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भारतीय कानून के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी, यहाँ तक कि थाना प्रभारी (SHO) को भी कानूनी प्रक्रिया और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी पूर्व सूचना (Notice) के किसी नागरिक या क्लाइंट को परेशान (Harassment) करना कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध और अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। ​महिला अधिवक्ता द्वारा ध्यान दिलाई गई कानून की प्रमुख शक्तियां और प्रावधान इस प्रकार हैं: ​1. नोटिस भेजना अनिवार्य (CRPC Section 41A / BNSS Section 35) ​किसी भी व्यक्ति को जांच में शामिल होने के लिए बुलाने से पहले पुलिस को लिखित रूप में नोटिस भेजना अनिवार्य है। ​बिना नोटिस दिए किसी को थाने बुलाना, धमकाना या उत्पीड़न करना सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के दिशानिर्देशों (Arnesh Kumar v. State of Bihar) का उल्लंघन है। ​2. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन (Article 21) ​भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। ​पुलिस द्वारा बिना किसी वैध कानूनी आधार के किसी को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करना संविधान के अनुच्छेद 21 का हनन है। ​3. SHO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की शक्तियां ​उच्च अधिकारियों से शिकायत: एसपी (SP), डीसीपी (DCP) या आईजी (IG) से SHO के दुर्व्यवहार की लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ​अदालत में रिट याचिका (Writ Petition): उच्च न्यायालय (High Court) में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जा सकती है। ​मानवाधिकार आयोग (NHRC/SHRC): मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाता है। ​न्यायिक शिकायत (Private Complaint): धारा 200 CrPC के तहत मजिस्ट्रेट के सामने संबंधित SHO के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की जा सकती है। ​4. निलंबन और विभागीय कार्रवाई ​यदि यह साबित हो जाता है कि SHO ने बिना किसी कानूनी आधार या नोटिस के किसी नागरिक को प्रताड़ित किया है, तो उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकती है, जिसके तहत उसे निलंबित (Suspend) या सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। ​कानून स्पष्ट करता है कि वर्दी या पद किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं बनाता; प्रक्रिया का पालन न करने पर एक SHO पर भी आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।

5 hrs ago
user_रामानंद सागर
रामानंद सागर
Librarian Chauri Chaura, Gorakhpur•
5 hrs ago

भारतीय कानून के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी, यहाँ तक कि थाना प्रभारी (SHO) को भी कानूनी प्रक्रिया और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी पूर्व सूचना (Notice) के किसी नागरिक या क्लाइंट को परेशान (Harassment) करना कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध और अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। ​महिला अधिवक्ता द्वारा ध्यान दिलाई गई कानून की प्रमुख शक्तियां और प्रावधान इस प्रकार हैं: ​1. नोटिस भेजना अनिवार्य (CRPC Section 41A / BNSS Section 35) ​किसी भी व्यक्ति को जांच में शामिल होने के लिए बुलाने से पहले पुलिस को लिखित रूप में नोटिस भेजना अनिवार्य है। ​बिना नोटिस दिए किसी को थाने बुलाना, धमकाना या उत्पीड़न करना सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के दिशानिर्देशों (Arnesh Kumar v. State of Bihar) का उल्लंघन है। ​2. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन (Article 21) ​भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। ​पुलिस द्वारा बिना किसी वैध कानूनी आधार के किसी को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करना संविधान के अनुच्छेद 21 का हनन है। ​3. SHO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की शक्तियां ​उच्च अधिकारियों से शिकायत: एसपी (SP), डीसीपी (DCP) या आईजी (IG) से SHO के दुर्व्यवहार की लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ​अदालत में रिट याचिका (Writ Petition): उच्च न्यायालय (High Court) में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जा सकती है। ​मानवाधिकार आयोग (NHRC/SHRC): मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाता है। ​न्यायिक शिकायत (Private Complaint): धारा 200 CrPC के तहत मजिस्ट्रेट के सामने संबंधित SHO के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की जा सकती है। ​4. निलंबन और विभागीय कार्रवाई ​यदि यह साबित हो जाता है कि SHO ने बिना किसी कानूनी आधार या नोटिस के किसी नागरिक को प्रताड़ित किया है, तो उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकती है, जिसके तहत उसे निलंबित (Suspend) या सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। ​कानून स्पष्ट करता है कि वर्दी या पद किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं बनाता; प्रक्रिया का पालन न करने पर एक SHO पर भी आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।

More news from Gorakhpur and nearby areas
  • प्रयागराज: अपनी समस्या को लेकर एसडीएम से भिड़ी महिला, तहसील परिसर में जमकर हुआ हंगामा ​प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित तहसील परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अपनी किसी पुरानी समस्या का निस्तारण न होने से नाराज एक महिला सीधे उपजिलाधिकारी (एसडीएम) से भिड़ गई। पीड़ित महिला ने अधिकारी के सामने ही तहसील प्रशासन पर लापरवाही और सुनवाई न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा। ​क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, महिला पिछले काफी समय से अपनी समस्या (जमीनी विवाद / राशन / राजस्व संबंधी) को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही थी। लगातार शिकायतों के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो महिला का सब्र का बांध टूट गया। तहसील में जनसुनवाई के दौरान जैसे ही एसडीएम अपने कक्ष से बाहर निकले या फरियादियों की सुन रहे थे, महिला उनसे तीखी बहस करने लगी। ​तहसील परिसर में मची खलबली महिला के आक्रामक रुख को देखकर मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों ने उसे शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन महिला अपनी बात पर अड़ी रही। महिला का कहना था कि "बार-बार आश्वासन देने के बाद भी अधिकारी केवल फाइलें टरका रहे हैं और धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।" ​अधिकारी का रुख मामला बढ़ता देख एसडीएम ने महिला को शांत कराने की कोशिश की और उनकी समस्या को ध्यानपूर्वक सुना। अधिकारी ने संबंधित क्षेत्र के कर्मचारियों को तत्काल मौके पर जाकर जांच करने और पारदर्शी तरीके से मामले के निस्तारण के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि आम जनता की शिकायतों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ​फिलहाल, इस पूरे वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर लोग स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
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    प्रयागराज: अपनी समस्या को लेकर एसडीएम से भिड़ी महिला, तहसील परिसर में जमकर हुआ हंगामा

​प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित तहसील परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अपनी किसी पुरानी समस्या का निस्तारण न होने से नाराज एक महिला सीधे उपजिलाधिकारी (एसडीएम) से भिड़ गई। पीड़ित महिला ने अधिकारी के सामने ही तहसील प्रशासन पर लापरवाही और सुनवाई न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा।
​क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, महिला पिछले काफी समय से अपनी समस्या (जमीनी विवाद / राशन / राजस्व संबंधी) को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही थी। लगातार शिकायतों के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो महिला का सब्र का बांध टूट गया। तहसील में जनसुनवाई के दौरान जैसे ही एसडीएम अपने कक्ष से बाहर निकले या फरियादियों की सुन रहे थे, महिला उनसे तीखी बहस करने लगी।
​तहसील परिसर में मची खलबली
महिला के आक्रामक रुख को देखकर मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों ने उसे शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन महिला अपनी बात पर अड़ी रही। महिला का कहना था कि "बार-बार आश्वासन देने के बाद भी अधिकारी केवल फाइलें टरका रहे हैं और धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।"
​अधिकारी का रुख
मामला बढ़ता देख एसडीएम ने महिला को शांत कराने की कोशिश की और उनकी समस्या को ध्यानपूर्वक सुना। अधिकारी ने संबंधित क्षेत्र के कर्मचारियों को तत्काल मौके पर जाकर जांच करने और पारदर्शी तरीके से मामले के निस्तारण के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि आम जनता की शिकायतों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
​फिलहाल, इस पूरे वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर लोग स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
    user_रामानंद सागर
    रामानंद सागर
    Librarian Chauri Chaura, Gorakhpur•
    5 hrs ago
  • कप्तानगंज CHC में जच्चा-बच्चा की मौत पर हंगामा, परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
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    कप्तानगंज CHC में जच्चा-बच्चा की मौत पर हंगामा, परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
    user_MANOJ KUMAR YADAV
    MANOJ KUMAR YADAV
    Video Creator हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • कुशीनगर हाटा विधानसभा थाना क्षेत्र के रहने वाला विशाल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए चड्ढा पानी के टंकी पर पूरा मामला इस वीडियो में देखिए धन्यवाद कुशीनगर हाटा विधानसभा थाना क्षेत्र के रहने वाला विशाल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए चड्ढा पानी के टंकी पर पूरा मामला इस वीडियो में देखिए धन्यवाद
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    कुशीनगर हाटा विधानसभा थाना क्षेत्र के रहने वाला विशाल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए चड्ढा पानी के टंकी पर पूरा मामला इस वीडियो में देखिए धन्यवाद
कुशीनगर हाटा विधानसभा थाना क्षेत्र के रहने वाला विशाल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए चड्ढा पानी के टंकी पर पूरा मामला इस वीडियो में देखिए धन्यवाद
    user_Snews33
    Snews33
    हाटा, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • खजनी में खादी ग्रामोद्योग संस्थान के चौकीदार को गोली लगी, हालत गंभीर | पुलिस जांच में जुटी खजनी में खादी ग्रामोद्योग संस्थान के चौकीदार को गोली लगी, हालत गंभीर | पुलिस जांच में जुटी गोरखपुर के खजनी थाना क्षेत्र में छताई पुल के पास खादी ग्रामोद्योग प्रशिक्षण संस्थान के चौकीदार रोशन सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल अवस्था में सड़क किनारे मिले रोशन सिंह को 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। गोली कैसे लगी और घटना के पीछे क्या वजह है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। #GorakhpurNews #Khajni #KhajniNews #GorakhpurBreakingNews #UPNews #CrimeNews #BreakingNews #Gorakhpur #UttarPradesh #DainikAdhyay
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    खजनी में खादी ग्रामोद्योग संस्थान के चौकीदार को गोली लगी, हालत गंभीर | पुलिस जांच में जुटी
खजनी में खादी ग्रामोद्योग संस्थान के चौकीदार को गोली लगी, हालत गंभीर | पुलिस जांच में जुटी
गोरखपुर के खजनी थाना क्षेत्र में छताई पुल के पास खादी ग्रामोद्योग प्रशिक्षण संस्थान के चौकीदार रोशन सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल अवस्था में सड़क किनारे मिले रोशन सिंह को 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। गोली कैसे लगी और घटना के पीछे क्या वजह है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
#GorakhpurNews #Khajni #KhajniNews #GorakhpurBreakingNews #UPNews #CrimeNews #BreakingNews #Gorakhpur #UttarPradesh #DainikAdhyay
    user_Shreyash Pandey
    Shreyash Pandey
    Local News Reporter वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • गोरखपुर पुलिस ने 15 हजार के इनामी बदमाश को मुठभेड़ में किया गिरफ्तार, पैर में लगी गोली। गोरखपुर में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।खजनी थाना क्षेत्र में देर रात पुलिस और 15 हजार रुपये के इनामी बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई।पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।पकड़े गए बदमाश की पहचान खजनी के भीटी खोरिया निवासी जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन के रूप में हुई है।पुलिस के मुताबिक,लादेन पर हत्या,लूट, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट समेत अलग-अलग थानों में कुल 19 मुकदमे दर्ज हैं और वह रंगदारी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था।दरअसल, मंगलवार की देर रात पुलिस को सूचना मिली थी कि खजनी थाने का वांछित और 15 हजार रुपये का इनामी बदमाश जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन बाघागाड़ा की तरफ से जरलही पुल होते हुए उनवल की ओर जाने वाला है।सूचना मिलते ही खजनी थाना पुलिस और एंटी थेफ्ट सेल की संयुक्त टीम ने जरलही पुल के पास संदिग्ध वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी। बीती देर रात करीब 3 बजकर 15 मिनट पर पुलिस को एक बाइक सवार संदिग्ध दिखाई दिया।पुलिस टीम ने टॉर्च की रोशनी दिखाकर उसे रुकने का इशारा किया और आवाज लगाई। पुलिस के मुताबिक,आवाज सुनते ही बाइक सवार ने पुल पर ही बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की।इसी दौरान बाइक अनियंत्रित हो गई और बदमाश लड़खड़ाकर गिर पड़ा।पुलिस टीम ने मौके पर उसे चारों तरफ से घेर लिया और आत्मसमर्पण करने के लिए कहा।आरोप है कि घिरता देख बदमाश ने तमंचा निकालकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस के मुताबिक,बदमाश ने एक गोली चलाई,जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।जवाबी फायरिंग में गोली उसके बाएं पैर में लगी और पुलिस टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।घायल बदमाश को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उसका उपचार चल रहा है।पुलिस ने मौके से एक तमंचा, कारतूस और बिना नंबर प्लेट की प्लेटिना बाइक बरामद की है।पुलिस के मुताबिक जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है।उसके खिलाफ चिलुआताल, कैंट,गोरखनाथ, शाहपुर, कोतवाली, बेलीपार,खजनी और बांसगांव थानों में हत्या, लूट,रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 19 मुकदमे दर्ज हैं। रंगदारी के एक मामले में वह लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था।एसपी साउथ दिनेश पुरी ने बताया कि पुलिस को बदमाश के किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में इलाके से गुजरने की सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर घेराबंदी की गई और पुलिस कार्रवाई में 15 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरी कार्रवाई को खजनी थाना प्रभारी जयंत कुमार सिंह और एंटी थेफ्ट सेल प्रभारी सुनील कुमार राय के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।संयुक्त पुलिस टीम की कार्रवाई के बाद अब पुलिस गिरफ्तार बदमाश से पूछताछ कर उसके आपराधिक नेटवर्क और उसके साथ जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।गोरखपुर पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि जिले में वांछित और इनामी अपराधियों पर शिकंजा कसने का अभियान जारी है। 19 मुकदमों के आरोपी और लंबे समय से फरार चल रहे 15 हजार के इनामी जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन का मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार होना पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। अब पुलिस की नजर इस बात पर है कि उसके आपराधिक नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और आने वाले समय में पूछताछ से कौन से नए राज सामने आते हैं। बाइट-दिनेश कुमार पूरी एसपी साउथ गोरखपुर
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    गोरखपुर पुलिस ने 15 हजार के इनामी बदमाश को मुठभेड़ में किया गिरफ्तार, पैर में लगी गोली।
गोरखपुर में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।खजनी थाना क्षेत्र में देर रात पुलिस और 15 हजार रुपये के इनामी बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई।पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।पकड़े गए बदमाश की पहचान खजनी के भीटी खोरिया निवासी जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन के रूप में हुई है।पुलिस के मुताबिक,लादेन पर हत्या,लूट, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट समेत अलग-अलग थानों में कुल 19 मुकदमे दर्ज हैं और वह रंगदारी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था।दरअसल, मंगलवार की देर रात पुलिस को सूचना मिली थी कि खजनी थाने का वांछित और 15 हजार रुपये का इनामी बदमाश जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन बाघागाड़ा की तरफ से जरलही पुल होते हुए उनवल की ओर जाने वाला है।सूचना मिलते ही खजनी थाना पुलिस और एंटी थेफ्ट सेल की संयुक्त टीम ने जरलही पुल के पास संदिग्ध वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी।
बीती देर रात करीब 3 बजकर 15 मिनट पर पुलिस को एक बाइक सवार संदिग्ध दिखाई दिया।पुलिस टीम ने टॉर्च की रोशनी दिखाकर उसे रुकने का इशारा किया और आवाज लगाई। पुलिस के मुताबिक,आवाज सुनते ही बाइक सवार ने पुल पर ही बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की।इसी दौरान बाइक अनियंत्रित हो गई और बदमाश लड़खड़ाकर गिर पड़ा।पुलिस टीम ने मौके पर उसे चारों तरफ से घेर लिया और आत्मसमर्पण करने के लिए कहा।आरोप है कि घिरता देख बदमाश ने तमंचा निकालकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस के मुताबिक,बदमाश ने एक गोली चलाई,जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।जवाबी फायरिंग में गोली उसके बाएं पैर में लगी और पुलिस टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।घायल बदमाश को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उसका उपचार चल रहा है।पुलिस ने मौके से एक तमंचा, कारतूस और बिना नंबर प्लेट की प्लेटिना बाइक बरामद की है।पुलिस के मुताबिक जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है।उसके खिलाफ चिलुआताल, कैंट,गोरखनाथ, शाहपुर, कोतवाली, बेलीपार,खजनी और बांसगांव थानों में हत्या, लूट,रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 19 मुकदमे दर्ज हैं। रंगदारी के एक मामले में वह लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था।एसपी साउथ दिनेश पुरी ने बताया कि पुलिस को बदमाश के किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में इलाके से गुजरने की सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर घेराबंदी की गई और पुलिस कार्रवाई में 15 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार कर लिया गया।
इस पूरी कार्रवाई को खजनी थाना प्रभारी जयंत कुमार सिंह और एंटी थेफ्ट सेल प्रभारी सुनील कुमार राय के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।संयुक्त पुलिस टीम की कार्रवाई के बाद अब पुलिस गिरफ्तार बदमाश से पूछताछ कर उसके आपराधिक नेटवर्क और उसके साथ जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।गोरखपुर पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि जिले में वांछित और इनामी अपराधियों पर शिकंजा कसने का अभियान जारी है। 19 मुकदमों के आरोपी और लंबे समय से फरार चल रहे 15 हजार के इनामी जितेंद्र पासवान उर्फ लादेन का मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार होना पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। अब पुलिस की नजर इस बात पर है कि उसके आपराधिक नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और आने वाले समय में पूछताछ से कौन से नए राज सामने आते हैं।
बाइट-दिनेश कुमार पूरी एसपी साउथ गोरखपुर
    user_Amarjeet paswan
    Amarjeet paswan
    Local News Reporter Gorakhpur, Uttar Pradesh•
    5 hrs ago
  • Gorakhpur Flood Alert: सरयू खतरे के निशान से ऊपर, राप्ती भी उफान पर | Gorakhpur Flood News
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    Gorakhpur Flood Alert: सरयू खतरे के निशान से ऊपर, राप्ती भी उफान पर | Gorakhpur Flood News
    user_EN Daily National
    EN Daily National
    Journalist वाराणसी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • राज भवन मार्च के दौरान पटना पुलिस ने तेजस्वी यादव को किया गिरफ्तार, तेजस्वी यादव जिस बस में थे, उस बस को RJD कार्यकर्ताओं ने किया हाईजैक !
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    राज भवन मार्च के दौरान पटना 
पुलिस ने तेजस्वी यादव को किया 
गिरफ्तार, तेजस्वी यादव जिस बस में 
 थे, उस बस को RJD कार्यकर्ताओं 
ने किया हाईजैक !
    user_Birendra Kumar Reporter
    Birendra Kumar Reporter
    देवरिया, देवरिया, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • भारतीय कानून के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी, यहाँ तक कि थाना प्रभारी (SHO) को भी कानूनी प्रक्रिया और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी पूर्व सूचना (Notice) के किसी नागरिक या क्लाइंट को परेशान (Harassment) करना कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध और अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। ​महिला अधिवक्ता द्वारा ध्यान दिलाई गई कानून की प्रमुख शक्तियां और प्रावधान इस प्रकार हैं: ​1. नोटिस भेजना अनिवार्य (CRPC Section 41A / BNSS Section 35) ​किसी भी व्यक्ति को जांच में शामिल होने के लिए बुलाने से पहले पुलिस को लिखित रूप में नोटिस भेजना अनिवार्य है। ​बिना नोटिस दिए किसी को थाने बुलाना, धमकाना या उत्पीड़न करना सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के दिशानिर्देशों (Arnesh Kumar v. State of Bihar) का उल्लंघन है। ​2. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन (Article 21) ​भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। ​पुलिस द्वारा बिना किसी वैध कानूनी आधार के किसी को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करना संविधान के अनुच्छेद 21 का हनन है। ​3. SHO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की शक्तियां ​उच्च अधिकारियों से शिकायत: एसपी (SP), डीसीपी (DCP) या आईजी (IG) से SHO के दुर्व्यवहार की लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ​अदालत में रिट याचिका (Writ Petition): उच्च न्यायालय (High Court) में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जा सकती है। ​मानवाधिकार आयोग (NHRC/SHRC): मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाता है। ​न्यायिक शिकायत (Private Complaint): धारा 200 CrPC के तहत मजिस्ट्रेट के सामने संबंधित SHO के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की जा सकती है। ​4. निलंबन और विभागीय कार्रवाई ​यदि यह साबित हो जाता है कि SHO ने बिना किसी कानूनी आधार या नोटिस के किसी नागरिक को प्रताड़ित किया है, तो उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकती है, जिसके तहत उसे निलंबित (Suspend) या सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। ​कानून स्पष्ट करता है कि वर्दी या पद किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं बनाता; प्रक्रिया का पालन न करने पर एक SHO पर भी आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
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    भारतीय कानून के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी, यहाँ तक कि थाना प्रभारी (SHO) को भी कानूनी प्रक्रिया और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी पूर्व सूचना (Notice) के किसी नागरिक या क्लाइंट को परेशान (Harassment) करना कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध और अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है।

​महिला अधिवक्ता द्वारा ध्यान दिलाई गई कानून की प्रमुख शक्तियां और प्रावधान इस प्रकार हैं:
​1. नोटिस भेजना अनिवार्य (CRPC Section 41A / BNSS Section 35)
​किसी भी व्यक्ति को जांच में शामिल होने के लिए बुलाने से पहले पुलिस को लिखित रूप में नोटिस भेजना अनिवार्य है।
​बिना नोटिस दिए किसी को थाने बुलाना, धमकाना या उत्पीड़न करना सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के दिशानिर्देशों (Arnesh Kumar v. State of Bihar) का उल्लंघन है।
​2. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन (Article 21)
​भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
​पुलिस द्वारा बिना किसी वैध कानूनी आधार के किसी को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करना संविधान के अनुच्छेद 21 का हनन है।
​3. SHO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की शक्तियां
​उच्च अधिकारियों से शिकायत: एसपी (SP), डीसीपी (DCP) या आईजी (IG) से SHO के दुर्व्यवहार की लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
​अदालत में रिट याचिका (Writ Petition): उच्च न्यायालय (High Court) में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जा सकती है।
​मानवाधिकार आयोग (NHRC/SHRC): मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाता है।
​न्यायिक शिकायत (Private Complaint): धारा 200 CrPC के तहत मजिस्ट्रेट के सामने संबंधित SHO के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की जा सकती है।
​4. निलंबन और विभागीय कार्रवाई
​यदि यह साबित हो जाता है कि SHO ने बिना किसी कानूनी आधार या नोटिस के किसी नागरिक को प्रताड़ित किया है, तो उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकती है, जिसके तहत उसे निलंबित (Suspend) या सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।
​कानून स्पष्ट करता है कि वर्दी या पद किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं बनाता; प्रक्रिया का पालन न करने पर एक SHO पर भी आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
    user_रामानंद सागर
    रामानंद सागर
    Librarian Chauri Chaura, Gorakhpur•
    5 hrs ago
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