बलरामपुर: 'रक्षक ही बने भक्षक?' बेलकोना के हणहा जंगल में हजारों पेड़ों की बलि, वन भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा ..बलरामपुर: 'रक्षक ही बने भक्षक?' बेलकोना के हणहा जंगल में हजारों पेड़ों की बलि, वन भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा एंकर...शंकरगढ़, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इन दिनों 'जल, जंगल और जमीन' को बचाने के दावों की हवा निकलती दिखाई दे रही है। ताजा मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव का है, जहां कभी बेशकीमती पेड़ों से लदा हणहा जंगल आज भू-माफियाओं और अवैध कब्जेधारियों की भेंट चढ़ चुका है। आरोप है कि यहाँ हजारों पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है बीओ01..हैरानी की बात यह है कि जिस जंगल को बचाने के लिए शासन हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है, उसे चंद रसूखदारों ने अधिकारियों की नाक के नीचे उजाड़ दिया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे खेल में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। जंगल की जमीन की खुलेआम 'सौदेबाजी' की गई और उसे खेती या अन्य कार्यों के लिए बेच दिया गया, जबकि विभाग मूकदर्शक बना रहा। बीओ 02..स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ग्रामीणों के अनुसार: जंगल कटने से क्षेत्र का जलस्तर गिर रहा है।मवेशियों के लिए चारा और लकड़ी का संकट खड़ा हो गया है।पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। बीओ3...सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि आदिवासियों और जंगल का अटूट रिश्ता है, लेकिन यहाँ प्रशासन की मिलीभगत से वन संपदा को लूटा जा रहा है। बीओ04.....बेलकोना का यह मामला केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है जो सरकारी जमीनों और जंगलों को अपना निशाना बना रहा है। अब सवाल यह उठता है कि: क्या शासन इन अवैध कब्जों को हटाकर फिर से वहां वृक्षारोपण कराएगा? दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई होगी या फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? फिलहाल, ग्रामीणों की नजरें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब बेलकोना का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और जंगल सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। रिपोर्ट: अली खान, जिला ब्यूरो
बलरामपुर: 'रक्षक ही बने भक्षक?' बेलकोना के हणहा जंगल में हजारों पेड़ों की बलि, वन भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा ..बलरामपुर: 'रक्षक ही बने भक्षक?' बेलकोना के हणहा जंगल में हजारों पेड़ों की बलि, वन भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा एंकर...शंकरगढ़, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इन दिनों 'जल, जंगल और जमीन' को बचाने के दावों की हवा निकलती दिखाई दे रही है। ताजा मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव का है, जहां कभी बेशकीमती पेड़ों से लदा हणहा जंगल आज भू-माफियाओं और अवैध कब्जेधारियों की भेंट चढ़ चुका है। आरोप है कि यहाँ हजारों पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है बीओ01..हैरानी की बात यह है कि जिस जंगल को बचाने के लिए शासन हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है, उसे चंद रसूखदारों ने अधिकारियों की नाक के नीचे उजाड़ दिया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे खेल में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। जंगल की जमीन की खुलेआम 'सौदेबाजी' की गई और उसे खेती या अन्य कार्यों के लिए बेच दिया गया, जबकि विभाग मूकदर्शक बना रहा। बीओ 02..स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ग्रामीणों के अनुसार: जंगल कटने से क्षेत्र का जलस्तर गिर रहा है।मवेशियों के लिए चारा और लकड़ी का संकट खड़ा हो गया है।पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। बीओ3...सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि आदिवासियों और जंगल का अटूट रिश्ता है, लेकिन यहाँ प्रशासन की मिलीभगत से वन संपदा को लूटा जा रहा है। बीओ04.....बेलकोना का यह मामला केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है जो सरकारी जमीनों और जंगलों को अपना निशाना बना रहा है। अब सवाल यह उठता है कि: क्या शासन इन अवैध कब्जों को हटाकर फिर से वहां वृक्षारोपण कराएगा? दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई होगी या फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? फिलहाल, ग्रामीणों की नजरें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब बेलकोना का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और जंगल सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। रिपोर्ट: अली खान, जिला ब्यूरो
- बलरामपुर@ छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में मंगलवार, 31 मार्च 2026 को जिला मुख्यालय बलरामपुर के चांदो चौक स्थित शहीद स्मारक में भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहीद वीर जवानों की पावन स्मृति में दीप प्रज्वलित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शाम करीब 7:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता एवं नगरवासी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्र सेवा एवं देश की एकता-अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल, जिला महामंत्री भानु प्रकाश दीक्षित, नगरपालिका अध्यक्ष लोधी राम एक्का, एवं भाजयुमो जिलाध्यक्ष मंगलम पाण्डेय सहित अन्य पदाधिकारी एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने में योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष प्रमथ मल्लिक, मंडल महामंत्री मनोज दास, कृष गुप्ता सहित युवा मोर्चा के अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से शहीदों के बलिदान को स्मरण करते हुए राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।1
- ..बलरामपुर: 'रक्षक ही बने भक्षक?' बेलकोना के हणहा जंगल में हजारों पेड़ों की बलि, वन भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा एंकर...शंकरगढ़, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इन दिनों 'जल, जंगल और जमीन' को बचाने के दावों की हवा निकलती दिखाई दे रही है। ताजा मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव का है, जहां कभी बेशकीमती पेड़ों से लदा हणहा जंगल आज भू-माफियाओं और अवैध कब्जेधारियों की भेंट चढ़ चुका है। आरोप है कि यहाँ हजारों पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है बीओ01..हैरानी की बात यह है कि जिस जंगल को बचाने के लिए शासन हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है, उसे चंद रसूखदारों ने अधिकारियों की नाक के नीचे उजाड़ दिया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे खेल में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। जंगल की जमीन की खुलेआम 'सौदेबाजी' की गई और उसे खेती या अन्य कार्यों के लिए बेच दिया गया, जबकि विभाग मूकदर्शक बना रहा। बीओ 02..स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ग्रामीणों के अनुसार: जंगल कटने से क्षेत्र का जलस्तर गिर रहा है।मवेशियों के लिए चारा और लकड़ी का संकट खड़ा हो गया है।पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। बीओ3...सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि आदिवासियों और जंगल का अटूट रिश्ता है, लेकिन यहाँ प्रशासन की मिलीभगत से वन संपदा को लूटा जा रहा है। बीओ04.....बेलकोना का यह मामला केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है जो सरकारी जमीनों और जंगलों को अपना निशाना बना रहा है। अब सवाल यह उठता है कि: क्या शासन इन अवैध कब्जों को हटाकर फिर से वहां वृक्षारोपण कराएगा? दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई होगी या फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? फिलहाल, ग्रामीणों की नजरें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब बेलकोना का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और जंगल सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। रिपोर्ट: अली खान, जिला ब्यूरो1
- Post by Ratan Choudhry1
- बहुचर्चित हंसपुर घटनाक्रम पर नया अपडेट...1
- बलरामपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां जंगलों की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव में हजारों पेड़ों की कटाई कर वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। बलरामपुर जिले में इन दिनों अवैध कब्जा और जमीन हथियाने का खेल तेजी से बढ़ता जा रहा है। कहीं फर्जी पट्टे जारी हो रहे हैं, तो कहीं जंगलों को काटकर वन भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव से सामने आया है, जहां कभी हजारों बेशकीमती पेड़ों से भरा हणहा जंगल आज उजड़ने की कगार पर पहुंच चुका है। आरोप है कि जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले ही इस पूरे खेल में शामिल हो गए। सैकड़ों से हजारों एकड़ वन भूमि की सौदेबाजी कर उसे बेच दिया गया और धीरे-धीरे उस पर कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कटाई और कब्जा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा जंगल खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों के मुताबिक यह जंगल ही उनके जीवन का आधार है, जहां से उन्हें पानी, लकड़ी और रोज़गार मिलता है। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि जंगल खुद मदद की गुहार लगा रहा है। इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब जंगल काटा जा रहा था तब जिम्मेदार अधिकारी कहां थे? क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा था, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई? अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में प्रशासन और वन विभाग क्या कार्रवाई करता है, और क्या उजड़ते जंगल को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।1
- Post by Mr Dayashankar Yadav1
- #समुदायों के बीच पीने की पानी को लेकर बहुत बड़ी संकट खड़ी हो चुकी है। साथ ही कुछ दबंगों के द्वारा भी जनजाति को दबाया जा रहा है। जो बिल्कुल गलत है। आजाद भारत में रहने चलने और हक सबको है।1
- जिला बलरामपुर रामानुजगंज लोकेशन............बलरामपुर स्लग....निलंबित एसडीएम डहरिया को रिमांड पर लेकर पहुंची पुलिस, आक्रोशित ग्रामीणों ने घेरा काफिला एंकर...बलरामपुर। कुसमी के तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया द्वारा ग्रामीण के साथ कथित मारपीट और उसके बाद हुई मौत का मामला अब और गरमा गया है। बुधवार को जब पुलिस आरोपी डहरिया को रिमांड पर लेकर पूछताछ के लिए कुसमी पहुंची, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। जैसे ही ग्रामीणों को खबर मिली कि आरोपी पूर्व एसडीएम को क्षेत्र में लाया गया है, बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के वाहनों को रोक लिया और "एसडीएम को फांसी दो" के नारे लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। आरोप है कि करुण डहरिया ने एक ग्रामीण के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था और पुलिस ने हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। एहतियात के तौर पर पूरे कुसमी इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मृतक के परिजनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूर्ण न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। रिपोर्ट: अली खान, जिला ब्यूरो1