राजधानी लखनऊ में महिगवां थाना पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम को एक बड़ी सफलता मिली है। टीम ने मोबाइल चोरी कर लोगों के साथ साइबर ठगी करने वाले एक शातिर अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरी कार्रवाई को थाना प्रभारी राधेश्याम मौर्य के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सामान और नकदी बरामद की है। बरामद सामानों में 11 महंगे एंड्रॉयड फोन और 3 की-पैड फोन सहित कुल 14 मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा, वारदात में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट डिजायर कार और एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। आरोपियों के पास से ₹8,358 नकद भी मिले हैं। पूछताछ में यह सामने आया है कि यह गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों से मोबाइल फोन चुराता था और फिर उन फोन में मौजूद पर्सनल डेटा, बैंकिंग ऐप्स और यूपीआई का दुरुपयोग कर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाकर साइबर ठगी करता था। पुलिस के बयान के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है। इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और बाकी सदस्यों का पता लगाने के लिए अभी जांच जारी है। इस कार्रवाई को लखनऊ पुलिस द्वारा साइबर अपराध और मोबाइल चोरी पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।
राजधानी लखनऊ में महिगवां थाना पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम को एक बड़ी सफलता मिली है। टीम ने मोबाइल चोरी कर लोगों के साथ साइबर ठगी करने वाले एक शातिर अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरी कार्रवाई को थाना प्रभारी राधेश्याम मौर्य के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सामान और नकदी बरामद की है। बरामद सामानों में 11 महंगे एंड्रॉयड फोन और 3 की-पैड फोन सहित कुल 14 मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा, वारदात में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट डिजायर कार और एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। आरोपियों के पास से ₹8,358 नकद भी मिले हैं। पूछताछ में यह सामने आया है कि यह गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों से मोबाइल फोन चुराता था और फिर उन फोन में मौजूद पर्सनल डेटा, बैंकिंग ऐप्स और यूपीआई का दुरुपयोग कर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाकर साइबर ठगी करता था। पुलिस के बयान के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है। इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और बाकी सदस्यों का पता लगाने के लिए अभी जांच जारी है। इस कार्रवाई को लखनऊ पुलिस द्वारा साइबर अपराध और मोबाइल चोरी पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।
- राजधानी लखनऊ में महिगवां थाना पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम को एक बड़ी सफलता मिली है। टीम ने मोबाइल चोरी कर लोगों के साथ साइबर ठगी करने वाले एक शातिर अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरी कार्रवाई को थाना प्रभारी राधेश्याम मौर्य के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सामान और नकदी बरामद की है। बरामद सामानों में 11 महंगे एंड्रॉयड फोन और 3 की-पैड फोन सहित कुल 14 मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा, वारदात में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट डिजायर कार और एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। आरोपियों के पास से ₹8,358 नकद भी मिले हैं। पूछताछ में यह सामने आया है कि यह गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों से मोबाइल फोन चुराता था और फिर उन फोन में मौजूद पर्सनल डेटा, बैंकिंग ऐप्स और यूपीआई का दुरुपयोग कर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाकर साइबर ठगी करता था। पुलिस के बयान के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है। इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और बाकी सदस्यों का पता लगाने के लिए अभी जांच जारी है। इस कार्रवाई को लखनऊ पुलिस द्वारा साइबर अपराध और मोबाइल चोरी पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।1
- सीतापुर जिले की बिसवां तहसील में स्थित मोहल्ला झझर का सरकारी हैंडपंप पिछले करीब दो माह से खराब पड़ा है, जिससे क्षेत्र के लोग गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद अब तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया है। मोहल्लेवासियों के अनुसार, भीषण गर्मी और अपनी दैनिक जरूरतों के बीच उन्हें पीने के पानी के लिए काफी दूर जाना पड़ रहा है। इस परेशानी से विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने आरोप लगाया है कि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों ने अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल खराब पड़े हैंडपंप की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्रवासियों को इस संकट से राहत मिल सके। इस स्थिति पर यह बड़ा सवाल उठाया गया है कि जब सरकारी हैंडपंप दो माह से खराब है और लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, तो संबंधित विभाग अब तक निष्क्रिय क्यों है, और आखिर जनता की मूलभूत सुविधा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।4
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस कर्मियों को सोशल मीडिया पर अनावश्यक रील बनाने और प्रचार-प्रसार से बचने की कई बार स्पष्ट हिदायत दी है, जिसमें वर्दी की गरिमा को सर्वोपरि बताया गया है। इसी पृष्ठभूमि में, पुलिस महानिदेशक की वर्दी में बनी एक रील के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बहस तेज हो गई है। यह रील कथित तौर पर Instagram ID: @cop.uttam.kumar.1051 से अपलोड की गई बताई जा रही है। इस घटना ने सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 के तहत नियमों के समान अनुप्रयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यदि यह सामग्री विभागीय अनुमति के बिना बनाई और प्रसारित की गई है, तो यह स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़ा करता है कि क्या ये नियम सभी पर एक समान लागू होते हैं, या फिर केवल अधीनस्थ कर्मचारियों के लिए ही हैं। यह सवाल सरकार से नहीं, बल्कि व्यवस्था से है कि यदि नियम बनाए गए हैं, तो उनका पालन हर स्तर पर समान रूप से होना चाहिए। अब देखना होगा कि इस मामले में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है या कोई कार्रवाई की जाती है।1
- विदेश मंत्रालय (MEA) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता है। इस स्पष्टीकरण ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता का सबूत नहीं है, तो भारतीय नागरिकता कैसे निर्धारित की जाएगी? MEA के अनुसार, आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज मुख्य रूप से पहचान या निवास के प्रमाण के तौर पर कार्य करते हैं। ये दस्तावेज कुछ गैर-नागरिकों को भी जारी किए जा सकते हैं, जिससे ये भी नागरिकता के विश्वसनीय प्रमाण के रूप में अनुपयोगी हो जाते हैं। मौजूदा व्यवस्था में, भारत में नागरिकता मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत जन्म, वंश या पंजीकरण के आधार पर तय की जाती है। इस स्थिति में, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सामान्य पहचान दस्तावेज नागरिकता सिद्ध करने में अपर्याप्त हैं, तो भविष्य में व्यक्ति की भारतीय नागरिकता किस आधार पर तय की जाएगी? इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या यह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की तैयारी का संकेत है।2
- बाराबंकी के घुघटेर क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम की दसवीं के अवसर पर हुसैन की सदाओं और मातमी माहौल के बीच ताजिया और अलम के विशाल जुलूस निकाले गए। ये विशाल जुलूस पिंडसावा, छिलगवा, दिनपनाह, सलेमाबाद, सोहीपुर, बजगनी और विभिन्न अन्य गांवों में रखे गए ताजियों के लिए थे। देर रात इन ताजियों का जुलूस के साथ दफन किया गया। इस दौरान प्रभारी निरीक्षक अभय कुमार मौर्य अपनी फ़ोर्स के साथ मौके पर मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में दसवीं मोहर्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।1
- लखनऊ पुलिस ने मोबाइल चोरी और साइबर ठगी करने वाले एक अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तहत पांच शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी आरोपी सीतापुर जनपद के निवासी हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 11 एंड्रॉयड मोबाइल, 3 की-पैड मोबाइल, 8,358 रुपये नकद, बैंक डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और सिम कार्ड बरामद किए हैं। वारदात में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट डिजायर कार और एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। जाँच के दौरान सामने आया कि आरोपी भीड़भाड़ वाले बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से मोबाइल चोरी करते थे। इसके बाद, वे चोरी हुए मोबाइल में लगे सिम कार्ड का उपयोग करके UPI, UPI Lite और इंटरनेट बैंकिंग को सक्रिय करते थे। सक्रिय होने के बाद, वे खातों से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे और नकद निकाल लेते थे। पूछताछ में आरोपियों ने महिगवां क्षेत्र में लगभग 3.91 लाख रुपये और बीकेटी क्षेत्र में करीब 4.28 लाख रुपये की साइबर ठगी करने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार, ठगी के बाद आरोपी साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से मोबाइल और सिम कार्ड नष्ट करने का प्रयास करते थे। लखनऊ पुलिस की सतर्क कार्रवाई और महिगवां पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल की संयुक्त कार्रवाई से इस गिरोह का सफलतापूर्वक खुलासा हुआ है। इस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।1
- उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की फतेहपुर तहसील में 10 मोहर्रम का जुलूस हजरत इमाम हुसैन और उनके अन्य साथियों की याद में निकाला गया। इस जुलूस के माध्यम से हजरत इमाम हुसैन के उस दृढ़ संकल्प को याद किया गया, जब उन्होंने सत्ता के आगे सिर झुकाने से इनकार कर दिया था और अन्याय के खिलाफ अपने साथियों के साथ कर्बला के मैदान में शहीद हो गए थे। इस अवसर पर अकीदतमंदों ने 'या हुसैन, या हुसैन' के नारे बुलंद किए। हर साल की तरह, इस साल भी बड़ी संख्या में लोग इस ताजिया जुलूस में शामिल हुए। यह जुलूस बड़ा इमामबाड़ा से शुरू होकर कर्बला तक प्रशासन की कड़ी निगरानी में सकुशल संपन्न हुआ।4
- सीतापुर के अटरिया में जंक्शन से कसावा तक हाल ही में बनी नई डामर सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के आरोपों के साथ विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल तथा निर्माण मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया है। उनका साफ कहना है कि सड़क के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क बनने के कुछ ही दिनों के भीतर इसकी असलियत सामने आने लगी है। सड़क पर डामर की बेहद पतली परत बिछाई गई है, जो आसानी से उखड़ रही है। कई जगहों से तो गिट्टियां भी अभी से बिखरकर सड़क पर फैलने लगी हैं, जिससे राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ गया है। इन शिकायतों ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। इस घोर लापरवाही को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। इसके साथ ही, मानकों की अनदेखी करने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए सड़क का दोबारा सही तरीके से निर्माण कराने की भी मांग की गई है।1