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कप्तानगंज CHC में जच्चा-बच्चा की मौत पर हंगामा, परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
MANOJ KUMAR YADAV
कप्तानगंज CHC में जच्चा-बच्चा की मौत पर हंगामा, परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
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- कुशीनगर हाटा विधानसभा थाना क्षेत्र के रहने वाला विशाल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए चड्ढा पानी के टंकी पर पूरा मामला इस वीडियो में देखिए धन्यवाद कुशीनगर हाटा विधानसभा थाना क्षेत्र के रहने वाला विशाल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए चड्ढा पानी के टंकी पर पूरा मामला इस वीडियो में देखिए धन्यवाद1
- प्रयागराज: अपनी समस्या को लेकर एसडीएम से भिड़ी महिला, तहसील परिसर में जमकर हुआ हंगामा प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित तहसील परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अपनी किसी पुरानी समस्या का निस्तारण न होने से नाराज एक महिला सीधे उपजिलाधिकारी (एसडीएम) से भिड़ गई। पीड़ित महिला ने अधिकारी के सामने ही तहसील प्रशासन पर लापरवाही और सुनवाई न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, महिला पिछले काफी समय से अपनी समस्या (जमीनी विवाद / राशन / राजस्व संबंधी) को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही थी। लगातार शिकायतों के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो महिला का सब्र का बांध टूट गया। तहसील में जनसुनवाई के दौरान जैसे ही एसडीएम अपने कक्ष से बाहर निकले या फरियादियों की सुन रहे थे, महिला उनसे तीखी बहस करने लगी। तहसील परिसर में मची खलबली महिला के आक्रामक रुख को देखकर मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों ने उसे शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन महिला अपनी बात पर अड़ी रही। महिला का कहना था कि "बार-बार आश्वासन देने के बाद भी अधिकारी केवल फाइलें टरका रहे हैं और धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।" अधिकारी का रुख मामला बढ़ता देख एसडीएम ने महिला को शांत कराने की कोशिश की और उनकी समस्या को ध्यानपूर्वक सुना। अधिकारी ने संबंधित क्षेत्र के कर्मचारियों को तत्काल मौके पर जाकर जांच करने और पारदर्शी तरीके से मामले के निस्तारण के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि आम जनता की शिकायतों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल, इस पूरे वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर लोग स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।1
- राज भवन मार्च के दौरान पटना पुलिस ने तेजस्वी यादव को किया गिरफ्तार, तेजस्वी यादव जिस बस में थे, उस बस को RJD कार्यकर्ताओं ने किया हाईजैक !1
- सामवेद एवं अथर्ववेद पारायण, वैदिक एवं वेद कथा महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ में चिचोली चिचोली में वैदिक एवं वेद कथा महायज्ञ, बड़ी संख्या में श्रद्धालु ले रहे लाभ बैतूल जिले के चिचोली में सुबोध जायसवाल के निवास पर यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद पारायण, वैदिक एवं वेद कथा महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ में चिचोली नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम का लाभ ले रहे हैं। आयोजक सुबोध जायसवाल ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर महायज्ञ एवं वेद कथा का लाभ लेने की अपील की है। चिचोली से संवाददाता राजेंद्र प्रसाद यादव की रिपोर्ट।1
- डाक्टर अजय कुमार शुक्ला कोदई शुक्ला निदान केंद्र पडरौना कुशीनगर के तरफ से पूरे देश वाशियो को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुकमान डाक्टर अजय कुमार शुक्ला कोदई शुक्ला निदान केंद्र पडरौना कुशीनगर के तरफ से पूरे देश वाशियो को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुकमान3
- प्रेम विवाह के बाद प्रेमी ने छोड़ा, न्याय की उम्मीद में तहसील पहुंची युवती कुशीनगर के सेवरही थाना क्षेत्र के गौरी जगदीश गांव का मामला बताया जा रहा है कि करीब एक महीने पहले राधिका ने घर से भागकर किशन से प्रेम विवाह किया था। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही प्रेमी किशन ने राधिका से दूरी बना ली और उसे छोड़ दिया। इसके बाद राधिका न्याय की उम्मीद लेकर तहसील पहुंची और अपनी फरियाद अधिकारियों के सामने रखी। वहीं राधिका की मां ने भी अपनी बेटी के साथ हुई घटना को लेकर बयान देते हुए न्याय की गुहार लगाई। मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि प्रेम विवाह के बाद यदि पति ही साथ छोड़ दे, तो युवती आखिर न्याय के लिए कहां जाए? राधिका की मां का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग की है। प्रेम विवाह के बाद प्रेमी ने छोड़ा, न्याय की उम्मीद में तहसील पहुंची युवती कुशीनगर के सेवरही थाना क्षेत्र के गौरी जगदीश गांव का मामला बताया जा रहा है कि करीब एक महीने पहले राधिका ने घर से भागकर किशन से प्रेम विवाह किया था। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही प्रेमी किशन ने राधिका से दूरी बना ली और उसे छोड़ दिया। इसके बाद राधिका न्याय की उम्मीद लेकर तहसील पहुंची और अपनी फरियाद अधिकारियों के सामने रखी। वहीं राधिका की मां ने भी अपनी बेटी के साथ हुई घटना को लेकर बयान देते हुए न्याय की गुहार लगाई। मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि प्रेम विवाह के बाद यदि पति ही साथ छोड़ दे, तो युवती आखिर न्याय के लिए कहां जाए? राधिका की मां का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग की है।1
- भारतीय कानून के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी, यहाँ तक कि थाना प्रभारी (SHO) को भी कानूनी प्रक्रिया और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी पूर्व सूचना (Notice) के किसी नागरिक या क्लाइंट को परेशान (Harassment) करना कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध और अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। महिला अधिवक्ता द्वारा ध्यान दिलाई गई कानून की प्रमुख शक्तियां और प्रावधान इस प्रकार हैं: 1. नोटिस भेजना अनिवार्य (CRPC Section 41A / BNSS Section 35) किसी भी व्यक्ति को जांच में शामिल होने के लिए बुलाने से पहले पुलिस को लिखित रूप में नोटिस भेजना अनिवार्य है। बिना नोटिस दिए किसी को थाने बुलाना, धमकाना या उत्पीड़न करना सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के दिशानिर्देशों (Arnesh Kumar v. State of Bihar) का उल्लंघन है। 2. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन (Article 21) भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। पुलिस द्वारा बिना किसी वैध कानूनी आधार के किसी को मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करना संविधान के अनुच्छेद 21 का हनन है। 3. SHO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की शक्तियां उच्च अधिकारियों से शिकायत: एसपी (SP), डीसीपी (DCP) या आईजी (IG) से SHO के दुर्व्यवहार की लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अदालत में रिट याचिका (Writ Petition): उच्च न्यायालय (High Court) में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जा सकती है। मानवाधिकार आयोग (NHRC/SHRC): मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाता है। न्यायिक शिकायत (Private Complaint): धारा 200 CrPC के तहत मजिस्ट्रेट के सामने संबंधित SHO के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की जा सकती है। 4. निलंबन और विभागीय कार्रवाई यदि यह साबित हो जाता है कि SHO ने बिना किसी कानूनी आधार या नोटिस के किसी नागरिक को प्रताड़ित किया है, तो उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकती है, जिसके तहत उसे निलंबित (Suspend) या सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। कानून स्पष्ट करता है कि वर्दी या पद किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं बनाता; प्रक्रिया का पालन न करने पर एक SHO पर भी आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।1