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पूछड़ी में बुलडोजर एक्शन पर उठे गंभीर सवाल, नेकी की दीवार के संयोजक बोले- हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर उजाड़े गए परिवार, वन अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप रिपोर्टर – सीमा खेतवाल स्थान – रामनगर,उत्तराखंड रामनगर के पूछड़ी में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर हुई बुलडोजर कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। करीब पांच एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए 80 से 82 परिवारों के आशियाने ध्वस्त किए जाने के बाद कार्रवाई की वैधानिकता और मानवीय पहलुओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नेकी की दीवार के संयोजक ताराचंद घिल्डियाल ने सरकार और वन विभाग पर वन अधिकार अधिनियम 2006 तथा हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वन ग्रामों में रहने वाले परिवारों की पहचान और सूची तैयार किए बिना की गई कार्रवाई ने कई परिवारों को बेघर कर दिया। वहीं, उन्होंने मीडिया को कार्रवाई स्थल पर जाने से रोके जाने पर भी सवाल उठाए हैं। पूछड़ी में बुलडोजर चला, मकान जमींदोज हुए और कई परिवारों के सिर से छत छिन गई। वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब इसे लेकर विरोध और सवाल तेज हो गए हैं। नेकी की दीवार के संयोजक ताराचंद घिल्डियाल ने ध्वस्तीकरण अभियान को असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। घिल्डियाल का कहना है कि वन ग्रामों, उनके तोकों और खत्तों में रहने वाले परिवारों की विधिवत पहचान कर सूची तैयार करना और उन्हें अधिसूचित करना जरूरी है। उनका दावा है कि नैनीताल हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को वन अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों की सूची प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार अब तक इन निर्देशों का पालन नहीं कर पाई है। ताराचंद घिल्डियाल ने 31 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि वन ग्रामों की सूची और जियो मैपिंग का मुद्दा भी उठाया गया था। उनके अनुसार, न्यायालय ने जियो मैपिंग और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों का रिकॉर्ड तैयार करने तथा अगले चार माह तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। घिल्डियाल का आरोप है कि ऐसे में इस अवधि के दौरान पूछड़ी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। उन्होंने कार्रवाई स्थल पर मीडिया की आवाजाही रोके जाने पर भी नाराजगी जताई। घिल्डियाल का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और प्रभावित परिवारों की आवाज सामने आना बेहद जरूरी है। सवाल यह है कि जब वन ग्रामों की पहचान, सूचीकरण और जियो मैपिंग को लेकर कानूनी प्रक्रिया का मुद्दा उठ रहा है, तो प्रभावित परिवारों के आशियाने ध्वस्त करने की कार्रवाई किस आधार पर की गई? फिलहाल पूछड़ी में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर वन अधिकार कानून, हाईकोर्ट के निर्देशों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे सवाल सामने हैं। नेकी की दीवार के संयोजक के आरोपों पर सरकार और वन विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि इन सवालों के बीच प्रशासन क्या जवाब देता है और बेघर हुए परिवारों को राहत मिलती है या नहीं। बाइट – ताराचंद घिल्डियाल, संयोजक, नेकी की दीवार

3 hrs ago
user_सीमा खेतवाल
सीमा खेतवाल
Local News Reporter बागेश्वर, बागेश्वर, उत्तराखंड•
3 hrs ago

पूछड़ी में बुलडोजर एक्शन पर उठे गंभीर सवाल, नेकी की दीवार के संयोजक बोले- हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर उजाड़े गए परिवार, वन अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप रिपोर्टर – सीमा खेतवाल स्थान – रामनगर,उत्तराखंड रामनगर के पूछड़ी में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर हुई बुलडोजर कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। करीब पांच एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए 80 से 82 परिवारों के आशियाने ध्वस्त किए जाने के बाद कार्रवाई की वैधानिकता और मानवीय पहलुओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नेकी की दीवार के संयोजक ताराचंद घिल्डियाल ने सरकार और वन विभाग पर वन अधिकार अधिनियम 2006 तथा हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वन ग्रामों में रहने वाले परिवारों की पहचान और सूची तैयार किए बिना की गई कार्रवाई ने कई परिवारों को बेघर कर दिया। वहीं, उन्होंने मीडिया को कार्रवाई स्थल पर जाने से रोके जाने पर भी सवाल उठाए हैं। पूछड़ी में बुलडोजर चला, मकान जमींदोज हुए और कई परिवारों के सिर से छत छिन गई। वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब इसे लेकर विरोध और सवाल तेज हो गए हैं। नेकी की दीवार के संयोजक ताराचंद घिल्डियाल ने ध्वस्तीकरण अभियान को असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। घिल्डियाल का कहना है कि वन ग्रामों, उनके तोकों और खत्तों में रहने वाले परिवारों की विधिवत पहचान कर सूची तैयार करना और उन्हें अधिसूचित करना जरूरी है। उनका दावा है

कि नैनीताल हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को वन अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों की सूची प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार अब तक इन निर्देशों का पालन नहीं कर पाई है। ताराचंद घिल्डियाल ने 31 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि वन ग्रामों की सूची और जियो मैपिंग का मुद्दा भी उठाया गया था। उनके अनुसार, न्यायालय ने जियो मैपिंग और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों का रिकॉर्ड तैयार करने तथा अगले चार माह तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। घिल्डियाल का आरोप है कि ऐसे में इस अवधि के दौरान पूछड़ी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। उन्होंने कार्रवाई स्थल पर मीडिया की आवाजाही रोके जाने पर भी नाराजगी जताई। घिल्डियाल का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और प्रभावित परिवारों की आवाज सामने आना बेहद जरूरी है। सवाल यह है कि जब वन ग्रामों की पहचान, सूचीकरण और जियो मैपिंग को लेकर कानूनी प्रक्रिया का मुद्दा उठ रहा है, तो प्रभावित परिवारों के आशियाने ध्वस्त करने की कार्रवाई किस आधार पर की गई? फिलहाल पूछड़ी में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर वन अधिकार कानून, हाईकोर्ट के निर्देशों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे सवाल सामने हैं। नेकी की दीवार के संयोजक के आरोपों पर सरकार और वन विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि इन सवालों के बीच प्रशासन क्या जवाब देता है और बेघर हुए परिवारों को राहत मिलती है या नहीं। बाइट – ताराचंद घिल्डियाल, संयोजक, नेकी की दीवार

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    पूछड़ी में बुलडोजर एक्शन पर उठे गंभीर सवाल, नेकी की दीवार के संयोजक बोले- हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर उजाड़े गए परिवार, वन अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप
रिपोर्टर – सीमा खेतवाल 
स्थान – रामनगर,उत्तराखंड
रामनगर के पूछड़ी में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर हुई बुलडोजर कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। करीब पांच एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए 80 से 82 परिवारों के आशियाने ध्वस्त किए जाने के बाद कार्रवाई की वैधानिकता और मानवीय पहलुओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नेकी की दीवार के संयोजक ताराचंद घिल्डियाल ने सरकार और वन विभाग पर वन अधिकार अधिनियम 2006 तथा हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वन ग्रामों में रहने वाले परिवारों की पहचान और सूची तैयार किए बिना की गई कार्रवाई ने कई परिवारों को बेघर कर दिया। वहीं, उन्होंने मीडिया को कार्रवाई स्थल पर जाने से रोके जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
पूछड़ी में बुलडोजर चला, मकान जमींदोज हुए और कई परिवारों के सिर से छत छिन गई। वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब इसे लेकर विरोध और सवाल तेज हो गए हैं। नेकी की दीवार के संयोजक ताराचंद घिल्डियाल ने ध्वस्तीकरण अभियान को असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया।
घिल्डियाल का कहना है कि वन ग्रामों, उनके तोकों और खत्तों में रहने वाले परिवारों की विधिवत पहचान कर सूची तैयार करना और उन्हें अधिसूचित करना जरूरी है। उनका दावा है कि नैनीताल हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को वन अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों की सूची प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार अब तक इन निर्देशों का पालन नहीं कर पाई है।
ताराचंद घिल्डियाल ने 31 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि वन ग्रामों की सूची और जियो मैपिंग का मुद्दा भी उठाया गया था। उनके अनुसार, न्यायालय ने जियो मैपिंग और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों का रिकॉर्ड तैयार करने तथा अगले चार माह तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। घिल्डियाल का आरोप है कि ऐसे में इस अवधि के दौरान पूछड़ी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी।
उन्होंने कार्रवाई स्थल पर मीडिया की आवाजाही रोके जाने पर भी नाराजगी जताई। घिल्डियाल का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और प्रभावित परिवारों की आवाज सामने आना बेहद जरूरी है। सवाल यह है कि जब वन ग्रामों की पहचान, सूचीकरण और जियो मैपिंग को लेकर कानूनी प्रक्रिया का मुद्दा उठ रहा है, तो प्रभावित परिवारों के आशियाने ध्वस्त करने की कार्रवाई किस आधार पर की गई?
फिलहाल पूछड़ी में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर वन अधिकार कानून, हाईकोर्ट के निर्देशों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे सवाल सामने हैं। नेकी की दीवार के संयोजक के आरोपों पर सरकार और वन विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि इन सवालों के बीच प्रशासन क्या जवाब देता है और बेघर हुए परिवारों को राहत मिलती है या नहीं।
बाइट – ताराचंद घिल्डियाल, संयोजक, नेकी की दीवार
    user_सीमा खेतवाल
    सीमा खेतवाल
    Local News Reporter बागेश्वर, बागेश्वर, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • नुमाइशखेत मैदान में तीन नवंबर से तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन नुमाइशखेत मैदान में तीन नवंबर से तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन बागेश्वर के नुमाइशखेत मैदान में तीन नवंबर से तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन होगा। मेले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों को बाजार मिलेगा। 35 स्टॉलों के जरिए ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जाएगी। ग्राम्य विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तीन से पांच नवंबर तक सरस मेला आयोजित किया जाएगा। मेले में कृषि, उद्यान और उद्योग विभाग के साथ महिला समूहों के उत्पाद प्रदर्शित होंगे। लोकगीत, लोकनृत्य, मेहंदी और एपण प्रतियोगिताएं भी आकर्षण रहेंगी। इसके अलावा बायर-सेलर मीट आयोजित कर महिलाओं को सीधे जोड़ने की पहल होगी। प्रशासन का कहना है कि मेले से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
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    नुमाइशखेत मैदान में तीन नवंबर से तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन 
नुमाइशखेत मैदान में तीन नवंबर से तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन 
बागेश्वर के नुमाइशखेत मैदान में तीन नवंबर से तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन होगा। मेले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों को बाजार मिलेगा। 35 स्टॉलों के जरिए ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जाएगी।
ग्राम्य विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तीन से पांच नवंबर तक सरस मेला आयोजित किया जाएगा। मेले में कृषि, उद्यान और उद्योग विभाग के साथ महिला समूहों के उत्पाद प्रदर्शित होंगे। लोकगीत, लोकनृत्य, मेहंदी और एपण प्रतियोगिताएं भी आकर्षण रहेंगी। इसके अलावा बायर-सेलर मीट आयोजित कर महिलाओं को सीधे  जोड़ने की पहल होगी। प्रशासन का कहना है कि मेले से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
    user_Jc pandey
    Jc pandey
    गरुड़, बागेश्वर, उत्तराखंड•
    22 hrs ago
  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहुंचे बीजेपी कार्यालय भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहुंचे बीजेपी कार्यालय भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने बैठक में MLC चुनाव मैं जीत और हर को लेकर चर्चा होगी संगठन सहित सरकार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर होगी
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    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहुंचे बीजेपी कार्यालय
भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहुंचे बीजेपी कार्यालय
भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने
बैठक में MLC चुनाव मैं जीत और हर को लेकर चर्चा होगी
संगठन सहित सरकार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर होगी
    user_ब्रेकिंग हरिद्वार
    ब्रेकिंग हरिद्वार
    भीकियासैंण, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    21 hrs ago
  • जनसेवक युवा पवन नेगी गैरसैंण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूरा समर्थन देता हूं। गैरसैंण की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हुंकार! 🏔️ गैरसैंण की आवाज — सम्मान, अधिकार और न्याय की मांग! #गैरसैंण #आंगनबाड़ीकार्यकर्ता #महिलासम्मान #कर्मचारीअधिकार #उत्तराखंड #viralpost #viralreelschallenge
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    जनसेवक युवा पवन नेगी गैरसैंण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूरा समर्थन देता हूं।

गैरसैंण की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हुंकार! 

🏔️ गैरसैंण की आवाज — सम्मान, अधिकार और न्याय की मांग!

#गैरसैंण #आंगनबाड़ीकार्यकर्ता #महिलासम्मान #कर्मचारीअधिकार #उत्तराखंड #viralpost #viralreelschallenge
    user_Pawan Negi Ji
    Pawan Negi Ji
    Social worker गैरसैंण, चमोली, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
  • जिला चिकित्सालय में कल लगेगा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर- मुख्यमंत्री निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में आठ विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे जांच, सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक ------------------- चम्पावत। जिला चिकित्सालय में दो नवंबर को मुख्यमंत्री निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा। इसमें साई सुखदा हॉस्पिटल, बरेली के विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों को परामर्श देंगे। शिविर में हृदय रोग, किडनी रोग, हड्डी एवं जोड़ रोग, प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जरी, फीटल मेडिसिन एवं आईवीएफ (स्त्री रोग), एंडोक्रिनोलॉजी (शुगर रोग), गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और यूरोलॉजी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे। मरीजों को परामर्श, बीपी, ब्लड शुगर, ईसीजी और बोन मिनरल डेंसिटी की जांच निःशुल्क मिलेगी। आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क इलाज की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। शिविर के आयोजन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान का सहयोग रहेगा। मरीजों से कहा गया है कि वे अपने पुराने पर्चे और जांच रिपोर्ट साथ लाएं। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 6399001234 पर संपर्क किया जा सकता है। साई सुखदा हॉस्पिटल का संपर्क नंबर 7060774191 है।
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    जिला चिकित्सालय में कल लगेगा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर- मुख्यमंत्री निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में आठ विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे जांच, सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक
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चम्पावत। जिला चिकित्सालय में दो नवंबर को मुख्यमंत्री निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा। इसमें साई सुखदा हॉस्पिटल, बरेली के विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों को परामर्श देंगे।

शिविर में हृदय रोग, किडनी रोग, हड्डी एवं जोड़ रोग, प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जरी, फीटल मेडिसिन एवं आईवीएफ (स्त्री रोग), एंडोक्रिनोलॉजी (शुगर रोग), गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और यूरोलॉजी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे।

मरीजों को परामर्श, बीपी, ब्लड शुगर, ईसीजी और बोन मिनरल डेंसिटी की जांच निःशुल्क मिलेगी। आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क इलाज की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

शिविर के आयोजन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान का सहयोग रहेगा। मरीजों से कहा गया है कि वे अपने पुराने पर्चे और जांच रिपोर्ट साथ लाएं। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 6399001234 पर संपर्क किया जा सकता है। साई सुखदा हॉस्पिटल का संपर्क नंबर 7060774191 है।
    user_Amit kumar
    Amit kumar
    Local News Reporter चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन, नोडल अधिकारियों को दिए निर्देश चम्पावत। आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 की तैयारियों को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी मनीष कुमार ने नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी दायित्वों का अध्ययन कर निर्धारित समय पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्वाचन कार्यों के लिए टीमों का गठन, कार्मिकों के प्रशिक्षण, मतदान दलों की उपलब्धता और रिटर्निंग ऑफिसर की हैंडबुक का अध्ययन करने को कहा। साथ ही मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी), स्थैतिक निगरानी दलों (एसएसटी), वाहनों, खानपान और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की समय से तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी नोडल अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करें, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारु रूप से संपन्न हो सके। उन्होंने बताया कि तैयारियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी प्रत्येक सोमवार को बैठक कर निर्वाचन संबंधी तैयारियों की जानकारी साझा की जा रही है। बैठक में प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी अजय सिंह, अपर जिलाधिकारी केएन गोस्वामी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी देवेंद्र सिंह अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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    विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन, नोडल अधिकारियों को दिए निर्देश
चम्पावत। आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 की तैयारियों को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी मनीष कुमार ने नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी दायित्वों का अध्ययन कर निर्धारित समय पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने निर्वाचन कार्यों के लिए टीमों का गठन, कार्मिकों के प्रशिक्षण, मतदान दलों की उपलब्धता और रिटर्निंग ऑफिसर की हैंडबुक का अध्ययन करने को कहा। साथ ही मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी), स्थैतिक निगरानी दलों (एसएसटी), वाहनों, खानपान और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की समय से तैयारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सभी नोडल अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करें, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारु रूप से संपन्न हो सके। उन्होंने बताया कि तैयारियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी प्रत्येक सोमवार को बैठक कर निर्वाचन संबंधी तैयारियों की जानकारी साझा की जा रही है।
बैठक में प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी अजय सिंह, अपर जिलाधिकारी केएन गोस्वामी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी देवेंद्र सिंह अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
    user_Girish singh bisht
    Girish singh bisht
    चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    11 hrs ago
  • विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटा चम्पावत जिला प्रशासन आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन–2027 को लेकर जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष कुमार ने नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने सभी अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से जिम्मेदारियां पूरी करने, निर्वाचन टीमों का गठन करने और कार्मिकों के प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में मतदान दलों, एमसीएमसी, स्थैतिक निगरानी दलों, मानव संसाधन, वाहनों, खान-पान और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी नियमों और रिटर्निंग ऑफिसर की हैंडबुक का अध्ययन करने को भी कहा गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी नोडल अधिकारी आपसी समन्वय के साथ पहले से तैयारियां पूरी रखें, ताकि चुनाव के दौरान व्यवस्थाएं सुचारु और पारदर्शी बनी रहें।
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    विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटा चम्पावत जिला प्रशासन
आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन–2027 को लेकर जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष कुमार ने नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर तैयारियों की जानकारी ली।
उन्होंने सभी अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से जिम्मेदारियां पूरी करने, निर्वाचन टीमों का गठन करने और कार्मिकों के प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में मतदान दलों, एमसीएमसी, स्थैतिक निगरानी दलों, मानव संसाधन, वाहनों, खान-पान और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी नियमों और रिटर्निंग ऑफिसर की हैंडबुक का अध्ययन करने को भी कहा गया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी नोडल अधिकारी आपसी समन्वय के साथ पहले से तैयारियां पूरी रखें, ताकि चुनाव के दौरान व्यवस्थाएं सुचारु और पारदर्शी बनी रहें।
    user_Champawat news
    Champawat news
    Local News Reporter चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    14 hrs ago
  • रामनगर पूछड़ी में वन विभाग का बड़ा एक्शन, दूसरे चरण में 81 अवैध निर्माण ध्वस्त, 5 हेक्टेयर तक वन भूमि कब्जामुक्त रिपोर्टर- सीमा खेतवाल स्थान- रामनगर रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान के दूसरे चरण में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार को प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने 81 अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर करीब 4 से 5 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की तैनाती रही, जबकि 30 से ज्यादा जेसीबी मशीनों और डंपरों की मदद से ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। शाम छह बजे शुरू हुई कार्रवाई रात दस बजे तक जारी रही। अभियान के बाद मौके से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया। रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब साढ़े चार बजे प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची। प्रभावित लोगों को शाम पांच बजे तक अपना सामान हटाने का समय दिया गया। इसके बाद शाम छह बजे से अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का अभियान शुरू कर दिया गया। मस्जिद मोहल्ला और मुल्ला पट्टी क्षेत्र में चिह्नित निर्माणों पर एक के बाद एक जेसीबी मशीनें गरजती रहीं। करीब चार घंटे तक चले इस अभियान में 81 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर वन भूमि को कब्जे में लिया गया। रात दस बजे तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी हुई, जिसके बाद मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। कार्रवाई के बाद तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पुनीत तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूछड़ी के अपर कोसी बीट में पहले चरण के दौरान 51 अवैध निर्माण हटाए गए थे, जबकि दूसरे चरण में 83 निर्माणों की सूची तैयार की गई थी। जिला प्रशासन और वन विभाग ने दस्तावेजों का कई बार सत्यापन किया। न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त मामलों, वन अधिकार अधिनियम की प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले मामलों और जिनकी बेदखली की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, उन्हें कार्रवाई से अलग रखा गया। जांच के बाद अंतिम रूप से 81 निर्माणों को ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित किया गया। पुनीत तोमर, डीएफओ तराई पश्चिमी वन प्रभाग डीएफओ के मुताबिक भारतीय वन अधिनियम के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए, आदेश पारित किए गए और अपीलों पर सुनवाई के बाद कार्रवाई की गई। न्यायालय में विचाराधीन और स्थगन आदेश वाले मामलों को अभियान से बाहर रखा गया। कार्रवाई को अंजाम देने के लिए तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, हल्द्वानी, रामनगर और कॉर्बेट क्षेत्र से वनकर्मियों को बुलाया गया था। वहीं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 800 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। अतिरिक्त बल और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर मौके पर एक हजार से अधिक जवान और कर्मचारी मौजूद रहे। अभियान के दौरान 30 से ज्यादा जेसीबी मशीनों, डंपरों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। डीएफओ पुनीत तोमर ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, पीआईयू जमरानी और नगर पालिका सहित संबंधित विभागों का सहयोग रहा। उन्होंने दावा किया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई। वहीं पूछड़ी में लोगों को स्टांप पेपर पर जमीन बेचकर बसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर डीएफओ ने कहा कि यह अलग विषय है। इस मामले में जिला स्तर पर कार्रवाई गतिमान है और एसआईटी का गठन भी किया गया है। वन विभाग के अनुसार उसकी प्राथमिकता वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराकर वापस विभाग के कब्जे में लेना था। फिलहाल पूछड़ी में अतिक्रमण हटाने के दूसरे चरण का अभियान पूरा हो चुका है। वन विभाग के मुताबिक 81 अवैध निर्माण ध्वस्त कर करीब 4 से 5 हेक्टेयर वन भूमि कब्जामुक्त कराई गई है। भारी पुलिस बल और मशीनरी की मौजूदगी में चले इस अभियान के बाद अब मौके से मलबा हटाने का काम जारी है।
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    रामनगर पूछड़ी में वन विभाग का बड़ा एक्शन, दूसरे चरण में 81 अवैध निर्माण ध्वस्त, 5 हेक्टेयर तक वन भूमि कब्जामुक्त
रिपोर्टर- सीमा खेतवाल 
स्थान- रामनगर
रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान के दूसरे चरण में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार को प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने 81 अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर करीब 4 से 5 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की तैनाती रही, जबकि 30 से ज्यादा जेसीबी मशीनों और डंपरों की मदद से ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। शाम छह बजे शुरू हुई कार्रवाई रात दस बजे तक जारी रही। अभियान के बाद मौके से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया। रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब साढ़े चार बजे प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची। प्रभावित लोगों को शाम पांच बजे तक अपना सामान हटाने का समय दिया गया। इसके बाद शाम छह बजे से अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का अभियान शुरू कर दिया गया।
मस्जिद मोहल्ला और मुल्ला पट्टी क्षेत्र में चिह्नित निर्माणों पर एक के बाद एक जेसीबी मशीनें गरजती रहीं। करीब चार घंटे तक चले इस अभियान में 81 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर वन भूमि को कब्जे में लिया गया। रात दस बजे तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी हुई, जिसके बाद मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।
कार्रवाई के बाद तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पुनीत तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूछड़ी के अपर कोसी बीट में पहले चरण के दौरान 51 अवैध निर्माण हटाए गए थे, जबकि दूसरे चरण में 83 निर्माणों की सूची तैयार की गई थी।
जिला प्रशासन और वन विभाग ने दस्तावेजों का कई बार सत्यापन किया। न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त मामलों, वन अधिकार अधिनियम की प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले मामलों और जिनकी बेदखली की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, उन्हें कार्रवाई से अलग रखा गया। जांच के बाद अंतिम रूप से 81 निर्माणों को ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित किया गया।
पुनीत तोमर, डीएफओ तराई पश्चिमी वन प्रभाग
डीएफओ के मुताबिक भारतीय वन अधिनियम के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए, आदेश पारित किए गए और अपीलों पर सुनवाई के बाद कार्रवाई की गई। न्यायालय में विचाराधीन और स्थगन आदेश वाले मामलों को अभियान से बाहर रखा गया।
कार्रवाई को अंजाम देने के लिए तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, हल्द्वानी, रामनगर और कॉर्बेट क्षेत्र से वनकर्मियों को बुलाया गया था। वहीं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 800 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। अतिरिक्त बल और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर मौके पर एक हजार से अधिक जवान और कर्मचारी मौजूद रहे।
अभियान के दौरान 30 से ज्यादा जेसीबी मशीनों, डंपरों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। डीएफओ पुनीत तोमर ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, पीआईयू जमरानी और नगर पालिका सहित संबंधित विभागों का सहयोग रहा।
उन्होंने दावा किया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
वहीं पूछड़ी में लोगों को स्टांप पेपर पर जमीन बेचकर बसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर डीएफओ ने कहा कि यह अलग विषय है। इस मामले में जिला स्तर पर कार्रवाई गतिमान है और एसआईटी का गठन भी किया गया है।
वन विभाग के अनुसार उसकी प्राथमिकता वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराकर वापस विभाग के कब्जे में लेना था।
फिलहाल पूछड़ी में अतिक्रमण हटाने के दूसरे चरण का अभियान पूरा हो चुका है। वन विभाग के मुताबिक 81 अवैध निर्माण ध्वस्त कर करीब 4 से 5 हेक्टेयर वन भूमि कब्जामुक्त कराई गई है। भारी पुलिस बल और मशीनरी की मौजूदगी में चले इस अभियान के बाद अब मौके से मलबा हटाने का काम जारी है।
    user_सीमा खेतवाल
    सीमा खेतवाल
    Local News Reporter बागेश्वर, बागेश्वर, उत्तराखंड•
    13 hrs ago
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