फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (सैम बहादुर) को भारतीय सेना के महानतम जनरलों में से एक माना जाता है। उनकी अदम्य सैन्य रणनीति ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार का सामना करने पर मजबूर किया, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ। वह भारतीय सैन्य अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल के सर्वोच्च पद पर पदोन्नत किया गया। सैम होर्मूसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर, पंजाब में एक पारसी परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शेरवुड कॉलेज, नैनीताल और हिंदू कॉलेज, अमृतसर में पूरी की। इसके बाद, वह भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून के पहले बैच (1932) में शामिल हुए। उनके सैन्य करियर में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा (म्यांमार) में बहादुरी से लड़ाई शामिल है, जहाँ उन्हें गंभीर चोटें लगी थीं। इसके बावजूद, उन्होंने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया और जीवित बचे, जिसके लिए उन्हें 'मिलिट्री क्रॉस' से सम्मानित किया गया। मानेकशॉ 1969 में सेना प्रमुख बने। उनके नेतृत्व में, भारतीय सेना ने 1971 में मात्र 13 दिनों के भीतर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। इस ऐतिहासिक जीत में, उनके शानदार नेतृत्व के परिणामस्वरूप 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। अपनी विशिष्ट सैन्य शैली, वीरता और करिश्माई नेतृत्व के कारण उन्हें गोरखा और भारतीय सेना के जवानों द्वारा प्यार से 'सैम बहादुर' कहा जाता था। उनकी असाधारण सेवाओं के सम्मान में, उन्हें 1 जनवरी 1973 को सेना के सर्वोच्च पद 'फील्ड मार्शल' से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें 1968 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। चार दशकों तक देश की सेवा करने के बाद, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का 27 जून 2008 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह अपने अनुशासित जीवन, स्पष्टवादिता और असीम साहस के लिए हमेशा भारतीय इतिहास में अमर रहेंगे।
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (सैम बहादुर) को भारतीय सेना के महानतम जनरलों में से एक माना जाता है। उनकी अदम्य सैन्य रणनीति ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार का सामना करने पर मजबूर किया, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ। वह भारतीय सैन्य अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल के सर्वोच्च पद पर पदोन्नत किया गया। सैम होर्मूसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर, पंजाब में एक पारसी परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शेरवुड कॉलेज, नैनीताल और हिंदू कॉलेज, अमृतसर में पूरी की। इसके बाद, वह भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून के पहले बैच (1932) में शामिल हुए। उनके सैन्य करियर में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा (म्यांमार) में बहादुरी से लड़ाई शामिल है, जहाँ उन्हें गंभीर चोटें लगी थीं। इसके बावजूद, उन्होंने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया और जीवित बचे, जिसके लिए उन्हें 'मिलिट्री क्रॉस' से सम्मानित किया गया। मानेकशॉ 1969 में सेना प्रमुख बने। उनके नेतृत्व में, भारतीय सेना ने 1971 में मात्र 13 दिनों के भीतर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। इस ऐतिहासिक जीत में, उनके शानदार नेतृत्व के परिणामस्वरूप 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। अपनी विशिष्ट सैन्य शैली, वीरता और करिश्माई नेतृत्व के कारण उन्हें गोरखा और भारतीय सेना के जवानों द्वारा प्यार से 'सैम बहादुर' कहा जाता था। उनकी असाधारण सेवाओं के सम्मान में, उन्हें 1 जनवरी 1973 को सेना के सर्वोच्च पद 'फील्ड मार्शल' से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें 1968 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। चार दशकों तक देश की सेवा करने के बाद, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का 27 जून 2008 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह अपने अनुशासित जीवन, स्पष्टवादिता और असीम साहस के लिए हमेशा भारतीय इतिहास में अमर रहेंगे।
- सोशल मीडिया पर अपने जादुई करतबों से देशभर का दिल जीतने वाले 8 वर्षीय नन्हे जादूगर साहिल से जुड़ा एक नया अपडेट सामने आया है। कुछ समय पहले, मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने साहिल का वीडियो साझा कर उसकी प्रतिभा की भरपूर सराहना की थी। महिंद्रा ने अपने ट्वीट में साहिल की पढ़ाई और जादू के लिए पेशेवर प्रशिक्षण का पूरा खर्च उठाने का वादा भी किया था, जिसके बाद साहिल रातों-रात इंटरनेट पर सनसनी बन गया था। हालांकि, इस बड़ी घोषणा के बावजूद, साहिल आज भी नैनीताल की माल रोड और मल्लीताल में पर्यटकों को हाथ की सफाई दिखाने को मजबूर है।1
- बिलासपुर में मोहर्रम का जुलूस संपन्न होने के कुछ समय बाद नगर के मुख्य चौराहा स्थित कर्बला भूमि पर पक्का निर्माण कार्य शुरू होने से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस निर्माण की जानकारी मिलते ही मुस्लिम समाज के लोग मौके पर भारी संख्या में एकत्र हो गए और निर्माण कार्य का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। हालात को काबू करने के लिए पालिका और पुलिस को तुरंत मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा। विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि संबंधित भूमि कर्बला के नाम दर्ज है और वर्षों से मोहर्रम के दौरान तीन दिनों के लिए यहाँ से अस्थायी दुकानें हटाई जाती हैं। उनका कहना था कि एक दुकानदार ने अवैध रूप से इस भूमि पर कब्जा कर पक्का निर्माण शुरू करवा दिया है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस विरोध के चलते कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल भी देखा गया। हंगामे की सूचना मिलते ही नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची। हालात बिगड़ते देख कस्बा चौकी प्रभारी योगेश कुमार भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद पालिका की टीम ने निर्माण में प्रयुक्त सामग्री जब्त कर अपने वाहन में भर ली। वहीं, पुलिस ने संबंधित दुकानदार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। देर रात मुस्लिम समाज के लोगों और अन्य नागरिकों ने दुकानदार के खिलाफ पुलिस को नामजद तहरीर सौंपी, जिसमें अवैध निर्माण और कब्जे के आरोप में सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। प्रभारी निरीक्षक जीत सिंह ने बताया कि दुकानदार को भविष्य में दोबारा पक्का निर्माण न करने की कड़ी हिदायत देते हुए हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया गया है। साथ ही, उन्हें मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।1
- उत्तराखंड के चंपावत में एक डंपर की टक्कर से एक नेपाली मजदूर की मौत हो गई।1
- चम्पावत में भूतपूर्व सैनिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह माँग की गई है कि उनकी समस्याओं का समाधान तत्काल और प्रमुखता से किया जाए।1
- चम्पावत जिले में, शनिवार, 27 जून 2026 को जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में जिला सैनिक कल्याण परिषद की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भूतपूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिजनों से संबंधित समस्याओं, सुविधाओं तथा विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा करना था। जिलाधिकारी ने पूर्व सैनिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर उनका त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में पिछली बैठक में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की गई, जिसमें सड़क, पेयजल पाइपलाइन और अमर जवान स्मारक के सौंदर्यीकरण से संबंधित प्रगतिरत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया गया। जिलाधिकारी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को ये सभी कार्य शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने छोटी संपर्क सड़कों के लिए तत्काल आगणन (एस्टीमेट) तैयार कर लोक निर्माण विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय बजट तैयार करते समय भूतपूर्व सैनिकों के हित में संचालित की जाने वाली योजनाओं के लिए विशेष प्रावधान किया जाए, और उनके सभी मामलों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित हो। उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों से सरकार द्वारा संचालित चैनलिंक फेंसिंग सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, और मा. मुख्यमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत भूतपूर्व सैनिक छोटी संपर्क सड़कों के प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। जिलाधिकारी ने पूर्व सैनिकों से नवाचार, जनहितकारी परियोजना या विकास संबंधी सुझावों को प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने का आह्वान किया, ताकि उन्हें आवश्यकतानुसार मुख्यमंत्री की घोषणाओं में शामिल किया जा सके। साथ ही, आगामी वर्षाकाल में संभावित आपदाओं के दौरान प्रशासन को सहयोग प्रदान करने की अपील भी की गई। बैठक में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने जिलाधिकारी को चार प्रमुख समस्याओं से अवगत कराया। इनमें तपनी-पाल मोटर मार्ग की क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवार के पुनर्निर्माण, ग्राम सभा बॉजगांव की क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन के सुधारीकरण एवं जल टैंक निर्माण, विविल इंटर कॉलेज से नरसों तक आपदा से क्षतिग्रस्त सड़क से मलबा हटाने एवं मरम्मत, और ग्राम शिलिंगटाक में चाय बागान से सटे क्षेत्र में जंगली जानवरों के बढ़ते खतरे से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने संबंधी प्रस्ताव शामिल थे। जिलाधिकारी ने इन सभी प्रस्तावों पर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल (सेनि) उमेद सिंह, अधिशासी अभियंता श्री मोहन पलड़िया, श्री हितेश कांडपाल, भूतपूर्व सैनिक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।3
- रामपुर जिले की तहसील टांडा में इस समय भीषण गर्मी और लू से आम जनजीवन बेहाल है। तपती धूप में सड़कों पर निकलने वाले यात्रियों और मेहनतकश मजदूरों को विशेष रूप से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस परेशानी को देखते हुए, स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने मिलकर सड़कों के किनारे पानी पिलाने की व्यवस्था की है। राहगीरों का कहना है कि चिलचिलाती धूप में यह सेवा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।1
- चम्पावत जनपद में चलाए जा रहे "ड्रग फ्री देवभूमि" अभियान के तहत पुलिस लगातार नशा तस्करों पर शिकंजा कस रही है। इसी क्रम में, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के निर्देशन में चलाए गए सघन चेकिंग अभियान के दौरान, ऑपरेशन प्रहार के तहत लोहाघाट पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। थाना लोहाघाट पुलिस ने 26 जून को अशोक (30 वर्ष), निवासी लोहाघाट, को 4.36 ग्राम अवैध स्मैक (हेरोइन) के साथ गिरफ्तार किया। बरामद स्मैक की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग ₹1.50 लाख बताई जा रही है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, आरोपी का पहले भी एनडीपीएस और अन्य आपराधिक मामलों में आपराधिक इतिहास रहा है। चम्पावत पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नशे की तस्करी, बिक्री या सेवन से जुड़ी किसी भी सूचना को तत्काल पुलिस या 1933 (मानस हेल्पलाइन) पर दें, ताकि "नशामुक्त चम्पावत, नशामुक्त उत्तराखण्ड" के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके।2
- चंपावत में फायर एवं पुलिस टीम द्वारा संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक जांच करते हुए उनका निरीक्षण किया गया।1
- उत्तराखंड के चंपावत जिले के टनकपुर में एक नशा तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसके पास से ₹75 लाख मूल्य की स्मैक जब्त की है। इस कार्रवाई के संबंध में एसपी चंपावत रेखा यादव ने जानकारी दी।1