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कानपुर–असारवा साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेन का संचालन कल से होगा,केशवरायपाटन रेल्वे स्टेशन पर होगा ठहराव कानपुर–असारवा साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेन का संचालन कल से होगा,केशवरायपाटन रेल्वे स्टेशन पर होगा ठहराव
Nitin Babar Journalist
कानपुर–असारवा साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेन का संचालन कल से होगा,केशवरायपाटन रेल्वे स्टेशन पर होगा ठहराव कानपुर–असारवा साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेन का संचालन कल से होगा,केशवरायपाटन रेल्वे स्टेशन पर होगा ठहराव
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- कानपुर–असारवा साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेन का संचालन कल से होगा,केशवरायपाटन रेल्वे स्टेशन पर होगा ठहराव1
- एक तरफ सरकार के दावे हैं कि हमारे पास गैस, तेल के दो महीने तक के रिजर्व हैं, या ये कि स्ट्रैट ऑफ हार्मुज से हमारे तेल गैस के कंटेनर आसानी निकल रहे हैं या ये कि किल्लत की बात करके देश में पैनिक पैदा किया जा रहा है लेकिन जमीनी सच्चाई इन सब दावों और खरीदी हुई मीडिया के जुड़े दिन रात सरकार का भोंपू बनकर हकीकत छुपाने से बदलेगी नहीं, ईरान पर हमले के एक हफ्ते बाद से ही इस क्राइसिस का असर दिखना शुरू हो गया था, हालत ये है कि अब ब्लैक में भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहा...1
- Post by Mahendar.merotha1
- जंग का आज 37 वां दिन: वो पल जब अमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर पर ईरानी हीट-सीकिंग मिसाइल का हमला हुआ... --- अमेरिका के एक F-15 पायलट को बचाने के ऑपरेशन में अमरीका का भारी नुकसान हुआ है। सिर्फ़ विमान और उपकरणों का ही नुकसान करीब 386 मिलियन डॉलर तक बताया जा रहा है। आपरेशन के बाद यह उपकरण खुद अमरीकी सेना ने विस्फोटकों के हवाले इसलिए कर दिये क्योंकि अगर वे साबुत रहते तो ईरान चीन और रूस की प्रयोगशालाओं में उनकी प्रतिभा को आंक लिया जाता। F-15E Strike Eagle: लगभग 100 मिलियन डॉलर A-10 Thunderbolt II: लगभग 18.8 मिलियन डॉलर 2 C-130 Hercules: कुल मिलाकर 150 से 200+ मिलियन डॉलर MH-6 Little Bird: लगभग 7.5 मिलियन डॉलर 1–2 MQ-9 Reaper ड्रोन: लगभग 30 से 60 मिलियन डॉलर लेकिन ईरान में फंसे एक अमेरिकी पायलट की जान बचाने की कीमत ट्रंप के राजनीतिक भविष्य को लहूलुहान कर सकती थी। स्रोत: Clash Report -शीतल पी सिंह1
- कोटा। शक्तिनगर कैंप कार्यालय में जनसुनवाई कर रहे हैं बिरला समस्याओं के समाधान को लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश इस दौरान परिंडे बांधने के अभियान का किया शुभारंभ आज विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे बिरला दोपहर 1 बजे नयापुरा में जल संसाधन भवन का करेंगे लोकार्पण 4 बजे बजरंग नगर में ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम का लोकार्पण शाम 5 बजे श्रीनाथपुरम स्टेडियम के पास विकास पथ का करेंगे शिलान्यास1
- कोटा। शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राउण्ड टेबल इण्डिया एवं अनएकेडमी के बीच एमओयू कर आर्थिक रूप से पिछड़े लेकिन होनहार विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की योजना शुरू की गई है। टेबल चेयरमैन रोहिताभ सोनी ने बताया कि इस प्रकल्प के प्रथम चरण में राजस्थान चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जयपुर, कोटा, जोधपुर और भीलवाड़ा सहित 8 शहरों —22 राजकीय विद्यालयों से प्रतिभाशाली छात्रों का चयन टेस्ट के माध्यम से किया जाएगा। इस चयन प्रक्रिया में हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों माध्यम के विद्यार्थी शामिल होंगे, यह सभी फटीएस (FTA) स्कूलों के छात्र होंगे। उन्होंने बताया कि कोटा राउंड टेबल द्वारा अब तक 110 से अधिक कक्षाकक्षों का निर्माण किया जा चुका है और इसी तरह राज्यभर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयास लगातार जारी हैं। इस पहल के तहत चयनित छात्रों को JEE एवं NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पूरी तरह निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। Unacademy Kota के अनुभवी फैकल्टी द्वारा नियमित कक्षाएं, डाउट सॉल्विंग सेशन, टेस्ट सीरीज एवं प्रदर्शन विश्लेषण की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। कार्यक्रम में टेबल चेयरमैन रोहिताभ सोनी, टेबल सेक्रेटरी निखिल अग्रवाल, एरिया चेयरमैन धर्मवीर पंड्या, नेशनल ट्रेजरर विपुल बुथड़ा, एरिया सेक्रेटरी किंशुक जैन, एरिया कॉर्पोरेट अलायंस जसकरण आनंद, अनएकेडमी सेंटर हेड कोटा संजय सिंह, सुयश प्रताप सिंह तथा अनएकेडमी फाउंडेशन कोटा हेड सौरभ सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।4
- बड़गांव |हाड़ौती की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ने सात समंदर पार एक नया इतिहास रचा है। बारां जिले के पाटोन्दा गांव में पिछले 165 वर्षों से आयोजित हो रही अद्वितीय 'ढाई कड़ी की रामलीला' अब अंतर्राष्ट्रीय शोध का विषय बन चुकी है। इस अनूठी लोक कला की महत्ता को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ने अपनी प्रतिष्ठित पुस्तक 'रुटलेज हैंडबुक ऑफ फेस्टिवल 2018' में इस पर एक विशेष अध्याय शामिल किया है। डॉ. अनुकृति के शोध से मिली वैश्विक पहचान पाटोन्दा की इस विरासत को विश्व पटल पर लाने का श्रेय डॉ. अनुकृति शर्मा को जाता है। उनके गहन शोध के बाद ही इस रामलीला की बारीकियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।इसके महान रचयिता गुरु गणपत लाल दाधीच द्वारा रचित इस रामलीला के 'ढाई कड़ी' के छंदों और संवादों की शैली इतनी विलक्षण है कि विदेशी शिक्षाविद् भी इसे भारतीय संस्कृति का एक अनूठा मॉडल मान रहे हैं। अयोध्या में सरकारी खर्च पर दी प्रस्तुति गांव की इस रामलीला की ख्याति केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मंच पर भी मनवाया है। भारत सरकार के आमंत्रण पर इस रामलीला दल ने अयोध्या में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रामायण मेले' में अपनी कला का प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि कलाकारों का पूरा खर्च भारत सरकार द्वारा वहन किया गया, जो पाटोन्दा की इस कला के प्रति राष्ट्रीय सम्मान को दर्शाता है। बिना ट्रेनिंग, रग-रग में रची है रामलीला इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ के कलाकारों को किसी रिहर्सल या औपचारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ती। गांव के बालक, युवा और बुजुर्गों के मन में यह रामलीला इस कदर रची-बसी है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह कला बिना किसी कागजी रिहर्सल के हस्तांतरित हो रही है। डेढ़ सदी से भी अधिक समय से यह सिलसिला अनवरत जारी है। हाड़ौती का गौरव बनी 'ढाई कड़ी' पाटोन्दा की यह रामलीला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली बारां जिले की पहली रामलीला है। यह न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की उस जीवंत संस्कृति का उदाहरण है जो आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है।1
- खेड़िया दुर्जन में खेत मे गेंहू की फसल निकालते समय थ्रेसर में हाथ आने से युवक गंभीर घायल, कोटा के अस्पताल में उपचार जारी। 21