सिविल अस्पताल सौसर में हड़ताल, BMO बदलने की मांग पर सड़कों पर उतरे कर्मचारी पांढुर्णा:-— कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश, मरीजों को भारी परेशानी । सौसर के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच आज जोरदार आंदोलन देखने को मिला, जिससे क्षेत्र का माहौल और गर्मा गया। अस्पताल परिसर में कर्मचारियों और चिकित्सा अधिकारियों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर कड़ा रुख अपनाया। इस आंदोलन का मुख्य कारण BMO पद से डॉ. योगेश शुक्ला को हटाने की मांग है, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए आवेदन में बताया गया कि 8 अप्रैल 2026 को कलेक्टर को ज्ञापन देकर यह मांग रखी गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल को सामूहिक अवकाश और 17-18 अप्रैल को हड़ताल की गई थी। 18 अप्रैल को 7 दिनों में कार्रवाई के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई थी, लेकिन तय समय में कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके विरोध में 24 अप्रैल को फिर ज्ञापन सौंपकर 28 अप्रैल तक कार्रवाई की मांग की गई थी। चेतावनी के अनुसार कार्रवाई न होने पर 29 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई, जो अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। हड़ताल और आंदोलन के कारण अस्पताल में इलाज ठप हो गया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सिविल अस्पताल सौसर में हड़ताल, BMO बदलने की मांग पर सड़कों पर उतरे कर्मचारी पांढुर्णा:-— कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश, मरीजों को भारी परेशानी । सौसर के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच आज जोरदार आंदोलन देखने को मिला, जिससे क्षेत्र का माहौल और गर्मा गया। अस्पताल परिसर में कर्मचारियों और चिकित्सा अधिकारियों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर कड़ा रुख अपनाया। इस आंदोलन का मुख्य कारण BMO पद से डॉ. योगेश शुक्ला को हटाने की मांग है, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए आवेदन में बताया गया कि 8 अप्रैल 2026 को कलेक्टर को ज्ञापन देकर यह मांग रखी गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल को सामूहिक अवकाश और 17-18 अप्रैल को हड़ताल की गई थी। 18 अप्रैल को 7 दिनों में कार्रवाई के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई थी, लेकिन तय समय में कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके विरोध में 24 अप्रैल को फिर ज्ञापन सौंपकर 28 अप्रैल तक कार्रवाई की मांग की गई थी। चेतावनी के अनुसार कार्रवाई न होने पर 29 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई, जो अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। हड़ताल और आंदोलन के कारण अस्पताल में इलाज ठप हो गया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
- पांढुर्णा:-सौसर के सिविल अस्पताल में जारी स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच आज हालात और ज्यादा गंभीर हो गए, जब कर्मचारियों और चिकित्सा अधिकारियों ने जोरदार आंदोलन किया। अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। आंदोलन के दौरान नारेबाजी की गई और लंबित मांगों पर तुरंत कार्रवाई की मांग उठाई गई। यह पूरा विवाद BMO पद से डॉ. योगेश शुक्ला को हटाने की मांग को लेकर चल रहा है, जिस पर अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। 📑 आवेदन और घटनाक्रम स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए आवेदन में बताया कि— 8 अप्रैल को कलेक्टर को ज्ञापन देकर BMO बदलने की मांग की गई थी। 16 अप्रैल को सामूहिक अवकाश और 17-18 अप्रैल को हड़ताल की गई। 18 अप्रैल को 7 दिन में कार्रवाई के आश्वासन पर हड़ताल स्थगित की गई। 24 अप्रैल को फिर ज्ञापन देकर 28 अप्रैल तक कार्रवाई की मांग रखी गई। लेकिन तय समय सीमा तक कोई निर्णय नहीं होने पर 29 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई, जिसके साथ ही आज आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया। 🏥 मरीजों पर असर हड़ताल और आंदोलन के कारण अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से आने वाले मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजा बोढे ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। ❗ निष्कर्ष आज हुए आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य कर्मचारी अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि प्रशासन इस बढ़ते विवाद को कैसे सुलझाता है और जनता को राहत कब मिलती है।2
- इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री जी ने मंदिर परिसर में शोभायमान, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भेंट की गई 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' का अवलोकन भी किया।*1
- Post by Rintu Khan1
- Post by Kashinath Sahu1
- ग्राम सांडिया में भीषण आगजनी, पशु कोठे सहित खेतों में जली नरवाई मुलताई। क्षेत्र के ग्राम सांडिया में आज दोपहर लगभग 1:50 बजे विनायक बुजाडे के खेत स्थित पशु कोठे में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कोठे में मौजूद 5 मवेसी आग की चपेट में आने से घायल हो गए। देखते ही देखते आग आसपास के खेतों तक पहुंच गई, जिससे खेतों की नरवाई, भूसा एवं पेड़ जलकर खाक हो गए। आगजनी की घटना से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही नगर पालिका के दोनों फायर वाहन मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए। फायर टीम द्वारा लगातार मशक्कत कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया ताकि आग अन्य खेतों तक न फैल सके। आग बुझाने में फायर टीम के ड्राइवर मनोज सिंह, धनराज पवार, गिरीश पिपले, विजय बडघरे एवं सुमित पूरी सक्रिय रूप से लगे हुए थे। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है, ग्रामीणों एवं फायर कर्मचारियों की मदद से स्थिति नियंत्रित करने के प्रयास किए गए।2
- आमला/मुलताई, 29 अप्रैल 2026। नागपुर डिवीजन के आमला पोस्ट अंतर्गत जौलखेड़ा स्टेशन के पास डाउन ट्रैक किनारे एक अज्ञात महिला गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही रेल पुलिस और रेलवे स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए महिला को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। यात्री की सूचना से हुआ खुलासा: जानकारी के अनुसार, ट्रेन नंबर 61117 मेमू से उतरे एक यात्री ने जौलखेड़ा स्टेशन के ड्यूटी ऑफिस (DY SS) को सूचना दी कि किलोमीटर नंबर 887/02-04 (JKR-MTY) के पास ट्रैक किनारे एक महिला घायल अवस्था में पड़ी है। सूचना मिलते ही ड्यूटी पर मौजूद डीवाई एसएस रूपेश पवार ने तुरंत पॉइंट्समैन और ट्रैकमैन को मौके पर भेजा। टीम ने महिला को उठाकर जौलखेड़ा स्टेशन लाया। *गंभीर हालत में मिली महिला:* प्राथमिक जांच में महिला का दाहिना हाथ कोहनी के नीचे से कटा हुआ पाया गया, वहीं सिर के पीछे लगभग 5 सेंटीमीटर लंबी गहरी चोट भी थी। अस्पताल में भर्ती, फिर जिला अस्पताल रेफर: रेलवे स्टाफ और पुलिस की मदद से महिला को 108 एंबुलेंस के जरिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुलताई ले जाया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर गजेंद्र मीणा ने प्राथमिक उपचार किया। महिला ने अपना नाम भारती और पता सागर बताया, लेकिन अचेत अवस्था में होने के कारण वह अन्य जानकारी नहीं दे सकी। उसके पास कोई पहचान पत्र या टिकट भी नहीं मिला। प्राथमिक उपचार के बाद महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल बैतूल रेफर किया गया। *पुलिस कर रही जांच:* मामले की सूचना मिलते ही रेल पुलिस और संबंधित अधिकारी जांच में जुट गए हैं। महिला की पहचान और घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।2
- आठनेर नगर में तब अफरातफरी मच गई जब शहर से लगे खेतों में आग ने विकराल रूप लेकर धू धू कर खेत की नरवई जलने लगीं यह आग लगभग 50 एकड़ में फैल गई अचानक लगीं आग से खेतों में रखा पशुओं का भूसा,पाइप सहित जलाऊ लकड़ी जलकर राख हो गई। सुचना पर आठनेर और बैतूल की दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद खेतों में फैली आग पर काबू पाया। फिलहाल आग लगने का कारण इषपट नहीं हो पाया प्रशासन जांच में जुटा है।1
- पांढुर्णा:-— कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश, मरीजों को भारी परेशानी । सौसर के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच आज जोरदार आंदोलन देखने को मिला, जिससे क्षेत्र का माहौल और गर्मा गया। अस्पताल परिसर में कर्मचारियों और चिकित्सा अधिकारियों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर कड़ा रुख अपनाया। इस आंदोलन का मुख्य कारण BMO पद से डॉ. योगेश शुक्ला को हटाने की मांग है, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए आवेदन में बताया गया कि 8 अप्रैल 2026 को कलेक्टर को ज्ञापन देकर यह मांग रखी गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल को सामूहिक अवकाश और 17-18 अप्रैल को हड़ताल की गई थी। 18 अप्रैल को 7 दिनों में कार्रवाई के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई थी, लेकिन तय समय में कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके विरोध में 24 अप्रैल को फिर ज्ञापन सौंपकर 28 अप्रैल तक कार्रवाई की मांग की गई थी। चेतावनी के अनुसार कार्रवाई न होने पर 29 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई, जो अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। हड़ताल और आंदोलन के कारण अस्पताल में इलाज ठप हो गया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।1