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अब शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा अब शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मंदिर ट्रस्ट द्वारा पार्किंग स्थल से गुफा मार्ग तक रैंप और बेहतर सुविधायुक्त रास्तों का निर्माण किया जा रहा है। जिससे श्रद्धालु आसानी से मंदिर तक पहुंच सकेंगे। मंदिर न्यास अध्यक्ष धर्मपाल चौधरी ने बताया कि भौगोलिक परिस्थितियां कठिन जरूर हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और उचित योजना से इस चुनौती को पार किया जा सकता है। रैंप के कार्य को जल्द पूरा किया जाएगा और इसे एक महीने में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ट्रस्ट ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि आने वाले 6 महीनों के भीतर मंदिर को पूरी तरह से एक्सेसिबल और सुगम बनाया जाएगा, ताकि दिव्यांगजन, बुजुर्ग और अन्य सभी श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।

3 hrs ago
user_Sanjeev ranout
Sanjeev ranout
बिलासपुर सदर, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
3 hrs ago

अब शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा अब शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मंदिर ट्रस्ट द्वारा पार्किंग स्थल से गुफा मार्ग तक रैंप और बेहतर सुविधायुक्त रास्तों का निर्माण किया जा रहा है। जिससे श्रद्धालु आसानी से मंदिर तक पहुंच सकेंगे। मंदिर न्यास अध्यक्ष धर्मपाल चौधरी ने बताया कि भौगोलिक परिस्थितियां कठिन जरूर हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और उचित योजना से इस चुनौती को पार किया जा सकता है। रैंप के कार्य को जल्द पूरा किया जाएगा और इसे एक महीने में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ट्रस्ट ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि आने वाले 6 महीनों के भीतर मंदिर को पूरी तरह से एक्सेसिबल और सुगम बनाया जाएगा, ताकि दिव्यांगजन, बुजुर्ग और अन्य सभी श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।

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  • अब शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मंदिर ट्रस्ट द्वारा पार्किंग स्थल से गुफा मार्ग तक रैंप और बेहतर सुविधायुक्त रास्तों का निर्माण किया जा रहा है। जिससे श्रद्धालु आसानी से मंदिर तक पहुंच सकेंगे। मंदिर न्यास अध्यक्ष धर्मपाल चौधरी ने बताया कि भौगोलिक परिस्थितियां कठिन जरूर हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और उचित योजना से इस चुनौती को पार किया जा सकता है। रैंप के कार्य को जल्द पूरा किया जाएगा और इसे एक महीने में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ट्रस्ट ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि आने वाले 6 महीनों के भीतर मंदिर को पूरी तरह से एक्सेसिबल और सुगम बनाया जाएगा, ताकि दिव्यांगजन, बुजुर्ग और अन्य सभी श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।
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    अब शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मंदिर ट्रस्ट द्वारा पार्किंग स्थल से गुफा मार्ग तक रैंप और बेहतर सुविधायुक्त रास्तों का निर्माण किया जा रहा है। जिससे श्रद्धालु आसानी से मंदिर तक पहुंच सकेंगे। मंदिर न्यास अध्यक्ष धर्मपाल चौधरी ने बताया कि भौगोलिक परिस्थितियां कठिन जरूर हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और उचित योजना से इस चुनौती को पार किया जा सकता है। रैंप के कार्य को जल्द पूरा किया जाएगा और इसे एक महीने में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ट्रस्ट ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि आने वाले 6 महीनों के भीतर मंदिर को पूरी तरह से एक्सेसिबल और सुगम बनाया जाएगा, ताकि दिव्यांगजन, बुजुर्ग और अन्य सभी श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।
    user_Sanjeev ranout
    Sanjeev ranout
    बिलासपुर सदर, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Post by Dinesh Kumar
    1
    Post by Dinesh Kumar
    user_Dinesh Kumar
    Dinesh Kumar
    Farmer भोटा, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    12 hrs ago
  • हमीरपुर पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए केंद्र सरकार से गोविंद सागर (भाखड़ा बांध) और महाराणा प्रताप सागर (पोंग बांध) जलाशयों के लिए समयबद्ध एवं समग्र एक्वाकल्चर विकास योजना तैयार करने की मांग की। इन दोनों जलाशयों का संयुक्त जल क्षेत्र लगभग 42,000 हेक्टेयर है, जो ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में मत्स्य आधारित आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति देश के दो सबसे बड़े मानव निर्मित जलाशयों के बीच होने के कारण विशेष महत्व रखती है, जो ब्लू रिवोल्यूशन और सतत मत्स्य विकास के लक्ष्य के अनुरूप है। उन्होंने आधुनिक फिश लैंडिंग केंद्र, आइस प्लांट, ट्राउट एवं कार्प हैचरी, केज कल्चर विस्तार और सीधे विपणन तंत्र को शामिल करते हुए एक सुनियोजित योजना बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही ब्लू रिवोल्यूशन योजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे, फिश सीड स्टॉकिंग, मछुआरों के कल्याण तथा राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा रेसवे यूनिट, बीज उत्पादन, पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाएं और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए विशेष परियोजनाएं शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 24 मार्च 2026 को लोकसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए ₹155.48 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें केंद्र का अंश ₹79.47 करोड़ है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जिला ऊना के गगरेट में ₹5.17 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना को मत्स्य एवं एक्वाकल्चर अवसंरचना विकास निधि के तहत स्वीकृति दी गई है। यह केंद्र प्रदेश के मछुआरों, मत्स्य पालकों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीकों, सर्वोत्तम प्रथाओं और तकनीकी मार्गदर्शन से प्रशिक्षित करेगा तथा हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को जारी निधि में निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष 2021–22 में ₹12.65 करोड़, 2022–23 में ₹13.10 करोड़, 2023–24 में ₹5.62 करोड़ और 2024–25 में ₹14.76 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा अवसंरचना और बीज उत्पादन के लिए नियमित सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश में मत्स्य उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021–22 में 16,015.81 मीट्रिक टन उत्पादन से बढ़कर 2024–25 में यह 19,019.83 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जबकि चालू वित्त वर्ष में फरवरी 2026 तक 16,861.06 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया जा चुका है। दोनों प्रमुख जलाशयों में व्यावसायिक पंगासियस मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 48 केज स्थापित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक जलाशय में 24-24 केज शामिल हैं। पोंग बांध में 15 और गोविंद सागर में 8 लैंडिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा 697 मछुआरों को नाव और जाल उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में 9,208 मछुआरों को क्लोज सीजन सहायता प्रदान की गई है और बीमा योजना के तहत मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर ₹5 लाख तथा आंशिक विकलांगता पर ₹2.50 लाख का प्रावधान है। आने वाले पांच वर्षों के लिए दोनों जलाशयों में प्रति वर्ष 600 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र पर केंद्र सरकार के विशेष ध्यान पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि गगरेट में मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र की स्वीकृति पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, एफआईडीएफ और ब्लू रिवोल्यूशन के तहत किए जा रहे निवेश प्रदेश के नदियों और जलाशयों पर निर्भर लोगों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। गोविंद सागर और महाराणा प्रताप सागर के लिए प्रस्तावित समग्र योजना हिमाचल के चार जिलों में मछुआरा समुदाय के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाएगी।
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    हमीरपुर
पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए केंद्र सरकार से गोविंद सागर (भाखड़ा बांध) और महाराणा प्रताप सागर (पोंग बांध) जलाशयों के लिए समयबद्ध एवं समग्र एक्वाकल्चर विकास योजना तैयार करने की मांग की। इन दोनों जलाशयों का संयुक्त जल क्षेत्र लगभग 42,000 हेक्टेयर है, जो ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में मत्स्य आधारित आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति देश के दो सबसे बड़े मानव निर्मित जलाशयों के बीच होने के कारण विशेष महत्व रखती है, जो ब्लू रिवोल्यूशन और सतत मत्स्य विकास के लक्ष्य के अनुरूप है। उन्होंने आधुनिक फिश लैंडिंग केंद्र, आइस प्लांट, ट्राउट एवं कार्प हैचरी, केज कल्चर विस्तार और सीधे विपणन तंत्र को शामिल करते हुए एक सुनियोजित योजना बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही ब्लू रिवोल्यूशन योजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे, फिश सीड स्टॉकिंग, मछुआरों के कल्याण तथा राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा रेसवे यूनिट, बीज उत्पादन, पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाएं और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए विशेष परियोजनाएं शुरू करने का आग्रह किया।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 24 मार्च 2026 को लोकसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए ₹155.48 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें केंद्र का अंश ₹79.47 करोड़ है।
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जिला ऊना के गगरेट में ₹5.17 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना को मत्स्य एवं एक्वाकल्चर अवसंरचना विकास निधि के तहत स्वीकृति दी गई है। यह केंद्र प्रदेश के मछुआरों, मत्स्य पालकों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीकों, सर्वोत्तम प्रथाओं और तकनीकी मार्गदर्शन से प्रशिक्षित करेगा तथा हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएगा।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को जारी निधि में निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष 2021–22 में ₹12.65 करोड़, 2022–23 में ₹13.10 करोड़, 2023–24 में ₹5.62 करोड़ और 2024–25 में ₹14.76 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा अवसंरचना और बीज उत्पादन के लिए नियमित सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है।
प्रदेश में मत्स्य उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021–22 में 16,015.81 मीट्रिक टन उत्पादन से बढ़कर 2024–25 में यह 19,019.83 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जबकि चालू वित्त वर्ष में फरवरी 2026 तक 16,861.06 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया जा चुका है।
दोनों प्रमुख जलाशयों में व्यावसायिक पंगासियस मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 48 केज स्थापित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक जलाशय में 24-24 केज शामिल हैं। पोंग बांध में 15 और गोविंद सागर में 8 लैंडिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा 697 मछुआरों को नाव और जाल उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में 9,208 मछुआरों को क्लोज सीजन सहायता प्रदान की गई है और बीमा योजना के तहत मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर ₹5 लाख तथा आंशिक विकलांगता पर ₹2.50 लाख का प्रावधान है। आने वाले पांच वर्षों के लिए दोनों जलाशयों में प्रति वर्ष 600 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र पर केंद्र सरकार के विशेष ध्यान पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि गगरेट में मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र की स्वीकृति पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, एफआईडीएफ और ब्लू रिवोल्यूशन के तहत किए जा रहे निवेश प्रदेश के नदियों और जलाशयों पर निर्भर लोगों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। गोविंद सागर और महाराणा प्रताप सागर के लिए प्रस्तावित समग्र योजना हिमाचल के चार जिलों में मछुआरा समुदाय के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाएगी।
    user_खबरी लाल
    खबरी लाल
    रिपोर्टर हमीरपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
  • ​एक साल पहले आपदा में क्षतिग्रस्त हुई थी सड़क, सुरक्षित हिस्से पर भी लोगों का कब्जा; हादसे का अंदेशा उपमंडल बंगाणा के तहत कोटला खास से गोविंद सागर झील की ओर जाने वाला एकमात्र लिंक मार्ग 'बेला हरिजन बस्ती' इन दिनों हादसों को न्योता दे रहा है। पिछले वर्ष हुई भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के कारण यह मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसकी सुध नहीं ली है। सड़क की स्थिति आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी आपदा के समय थी, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। ​खाई में समाने का डर, फिर भी विभाग मौन सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस चुका है और कभी भी गहरी खाई में गिर सकता है। यह मार्ग बेला हरिजन बस्ती के लिए संपर्क का एकमात्र साधन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अधिकारी किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठे नजर आ रहे हैं। ​सुरक्षित रास्ते पर 'अतिक्रमण' ने बढ़ाई मुश्किलें हैरानी की बात यह है कि सड़क का जो हिस्सा सुरक्षित बचा है, वहां कुछ स्थानीय लोगों द्वारा अपने वाहन और निर्माण सामग्री (रेत-बजरी) फैला दी गई है। इस कारण राहगीरों और वाहन चालकों को मजबूरन सड़क के उस हिस्से से गुजरना पड़ रहा है जो धंसा हुआ है। ज़रा सी चूक किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है। ​जनता की मांग: तुरंत हो मरम्मत बस्ती के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि: ​क्षतिग्रस्त मार्ग की तुरंत मरम्मत शुरू करवाई जाए। ​सड़क पर अवैध रूप से रखी गई निर्माण सामग्री और वाहनों को हटाया जाए ताकि आवाजाही सुगम हो सके। ​स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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    ​एक साल पहले आपदा में क्षतिग्रस्त हुई थी सड़क, सुरक्षित हिस्से पर भी लोगों का कब्जा; हादसे का अंदेशा
उपमंडल बंगाणा के तहत कोटला खास से गोविंद सागर झील की ओर जाने वाला एकमात्र लिंक मार्ग 'बेला हरिजन बस्ती' इन दिनों हादसों को न्योता दे रहा है। पिछले वर्ष हुई भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के कारण यह मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसकी सुध नहीं ली है। सड़क की स्थिति आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी आपदा के समय थी, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।
​खाई में समाने का डर, फिर भी विभाग मौन
सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस चुका है और कभी भी गहरी खाई में गिर सकता है। यह मार्ग बेला हरिजन बस्ती के लिए संपर्क का एकमात्र साधन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अधिकारी किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठे नजर आ रहे हैं।
​सुरक्षित रास्ते पर 'अतिक्रमण' ने बढ़ाई मुश्किलें
हैरानी की बात यह है कि सड़क का जो हिस्सा सुरक्षित बचा है, वहां कुछ स्थानीय लोगों द्वारा अपने वाहन और निर्माण सामग्री (रेत-बजरी) फैला दी गई है। इस कारण राहगीरों और वाहन चालकों को मजबूरन सड़क के उस हिस्से से गुजरना पड़ रहा है जो धंसा हुआ है। ज़रा सी चूक किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है।
​जनता की मांग: तुरंत हो मरम्मत
बस्ती के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि: ​क्षतिग्रस्त मार्ग की तुरंत मरम्मत शुरू करवाई जाए।
​सड़क पर अवैध रूप से रखी गई निर्माण सामग्री और वाहनों को हटाया जाए ताकि आवाजाही सुगम हो सके।
​स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
    user_Abhishek Kumar Bhatia
    Abhishek Kumar Bhatia
    Local News Reporter बंगाना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    9 hrs ago
  • हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आज अपनी गलती सुधारने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले सदन में 1100 करोड़ के घोटाले की बात कही। अब वे इसे 100 करोड़ रुपए का घोटाला बता रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग की है। VO—- जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर योजना को आयुष्मान भारत के पैटर्न पर लागू किया गया था, ताकि आयुष्मान भारत से बाहर रह गए लोगों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि पहले लोग बीमारी के समय जमीन गिरवी रखने और रिश्तेदारों से उधार लेने को मजबूर होते थे, लेकिन इस योजना ने गरीब परिवारों को बड़ी राहत दी।उन्होंने आरोप लगाया कि योजना को बंद करने से पहले इसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और मनगढ़ंत आरोप लगाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। VO—- जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हिमकेयर योजना पर करीब 972 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि इसका अनुमानित वार्षिक खर्च लगभग 200 करोड़ रुपये था। उनके अनुसार, तीन वर्षों में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि दवाइयों की ऊंचे दामों पर खरीद के कारण खर्च बढ़ा है और पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच किसी सिटिंग हाईकोर्ट जज की निगरानी में करवाई जाए और ऑडिट केवल पूर्व सरकार का ही नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार के तीन वर्षों का भी किया जाए। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को प्रश्नकाल में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राजनीतिक कारणों से योजना को बंद करना चाहते हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को नुकसान हो रहा है। बाइट—- जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
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    हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आज अपनी गलती सुधारने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले सदन में 1100 करोड़ के घोटाले की बात कही। अब वे इसे 100 करोड़ रुपए का घोटाला बता रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग की है। 
VO—- जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर योजना को आयुष्मान भारत के पैटर्न पर लागू किया गया था, ताकि आयुष्मान भारत से बाहर रह गए लोगों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि पहले लोग बीमारी के समय जमीन गिरवी रखने और रिश्तेदारों से उधार लेने को मजबूर होते थे, लेकिन इस योजना ने गरीब परिवारों को बड़ी राहत दी।उन्होंने आरोप लगाया कि योजना को बंद करने से पहले इसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और मनगढ़ंत आरोप लगाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
VO—- जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हिमकेयर योजना पर करीब 972 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि इसका अनुमानित वार्षिक खर्च लगभग 200 करोड़ रुपये था। उनके अनुसार, तीन वर्षों में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि दवाइयों की ऊंचे दामों पर खरीद के कारण खर्च बढ़ा है और पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच किसी सिटिंग हाईकोर्ट जज की निगरानी में करवाई जाए और ऑडिट केवल पूर्व सरकार का ही नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार के तीन वर्षों का भी किया जाए।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को प्रश्नकाल में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राजनीतिक कारणों से योजना को बंद करना चाहते हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को नुकसान हो रहा है।
बाइट—- जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    12 hrs ago
  • *हमीरपुर बस स्टैंड के पास बड़ा खतरा! अधूरी खुदाई से हादसे का डर | PWD पर उठे सवाल*
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    *हमीरपुर बस स्टैंड के पास बड़ा खतरा! अधूरी खुदाई से हादसे का डर | PWD पर उठे सवाल*
    user_BHK News Himachal
    BHK News Himachal
    Local News Reporter बल्ह, मंडी, हिमाचल प्रदेश•
    22 min ago
  • सुजानपुर सैनिक प्राइमरी स्कूल में शनिवार को फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया स्कूल कैंपस में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने खूब धमाल मचाई हिंदी पंजाबी पहाड़ी गानों पर छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दर्शक दीर्घा में बैठे मुख्य अतिथियों के साथ अन्य स्कूल स्टाफ सदस्यों का खूब मनोरंजन किया आयोजित इस फेयरवेल पार्टी में चतुर्थ श्रेणी के छात्रों ने अपने सीनियर पांचवी कक्षा के छात्रों को फेयरवेल पार्टी दी। कार्यक्रम में विशेष रूप से सैनिक स्कूल अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन रचना जोशी ,सेक्रेटरी कमांडर अक्षय कुमार साहू सहित स्टाफ सदस्य मौजूद रहे । इस कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई। फेयरवेल में ओलंपियाड की परीक्षा में स्वर्ण ,रजत और कांस्य पदक प्राप्त करने वाले बच्चों को भी सम्मानित किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि ने बच्चों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की वह बच्चों को स्कूल स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
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    सुजानपुर
सैनिक प्राइमरी स्कूल में शनिवार को फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया स्कूल कैंपस में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने खूब धमाल मचाई हिंदी पंजाबी पहाड़ी गानों पर छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दर्शक दीर्घा में बैठे मुख्य अतिथियों के साथ अन्य स्कूल स्टाफ सदस्यों का खूब मनोरंजन किया आयोजित इस फेयरवेल पार्टी में चतुर्थ श्रेणी के छात्रों ने अपने सीनियर पांचवी कक्षा के छात्रों को फेयरवेल पार्टी दी। कार्यक्रम में विशेष रूप से सैनिक स्कूल अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन रचना जोशी ,सेक्रेटरी कमांडर अक्षय कुमार साहू सहित  स्टाफ सदस्य मौजूद रहे । इस कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई। फेयरवेल में ओलंपियाड की परीक्षा में स्वर्ण ,रजत और कांस्य पदक प्राप्त करने वाले बच्चों को भी सम्मानित किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि ने बच्चों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की वह बच्चों को स्कूल स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
    user_Ranjna Kumari
    Ranjna Kumari
    टीरा सुजानपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हमीरपुर उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने शनिवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं, अभियानों तथा अधिनियमों से संबंधित छह अलग-अलग जिला स्तरीय समितियों की बैठक की अध्यक्षता की। जिला दिव्यांगता समिति की बैठक में उपायुक्त ने बताया कि जिला में लगभग 5260 दिव्यांगों को यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए गए हैं और इन्हें विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। उन्हांेने कहा कि सभी सरकारी भवनों, सार्वजनिक स्थलों, परिवहन सेवाओं, अस्पतालों, कार्यालयों और शौचालयों इत्यादि में दिव्यांगों के लिए निर्धारित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। मेडिकल कालेज अस्पताल में मेडिकल या अन्य आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए भी दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंध होने चाहिए। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जिला में अधिनियम के तहत 26 एफआईआर हुई हैं। इनमें से 13 मामलों की जांच जारी है और 3 मामलों के चालान पेश कर दिए गए हैं। 11 मामलों की कैंसलेशन रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभाग के अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों की जांच और अभियोजन में विलंब नहीं होना चाहिए। विभिन्न अदालतों में पहले से लंबित 28 मामलों पर भी बैठक में चर्चा की गई। राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के अंतर्गत गठित स्थानीय समिति की बैठक में उपायुक्त ने बताया कि मानसिक विकलांगता, ऑटिज्म, सेरीब्रल पाल्सी और बहु-विकलांगता से ग्रस्त बच्चों के माता-पिता स्वभाविक रूप से इन बच्चों के संरक्षक होते हैं। लेकिन, 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ऐसे लोगों के लिए कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति आवश्यक होती है। जिला में अभी तक 211 ऐसे दिव्यांगजनों के अभिभावकों को कानूनी अभिभावक प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इस तिमाही के दौरा समिति को कोई नया आवेदन नहीं मिला है। नशा मुक्त भारत अभियान 2.0 की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को नियमित रूप से जागरुकता गतिविधियां आयोजित करने तथा इनकी रिपोर्ट नियमित रूप से जिला कल्याण अधिकारी को प्रेषित करने के निर्देश दिए। उन्हांेने कहा कि इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप देने उपमंडल और पंचायत स्तर पर गठित कमेटियों की सक्रियता बहुत जरूरी है। सभी तहसील कल्याण अधिकारी इस संबंध में एसडीएम और बीडीओ के साथ समन्वय स्थापित करें।   अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने कहा कि सभी संबंधित विभाग अल्पसंख्यक वर्गों के पात्र लोगों को चिह्नित करें और उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करें। हाथ से मैला उठाने वाले सफाई कर्मचारियों के नियोजन प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम-2013 के अंतर्गत गठित जिला सतर्कता समिति की बैठक में उपायुक्त ने कहा कि जिला में पुराने ढंग से मैला ढोने की कुप्रथा नहीं है। उन्होंने कहा कि सेप्टिक टैंकों, शौचालयों और नालियों की सफाई करने वाले कर्मचारियों की के पास सभी आवश्यक उपकरण एवं सुरक्षा किट होनी चाहिए तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच की जानी चाहिए।   उक्त सभी समितियों की बैठकों में जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल शर्मा ने विभिन्न योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। बैठक में एसपी बलवीर सिंह, एसडीएम भोरंज शशिपाल शर्मा, जिला न्यायवादी संदीप अग्निहोत्री, नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राम प्रसाद, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा उक्त समितियों के गैर सरकारी सदस्य भी उपस्थित थे। -0-
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    हमीरपुर 
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने शनिवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं, अभियानों तथा अधिनियमों से संबंधित छह अलग-अलग जिला स्तरीय समितियों की बैठक की अध्यक्षता की।
जिला दिव्यांगता समिति की बैठक में उपायुक्त ने बताया कि जिला में लगभग 5260 दिव्यांगों को यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए गए हैं और इन्हें विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। उन्हांेने कहा कि सभी सरकारी भवनों, सार्वजनिक स्थलों, परिवहन सेवाओं, अस्पतालों, कार्यालयों और शौचालयों इत्यादि में दिव्यांगों के लिए निर्धारित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। मेडिकल कालेज अस्पताल में मेडिकल या अन्य आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए भी दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंध होने चाहिए।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जिला में अधिनियम के तहत 26 एफआईआर हुई हैं। इनमें से 13 मामलों की जांच जारी है और 3 मामलों के चालान पेश कर दिए गए हैं। 11 मामलों की कैंसलेशन रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभाग के अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों की जांच और अभियोजन में विलंब नहीं होना चाहिए। विभिन्न अदालतों में पहले से लंबित 28 मामलों पर भी बैठक में चर्चा की गई।
राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के अंतर्गत गठित स्थानीय समिति की बैठक में उपायुक्त ने बताया कि मानसिक विकलांगता, ऑटिज्म, सेरीब्रल पाल्सी और बहु-विकलांगता से ग्रस्त बच्चों के माता-पिता स्वभाविक रूप से इन बच्चों के संरक्षक होते हैं। लेकिन, 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ऐसे लोगों के लिए कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति आवश्यक होती है। जिला में अभी तक 211 ऐसे दिव्यांगजनों के अभिभावकों को कानूनी अभिभावक प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इस तिमाही के दौरा समिति को कोई नया आवेदन नहीं मिला है।
नशा मुक्त भारत अभियान 2.0 की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को नियमित रूप से जागरुकता गतिविधियां आयोजित करने तथा इनकी रिपोर्ट नियमित रूप से जिला कल्याण अधिकारी को प्रेषित करने के निर्देश दिए। उन्हांेने कहा कि इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप देने उपमंडल और पंचायत स्तर पर गठित कमेटियों की सक्रियता बहुत जरूरी है। सभी तहसील कल्याण अधिकारी इस संबंध में एसडीएम और बीडीओ के साथ समन्वय स्थापित करें।  
अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने कहा कि सभी संबंधित विभाग अल्पसंख्यक वर्गों के पात्र लोगों को चिह्नित करें और उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करें।
हाथ से मैला उठाने वाले सफाई कर्मचारियों के नियोजन प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम-2013 के अंतर्गत गठित जिला सतर्कता समिति की बैठक में उपायुक्त ने कहा कि जिला में पुराने ढंग से मैला ढोने की कुप्रथा नहीं है। उन्होंने कहा कि सेप्टिक टैंकों, शौचालयों और नालियों की सफाई करने वाले कर्मचारियों की के पास सभी आवश्यक उपकरण एवं सुरक्षा किट होनी चाहिए तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच की जानी चाहिए।  
उक्त सभी समितियों की बैठकों में जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल शर्मा ने विभिन्न योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। बैठक में एसपी बलवीर सिंह, एसडीएम भोरंज शशिपाल शर्मा, जिला न्यायवादी संदीप अग्निहोत्री, नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राम प्रसाद, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा उक्त समितियों के गैर सरकारी सदस्य भी उपस्थित थे।
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    user_खबरी लाल
    खबरी लाल
    रिपोर्टर हमीरपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
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