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अम्बेडकरनगर- जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला नें कहा जिले में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं है! जिले में खपत के अनुपात में ढ़ाई गुना स्टाक उपलब्ध है!!
Dushyant Kumar Journalist
अम्बेडकरनगर- जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला नें कहा जिले में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं है! जिले में खपत के अनुपात में ढ़ाई गुना स्टाक उपलब्ध है!!
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- आखिर क्यों उठा पुलिस पर सांवरिया निशान, पीड़ित प्रार्थना पत्र लेकर दर दर भटक कर हो रहा परेशान1
- Post by APDP NEWS1
- *गैस को छोड़कर अब लोग पेट्रोल टंकियो पर पहुंच रहे डिब्बा ड्रम लेकर भरवाने तेल* *अंबेडकर नगर* जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के इलफातगंज रोड पर चंदयनी के पास स्थित शेखर पेट्रोल पंप पर डीजल पेट्रोल के लिए लगी लंबी लाइन , ड्रम डिब्बा ट्रैक्टर ट्राली में भरकर पहुंच रहे लोग, पेट्रोल टंकी चालक खुले आम दे रहा अधिकारियों को चुनौती। सख्त आदेश के बाद भी नहीं पड़ रहा कोई प्रभाव। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने अफवाह फैलाने व इस तरीके से बड़े-बड़े ड्रम व डिब्बों में तेल देने पर टंकी चालकों पर दिए थे कार्रवाई करने का निर्देश फिर भी नहीं मान रहे पेट्रोल टंकी चालक। अगर इसी तरीके से चलता रहा तो जल्द ही जानता में गलत अफवाह फैलने में देरी नहीं लगेगी , और लोग पेट्रोल टंकियो पर खड़े नजर आएंगे। *ब्यूरो रिपोर्ट वैभव सिंह* ✍️2
- अंबेडकर नगर के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर कल देर शाम से लंबी लंबी लाइनें देखी जा रही है । लोग अपने बाइक से लेकर बड़े बड़े डिब्बे में पेट्रोल और डीजल स्टोर कर रहे हैं । यह दृश्य देखकर अंबेडकर नगर के जिला अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में फ्यूल उपलब्ध है । अफवाह फैलाने वालों को जेल होगी । किसानों के लिए मड़ाई और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में डीजल मौजूद है । कोई जमाखोरी किया तो बक्शा नहीं जाएगा1
- अजीत मिश्रा (खोजी) 🚨बस्ती में लोकतंत्र लहूलुहान: जब 'सच' दिखाने पर गुंडों ने पत्रकार का गला दबाया🚨 ⚡"बस्ती में 'कलम' पर भारी 'कट्टा-तंत्र': पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी की कवरेज कर रहे पत्रकार पर जानलेवा हमला!" ⚡"खौफनाक: बस्ती में पत्रकार वेदिक द्विवेदी पर हमला, पंप चालक के गुंडे तरुण सिंह ने सरेआम की मारपीट।" ⚡"साहब! ये कैसी 'सामान्य स्थिति' है? जहां पत्रकार को सच बोलने पर मिलती है गुंडों की मार!" बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती। उत्तर प्रदेश में सुशासन के दावों के बीच बस्ती मंडल से आई एक रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। दुबखरा स्थित भारत पेट्रोलियम पंप पर जो हुआ, वह केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को दी गई सीधी चुनौती है। कैमरे के सामने एक पत्रकार को सरेआम धमकाना, उसका गला दबाना और मारपीट करना यह साबित करता है कि जिले में अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। 💫एडीएम के दावे बनाम जमीनी हकीकत अजीब विडंबना है कि एक तरफ एडीएम प्रतिपाल सिंह बयान जारी कर कह रहे हैं कि "स्थिति सामान्य है", वहीं दूसरी ओर जनता पेट्रोल की एक-एक बूंद के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। जब पत्रकार वेदिक द्विवेदी ने इसी 'झूठ' को बेनकाब करने के लिए मौके पर रिपोर्टिंग शुरू की, तो पंप चालक के कथित गुर्गे तरुण सिंह ने उन पर हमला बोल दिया। सवाल यह है: अगर स्थिति सामान्य है, तो वहां लंबी कतारें क्यों थीं? और अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो कैमरे से इतनी घबराहट क्यों? क्या पंप पर तेल की कालाबाजारी हो रही थी, जिसे छुपाने के लिए गुंडों का सहारा लिया गया? 💫पंप पर 'गुंडा-राज', प्रशासन मौन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह तरुण सिंह ने पत्रकार का माइक छीनने की कोशिश की और उन पर शारीरिक हमला किया। यह घटना दर्शाती है कि जिले के कुछ पेट्रोल पंप अब जनसुविधा केंद्र नहीं, बल्कि 'दबंगों के अड्डे' बन चुके हैं। पत्रकार का दोष सिर्फ इतना था कि वह आम जनता की आवाज उठा रहा था। 💫कब होगी 'बुलडोजर' वाली कार्रवाई? बस्ती की जनता और पत्रकार समाज अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस 'जीरो टॉलरेंस' नीति की ओर देख रहा है, जिसका ढिंढोरा पीटा जाता है। 👉क्या पत्रकार पर हाथ उठाने वाले इन गुंडों पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई होगी? 👉क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर भी नकेल कसेगा जो बंद कमरों में बैठकर 'सब ठीक है' का भ्रम फैला रहे हैं? लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला बस्ती जनपद के दुबखरा स्थित भारत पेट्रोलियम पंप का है, जहां अव्यवस्थाओं की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार वेदिक द्विवेदी पर पंप चालक के कथित गुंडे तरुण सिंह ने जानलेवा हमला कर दिया। यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सच की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है। 💫दहशत का केंद्र बना पेट्रोल पंप एक तरफ जिले के एडीएम प्रतिपाल सिंह कागजों पर दावा कर रहे हैं कि "स्थिति सामान्य है" और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। दुबखरा पंप पर लगी लंबी कतारें और वहां व्याप्त अफरातफरी प्रशासन के दावों की पोल खोल रही थीं। जब पत्रकार वेदिक द्विवेदी इन अव्यवस्थाओं को जनता के सामने लाने का अपना पेशेवर दायित्व निभा रहे थे, तभी तरुण सिंह नामक व्यक्ति ने उन पर हमला बोल दिया। 💫प्रशासनिक विफलता और गुंडों के हौसले बुलंद सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन शांति का दावा कर रहा है, तो सार्वजनिक स्थानों पर इन "सफेदपोश गुंडों" को कानून हाथ में लेने की हिम्मत कहां से मिल रही है? 🔔अव्यवस्था: क्या पंप पर लंबी लाइनें प्रशासनिक कुप्रबंधन का नतीजा नहीं हैं? 🔔सुरक्षा: ड्यूटी पर तैनात पत्रकार के साथ मारपीट होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा सवालिया निशान खड़ा करता है। 🔔दबंगई: क्या अब बस्ती में रिपोर्टिंग करने के लिए गुंडों से अनुमति लेनी होगी? 💫कार्रवाई का इंतज़ार: कब जागेगा तंत्र? पत्रकार पर हमला सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटना है। इस घटना ने जिले के पत्रकार जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या तरुण सिंह जैसे अराजक तत्वों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी, या फिर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? ब्यूरो चीफ की टिप्पणी: "अगर सच दिखाने की कीमत खून से चुकानी पड़े, तो यह समाज और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। हम इस हमले की पुरजोर निंदा करते हैं और प्रशासन से मांग करते हैं कि दोषियों को तत्काल जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए।" निष्कर्ष: कलम को डराने की कोशिशें नई नहीं हैं, लेकिन बस्ती की यह घटना प्रशासन के माथे पर कलंक है। अगर 24 घंटे के भीतर दोषियों पर ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जो मिसाल बने, तो यह माना जाएगा कि बस्ती में लोकतंत्र नहीं, बल्कि 'लाठी तंत्र' चल रहा है। ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)1
- Post by हलचल अयोध्या समाचार1
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- पहले देश बंद फिर गैस क्या अब डीजल पेट्रोल भी आइए जानते हैं1
- अफवाहों का ‘ईंधन’ और खौफ की ‘रफ़्तार’: सिद्धार्थनगर में तेल के लिए त्राहि-त्राहि अजीत मिश्रा (खोजी), ब्यूरो चीफ - बस्ती मंडल सिद्धार्थनगर। सात समंदर पार ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आहट क्या हुई, सरहदी जिले सिद्धार्थनगर की सड़कों पर पैनिक का ‘विस्फोट’ हो गया। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने की एक अफवाह ने जिले के पेट्रोल पंपों पर वो मंजर पैदा कर दिया, जिसे देखकर लगा कि शायद कल से पहिए थम जाएंगे। आलम यह है कि लोग अपनी गाड़ियों की टंकी ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े गैलनों में भी तेल भरकर घर ले जाने की होड़ में लगे हैं। बढ़नी और शोहरतगढ़ में बिगड़े हालात, पुलिस ने संभाला मोर्चा अफवाह की आग सबसे ज्यादा बढ़नी और शोहरतगढ़ के इलाकों में भड़की। देखते ही देखते पेट्रोल पंपों पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) का नतीजा यह हुआ कि कई पंपों पर चंद घंटों में ही 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक गए, जिससे जनता में डर और गहरा गया। मैदान में उतरे SDM और CO: दी कड़ी चेतावनी हालात की गंभीरता को देखते हुए SDM विवेकानंद मिश्र और CO मयंक द्विवेदी ने खुद मोर्चा संभाला। एसडीएम ने मालगहिया और बढ़नी के पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया और सप्लाई चेन की हकीकत जांची। SDM विवेकानंद मिश्र ने दो टूक शब्दों में कहा: "जिले में तेल की रत्ती भर भी कमी नहीं है। स्टॉक पर्याप्त है। तेल की किल्लत की खबरें महज कोरी अफवाह हैं। जो भी सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रम फैलाएगा, प्रशासन उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करेगा। लोग अनावश्यक रूप से स्टॉक जमा न करें।" पंपों पर 'पहरा', शांति की अपील क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी ने खुद पंपों पर खड़े होकर व्यवस्था को सुचारू कराया। उन्होंने निर्देश दिया कि लोग कतारबद्ध होकर अपनी जरूरत के मुताबिक ही ईंधन लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस बल को इसलिए तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था और यातायात में कोई बाधा न आए। हकीकत: सप्लाई सुरक्षित, डर बेवजह प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है। युद्ध की खबरों का स्थानीय आपूर्ति पर फिलहाल कोई असर नहीं है। अधिकारियों की सक्रियता के बाद बढ़नी क्षेत्र में स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन प्रशासन अभी भी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है।1