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जशपुर : बगीचा के रौनी घाट से बड़ी ख़बर सामने आ रही है,जानकारी के मुताबिक एक ट्रैक्टर चालक ढलान रोड़ पर वाहन को न्यूट्रल कर बगीचा कि ऒर उतार रहा था। उसी वक्त अचानक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर तेज रफ्तार में निचे खाई में पलट गया। बताया जा रहा है,हादसा इतना जबरदस्त था कि आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई,जानकारी के अनुसार स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। बताया जा रहा है, चालक को गंभीर चोटें आई हैं, हालांकि उसकी स्थिति को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है,घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि रौनी घाट की खतरनाक ढलान पर इस तरह की लापरवाही कभी भी बड़ा हादसा बन सकती है।
क्राइम कण्ट्रोल न्यूज़ सी.सी.एफ
जशपुर : बगीचा के रौनी घाट से बड़ी ख़बर सामने आ रही है,जानकारी के मुताबिक एक ट्रैक्टर चालक ढलान रोड़ पर वाहन को न्यूट्रल कर बगीचा कि ऒर उतार रहा था। उसी वक्त अचानक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर तेज रफ्तार में निचे खाई में पलट गया। बताया जा रहा है,हादसा इतना जबरदस्त था कि आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई,जानकारी के अनुसार स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। बताया जा रहा है, चालक को गंभीर चोटें आई हैं, हालांकि उसकी स्थिति को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है,घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि रौनी घाट की खतरनाक ढलान पर इस तरह की लापरवाही कभी भी बड़ा हादसा बन सकती है।
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- निलंबित एसडीएम करुण डहरिया को रिमांड पर लेकर पहुंची पुलिस, आक्रोशित ग्रामीणों ने घेरा काफिला, इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा बलरामपुर। कुसमी के तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया से जुड़ा ग्रामीण की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद से क्षेत्र में आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को जब पुलिस निलंबित एसडीएम करुण डहरिया को रिमांड पर लेकर पूछताछ के लिए कुसमी क्षेत्र पहुंची, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और पुलिस के काफिले को घेर लिया। आक्रोशित भीड़ ने “एसडीएम को फांसी दो” के नारे लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे कुछ देर के लिए इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। घटना के बाद से बढ़ता गया आक्रोश दरअसल, कुसमी क्षेत्र में कुछ समय पहले एक ग्रामीण के साथ कथित रूप से मारपीट की घटना सामने आई थी। आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया ने किसी विवाद के दौरान ग्रामीण के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। मारपीट में गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ग्रामीण की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और लोगों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया। घटना को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शासन ने तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने करुण डहरिया के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। इस बीच पुलिस लगातार मामले की जांच में जुटी रही और घटना से जुड़े तथ्यों को खंगालने का प्रयास किया जा रहा है। पूछताछ के लिए पुलिस ने लिया रिमांड जांच को आगे बढ़ाने और घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ के लिए पुलिस ने न्यायालय से करुण डहरिया का रिमांड मांगा था। अदालत से अनुमति मिलने के बाद बुधवार को पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर कुसमी क्षेत्र पहुंची, ताकि घटना से जुड़े स्थानों और परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। ग्रामीणों ने घेरा पुलिस का काफिला जैसे ही ग्रामीणों को इस बात की जानकारी मिली कि आरोपी पूर्व एसडीएम को पुलिस कुसमी क्षेत्र लेकर आई है, गांवों में यह खबर तेजी से फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर इकट्ठा हो गए और पुलिस के वाहनों को रोकते हुए काफिले को घेर लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने “एसडीएम को फांसी दो” के नारे लगाए और कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने और रास्ता खाली कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अधिकारियों ने समझाइश देकर कराया शांत हालात बिगड़ते देख वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों की समझाइश के बाद धीरे-धीरे भीड़ शांत हुई और स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सका। इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरे कुसमी क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वहीं मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका आंदोलन और संघर्ष जारी रहेगा। इस पूरे मामले पर अब प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।1
- तेज रफ्तार कार ने ली युवक की जान : ग्रामीणों ने 12 घंटे तक NH-43 किया जाम, प्रशासन की समझाइश के बाद शांत हुआ मामला हादसे के बाद ग्रामीणों ने किया चक्काजाम सीतापुर के गुतुरमा में कार-बाइक टक्कर में युवक की मौत के बाद ग्रामीणों ने 12 घंटे तक नेशनल हाईवे-43 जाम किया। प्रशासन की समझाइश के बाद मामला शांत। सीतापुर में देर रात नेशनल हाइवे-43 में ग्राम गुतुरमा स्थित उड़िया होटल के पास कार ने बाइक सवार को ठोकर मार दी। इस घटना में ग्राम लीचिरमा निवासी बाइक सवार युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। युवक की मौत से आक्रोशित परिजनों समेत ग्रामीणों ने देर तक नेशनल हाईवे जाम कर दिया। जिसके काफी देर बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम खत्म किया है। मिली जानकारी के अनुसार, सड़क दुर्घटना में मृत युवक के शव के साथ 12 घंटे तक नेशनल हाईवे जाम करने वाले ग्रामीणों ने आखिरकार समझाइश के बाद चक्काजाम समाप्त कर दिया। घटना के अगले दिन लगभग 12 बजे मौके पर पहुँचे पूर्व मंत्री अमरजीत भगत एडिशनल एसपी अमोलक सिंह ढिल्लो, तहसीलदार रुपाली मेश्राम समेत अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधियों द्वारा काफी मान मनौव्वल एवं समझाइश के बाद मृतक के परिजन-ग्रामीण माने और चक्काजाम समाप्त किया। विधायक ने भेजे अपने प्रतिनिधि इस घटना के बाद चुनावी दौरे पर पश्चिम बंगाल गए विधायक रामकुमार टोप्पो ने देर रात प्रशासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधा और पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद देने की बात कही थी। इस दुःखद घटना के बाद विधायक ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मौके पर अपने प्रतिनिधि भी भेजे ताकि पीड़ित परिवार को जरूरत के अनुसार सहयोग किया जा सके। जैसे-तैसे शांत हुए मृतक के परिजन और ग्रामीण चक्काजाम के दौरान प्रशासन की ओर से मौके पर मौजूद तहसीलदार रुपाली मेश्राम ने पीड़ित परिजनों को शासन द्वारा दी जाने वाली तात्कालिक सहायता राशि के रूप में 25 हजार रुपये प्रदान किया। जिसके बाद पुलिस परिजन के साथ शव लेकर हॉस्पिटल पहुँची। जहाँ पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। चक्काजाम समाप्त होते ही पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली और नेशनल हाईवे पर आवागमन बहाल कराया। पीड़ित परिवार को दिया गया 25 हजार मुआवजा इस संबंध में तहसीलदार रुपाली मेश्राम ने बताया कि, तात्कालिक सहायता राशि के रूप में पीड़ित परिवार को 25 हजार मुआवजे के रूप में दी गई है। इसके अलावा शासन स्तर से जो सहायता राशि दी जाती है। वो भी औपचारिकता पूरी करने के बाद पीड़ित परिवार को दिया जाएगा। इस दौरान काफी संख्या में आसपास क्षेत्र के ग्रामीण जनप्रतिनिधि पंच सरपंच एवं पुलिस बल मौके पर मौजूद थी। कार सवारों को देर रात अपने साथ थाने ले गई पुलिस देर रात कार की ठोकर से युवक की मौत के बाद मौके पर पहुँची पुलिस कार में सवार एक पुरुष एक महिला समेत नाबालिग को अपने साथ थाने ले गई।प्रत्यक्षदर्शियों के बताए अनुसार कार में नाबालिग समेत दो पुरुष और एक महिला सवार थे।इसके अलावा कार में शराब की शीशी सिगरेट समेत आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है। हादसे के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल जिसे देखने के बाद प्रत्यक्षदर्शियों के कहना है कि नाबालिग को छोड़ बाकी सभी नशे में धुत होकर और कार में ही मौज मस्ती कर रहे थे। इसी बीच कार सवार युवक को सामने देख कार चालक असंतुलित हो गया और बाइक को ठोकर मार दी। जिसकी वजह से युवक की मौत हो गई और माता पिता ने हमेशा के लिए अपना जवान बेटा खो दिया। इस हादसे के बाद माता पिता समेत घरवालों का रो रोकर बुरा हाल है1
- जिला बलरामपुर रामानुजगंज लोकेशन...........बलरामपुर एंकर..बलरामपुर जिले के कुसमी में सोशल मीडिया पर मुस्लिम समाज के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। इस अपमानजनक कृत्य से आक्रोशित मुस्लिम समाज के लोगों ने एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया। समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने आरोपियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। बीओ01....मामला कुछ दिन पहले का है, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कुछ युवकों द्वारा मुस्लिम समाज को निशाना बनाते हुए अभद्र भाषा और आपत्तिजनक पोस्ट साझा की गई थी। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय में गहरा असंतोष फैल गया। कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल धरना दे रहे लोगों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी और साक्ष्य भी सौंपे गए थे। इसके बावजूद, कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। बीओ02... समाज के लोगों ने कुसमी में एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे शांति बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन उनकी आस्था और सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपियों पर सख्त से सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की जाए। किसी न किसी बहाने से मुस्लिम समाज को लगातार निशाना बनाया जाता है, जो किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन हमारी सहिष्णुता का इम्तिहान न ले और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजे। बाइट.. 1.. विरासत कुजूर थाना प्रभारी कुसमी 2 शादाब आजम रिजवी1
- बलरामपुर@ छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में मंगलवार, 31 मार्च 2026 को जिला मुख्यालय बलरामपुर के चांदो चौक स्थित शहीद स्मारक में भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहीद वीर जवानों की पावन स्मृति में दीप प्रज्वलित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शाम करीब 7:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता एवं नगरवासी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्र सेवा एवं देश की एकता-अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल, जिला महामंत्री भानु प्रकाश दीक्षित, नगरपालिका अध्यक्ष लोधी राम एक्का, एवं भाजयुमो जिलाध्यक्ष मंगलम पाण्डेय सहित अन्य पदाधिकारी एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने में योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष प्रमथ मल्लिक, मंडल महामंत्री मनोज दास, कृष गुप्ता सहित युवा मोर्चा के अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से शहीदों के बलिदान को स्मरण करते हुए राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।1
- ब्रेकिंग न्यूज़ रिपोर्ट ग्राम पंचायत परसा, जनपद अंबिकापुर में अव्यवस्थाओं का अंबार देखने को मिल रहा है। सड़क किनारे बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय की हालत बेहद खराब हो चुकी है। प्रतीक्षालय में लगी सभी सीटें उखाड़ ली गई हैं, जिससे राहगीरों और यात्रियों को बैठने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले दुकानदार भी गंदगी के बीच अपना सामान बेचने को मजबूर हैं। आसपास साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं होने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द प्रतीक्षालय की मरम्मत कर सीटों की व्यवस्था की जाए और क्षेत्र में साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। रिपोर्ट: हिमांशु राज, एमडी न्यूज़, अंबिकापुर 📞 78058380762
- Post by Ratan Choudhry1
- ..बलरामपुर: 'रक्षक ही बने भक्षक?' बेलकोना के हणहा जंगल में हजारों पेड़ों की बलि, वन भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा एंकर...शंकरगढ़, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इन दिनों 'जल, जंगल और जमीन' को बचाने के दावों की हवा निकलती दिखाई दे रही है। ताजा मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव का है, जहां कभी बेशकीमती पेड़ों से लदा हणहा जंगल आज भू-माफियाओं और अवैध कब्जेधारियों की भेंट चढ़ चुका है। आरोप है कि यहाँ हजारों पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है बीओ01..हैरानी की बात यह है कि जिस जंगल को बचाने के लिए शासन हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है, उसे चंद रसूखदारों ने अधिकारियों की नाक के नीचे उजाड़ दिया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे खेल में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। जंगल की जमीन की खुलेआम 'सौदेबाजी' की गई और उसे खेती या अन्य कार्यों के लिए बेच दिया गया, जबकि विभाग मूकदर्शक बना रहा। बीओ 02..स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ग्रामीणों के अनुसार: जंगल कटने से क्षेत्र का जलस्तर गिर रहा है।मवेशियों के लिए चारा और लकड़ी का संकट खड़ा हो गया है।पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। बीओ3...सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि आदिवासियों और जंगल का अटूट रिश्ता है, लेकिन यहाँ प्रशासन की मिलीभगत से वन संपदा को लूटा जा रहा है। बीओ04.....बेलकोना का यह मामला केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है जो सरकारी जमीनों और जंगलों को अपना निशाना बना रहा है। अब सवाल यह उठता है कि: क्या शासन इन अवैध कब्जों को हटाकर फिर से वहां वृक्षारोपण कराएगा? दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई होगी या फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? फिलहाल, ग्रामीणों की नजरें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब बेलकोना का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और जंगल सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। रिपोर्ट: अली खान, जिला ब्यूरो1
- बहुचर्चित हंसपुर घटनाक्रम पर नया अपडेट...1
- बलरामपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां जंगलों की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव में हजारों पेड़ों की कटाई कर वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। बलरामपुर जिले में इन दिनों अवैध कब्जा और जमीन हथियाने का खेल तेजी से बढ़ता जा रहा है। कहीं फर्जी पट्टे जारी हो रहे हैं, तो कहीं जंगलों को काटकर वन भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव से सामने आया है, जहां कभी हजारों बेशकीमती पेड़ों से भरा हणहा जंगल आज उजड़ने की कगार पर पहुंच चुका है। आरोप है कि जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले ही इस पूरे खेल में शामिल हो गए। सैकड़ों से हजारों एकड़ वन भूमि की सौदेबाजी कर उसे बेच दिया गया और धीरे-धीरे उस पर कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कटाई और कब्जा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा जंगल खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों के मुताबिक यह जंगल ही उनके जीवन का आधार है, जहां से उन्हें पानी, लकड़ी और रोज़गार मिलता है। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि जंगल खुद मदद की गुहार लगा रहा है। इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब जंगल काटा जा रहा था तब जिम्मेदार अधिकारी कहां थे? क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा था, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई? अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में प्रशासन और वन विभाग क्या कार्रवाई करता है, और क्या उजड़ते जंगल को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।1