निवासी सुशील सिंह, उनके भाई और 20 अज्ञात लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है। यह मुकदमा पट्टी खास निवासी स्वतंत्र कुमार की तहरीर पर दर्ज किया गया है। पीड़ित स्वतंत्र कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि 3 जून और 6 जून 2026 को सुबह करीब 10 बजे सुशील सिंह अपने भाई और लगभग 20 अन्य लोगों के साथ स्कूल के दक्षिणी गेट पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां इन लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, पीड़ित पर रिकॉर्डिंग बंद करने का दबाव बनाया और उसे जान से मारने की धमकी दी। साथ ही, पीड़ित का मोबाइल दो बार छीनने की कोशिश भी की गई। स्वतंत्र कुमार के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उन्होंने 4 जून और 10 जून को प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने के उपरांत पट्टी पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को इन सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। इस घटना का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।1
- सुल्तानपुर में जनता की समस्याओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर बढ़ती लूटमार, चोरी और छिनैती की घटनाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सच बोलना या गरीबों की मदद करना अब अपराध की श्रेणी में आता है। आरोप है कि अधिकारी किसी की फरियाद सुनने को तैयार नहीं हैं, जिससे आमजन बेहाल और परेशान है। व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह भी कहा गया है कि वर्तमान में सरकार न्यायपालिका की भूमिका निभा रही है, जबकि न्यायपालिका पूरी तरह से मूक बनी हुई है। पुलिस तंत्र पर भी मिलीभगत का आरोप लगा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि पुलिस अपराधियों के साथ मिलकर मलाई खा रही है और सरकार अपनी मनमर्जी से काम कर रही है।1
- Jai jai jai jai jai jai jai jai jai jai jai jai jai jai shree ambe maa1
- प्रतापगढ़ जिले की पट्टी तहसील के अधिवक्ता रोशन सिंह को बृहस्पतिवार को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के संबंध में पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को पट्टी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों ने रविवार तक का अल्टीमेटम दिया है और तब तक सांकेतिक हड़ताल पर रहते हुए न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्रदर्शन के दौरान बार महामंत्री विकास श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव शंकर सिंह, उपाध्यक्ष मनीष सिंह, कोषाध्यक्ष विपिन सिंह, सह मंत्री विकास तिवारी समेत रवि सिंह, इन्द्र प्रसाद तिवारी, नफीस, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, प्रदीप पाठक, योगेश कुमार, विकास कुमार तिवारी और चन्दन सिंह सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।1
- बलिया में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान बिजली गुल होने का मामला सामने आया है। कार्यक्रम के बीच में अचानक बत्ती गुल होने से अंधेरा छा गया, जिसके बाद मंत्री को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में अपना संबोधन जारी रखना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें मंत्री अंधेरे में टॉर्च की रोशनी के सहारे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते नजर आ रहे हैं।1
- सुल्तानपुर जीआरपी की कार्यशैली इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था से ज़्यादा चर्चाएँ वसूली, दबंगई और अनुशासनहीनता की हो रही हैं। आरोप है कि पश्चिम से आए कुछ सिपाहियों ने जीआरपी की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सब बिना विभागीय संरक्षण के संभव है। चर्चा है कि जीआरपी प्रभारी भोलाशंकर का इन पर पूरा संरक्षण प्राप्त है। यह संरक्षण स्टेशन के बाहर टेम्पो स्टैंड, वेंडरों और कथित टिकट दलालों से होने वाली कथित वसूली के खेल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान सिपाही योगेश कुमार यादव के हाथों में है, जो बिना वर्दी के भी दो वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ ऐसे घूमता है, मानो उसे व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए सरकारी एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया गया हो। यदि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे दृश्य वास्तविक हैं, तो तस्वीर और भी चिंताजनक है, जहाँ एक व्यक्ति को जानवरों की तरह बेरहमी से पीटा जा रहा है। ऐसे दृश्य न केवल पुलिस की छवि पर दाग लगाते हैं, बल्कि आम नागरिक के मन में कानून के प्रति भरोसा भी कमजोर करते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में दहशत का माहौल है और लोग शिकायत करने से बचते हैं। इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर भी अनुशासनहीनता देखने को मिली है, जहाँ सिपाही नितिन कुमार मलिक का आचरण सलामी समारोह के दौरान वर्दी की गरिमा और तिरंगे के सम्मान के अनुरूप नहीं था। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुल्तानपुर जीआरपी में कानून का राज है या कुछ लोगों की मनमानी का। यदि लगाए जा रहे आरोपों और सीसीटीवी फुटेज में दम है, तो संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए, क्योंकि वर्दी सम्मान का प्रतीक है, भय और बदनामी का नहीं।1