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अम्बेडकरनगर-अधिवक्ताओं नें जोरदार प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन,कारवाई की मांग!!
Dushyant Kumar Journalist
अम्बेडकरनगर-अधिवक्ताओं नें जोरदार प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन,कारवाई की मांग!!
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- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- ब्रेकिंग न्यूज: अम्बेडकर नगर टडवा मिश्र में सामुदायिक शौचालय बना शो-पीस, 6 महीने से बंद बसखारी ब्लॉक के ग्राम टडवा मिश्र में बना सामुदायिक शौचालय बदहाल स्थिति में बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार न बिजली है न पानी, जिससे इसका उपयोग नहीं हो रहा। शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। मरम्मत के नाम पर खर्च और केयरटेकर का मानदेय निकलने पर सवाल उठ रहे हैं। शौचालय बंद होने से ग्रामीण खुले में शौच को मजबूर हैं, जांच की मांग की जा रही है। देखिए वीडियो में पूरी खबर एवं विसतृत समाचार के लिए इतंजार करिये कल के अंक का1
- अफवाहों का ‘ईंधन’ और खौफ की ‘रफ़्तार’: सिद्धार्थनगर में तेल के लिए त्राहि-त्राहि अजीत मिश्रा (खोजी), ब्यूरो चीफ - बस्ती मंडल सिद्धार्थनगर। सात समंदर पार ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आहट क्या हुई, सरहदी जिले सिद्धार्थनगर की सड़कों पर पैनिक का ‘विस्फोट’ हो गया। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने की एक अफवाह ने जिले के पेट्रोल पंपों पर वो मंजर पैदा कर दिया, जिसे देखकर लगा कि शायद कल से पहिए थम जाएंगे। आलम यह है कि लोग अपनी गाड़ियों की टंकी ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े गैलनों में भी तेल भरकर घर ले जाने की होड़ में लगे हैं। बढ़नी और शोहरतगढ़ में बिगड़े हालात, पुलिस ने संभाला मोर्चा अफवाह की आग सबसे ज्यादा बढ़नी और शोहरतगढ़ के इलाकों में भड़की। देखते ही देखते पेट्रोल पंपों पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) का नतीजा यह हुआ कि कई पंपों पर चंद घंटों में ही 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक गए, जिससे जनता में डर और गहरा गया। मैदान में उतरे SDM और CO: दी कड़ी चेतावनी हालात की गंभीरता को देखते हुए SDM विवेकानंद मिश्र और CO मयंक द्विवेदी ने खुद मोर्चा संभाला। एसडीएम ने मालगहिया और बढ़नी के पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया और सप्लाई चेन की हकीकत जांची। SDM विवेकानंद मिश्र ने दो टूक शब्दों में कहा: "जिले में तेल की रत्ती भर भी कमी नहीं है। स्टॉक पर्याप्त है। तेल की किल्लत की खबरें महज कोरी अफवाह हैं। जो भी सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रम फैलाएगा, प्रशासन उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करेगा। लोग अनावश्यक रूप से स्टॉक जमा न करें।" पंपों पर 'पहरा', शांति की अपील क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी ने खुद पंपों पर खड़े होकर व्यवस्था को सुचारू कराया। उन्होंने निर्देश दिया कि लोग कतारबद्ध होकर अपनी जरूरत के मुताबिक ही ईंधन लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस बल को इसलिए तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था और यातायात में कोई बाधा न आए। हकीकत: सप्लाई सुरक्षित, डर बेवजह प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है। युद्ध की खबरों का स्थानीय आपूर्ति पर फिलहाल कोई असर नहीं है। अधिकारियों की सक्रियता के बाद बढ़नी क्षेत्र में स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन प्रशासन अभी भी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है।1
- *अग्निशमन केंद्र का काम तेजी पर, अगले माह से शुरू होंगी सेवाएं साथ ही सर्विस लेन की माँग* जनपद सुल्तानपुर के लम्भुआ विधानसभा क्षेत्रवासियों के लिए राहत भरी खबर है कि लम्भुआ में बन रहा अग्निशमन केंद्र अब तेजी से अपने अन्तिम चरण में पहुंच गया है। लम्बे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना पर अब काम तेजी से दिखाई दे रहा है, जिससे जल्द ही क्षेत्र को अग्नि सुरक्षा की बड़ी सुविधा मिलने वाली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अग्निशमन केन्द्र का कार्यालय और अधिकारियों के आवास के साथ पानी की टंकी जो भूमिगत का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। वार्ता के दौरान संबंधित सूत्रों ने बताया कि आगामी माह से यहां पर अग्निशमन की गाड़ियां तैनात कर दी जाएंगी और कर्मचारियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित हो जाएगी। इससे आसपास के क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सम्भव हो सकेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सुविधा लम्बे समय से मांग में थी, जो अब अथक प्रयासों के बाद साकार होती नजर आ रही है। अग्निशमन केंद्र के शुरू होने से लंभुआ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, इस महत्वपूर्ण परियोजना के साथ एक आवश्यक मांग भी सामने आई है। स्थानीय निवासियों और मुरली गांव के लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे एक सर्विस लेन बनाए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अग्निशमन केंद्र के ठीक पास से मुख्य मार्ग जुड़ा हुआ है, जिससे सीधे हाईवे पर वाहनों के चढ़ने-उतरने में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विशेष रूप से केंद्र के पूर्व दिशा में स्थित प्राथमिक विद्यालय “मुरली” के छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। यदि सर्विस लेन का निर्माण हो जाता है, तो अग्निशमन वाहनों को मुख्य मार्ग पर सीधे प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अग्निशमन केंद्र के संचालन शुरू होने से पहले ही इस समस्या पर ध्यान दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।1
- अयोध्या पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन जिला अध्यक्ष श्री राजेश सिंह जनता से अपील की है जनपद अयोध्या के सभी पेट्रोल पंप पर्याप्त मात्रा में डीजल पेट्रोल उपलब्ध है अगर किसी पेट्रोल पंप पर उपलब्ध नहीं है वह आज शाम तक उपलब्ध हो जाएगा अफवाहों में ना आए ना पेट्रोल पंप पर भीड़ लगाये।1
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- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले की सड़कों पर इन दिनों वाहनों का शोर नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों पर चीख-पुकार सुनाई दे रही है। जिले में डीजल-पेट्रोल का ऐसा 'कृत्रिम' संकट खड़ा किया गया है कि आम आदमी की जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। छोटे पंपों पर ताले लटके हैं, और जो बड़े पंप खुले हैं, वहाँ मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या वाकई तेल खत्म हो गया है, या फिर यह आने वाली कीमतों में उछाल से पहले का कोई बड़ा 'खेलो' (म्युचुअल गेम) है? पंपों पर 'नो स्टॉक' का बोर्ड, जनता के सब्र का बांध टूटा जिले के अधिकांश पंपों पर कर्मचारी एक ही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं— "तेल नहीं है।" घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब उपभोक्ता नोजल के पास पहुँचता है, तो उसे खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस बेरुखी ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। पंप कर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज अब आम बात हो गई है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कभी भी बड़ी हिंसा भड़क सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। सप्लाई की कमी या मुनाफाखोरी की साजिश? एक तरफ कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि सप्लाई पूरी तरह बाधित है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में चर्चा आम है कि यह 'आर्टिफिशियल स्कैरसिटी' (कृत्रिम कमी) पैदा की जा रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए स्टॉक को डंप किया जा रहा है। बड़ा सवाल: अगर सप्लाई नहीं है, तो क्या प्रशासन ने इसकी जांच की? क्या डिपो से आने वाले टैंकरों का मिलान सेल रजिस्टर से किया गया? आखिर 'सस्पेंस' की यह चादर क्यों तानी गई है? गायब प्रशासन और ठप होता जनजीवन हैरानी की बात यह है कि जिले में हाहाकार मचा है, जरूरी काम ठप हो गए हैं, किसान खेतों में परेशान है और एम्बुलेंस तक को तेल के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह से नदारद है। रसद विभाग (Supply Department) की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। क्या अधिकारियों को इस कालाबाजारी की भनक नहीं है, या फिर 'साहब' मौन रहकर इस खेल को शह दे रहे हैं? हालात बेकाबू, कभी भी फूट सकता है जनाक्रोश बस्ती की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। लोगों का कहना है कि अगर अगले 24 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं हुई और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उग्र आंदोलन तय है। जब तेल की कोई आधिकारिक कमी नहीं है, तो फिर यह किल्लत क्यों? सच्चाई पर से पर्दा उठना जरूरी है, वरना बस्ती की ये लंबी कतारें किसी बड़े बवाल की वजह बन सकती हैं।1
- Post by A news 881