गरियाबंद/राजिम में, दूतकैया गांव में 1 फरवरी को हुई हिंसा के बाद 22 लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में सर्व हिंदू समाज ने सोमवार को राजिम के सुंदर लाल शर्मा चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई को "एकतरफा" करार देते हुए पुलिस पर पक्षपात और अनुचित कदम उठाने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि 1 फरवरी को दोपहर में ही पुलिस को विवाद की सूचना दी गई थी, बावजूद इसके घटना शाम 4 बजे के बाद हुई और पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप है कि पुलिस ने बाद में निर्दोष हिंदू युवकों को गिरफ्तार कर लिया, लोगों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए और झूठे मामलों में फंसाया। हिंदू संगठनों ने राजिम थाने के SI जीवन साहू को तुरंत निलंबित करने की मांग की, साथ ही यह भी कहा कि मुख्य आरोपी आरिफ खान द्वारा गांव में मारपीट के बाद ग्रामीणों की प्रतिक्रिया को ही हिंसा बताया जा रहा है, जबकि असली दोषियों पर नरमी बरती गई है। गौरतलब है कि दूतकैया में 1 फरवरी को पुराने शिवलिंग विवाद को लेकर दो पक्षों में झड़प हुई थी, जिसके दौरान भीड़ ने घरों और वाहनों में आगजनी की और पुलिस पर पथराव भी किया गया था। इस मामले में पुलिस ने पहले तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सर्व हिंदू समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और गिरफ्तार किए गए 22 लोगों को रिहा नहीं किया जाता, तो यह आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा।
गरियाबंद/राजिम में, दूतकैया गांव में 1 फरवरी को हुई हिंसा के बाद 22 लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में सर्व हिंदू समाज ने सोमवार को राजिम के सुंदर लाल शर्मा चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई को "एकतरफा" करार देते हुए पुलिस पर पक्षपात और अनुचित कदम उठाने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि 1 फरवरी को दोपहर
में ही पुलिस को विवाद की सूचना दी गई थी, बावजूद इसके घटना शाम 4 बजे के बाद हुई और पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप है कि पुलिस ने बाद में निर्दोष हिंदू युवकों को गिरफ्तार कर लिया, लोगों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए और झूठे मामलों में फंसाया। हिंदू संगठनों ने राजिम थाने के SI जीवन साहू
को तुरंत निलंबित करने की मांग की, साथ ही यह भी कहा कि मुख्य आरोपी आरिफ खान द्वारा गांव में मारपीट के बाद ग्रामीणों की प्रतिक्रिया को ही हिंसा बताया जा रहा है, जबकि असली दोषियों पर नरमी बरती गई है। गौरतलब है कि दूतकैया में 1 फरवरी को पुराने शिवलिंग विवाद को लेकर दो पक्षों में झड़प हुई थी, जिसके दौरान भीड़ ने
घरों और वाहनों में आगजनी की और पुलिस पर पथराव भी किया गया था। इस मामले में पुलिस ने पहले तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सर्व हिंदू समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और गिरफ्तार किए गए 22 लोगों को रिहा नहीं किया जाता, तो यह आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा।
- जैन साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर सकल जैन समाज में गहरी चिंता व्याप्त है, जिसके चलते मंगलवार को गोबरा नवापारा तहसील कार्यालय में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम एक ज्ञापन SDM को सौंपा। समाज का यह कदम हाल ही में पैदल विहार के दौरान पूज्य आर्यिका माताजी की सड़क दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु के बाद आया है, जिसे समाज अत्यंत संदिग्ध मान रहा है। सकल जैन समाज का कहना है कि यह घटना सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि वायरल हुई वीडियो क्लिप और घटनास्थल से मिले तथ्यों के आधार पर समाज में गहरी आशंका और आक्रोश का माहौल है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी भी प्रकार की सुरक्षा या भौतिक सुविधाओं का उपयोग नहीं करते। ऐसे अहिंसक संतों के साथ लगातार हो रही दुर्घटनाएं व हमले अत्यंत चिंताजनक हैं। ज्ञापन के माध्यम से समाज ने गृह मंत्री से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि आर्यिका माताजी की मृत्यु के प्रकरण की सच्चाई सामने लाने के लिए SIT अथवा न्यायिक जांच कराई जाए। दूसरी, घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज एवं डिजिटल साक्ष्य तत्काल सुरक्षित किए जाएं ताकि सबूतों से छेड़छाड़ न हो। तीसरी मांग में कहा गया है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उन पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। चौथी और महत्वपूर्ण मांग यह है कि यदि जांच में सुनियोजित कृत्य या षडयंत्र के तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों पर हत्या व साजिश की कड़ी धाराएं लगाई जाएं। इन मांगों के अतिरिक्त, सकल जैन समाज ने 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' बनाने की मांग भी की है। इसमें देशभर के राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर जैन संतों के विहार मार्गों को चिन्हित कर विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने तथा हाईवे पेट्रोलिंग को विहाररत् संतों को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश देने की बात कही गई है। ज्ञापन सौंपते समय समाज के वरिष्ठजन, महिला मंडल और युवा वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने जोर देकर कहा कि संत समाज राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है, और उनकी सुरक्षा सरकार का नैतिक दायित्व है। SDM ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए इसे उचित माध्यम से गृह मंत्रालय तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।4
- रायपुर जिले के भटागांव स्थित बीएसयूपी कॉलोनी के ब्लॉक नंबर 13 के पास गंभीर गंदगी फैली हुई है। जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में कोई भी सफाईकर्मी साफ-सफाई का काम नहीं कर रहा है, जिसके चलते गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है और उसे हटाया नहीं जा पा रहा है।1
- संभव स्टील कंपनी में हुई तोड़फोड़, मारपीट और ट्रक चालकों से लूटपाट के आरोप में 6 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।1
- बिहार की राजधानी पटना के रुपसपुर इलाके में स्थित एक होटल में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पॉलीटेक्निक परीक्षा देने आई एक छात्रा अपने पिता के साथ इस होटल में ठहरी हुई थी, तभी यह घटना घटी। आरोप है कि देर रात नशे की हालत में एक युवक छात्रा के कमरे में घुस गया और उसके साथ छेड़छाड़ करते हुए उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश की। हालांकि, छात्रा के पिता ने बड़ी बहादुरी का परिचय देते हुए अपनी बेटी को उस युवक से बचा लिया। इस घटना के बाद होटल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पूरा हादसा उस छात्रा के साथ हुआ जो अपनी जिंदगी में पहली बार पटना आई थी।1
- तिल्दा-नेवरा के समीप ग्राम तुलसी में प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों की मौजूदगी में सड़क किनारे सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीन का इस्तेमाल कर ध्वस्त कर दिया गया। यह जानकारी मिली है कि कई व्यक्तियों ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर उस पर पक्के निर्माण कर लिए थे, और कुछ जगहों पर तो सरकारी बिजली के पोल तक को दीवारों और पक्के पर्दों से घेरकर घरों के भीतर ले लिया गया था, जिससे भविष्य में विद्युत व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। इस अभियान के दौरान प्रशासनिक अमला, राजस्व विभाग और पुलिस बल मौके पर उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा और यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। प्रशासन ने आम जनता से यह अपील की है कि वे स्वेच्छा से सरकारी भूमि को खाली कर दें, अन्यथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।4
- धमधा के वार्ड नंबर 10, ब्राह्मण पारा में सोमवार को एक 20 वर्षीय युवक निखिल देवांगन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे इलाके में गहरा सदमा फैल गया। दोपहर करीब 12 बजे हुई इस घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। सूचना पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और युवक को तुरंत धमधा के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना धमधा में 24 घंटे के भीतर हुई दूसरी आत्महत्या है। रविवार देर रात धमधा के ही एक अन्य युवक संजोग यादव ने भी फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। पिछले दो महीनों में कुणाल यादव, संजोग यादव और निखिल देवांगन सहित कुल तीन युवा आत्महत्या कर चुके हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय, चिंता और गंभीर सामाजिक चर्चा का माहौल बन गया है। लगातार हो रही इन दर्दनाक घटनाओं ने पूरे धमधा क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है, और स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियाँ बन रही हैं, जिनकी वजह से युवा इतना कठोर कदम उठा रहे हैं। लोग मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव, बेरोजगारी या अकेलेपन जैसे संभावित कारणों को लेकर चिंतित हैं। पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रकरण दर्ज कर लिया है और आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए गहन जाँच शुरू कर दी है। पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है तथा सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल में जुटी हुई है। फिलहाल आत्महत्या का कारण अज्ञात बताया जा रहा है।1
- छत्तीसगढ़ के तिल्दा-नेवरा के पास खपरी मढ़ी स्थित प्रसिद्ध बंजारी धाम से लगे जंगल में अचानक भीषण आग लग गई। अचानक लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और जंगल का एक बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। आग की ऊंची लपटें दूर से ही दिखाई दे रही थीं, जिसने आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैला दी और कई घंटों तक धधकती रहीं। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तेज हवा और सूखे जंगल के कारण आग लगातार फैलती रही, जिससे दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल कर्मी लगातार पानी की बौछार करते रहे, वहीं वन विभाग की टीम भी आग बुझाने के प्रयास में जुटी रही। घटना की सूचना मिलने पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और कई ग्रामीणों ने भी प्रशासन की मदद की। हालांकि, देर शाम तक आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने वाले क्षेत्र में बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ियां और घना वन क्षेत्र मौजूद है, जिससे लाखों रुपये की वन संपदा के नुकसान की आशंका है। इसके अतिरिक्त, जंगल में रहने वाले जंगली जानवरों, पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं के भी जलकर मरने की संभावना जताई जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, जिसके प्रारंभिक संभावित कारणों में भीषण गर्मी, सूखी झाड़ियां या किसी मानवीय लापरवाही को माना जा रहा है। फिलहाल, उनकी प्राथमिकता आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने और इसे जंगल के अन्य हिस्सों तक फैलने से रोकने की है। इस घटना ने जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं और वन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जंगल क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और स्थायी सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।2
- गरियाबंद/राजिम में, दूतकैया गांव में 1 फरवरी को हुई हिंसा के बाद 22 लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में सर्व हिंदू समाज ने सोमवार को राजिम के सुंदर लाल शर्मा चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई को "एकतरफा" करार देते हुए पुलिस पर पक्षपात और अनुचित कदम उठाने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि 1 फरवरी को दोपहर में ही पुलिस को विवाद की सूचना दी गई थी, बावजूद इसके घटना शाम 4 बजे के बाद हुई और पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप है कि पुलिस ने बाद में निर्दोष हिंदू युवकों को गिरफ्तार कर लिया, लोगों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए और झूठे मामलों में फंसाया। हिंदू संगठनों ने राजिम थाने के SI जीवन साहू को तुरंत निलंबित करने की मांग की, साथ ही यह भी कहा कि मुख्य आरोपी आरिफ खान द्वारा गांव में मारपीट के बाद ग्रामीणों की प्रतिक्रिया को ही हिंसा बताया जा रहा है, जबकि असली दोषियों पर नरमी बरती गई है। गौरतलब है कि दूतकैया में 1 फरवरी को पुराने शिवलिंग विवाद को लेकर दो पक्षों में झड़प हुई थी, जिसके दौरान भीड़ ने घरों और वाहनों में आगजनी की और पुलिस पर पथराव भी किया गया था। इस मामले में पुलिस ने पहले तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सर्व हिंदू समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और गिरफ्तार किए गए 22 लोगों को रिहा नहीं किया जाता, तो यह आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा।4