बलिया: जन्माष्टमी के बाद अब कान्हा की छठी! जानिए कब मनाया जाएगा श्रीकृष्ण छठियार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। अब जन्मोत्सव के बाद भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के छठियार यानी छठी उत्सव का इंतजार है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद उनकी छठी मनाई जाती है। इस अवसर पर बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें नए वस्त्र, मुकुट व आभूषण पहनाकर भोग लगाया जाता है। छठियार के अवसर पर मंदिरों और घरों में भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, फल, मिठाई और अन्य पारंपरिक पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके बाद पूजा-अर्चना और आरती के साथ प्रसाद का वितरण किया जाता है। हालांकि छठियार की तारीख को लेकर अलग-अलग स्थानीय परंपराएं हैं। कुछ पंचांगों और धार्मिक परंपराओं में 2026 में लड्डू गोपाल की छठी 6 सितंबर को बताई गई है, जबकि कई जगह जन्म के छठे दिन की गणना के अनुसार अलग तारीख पर आयोजन किया जाता है। इसलिए श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर की परंपरा के अनुसार छठियार मनाएं। कृष्ण जन्माष्टमी के बाद भी मंदिरों और घरों में कान्हा की भक्ति का उत्साह जारी है और छठियार को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
बलिया: जन्माष्टमी के बाद अब कान्हा की छठी! जानिए कब मनाया जाएगा श्रीकृष्ण छठियार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। अब जन्मोत्सव के बाद भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के छठियार यानी छठी उत्सव का इंतजार है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद उनकी छठी मनाई जाती है। इस अवसर पर बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें नए वस्त्र, मुकुट व आभूषण पहनाकर भोग लगाया जाता है। छठियार के अवसर पर मंदिरों और घरों में भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, फल, मिठाई और अन्य पारंपरिक पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके बाद पूजा-अर्चना और आरती के साथ प्रसाद का वितरण किया जाता है। हालांकि छठियार की तारीख को लेकर अलग-अलग स्थानीय परंपराएं हैं। कुछ पंचांगों और धार्मिक परंपराओं में 2026 में लड्डू गोपाल की छठी 6 सितंबर को बताई गई है, जबकि कई जगह जन्म के छठे दिन की गणना के अनुसार अलग तारीख पर आयोजन किया जाता है। इसलिए श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर की परंपरा के अनुसार छठियार मनाएं। कृष्ण जन्माष्टमी के बाद भी मंदिरों और घरों में कान्हा की भक्ति का उत्साह जारी है और छठियार को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
- बलिया: बाढ़ का अलर्ट, सेल्फी-रील बनाने वालों को सख्त चेतावनी SDRF अलर्ट लगातार बढ़ते बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। साथ ही सेल्फी या रील बनाने के लिए जोखिम उठाने वालों को सख्त चेतावनी दी गई है। बाढ़ प्रभावित थाना क्षेत्रों में पुलिस की विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए SDRF को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। जान जोखिम में डालकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सेल्फी या रील न बनाएं। सुरक्षित रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।1
- बलिया में फौजी की हुंकार से गरमाई सियासत, 300 गाड़ियों के काफिले के साथ रमेश सिंह गुड्डू ने ठोकी दावेदारी बलिया। 361 बलिया नगर विधानसभा की सियासत में पूर्व सैनिक रमेश सिंह गुड्डू की सक्रिय एंट्री ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पॉलिटेक्निक ग्राउंड से निकली उनकी जनसंपर्क यात्रा में करीब 300 गाड़ियों का काफिला शामिल रहा। जगह-जगह समर्थकों ने फूल-मालाओं से स्वागत कर शक्ति प्रदर्शन किया। यात्रा की शुरुआत शहीदों को माल्यार्पण कर नमन करने से हुई। इसके बाद बाबा बालेश्वर नाथ और बाबा भृगु मुनि का आशीर्वाद लेकर काफिला कदम चौराहा, जमुआ, सरहसपाली, आखार, बेयासी, घोड़ाहरा, बसरिखपुर, बहादुरपुर, नंदपुर और हल्दी सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरा। हल्दी में बाढ़ पीड़ितों के लिए नि:शुल्क मेडिकल कैंप और भोजन की व्यवस्था भी की गई। इसके बाद सोनवानी बिगही, रहुआ, सेरिया, दवनी, रुस्तमपुर, बांसडीह रोड, घरौली, आमघाट, शंकरपुर चट्टी, छोड़हर, हनुमानगंज और बहादुरपुर तक जनसंपर्क हुआ। इस दौरान दो दर्जन से अधिक मंदिरों में उन्होंने दर्शन किए। पत्रकारों से बातचीत में रमेश सिंह गुड्डू ने कहा, “अब मैदान में फौजी उतर चुका है, पीछे नहीं हटेगा।” उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, गंगा कटान, जलजमाव और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना है कि जनता का अवसर मिलने पर वे समस्याओं को लेकर शासन तक मजबूती से आवाज उठाएंगे। युवाओं के रोजगार और शिक्षा के मुद्दे पर भी उन्होंने संघर्ष का ऐलान किया। वहीं अग्निपथ योजना पर अपनी ही राजनीतिक विचारधारा से अलग राय रखते हुए उन्होंने कहा कि सेना की सेवा स्थायी होनी चाहिए।1
- रसड़ा क्षेत्र के प्रधानपुर स्थित शहीद रामानुज विद्यालय परिसर में सोमवार को अमर शहीद रामानुज का 43वां शहादत दिवस श्रद्धा, सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया रसड़ा (बलिया) । रसड़ा क्षेत्र के प्रधानपुर स्थित शहीद रामानुज विद्यालय परिसर में सोमवार को अमर शहीद रामानुज का 43वां शहादत दिवस श्रद्धा, सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहीद रामानुज की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया तथा भव्य शहीद मेला और श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई, जिसमें क्षेत्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद शहीद रामानुज की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद उन्होंने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह, भाजपा नेता एवं रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक पद प्रत्याशी विनोद सिंह, इंद्रजीत सिंह, चंद्रमा सिंह, शिवजी तिवारी, पुरुषोत्तम यादव और अवधेश तिवारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी मौजूद रहे।1
- सिसवन। ग्रामीणों के सहयोग से अखंड अष्टयाम का आयोजन किया गया सिसवन प्रखंड के सिसवन-माझी मुख्य सड़क पर नौका टोला,साईपुर, निरखापुर तिनमोहनी के पास स्थित हनुमान मंदिर में 24 घंटे से चल रहे अखंड अष्टयाम का विधिवत समापन हो गया।इस दौरान हरे राम हरे कृष्ण की धुन से पूरा इलाका भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दिन-रात भजन-कीर्तन में शामिल हुए।मंदिर के पुजारी जगत दास ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ग्रामीणों के सहयोग से अखंड अष्टयाम का आयोजन किया गया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की कामना है। 24 घंटे तक लगातार हरे राम महामंत्र का जाप किया गया।2
- बलिया।वाराणसी खंड स्नातक विधान परिषद चुनाव को लेकर सपा ने कसी कमर, जीत की रणनीति पर हुआ मंथन बलिया। वाराणसी खंड स्नातक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र में आगामी माह होने वाले चुनाव में सफलता हासिल करने के उद्देश्य से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को पार्टी के जिला कार्यालय पर सम्पन्न हुई। बैठक में चुनाव की तैयारियों को लेकर एक-एक बिंदु पर गहन मंथन किया गया तथा संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय कर चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने की रणनीति बनाई गई। बैठक को संबोधित करते हुए वाराणसी खंड से वर्तमान विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने कहा कि विधान परिषद से लेकर सड़क तक उन्होंने युवाओं, छात्रों, अध्यापकों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों सहित समाज के सभी वर्गों के मुद्दों पर लगातार आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का जो कर्तव्य होता है, उसे पूरी तन्मयता और निष्ठा के साथ निभाने का उन्होंने प्रयास किया है और आगे भी जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि विधान परिषद में जनता की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाना और सड़क पर संघर्ष करना उनकी प्राथमिकता रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनाव में पूरी मजबूती के साथ जुटने तथा अधिक से अधिक स्नातक मतदाताओं से संपर्क स्थापित करने का आह्वान किया। बैरिया विधायक जयप्रकाश अंचल ने कहा कि यह चुनाव केवल किसी व्यक्ति के निर्वाचन का चुनाव नहीं, बल्कि युवाओं, छात्रों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों की आवाज को मजबूत करने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ मतदाताओं के बीच जाएं और पार्टी की नीतियों तथा जनहित में किए गए संघर्षों को जनता तक पहुंचाएं। संगठन की एकजुटता और कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर समाजवादी पार्टी इस चुनाव में मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी। बैठक में चुनाव को लेकर मतदाता संपर्क अभियान को तेज करने, संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने तथा प्रत्येक क्षेत्र में प्रभावी जनसंपर्क अभियान चलाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। नेताओं ने कार्यकर्ताओं से आपसी समन्वय के साथ चुनावी तैयारियों में जुट जाने का आह्वान किया। बैठक में डा.विश्राम यादव, यशपाल सिंह, आद्या शंकर यादव रंजीत चौधरी,अरविन्द गिरी, सुशील पाण्डेय कान्हजी, रामजी गुप्ता,चंद्रशेखर सिंह, विजय शंकर यादव,शशिकांत चतुर्वेदी, संतोष गर्ग,राजन कन्नौजिया,रामेश्वर पासवान,रविन्द्र यादव,जमाल आलम, अनिल राय,जुबेर सोनू, दशरथ यादव,रामनाथ पटेल सुरेश यादव, विनय गौड़,धनजी यादव सर्वजीत यादव, सुभाष यादव सहित समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष संग्राम सिंह यादव और संचालन महासचिव बीरबल राम ने किया।1
- गरखा.प्रखंड.पंचायत.कोठिया1
- जाति में जनता उलझी है, नेता नहीं। अपनी जाती का भी भला किये होते तो 50℅ सुखी हो गया होता?? जाति में जनता उलझी है, नेता नहीं। अपनी जाती का भी भला किये होते तो 50℅ सुखी हो गया होता??1
- बलिया: जन्माष्टमी के बाद अब कान्हा की छठी! जानिए कब मनाया जाएगा श्रीकृष्ण छठियार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। अब जन्मोत्सव के बाद भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के छठियार यानी छठी उत्सव का इंतजार है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद उनकी छठी मनाई जाती है। इस अवसर पर बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें नए वस्त्र, मुकुट व आभूषण पहनाकर भोग लगाया जाता है। छठियार के अवसर पर मंदिरों और घरों में भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, फल, मिठाई और अन्य पारंपरिक पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके बाद पूजा-अर्चना और आरती के साथ प्रसाद का वितरण किया जाता है। हालांकि छठियार की तारीख को लेकर अलग-अलग स्थानीय परंपराएं हैं। कुछ पंचांगों और धार्मिक परंपराओं में 2026 में लड्डू गोपाल की छठी 6 सितंबर को बताई गई है, जबकि कई जगह जन्म के छठे दिन की गणना के अनुसार अलग तारीख पर आयोजन किया जाता है। इसलिए श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर की परंपरा के अनुसार छठियार मनाएं। कृष्ण जन्माष्टमी के बाद भी मंदिरों और घरों में कान्हा की भक्ति का उत्साह जारी है और छठियार को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।1