बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से गुजरने वाले व्यस्त हाईवे पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमराती दिख रही है, जहाँ रात 10:00 बजे के बाद खुलेआम अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। आरोप है कि यह गोरखधंधा पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। स्थानीय सूत्रों और निवासियों के अनुसार, हाईवे किनारे स्थित ढाबों और अवैध अड्डों पर ग्राहकों से 100-50 रुपये अतिरिक्त 'सुविधा शुल्क' लेकर शराब बेची जा रही है। यह महज एक अवैध व्यापार नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा है, जिसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस का मौन संरक्षण प्राप्त है। इस अवैध धंधे के कारण स्थानीय लोग और राहगीर भारी दहशत में हैं। जब भी किसी ने इसका विरोध करने की कोशिश की, तो उसे दबंगों और शराब माफियाओं द्वारा जान से मारने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी गई हैं। आम जनता सवाल उठा रही है कि एक जिम्मेदार नागरिक को कानून का पालन करने की अपेक्षा करने पर क्यों डराया-धमकाया जा रहा है, और क्या माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून को अपने जेब में लेकर घूम रहे हैं? लोगों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या कप्तानगंज पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी इस बड़े पैमाने पर हो रही अवैध बिक्री से अनभिज्ञ हैं। इतने बड़े कारोबार को स्थानीय बीट सिपाहियों और गश्ती दलों द्वारा न देख पाना उनकी कार्यशैली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जिससे यह संदेह गहराता है कि ये विभाग अपनी जेबें भरने के लिए इस अवैध धंधे को फलने-फूलने दे रहे हैं। यह स्थिति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनाई गई सख्त नीति के दावों को धज्जियां उड़ा रही है। हाईवे पर देर रात बिकती शराब न केवल अवैध है, बल्कि यह नशे में धुत होकर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रही है। स्थानीय निवासियों ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अवैध धंधे को संरक्षण देने वाले पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो किसी बड़ी अनहोनी या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह देखना बाकी है कि क्या बस्ती प्रशासन इस 'सुविधा शुल्क' वाले अवैध कारोबार पर लगाम कसने का साहस दिखा पाएगा, या फिर पुलिस की चुप्पी इसी तरह आम जनता पर भारी पड़ती रहेगी।
बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से गुजरने वाले व्यस्त हाईवे पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमराती दिख रही है, जहाँ रात 10:00 बजे के बाद खुलेआम अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। आरोप है कि यह गोरखधंधा पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। स्थानीय सूत्रों और निवासियों के अनुसार, हाईवे किनारे स्थित ढाबों और अवैध अड्डों पर ग्राहकों से 100-50 रुपये अतिरिक्त 'सुविधा शुल्क' लेकर शराब बेची जा रही है। यह महज एक अवैध व्यापार नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा है, जिसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस का मौन संरक्षण प्राप्त है। इस अवैध धंधे के कारण स्थानीय लोग और राहगीर भारी दहशत में हैं। जब भी किसी ने इसका विरोध करने की कोशिश की, तो उसे दबंगों और शराब माफियाओं द्वारा जान से मारने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी गई हैं। आम जनता सवाल उठा रही है कि एक जिम्मेदार नागरिक को कानून का पालन करने की अपेक्षा करने पर क्यों डराया-धमकाया जा रहा है, और क्या माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून को अपने जेब में लेकर घूम रहे हैं? लोगों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या कप्तानगंज पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी इस बड़े पैमाने पर हो रही अवैध बिक्री से अनभिज्ञ हैं। इतने बड़े कारोबार को स्थानीय बीट सिपाहियों और गश्ती दलों द्वारा न देख पाना उनकी कार्यशैली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जिससे यह संदेह गहराता है कि ये विभाग अपनी जेबें भरने के लिए इस अवैध धंधे को फलने-फूलने दे रहे हैं। यह स्थिति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनाई गई सख्त नीति के दावों को धज्जियां उड़ा रही है। हाईवे पर देर रात बिकती शराब न केवल अवैध है, बल्कि यह नशे में धुत होकर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रही है। स्थानीय निवासियों ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अवैध धंधे को संरक्षण देने वाले पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो किसी बड़ी अनहोनी या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह देखना बाकी है कि क्या बस्ती प्रशासन इस 'सुविधा शुल्क' वाले अवैध कारोबार पर लगाम कसने का साहस दिखा पाएगा, या फिर पुलिस की चुप्पी इसी तरह आम जनता पर भारी पड़ती रहेगी।
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- बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से गुजरने वाले व्यस्त हाईवे पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमराती दिख रही है, जहाँ रात 10:00 बजे के बाद खुलेआम अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। आरोप है कि यह गोरखधंधा पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। स्थानीय सूत्रों और निवासियों के अनुसार, हाईवे किनारे स्थित ढाबों और अवैध अड्डों पर ग्राहकों से 100-50 रुपये अतिरिक्त 'सुविधा शुल्क' लेकर शराब बेची जा रही है। यह महज एक अवैध व्यापार नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा है, जिसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस का मौन संरक्षण प्राप्त है। इस अवैध धंधे के कारण स्थानीय लोग और राहगीर भारी दहशत में हैं। जब भी किसी ने इसका विरोध करने की कोशिश की, तो उसे दबंगों और शराब माफियाओं द्वारा जान से मारने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी गई हैं। आम जनता सवाल उठा रही है कि एक जिम्मेदार नागरिक को कानून का पालन करने की अपेक्षा करने पर क्यों डराया-धमकाया जा रहा है, और क्या माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून को अपने जेब में लेकर घूम रहे हैं? लोगों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या कप्तानगंज पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी इस बड़े पैमाने पर हो रही अवैध बिक्री से अनभिज्ञ हैं। इतने बड़े कारोबार को स्थानीय बीट सिपाहियों और गश्ती दलों द्वारा न देख पाना उनकी कार्यशैली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जिससे यह संदेह गहराता है कि ये विभाग अपनी जेबें भरने के लिए इस अवैध धंधे को फलने-फूलने दे रहे हैं। यह स्थिति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनाई गई सख्त नीति के दावों को धज्जियां उड़ा रही है। हाईवे पर देर रात बिकती शराब न केवल अवैध है, बल्कि यह नशे में धुत होकर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रही है। स्थानीय निवासियों ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अवैध धंधे को संरक्षण देने वाले पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो किसी बड़ी अनहोनी या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह देखना बाकी है कि क्या बस्ती प्रशासन इस 'सुविधा शुल्क' वाले अवैध कारोबार पर लगाम कसने का साहस दिखा पाएगा, या फिर पुलिस की चुप्पी इसी तरह आम जनता पर भारी पड़ती रहेगी।1
- उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार लगाए जाने के विरोध में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बस्ती में शुक्रवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई है कि इस बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए। व्यापारियों का कहना है कि बीच सत्र में इस तरह की वृद्धि से उद्योग जगत और आम जनता पर महंगाई का बोझ पड़ेगा, जिसका प्रतिकूल प्रभाव आम उपभोक्ताओं के साथ ही व्यापार पर भी पड़ेगा। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्ती मंडल अध्यक्ष डॉ. हरिमूर्ति सिंह ‘मनोज’ ने आरोप लगाया कि जून माह से लागू किए गए इस अधिभार को लगाने से पहले विद्युत नियामक आयोग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। प्रदेश उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद मद्धेशिया ने इस बढ़ोतरी को उपभोक्ताओं पर 'दोहरी मार' बताया, क्योंकि औद्योगिक और घरेलू बिलों में पहले से ही फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है। प्रदेश उपाध्यक्ष सुनीत पांडेय ने वाणिज्यिक (एलएमवी-2) श्रेणी के बिलों में फिक्स चार्ज और मिनिमम चार्ज दोनों के पहले से लागू होने की बात कही, जबकि जिला महामंत्री आलोक दुबे ने घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक बिलों में 7.5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी भी जोड़े जाने की जानकारी दी। जिला संगठन महामंत्री भरत राम गुप्ता ‘बबलू’ ने तर्क दिया कि विद्युत नियामक आयोग हर साल उत्पादन और खर्चों की समीक्षा के बाद सुनवाई कर दरों का निर्धारण करता है, ऐसे में बीच सत्र में अचानक दरों में वृद्धि करना अनुचित है। जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने इस अचानक बढ़ोतरी को गलत परंपरा की शुरुआत बताते हुए आगाह किया कि इसका सीधा असर महंगाई के रूप में आम जनता को भुगतना पड़ेगा। नगर अध्यक्ष राणा महेंद्र प्रताप और महामंत्री धीरेंद्र चौधरी ने कहा कि बिजली की लागत बढ़ने से उत्तर प्रदेश का उद्योग और व्यापार प्रभावित होगा, जिससे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और अंततः बाजार पर भी असर पड़ेगा। जिला महामंत्री आलोक दुबे और जिला संगठन महामंत्री भरत राम गुप्ता ‘बबलू’ ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उद्योग मंच के जिला अध्यक्ष कमलेश चौधरी और जिला युवा संगठन महामंत्री सत्य प्रकाश दुबे सहित अन्य पदाधिकारियों ने ईंधन अधिभार के नाम पर की गई 10 प्रतिशत बढ़ोतरी को तुरंत समाप्त करने के आदेश जारी करने की मांग की। इस अवसर पर विकास शर्मा, पवन गुप्ता, ओम प्रकाश चौधरी, प्रवीण सिंह, अजय कनौजिया सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।3
- ग्राम अईलिया पोस्ट परसवा जिला बस्ती ब्लॉक कुदरह थाना लालगंज1
- वायरल पोस्ट में बिहार को लेकर एक टिप्पणी की गई है, जिसमें कहा गया है कि यह बिहार है, और यहाँ कुछ भी हो सकता है।1
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र में भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा खंडित किए जाने का एक अत्यंत निंदनीय मामला सामने आया है। ग्राम बिशनपुरवा बगड़वरवा के पास हुई इस घटना की जानकारी सुबह मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, वाल्टरगंज थाना पुलिस और उच्च अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे हैं। प्रशासन लगातार ग्रामीणों को शांत कराने और स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास कर रहा है। स्थानीय समाज और विभिन्न संगठनों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है, साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और खंडित प्रतिमा के स्थान पर अविलंब नई प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।1
- संतकबीरनगर के मेंहदावल स्थित बखिरा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़हरा में जिलाधिकारी (डीएम) आलोक कुमार और पुलिस अधीक्षक (एसपी) संदीप कुमार मीणा ने एक जनकल्याण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य शासन की उपलब्धियों और जनहितकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाना था। इस दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, किसान सम्मान निधि, स्वरोजगार योजनाओं सहित केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे। कार्यक्रम में 'बहू-बेटी सम्मेलन' का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता, महिला अधिकार एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। उपस्थित महिलाओं को महिला सुरक्षा संबंधी हेल्पलाइन नंबर 1090, 112, 1076 और साइबर हेल्पलाइन 1930 के बारे में बताया गया, साथ ही उन्हें सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूक रहने और महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही समाज और राष्ट्र के समग्र विकास का आधार है। एसपी संदीप कुमार मीणा ने बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए ग्रामीणों को किसी भी अनजान कॉल, लिंक, ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करने की सलाह दी। उन्होंने साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, कम्युनिटी पुलिसिंग कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ नागरिकों को उनकी सुरक्षा और सम्मान के महत्व के बारे में जागरूक किया गया, और उनसे अपने परिवार एवं समाज के बुजुर्गों का सम्मान करने तथा उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग करने की अपील की गई। कार्यक्रम के दौरान, ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी विभिन्न समस्याओं और सुझावों को रखा, जिन पर संबंधित विभागीय अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों एवं गणमान्य नागरिकों ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनजागरूकता अभियान की सराहना की। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, संबंधित विभागों के अधिकारीगण, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी, ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, आशा बहुएं, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।4
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