प्रतापगढ़ के पट्टी कोतवाली क्षेत्र में स्कूल गेट के बाहर युवक को धमकाने, गाली-गलौज करने और मोबाइल छीनने का प्रयास करने के मामले में करीब एक महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने रामकोला निवासी सुशील सिंह, उनके भाई और 20 अज्ञात लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है। यह मुकदमा पट्टी खास निवासी स्वतंत्र कुमार की तहरीर पर दर्ज किया गया है। पीड़ित स्वतंत्र कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि 3 जून और 6 जून 2026 को सुबह करीब 10 बजे सुशील सिंह अपने भाई और लगभग 20 अन्य लोगों के साथ स्कूल के दक्षिणी गेट पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां इन लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, पीड़ित पर रिकॉर्डिंग बंद करने का दबाव बनाया और उसे जान से मारने की धमकी दी। साथ ही, पीड़ित का मोबाइल दो बार छीनने की कोशिश भी की गई। स्वतंत्र कुमार के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उन्होंने 4 जून और 10 जून को प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने के उपरांत पट्टी पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को इन सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। इस घटना का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
प्रतापगढ़ के पट्टी कोतवाली क्षेत्र में स्कूल गेट के बाहर युवक को धमकाने, गाली-गलौज करने और मोबाइल छीनने का प्रयास करने के मामले में करीब एक महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने रामकोला निवासी सुशील सिंह, उनके भाई और 20 अज्ञात लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है। यह मुकदमा पट्टी खास निवासी स्वतंत्र कुमार की तहरीर पर दर्ज किया गया है। पीड़ित स्वतंत्र कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि 3 जून और 6 जून 2026 को सुबह करीब 10 बजे सुशील सिंह अपने भाई और लगभग 20 अन्य लोगों के साथ स्कूल के दक्षिणी गेट पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां इन लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, पीड़ित पर रिकॉर्डिंग बंद करने का दबाव बनाया और उसे जान से मारने की धमकी दी। साथ ही, पीड़ित का मोबाइल दो बार छीनने की कोशिश भी की गई। स्वतंत्र कुमार के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उन्होंने 4 जून और 10 जून को प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने के उपरांत पट्टी पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को इन सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। इस घटना का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
- प्रतापगढ़ के पट्टी कोतवाली क्षेत्र में स्कूल गेट के बाहर युवक को धमकाने, गाली-गलौज करने और मोबाइल छीनने का प्रयास करने के मामले में करीब एक महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने रामकोला निवासी सुशील सिंह, उनके भाई और 20 अज्ञात लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है। यह मुकदमा पट्टी खास निवासी स्वतंत्र कुमार की तहरीर पर दर्ज किया गया है। पीड़ित स्वतंत्र कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि 3 जून और 6 जून 2026 को सुबह करीब 10 बजे सुशील सिंह अपने भाई और लगभग 20 अन्य लोगों के साथ स्कूल के दक्षिणी गेट पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां इन लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, पीड़ित पर रिकॉर्डिंग बंद करने का दबाव बनाया और उसे जान से मारने की धमकी दी। साथ ही, पीड़ित का मोबाइल दो बार छीनने की कोशिश भी की गई। स्वतंत्र कुमार के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उन्होंने 4 जून और 10 जून को प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने के उपरांत पट्टी पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को इन सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। इस घटना का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।1
- प्रतापगढ़ जिले की पट्टी तहसील के अधिवक्ता रोशन सिंह को बृहस्पतिवार को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के संबंध में पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को पट्टी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों ने रविवार तक का अल्टीमेटम दिया है और तब तक सांकेतिक हड़ताल पर रहते हुए न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्रदर्शन के दौरान बार महामंत्री विकास श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव शंकर सिंह, उपाध्यक्ष मनीष सिंह, कोषाध्यक्ष विपिन सिंह, सह मंत्री विकास तिवारी समेत रवि सिंह, इन्द्र प्रसाद तिवारी, नफीस, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, प्रदीप पाठक, योगेश कुमार, विकास कुमार तिवारी और चन्दन सिंह सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।1
- बलिया में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान बिजली गुल होने का मामला सामने आया है। कार्यक्रम के बीच में अचानक बत्ती गुल होने से अंधेरा छा गया, जिसके बाद मंत्री को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में अपना संबोधन जारी रखना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें मंत्री अंधेरे में टॉर्च की रोशनी के सहारे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते नजर आ रहे हैं।1
- प्रतापगढ़ के पट्टी स्थित कंधई थाना क्षेत्र के कोनी गांव में जमीनी विवाद के चलते 14 वर्षीय किशोर प्रवेश पटेल की हत्या के बाद आक्रोशित परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। परिजनों की मांग है कि जिलाधिकारी को मौके पर बुलाया जाए। पृथ्वी पाल पटेल के अनुसार, 8 जुलाई को हुए जानलेवा हमले में उनके पुत्र पर कुल्हाड़ी और रॉड से वार किया गया था, जिसके बाद प्रयागराज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस हमले में पीड़ित की पत्नी प्रमिला देवी और पुत्री प्रतिमा पटेल भी घायल हुई हैं, जिनका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है और वे भविष्य में आरोपियों से जान के खतरे को लेकर डरे हुए हैं। परिवार ने अपनी मुख्य मांगों में तत्काल शस्त्र लाइसेंस जारी करने, 24 घंटे के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की मांग रखी है। परिवार प्रशासन से मामले में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है।1
- सुल्तानपुर जिले के प्रतापपुर कमैचा विकासखंड अंतर्गत धौरहरा ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गांव में नालियां चोक पड़ी हैं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी नियमित रूप से गांव नहीं पहुंचते हैं, जिससे मानसून के दौरान संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस अव्यवस्था के संबंध में जब पत्रकारों ने तैनात सफाईकर्मी राकेश वर्मा से सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर असहयोगपूर्ण व्यवहार करते हुए कहा, "इस संबंध में मुझसे बात मत करो।" सफाईकर्मी के इस रवैये ने ग्रामीणों के असंतोष को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल धौरहरा ही नहीं, बल्कि ब्लॉक की कई पंचायतों में सफाईकर्मी गांव आने के बजाय ब्लॉक एवं अन्य कार्यालयों के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इस पूरे मामले की जानकारी जब खंड विकास अधिकारी निशा तिवारी को दी गई, तो उन्होंने कथित तौर पर "उसे बात करती हूं" कहकर मामले को टाल दिया, जिससे ग्रामीणों में और अधिक रोष है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। अब यह मामला जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के संज्ञान में पहुंच चुका है, जिसके बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है ताकि गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके।4
- जौनपुर के मड़ियाहूं थाने में तैनात उप निरीक्षक रामाश्रय प्रजापति को भ्रष्टाचार निवारण संगठन की वाराणसी इकाई ने एक बड़ी कार्रवाई के दौरान रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। उप निरीक्षक ने यह रिश्वत एक मुकदमे में नाम बढ़ाने की एवज में मांगी थी। आरोपी दरोगा को कार्यालय के पास से रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।1
- सुल्तानपुर जिले के लम्भुआ में वकीलों ने उपजिलाधिकारी प्रीति जैन पर अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामसागर पाठक ने बताया कि उपजिलाधिकारी ने अधिवक्ता भएन्द्र जीत यादव के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें कोर्ट से बाहर निकल जाने के लिए कहा। इस घटना से आक्रोशित वकीलों ने 'उपजिलाधिकारी लम्भुआ मुर्दाबाद' के नारे लगाए और प्रदर्शन किया। अधिवक्ता सुषमा पाल और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उपजिलाधिकारी पर उचित कार्यवाही नहीं की जाती, तब तक सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे। बार एसोसिएशन के सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी के न्यायालय में आदेश पारित होने के बावजूद महीनों तक कोई कार्यवाही नहीं होती है, जिससे आम जनता को बेवजह परेशान होना पड़ता है। वकीलों ने इसे घोर लापरवाही बताते हुए न्याय की मांग की है।1
- प्रतापगढ़ के विकास खंड मांधाता अंतर्गत भगवतगंज बाजार से सराय प्रानमती होते हुए नीमा सराय जाने वाले मुख्य संपर्क मार्ग को कथित रूप से कुछ दबंगों द्वारा ट्रैक्टर चलाकर क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस सार्वजनिक उपयोग के मार्ग को ट्रैक्टर से जोतकर खेत की तरह बना दिया गया है, जिससे सड़क की स्थिति खराब हो गई और लोगों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि यह मार्ग कई गांवों को जोड़ता है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। ग्रामीणों ने इसे केवल रास्ते को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि सरकारी भूमि और आम जनता के अधिकारों को चुनौती देने जैसा बताया है, साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि आखिर किसके दम पर सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल मौके का निरीक्षण करने और सार्वजनिक मार्ग को उसकी पूर्व स्थिति में बहाल करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है। उनकी प्रमुख मांगों में सार्वजनिक मार्ग की तत्काल मरम्मत, राजस्व एवं पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त निरीक्षण, जानबूझकर मार्ग क्षतिग्रस्त करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई और भविष्य में अतिक्रमण तथा क्षति रोकने के लिए नियमित निगरानी की व्यवस्था शामिल है। इस पूरे प्रकरण के बाद ग्रामीणों में रोष है और यह सवाल उठ रहा है कि क्या सार्वजनिक रास्तों पर भी अब दबंगों का कब्जा चलेगा या प्रशासन ग्रामीणों के आवागमन के अधिकार की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाएगा।1