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हरिद्वार में नगर निगम के कूड़ा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि निगम द्वारा कूड़ा उठाया जा रहा है, वह सफाई का एक प्रयास है या फिर गंदगी को और अधिक फैलाया जा रहा है, जिससे इलाके में अव्यवस्था बढ़ रही है।
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हरिद्वार में नगर निगम के कूड़ा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि निगम द्वारा कूड़ा उठाया जा रहा है, वह सफाई का एक प्रयास है या फिर गंदगी को और अधिक फैलाया जा रहा है, जिससे इलाके में अव्यवस्था बढ़ रही है।
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- हरिद्वार में नगर निगम के कूड़ा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि निगम द्वारा कूड़ा उठाया जा रहा है, वह सफाई का एक प्रयास है या फिर गंदगी को और अधिक फैलाया जा रहा है, जिससे इलाके में अव्यवस्था बढ़ रही है।1
- भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से गंगोत्री जाने का सौभाग्य मिला है, और लोगों को जीवन में माता गंगा के दर्शन कराने की बात कही गई है। गंगा माता का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, और आशंका जताई गई है कि जुलाई महीने में हरिद्वार में गंगा माता का जलस्तर और भी बढ़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए, श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे गंगा के भीतर प्रवेश न करें, बल्कि बाहर से ही स्नान करें। सभी को सावधानी बरतने और विशेष रूप से बच्चों का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, गंदगी न फैलाने और सफाई का विशेष ध्यान रखने पर भी ज़ोर दिया गया है। संदेश में कृष्ण भजन सब्सक्राइब करने और शारदा सिन्हा के गीत साझा करने का आग्रह किया गया है। इसमें दुर्गा माता और भोलेनाथ की जय के उद्घोष के साथ, गंगोत्री में गंगा माता के लाइव दर्शन और सावन महीने में गंगा माता, वैष्णो देवी का भी ज़िक्र है।1
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के पांच वर्ष सफलतापूर्वक पूरे होने के अवसर पर ऋषिकेश के आईडीपीएल मैदान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे कार्यक्रम में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। इस कार्यक्रम में राज्यपाल गुरमीत सिंह के साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों को साझा किया गया।1
- लक्सर क्षेत्र के डौसनी गांव में आज सुबह करीब 4:30 बजे मदनपाल नामक व्यक्ति के घर में एक खतरनाक मगरमच्छ घुस गया। घर में हलचल होने पर परिवार के सदस्य जाग गए और मगरमच्छ का तांडव देखकर दहशत में आ गए। अपनी जान बचाने के लिए परिवार को घर की छत पर चढ़ना पड़ा। घटना की सूचना लक्सर वन विभाग को दी गई, जिसके बाद वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। टीम ने मगरमच्छ को सफलतापूर्वक पकड़कर दूर गंगा नदी में छोड़ दिया। इस बचाव अभियान में वन विभाग की टीम के सदस्य गुरजंट सिंह और भोपाल सिंह शामिल रहे। खतरनाक मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद डौसनी गांव के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। उन्होंने वन विभाग लक्सर की टीम का बहुत-बहुत धन्यवाद किया और अपनी खुशी जाहिर की।1
- राजस्थान दौरे पर निकले नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के काफिले पर अचानक असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। इस घटना के बाद मौजूदा सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह मुद्दा उठाया गया है कि अगर जनता द्वारा चुना गया एक सांसद ही सुरक्षित नहीं है, तो सरकार आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगी।1
- बिजनौर जिले के हल्दौर थाना क्षेत्र के हसनपुर जट गांव में एक गुलदार पिंजरे में कैद हो गया है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को काफी राहत मिली है। ग्रामीण लंबे समय से गुलदार के डर से परेशान थे। ग्रामीणों की शिकायत के बाद, वन विभाग ने कल गांव में पिंजरा लगाया था, और रात्रि के समय गुलदार उसमें कैद हो गया।1
- सदियों से धर्म नगरी के रूप में विख्यात हरिद्वार का तीर्थत्व अब 'कलिकाल' में नष्ट होता जा रहा है। पिछले चार दशकों में हुई नई बसावट के कारण घाटों, मंदिरों और धर्मशालाओं की इस शांत नगरी का चरित्र पूरी तरह बदल गया है। अब धर्म, अध्यात्म और कर्मकांड की यह नगरी मौज-मस्ती का केंद्र बनती जा रही है, जिसे स्थानीय और बाहरी लोग 'समय के परिवर्तन' के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। एक वक्त था जब हरिद्वार आकर व्यसन या मौज-मस्ती के बारे में सोचना भी पाप समझा जाता था, लेकिन अब लोग यहाँ केवल मौज-मस्ती के उद्देश्य से आने लगे हैं। इस प्रवृत्ति के लिए दिल्ली और हरियाणा से आने वाले लोग हरिद्वार में कुख्यात हो चुके हैं। इसी बदलते स्वरूप की एक बानगी हाल ही में देखने को मिली, जब वीआईपी घाट पर गंगा किनारे एक संस्था के सम्मेलन में भजन लहरी के स्थान पर महिला नृत्यांगनाओं से द्विअर्थी फिल्मी गीत गवाए गए। इन गानों पर मासूम किसान नेताओं ने प्रसन्न होकर खूब नोट लुटाए। सम्मेलन की समाप्ति पर सभी 'हर-हर गंगे' का उद्घोष करते हुए वापस लौट गए।1