मुरादनगर में बिजली कनेक्शन के नाम पर मनमानी? लाखों की ABC केबल कचरे में, कनेक्शन के लिए तरस रही जनता—विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मुरादनगर से विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक तरफ कई कॉलोनियों में रहने वाले परिवार वर्षों से बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग के चक्कर काट रहे हैं और घरों में रोशनी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग के ही सब-डिवीजन नूरपुर क्षेत्र में लाखों रुपये की ABC केबल खुले में कचरे के बीच पड़ी धूल फांक रही है। मामला विद्युत वितरण खंड 33/11 डिवीजन मुरादनगर के सब-डिवीजन नूरपुर से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध तस्वीरों में बड़ी मात्रा में ABC केबल बेकार पड़ी दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए विद्युत सामग्री उपलब्ध है, तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से बिजली कनेक्शन की मांग कर रहे हैं। इन परिवारों के बच्चे और बुजुर्ग आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि कनेक्शन के लिए कभी विभागीय प्रक्रिया तो कभी अन्य कारण बताए जाते हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता। दूसरी ओर एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग स्थानों से विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने की कथित तैयारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को एक स्थान से बिजली कनेक्शन उपलब्ध भी कराया जा चुका है। यदि ऐसा है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग के नियम सभी उपभोक्ताओं के लिए समान हैं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ABC केबल उपलब्ध है और उसका उपयोग विद्युत सुविधा से वंचित परिवारों तक बिजली पहुंचाने में किया जा सकता है, तो वह कचरे में क्यों पड़ी है? क्या इस सामग्री का कोई उपयोग नहीं है या फिर विभागीय स्तर पर इसका इस्तेमाल करने की इच्छाशक्ति नहीं है? यह मामला भ्रष्टाचार है, विभागीय लापरवाही है या फिर सिस्टम की विफलता—इसका जवाब तो निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन तस्वीरें और स्थानीय लोगों की शिकायतें विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े करती हैं। सरकार लगातार हर घर तक बिजली पहुंचाने और आम जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यदि पात्र लोगों को कनेक्शन नहीं मिल रहा और दूसरी तरफ लाखों रुपये की विद्युत सामग्री अनुपयोगी पड़ी है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। अब सवाल विद्युत वितरण खंड मुरादनगर के अधिकारियों से है—ABC केबल किस काम के लिए खरीदी गई थी? वह कचरे में क्यों पड़ी है? जरूरतमंद परिवारों को कनेक्शन क्यों नहीं मिल रहे? और क्या एक ही व्यक्ति को दो स्थानों से सप्लाई देने के मामले की जांच होगी? जनता को इन सवालों के जवाब का इंतजार है। सरकार और विद्युत विभाग को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही तय करें और बिजली से वंचित परिवारों को नियमानुसार शीघ्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराएं।
मुरादनगर में बिजली कनेक्शन के नाम पर मनमानी? लाखों की ABC केबल कचरे में, कनेक्शन के लिए तरस रही जनता—विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मुरादनगर से विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक तरफ कई कॉलोनियों में रहने वाले परिवार वर्षों से बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग के चक्कर काट रहे हैं और घरों में रोशनी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग के ही सब-डिवीजन नूरपुर क्षेत्र में लाखों रुपये की ABC केबल खुले में कचरे के बीच पड़ी धूल फांक रही है। मामला विद्युत वितरण खंड 33/11 डिवीजन मुरादनगर के सब-डिवीजन नूरपुर से जुड़ा बताया जा रहा है।
उपलब्ध तस्वीरों में बड़ी मात्रा में ABC केबल बेकार पड़ी दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए विद्युत सामग्री उपलब्ध है, तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से बिजली कनेक्शन की मांग कर रहे हैं। इन परिवारों के बच्चे और बुजुर्ग आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि कनेक्शन के लिए कभी विभागीय प्रक्रिया तो कभी अन्य कारण बताए जाते हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता। दूसरी ओर एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग स्थानों से विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने की कथित तैयारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा
है कि संबंधित व्यक्ति को एक स्थान से बिजली कनेक्शन उपलब्ध भी कराया जा चुका है। यदि ऐसा है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग के नियम सभी उपभोक्ताओं के लिए समान हैं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ABC केबल उपलब्ध है और उसका उपयोग विद्युत सुविधा से वंचित परिवारों तक बिजली पहुंचाने में किया जा सकता है, तो वह कचरे में क्यों पड़ी है? क्या इस सामग्री का कोई उपयोग नहीं है या फिर विभागीय स्तर पर इसका इस्तेमाल करने की इच्छाशक्ति नहीं है? यह मामला भ्रष्टाचार है, विभागीय लापरवाही है या फिर सिस्टम की विफलता—इसका जवाब तो निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन तस्वीरें और स्थानीय लोगों की शिकायतें विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े करती हैं। सरकार लगातार हर घर तक बिजली पहुंचाने और आम
जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यदि पात्र लोगों को कनेक्शन नहीं मिल रहा और दूसरी तरफ लाखों रुपये की विद्युत सामग्री अनुपयोगी पड़ी है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। अब सवाल विद्युत वितरण खंड मुरादनगर के अधिकारियों से है—ABC केबल किस काम के लिए खरीदी गई थी? वह कचरे में क्यों पड़ी है? जरूरतमंद परिवारों को कनेक्शन क्यों नहीं मिल रहे? और क्या एक ही व्यक्ति को दो स्थानों से सप्लाई देने के मामले की जांच होगी? जनता को इन सवालों के जवाब का इंतजार है। सरकार और विद्युत विभाग को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही तय करें और बिजली से वंचित परिवारों को नियमानुसार शीघ्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराएं।
- मुरादनगर में बिजली कनेक्शन के नाम पर मनमानी? लाखों की ABC केबल कचरे में, कनेक्शन के लिए तरस रही जनता—विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मुरादनगर से विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक तरफ कई कॉलोनियों में रहने वाले परिवार वर्षों से बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग के चक्कर काट रहे हैं और घरों में रोशनी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग के ही सब-डिवीजन नूरपुर क्षेत्र में लाखों रुपये की ABC केबल खुले में कचरे के बीच पड़ी धूल फांक रही है। मामला विद्युत वितरण खंड 33/11 डिवीजन मुरादनगर के सब-डिवीजन नूरपुर से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध तस्वीरों में बड़ी मात्रा में ABC केबल बेकार पड़ी दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए विद्युत सामग्री उपलब्ध है, तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से बिजली कनेक्शन की मांग कर रहे हैं। इन परिवारों के बच्चे और बुजुर्ग आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि कनेक्शन के लिए कभी विभागीय प्रक्रिया तो कभी अन्य कारण बताए जाते हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता। दूसरी ओर एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग स्थानों से विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने की कथित तैयारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को एक स्थान से बिजली कनेक्शन उपलब्ध भी कराया जा चुका है। यदि ऐसा है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग के नियम सभी उपभोक्ताओं के लिए समान हैं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ABC केबल उपलब्ध है और उसका उपयोग विद्युत सुविधा से वंचित परिवारों तक बिजली पहुंचाने में किया जा सकता है, तो वह कचरे में क्यों पड़ी है? क्या इस सामग्री का कोई उपयोग नहीं है या फिर विभागीय स्तर पर इसका इस्तेमाल करने की इच्छाशक्ति नहीं है? यह मामला भ्रष्टाचार है, विभागीय लापरवाही है या फिर सिस्टम की विफलता—इसका जवाब तो निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन तस्वीरें और स्थानीय लोगों की शिकायतें विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े करती हैं। सरकार लगातार हर घर तक बिजली पहुंचाने और आम जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यदि पात्र लोगों को कनेक्शन नहीं मिल रहा और दूसरी तरफ लाखों रुपये की विद्युत सामग्री अनुपयोगी पड़ी है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। अब सवाल विद्युत वितरण खंड मुरादनगर के अधिकारियों से है—ABC केबल किस काम के लिए खरीदी गई थी? वह कचरे में क्यों पड़ी है? जरूरतमंद परिवारों को कनेक्शन क्यों नहीं मिल रहे? और क्या एक ही व्यक्ति को दो स्थानों से सप्लाई देने के मामले की जांच होगी? जनता को इन सवालों के जवाब का इंतजार है। सरकार और विद्युत विभाग को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही तय करें और बिजली से वंचित परिवारों को नियमानुसार शीघ्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराएं।4
- देश भर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी की धूम , गाजियाबाद के मंदिरों में भव्य सजावट के साथ तैयारियां पूर्ण1
- गाजियाबाद के कनावनी में किसानों की महापंचायत जुटी है। मुद्दा है जमीन के मुआवजे का। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन के बदले उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल रहा और उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि जमीन उनकी आजीविका का आधार है, लेकिन जमीन लिए जाने के बाद मिलने वाला मुआवजा उनकी मांग और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इसी मांग को लेकर किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। अब किसानों ने महापंचायत के जरिए अपनी आवाज बुलंद की है। किसानों की मांग है कि जीडीए उनकी बात सुने, मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में किसानों के साथ पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से फैसला लिया जाए। महापंचायत में किसान एकजुट होकर प्रशासन और जीडीए से सवाल कर रहे हैं—आखिर उनकी जमीन का उचित मूल्य उन्हें कब मिलेगा?4
- चोरी की घटना का खुलासा, एक अभियुक्त गिरफ्तार; चोरी के आभूषण बरामद गाजियाबाद। पुलिस आयुक्त गाजियाबाद के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत स्वाट टीम ग्रामीण जोन एवं थाना भोजपुर पुलिस टीम को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। संयुक्त टीम ने चोरी की घटना को अंजाम देने के आरोप में एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से चोरी किए गए आभूषण भी बरामद किए गए हैं। पुलिस टीम ने कार्रवाई के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी के आभूषण बरामद किए। बरामद सामान को पुलिस ने कब्जे में लेकर मामले की जांच आगे बढ़ा दी है। पुलिस द्वारा अभियुक्त से पूछताछ कर चोरी की अन्य घटनाओं के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में चोरी एवं अन्य आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में स्वाट टीम ग्रामीण जोन और थाना भोजपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को अहम सफलता माना जा रहा है। बाइट: श्री भास्कर वर्मा, सहायक पुलिस आयुक्त, मोदीनगर।2
- कलछीना के पास SWAT टीम के हत्थे चढ़ा शातिर चोर, चोरी के जेवरात बरामद। जनपद गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र में चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए स्वाट टीम ग्रामीण जोन और भोजपुर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में एक शातिर चोर को कलछीना के पास से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं।गिरफ्तार आरोपी की पहचान हापुड़ के धौलाना थाना क्षेत्र के गांव देहरा निवासी आरिफ उर्फ काला के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, 25 अगस्त को भोजपुर क्षेत्र में एक मकान का ताला तोड़कर आभूषण और नकदी चोरी की गई थी। मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस ने सूचना के आधार पर आरोपी को दबोच लिया।तलाशी के दौरान उसके पास से सोने के मंगलसूत्र, टीका, कंठीमाला, नथ, अंगूठियां, गले के आभूषण और कानों की बालियां बरामद हुईं। वहीं चांदी की पाजेब, पायल, गले का सेट, मंगलसूत्र और बिछुए भी मिले हैं।पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपी ने सुक्कन गढ़ी और अमराला गांव में चोरी की वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। जांच में आरोपी का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ के विभिन्न थानों में चोरी और लूट के कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।पुलिस अब बरामद जेवरों को अन्य चोरी की घटनाओं से जोड़कर जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। *दुनिया डायरेक्ट राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र में अनुभवी एवं फ्रेशियर पत्रकारों की भर्ती शुरू। दुनिया डायरेक्ट राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र में जुड़ने और समाचार एवं विज्ञापन के लिए संपर्क करे। समीर चौधरी 9528754757 *2
- पोर्टर की पोल खोल (पार्ट 6) - 5-स्टार रेटिंग का ढोंग और डिस्टेंस का असली खेल! | Porter Rating vs Distance Scam नमस्ते मेरे ड्राइवर भाइयों, मैं अरविंद कुमार 'अपना कार्गो पार्टनर' से! 🚚 पोर्टर की पोल खोल सीरीज के पार्ट 6 में आज हम पर्दाफाश कर रहे हैं उस 'रेटिंग' के सबसे बड़े ढोंग का, जिसके भरोसे आप दिन-रात अपनी जान खपाते हैं। भाई, हर ड्राइवर सोचता है कि अगर मेरी रेटिंग 5-स्टार है, तो कंपनी सबसे पहले आर्डर मुझे देगी। लेकिन असलियत क्या है? मान लीजिए एक ड्राइवर 500 मीटर दूर खड़ा है जिसकी रेटिंग 4.8 है, और दूसरा 1 किलोमीटर दूर खड़ा है जिसकी रेटिंग 5.0 है। जब दोनों एक साथ आर्डर एक्सेप्ट करते हैं, तो ट्रिप 5-स्टार वाले को नहीं बल्कि 500 मीटर पास वाले (4.8 रेटिंग) को मिलती है! साफ बात है—कंपनी का एल्गोरिदम रेटिंग नहीं, सिर्फ 'डिस्टेंस' देखता है! रेटिंग का यह झुनझुना सिर्फ ड्राइवरों को उलझाने के लिए है। वीडियो को पूरा देखें और समझें इस फर्जीवाड़े को। 👀 और हाँ, कल पार्ट 7 देखना मत भूलना! उसमें हम बात करेंगे उस पैसे की—जो न तो कस्टमर ने दिया और न पोर्टर कंपनी ने! आपका कितना पैसा डूबा है, नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताना! चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें ताकि अगली पोल सीधे आप तक पहुँचे। जय हिंद, जय भारत! 🇮🇳1
- गाजियाबाद में ‘न्यू टेंपो वेलफेयर एसोसिएशन’ का स्टीकर चर्चा में, पुलिस-प्रशासन और आरटीओ विभाग की भूमिका पर उठे सवाल गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में इन दिनों ऑटो और टेंपो चालकों के बीच “न्यू टेंपो वेलफेयर एसोसिएशन, मोदीनगर-गाजियाबाद” का नाम तेजी से चर्चा में है। ऑटो और टेंपो पर लगाए जा रहे संगठन के स्टीकर को लेकर स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर यह संगठन किसने बनाया, इसका उद्देश्य क्या है और वाहनों पर लगाए जा रहे इन स्टीकरों की वास्तविक भूमिका क्या है? सूत्रों के अनुसार, इससे पहले मोदीनगर से गाजियाबाद तक राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर चलने वाले ऑटो और टेंपो पर कथित रूप से “टाइगर ब्रांड” के स्टीकर चर्चा में रहे थे। बताया जाता है कि पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के बाद वह पहचान धीरे-धीरे समाप्त हो गई। अब एक नए स्टीकर के प्रचलन को लेकर फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों ने आशंका जताई है कि कहीं यह स्टीकर वाहनों की अलग पहचान बनाने और कथित रूप से चालान या सीज की कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से तो इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। कुछ लोगों ने स्टीकर के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतें सामने आने का भी दावा किया है सबसे बड़ा सवाल पुलिस प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी स्टीकर के माध्यम से नियमों को प्रभावित करने या अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास हो रहा है, तो इसकी जांच क्यों नहीं की जा रही? क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर मामले की जांच अभी तक नहीं हुई है? अब जरूरत है कि गाजियाबाद पुलिस प्रशासन और आरटीओ विभाग इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट करे कि यह संगठन कानूनी रूप से पंजीकृत है या नहीं और स्टीकर लगाने का उद्देश्य क्या है। संगठन के पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।3
- इन कलयुगी बेटों को देखिए दो बेटों ने बीच सड़क पर अपने ही पिता की बेरहमी से पिटाई कर दी। इन कलयुगी बेटों को देखिए जमीन के विवाद में दो बेटों ने बीच सड़क पर अपने ही पिता की बेरहमी से पिटाई कर दी। बताया जा रहा है कि बेटे अपनी मां अंजना राउत के नाम की जमीन बेचने से नाराज थे। इसी बात को लेकर दोनों बेटों ने बीच सड़क पर पिता के साथ मारपीट की। वीडियो महाराष्ट्र के इंदापुर का है।1