logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

बैतूल जिले के आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में ₹15 लाख की लागत से बनाया गया घाट पहली ही बारिश का सामना नहीं कर सका और ध्वस्त हो गया। नदी के तेज बहाव ने घाट के दोनों किनारों की मिट्टी और निर्माण को बहा दिया, जिससे इस पूरे कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। उन्होंने बताया कि बिना किसी मजबूत आधार के सीधे बसवा रेत पर कंक्रीट की ढलाई कर दी गई, और न ही जमीन को कंप्रेसर से दबाया गया, न ही उसे रोलर चलाकर मजबूत बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, इसी का परिणाम है कि पहली बारिश ने ही पूरे निर्माण की असलियत सामने ला दी। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के साथ किया गया खुला खिलवाड़ है; यदि निर्माण मानकों के अनुरूप होता तो पहली बारिश में घाट की ऐसी दयनीय स्थिति नहीं होती। लोगों का यह भी आरोप है कि पंचायत स्तर पर गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम किया गया, और जिम्मेदार अधिकारी भी सब कुछ देखते हुए मौन बने रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹15 लाख की राशि आखिर खर्च कहाँ हुई। यदि निर्माण शुरू से ही मानकों के विपरीत था, तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए? ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या निरीक्षण केवल कागजों तक ही सीमित था, या फिर इस पूरे मामले को किसी का संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, और गुणवत्ता की निष्पक्ष पड़ताल हो। यदि अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो सरपंच, सचिव और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने पूरे निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप दोबारा कराने की भी मांग की है, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके और ग्रामीणों को एक सुरक्षित घाट मिल सके। जनता अब पूछ रही है कि यह ₹15 लाख का घाट है या सरकारी खजाने पर पड़ा भ्रष्टाचार का एक और घाट? पहली बारिश ने जो सच्चाई दिखाई है, उसके बाद क्या प्रशासन अब भी आँखें मूंदे रहेगा या दोषियों पर कार्रवाई करेगा?

2 hrs ago
user_जिला ब्यूरो बैतूल
जिला ब्यूरो बैतूल
Salesperson बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

बैतूल जिले के आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में ₹15 लाख की लागत से बनाया गया घाट पहली ही बारिश का सामना नहीं कर सका और ध्वस्त हो गया। नदी के तेज बहाव ने घाट के दोनों किनारों की मिट्टी और निर्माण को बहा दिया, जिससे इस पूरे कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। उन्होंने बताया कि बिना किसी मजबूत आधार के सीधे बसवा रेत पर कंक्रीट की ढलाई कर दी गई, और न

ही जमीन को कंप्रेसर से दबाया गया, न ही उसे रोलर चलाकर मजबूत बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, इसी का परिणाम है कि पहली बारिश ने ही पूरे निर्माण की असलियत सामने ला दी। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के साथ किया गया खुला खिलवाड़ है; यदि निर्माण मानकों के अनुरूप होता तो पहली बारिश में घाट की ऐसी दयनीय स्थिति नहीं होती। लोगों का यह भी आरोप है कि पंचायत स्तर पर गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम किया गया, और जिम्मेदार अधिकारी भी सब कुछ

29696680-cdb6-4191-bef5-6bf8fab296fd

देखते हुए मौन बने रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹15 लाख की राशि आखिर खर्च कहाँ हुई। यदि निर्माण शुरू से ही मानकों के विपरीत था, तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए? ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या निरीक्षण केवल कागजों तक ही सीमित था, या फिर इस पूरे मामले को किसी का संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, और गुणवत्ता की निष्पक्ष पड़ताल हो। यदि अनियमितताएँ साबित होती हैं,

eb7aa098-6969-497e-88c5-6b8683673f6e

तो सरपंच, सचिव और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने पूरे निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप दोबारा कराने की भी मांग की है, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके और ग्रामीणों को एक सुरक्षित घाट मिल सके। जनता अब पूछ रही है कि यह ₹15 लाख का घाट है या सरकारी खजाने पर पड़ा भ्रष्टाचार का एक और घाट? पहली बारिश ने जो सच्चाई दिखाई है, उसके बाद क्या प्रशासन अब भी आँखें मूंदे रहेगा या दोषियों पर कार्रवाई करेगा?

More news from Betul and nearby areas
  • बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम नाँदपुर में सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण एक ग्रामीण के घर में बारिश का पानी घुसने का मामला सामने आया है। पीड़ित हेमंत पटवारी ने बताया कि सड़क और नाली का निर्माण न होने की वजह से हर बारिश में उनके घर में पानी भर जाता है, जिससे परिवार को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। हेमंत पटवारी के अनुसार, उन्होंने ग्राम पंचायत नाँदपुर के सरपंच, उपसरपंच और सचिव को इस समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें "कंप्लेंट कर दो" कहकर टाल दिया। शिकायत दर्ज कराने के दो-तीन दिन बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। पीड़ित ने यह भी बताया कि घर में छोटे बच्चे होने के कारण उन्हें सांप-बिच्छू के डर से रात को सोना मुश्किल हो गया है। हाल ही में हुई बारिश में उनके घर में एक बार फिर पानी घुस गया, जिसके बाद नाली निर्माण के अनुरोध पर उन्हें जवाब मिला कि "कल आकर देखता हूं और अपने घर के सामने ऊंचा करवा लो।" ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क और नाली का निर्माण कराया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने पंचायत से शीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करने और स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो किसी भी प्रकार की जनहानि के लिए पंचायत जिम्मेदार होगी।
    1
    बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम नाँदपुर में सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण एक ग्रामीण के घर में बारिश का पानी घुसने का मामला सामने आया है। पीड़ित हेमंत पटवारी ने बताया कि सड़क और नाली का निर्माण न होने की वजह से हर बारिश में उनके घर में पानी भर जाता है, जिससे परिवार को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

हेमंत पटवारी के अनुसार, उन्होंने ग्राम पंचायत नाँदपुर के सरपंच, उपसरपंच और सचिव को इस समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें "कंप्लेंट कर दो" कहकर टाल दिया। शिकायत दर्ज कराने के दो-तीन दिन बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। पीड़ित ने यह भी बताया कि घर में छोटे बच्चे होने के कारण उन्हें सांप-बिच्छू के डर से रात को सोना मुश्किल हो गया है। हाल ही में हुई बारिश में उनके घर में एक बार फिर पानी घुस गया, जिसके बाद नाली निर्माण के अनुरोध पर उन्हें जवाब मिला कि "कल आकर देखता हूं और अपने घर के सामने ऊंचा करवा लो।"

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क और नाली का निर्माण कराया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने पंचायत से शीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करने और स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो किसी भी प्रकार की जनहानि के लिए पंचायत जिम्मेदार होगी।
    user_Kashinath Sahu
    Kashinath Sahu
    Local News Reporter Multai, Betul•
    1 hr ago
  • मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समाज में जल संरक्षण और संवर्धन के प्रति व्यापक जनजागरण के उद्देश्य से चलाए गए 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का समापन हो गया है। यह अभियान पूरे प्रदेश में संचालित किया गया था। अभियान का समापन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के आठनेर विकासखंड के निर्देशन में, नगर परिषद आठनेर के सहयोग और जन कल्याण संस्था आठनेर के संयोजन से हुआ। आठनेर नगर के ताप्ती सरोवर स्थित जलकुंड पर आयोजित इस समापन कार्यक्रम में सामूहिक श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया और जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया।
    1
    मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समाज में जल संरक्षण और संवर्धन के प्रति व्यापक जनजागरण के उद्देश्य से चलाए गए 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का समापन हो गया है। यह अभियान पूरे प्रदेश में संचालित किया गया था।

अभियान का समापन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के आठनेर विकासखंड के निर्देशन में, नगर परिषद आठनेर के सहयोग और जन कल्याण संस्था आठनेर के संयोजन से हुआ। आठनेर नगर के ताप्ती सरोवर स्थित जलकुंड पर आयोजित इस समापन कार्यक्रम में सामूहिक श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया और जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया।
    user_आठनेर रिपोर्टर
    आठनेर रिपोर्टर
    पत्रकारिता आठनेर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजी रामजी) योजना की शुरुआत 1 जुलाई 2026 से हो गई है। इसका राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री ग्रामीण विकास मंत्रालय नई दिल्ली श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आंध्र प्रदेश राज्य के तिरूपति जिले के मुक्कारवरिपल्लीर ग्राम में आयोजित किया गया। इसी क्रम में, बैतूल के जनपद पंचायत प्रभातपट्टन में विधायक मुलताई श्री चन्द्रशेखर देशमुख और अध्यक्ष जिला पंचायत श्री राजा पंवार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय जन सम्मेलन सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री देशमुख ने बताया कि जहां मनरेगा में 100 दिन का रोजगार मिलता था, वहीं वीबीजी रामजी योजना के तहत अब 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायतें अपने कार्यों का निर्धारण स्वयं कर सकेंगी, जिससे वे अपनी परिस्थितियों के अनुसार प्राथमिकताएं तय कर सकें। इस योजना से श्रमिकों को समय पर मजदूरी का भुगतान मिलेगा, जिससे वे अधिक संख्या में काम पर आ सकेंगे। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण और ग्रामीण अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता मिलने से गांवों में अधिक विकास कार्य हो सकेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजा पंवार ने कहा कि वीबीजी रामजी योजना के तहत मजदूरी दर बढ़ाकर ₹300 कर दी गई है। ग्राम सभा के माध्यम से योजनाओं के बनने से गांव अपने विकास के लिए आत्मनिर्भर बनेंगे और अंतिम छोर पर स्थित गांवों तथा वंचित वर्गों को भी लाभ मिल पाएगा। उन्होंने बताया कि काम मांगने के बाद समय सीमा में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी प्राप्त होगा। केन्द्र और राज्य सरकार की 60:40 की भागीदारी से गांवों को अधिक राशि मिलेगी, जिससे अधिक विकास कार्य किए जा सकेंगे। श्री पंवार ने इस योजना को केवल एक योजना के रूप में न देखकर, बल्कि 'सेवा भाव' के साथ क्रियान्वित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के उद्देश्यों, ग्रामीण रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन तथा ग्राम स्तर पर विकास गतिविधियों को गति प्रदान करने संबंधी विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, आर्थिक सशक्तिकरण तथा आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री हंसराज धुर्वे, जि.पं.सदस्य श्रीमती सरस्वती नागले, श्रीमती उर्मिला गव्हाडे, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सोनाली विनोद पटेल, ज.पं. उपाध्यक्ष श्री देवीराम बनखेडे, अति.मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती इंदिरा मेहतो, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सुश्री आंचल पवार, कार्यपालन यंत्री ग्रायांसे श्री धाकरे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
    2
    विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजी रामजी) योजना की शुरुआत 1 जुलाई 2026 से हो गई है। इसका राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री ग्रामीण विकास मंत्रालय नई दिल्ली श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आंध्र प्रदेश राज्य के तिरूपति जिले के मुक्कारवरिपल्लीर ग्राम में आयोजित किया गया। इसी क्रम में, बैतूल के जनपद पंचायत प्रभातपट्टन में विधायक मुलताई श्री चन्द्रशेखर देशमुख और अध्यक्ष जिला पंचायत श्री राजा पंवार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय जन सम्मेलन सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री देशमुख ने बताया कि जहां मनरेगा में 100 दिन का रोजगार मिलता था, वहीं वीबीजी रामजी योजना के तहत अब 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायतें अपने कार्यों का निर्धारण स्वयं कर सकेंगी, जिससे वे अपनी परिस्थितियों के अनुसार प्राथमिकताएं तय कर सकें। इस योजना से श्रमिकों को समय पर मजदूरी का भुगतान मिलेगा, जिससे वे अधिक संख्या में काम पर आ सकेंगे। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण और ग्रामीण अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता मिलने से गांवों में अधिक विकास कार्य हो सकेंगे।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजा पंवार ने कहा कि वीबीजी रामजी योजना के तहत मजदूरी दर बढ़ाकर ₹300 कर दी गई है। ग्राम सभा के माध्यम से योजनाओं के बनने से गांव अपने विकास के लिए आत्मनिर्भर बनेंगे और अंतिम छोर पर स्थित गांवों तथा वंचित वर्गों को भी लाभ मिल पाएगा। उन्होंने बताया कि काम मांगने के बाद समय सीमा में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी प्राप्त होगा। केन्द्र और राज्य सरकार की 60:40 की भागीदारी से गांवों को अधिक राशि मिलेगी, जिससे अधिक विकास कार्य किए जा सकेंगे। श्री पंवार ने इस योजना को केवल एक योजना के रूप में न देखकर, बल्कि 'सेवा भाव' के साथ क्रियान्वित करने पर जोर दिया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के उद्देश्यों, ग्रामीण रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन तथा ग्राम स्तर पर विकास गतिविधियों को गति प्रदान करने संबंधी विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, आर्थिक सशक्तिकरण तथा आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री हंसराज धुर्वे, जि.पं.सदस्य श्रीमती सरस्वती नागले, श्रीमती उर्मिला गव्हाडे, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सोनाली विनोद पटेल, ज.पं. उपाध्यक्ष श्री देवीराम बनखेडे, अति.मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती इंदिरा मेहतो, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सुश्री आंचल पवार, कार्यपालन यंत्री ग्रायांसे श्री धाकरे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
    user_M. Afsar khan
    M. Afsar khan
    Local News Reporter Multai, Betul•
    3 hrs ago
  • बेटूल जिले के आमला थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक अंधे हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा करते हुए मृतक के पुत्र और पत्नी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि खेती और पैसों को लेकर विवाद से नाराज बेटे ने अपनी मां के साथ मिलकर पिता का गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को कुड़मुड नदी के सूखे हिस्से में छिपा दिया गया, वहीं मां ने पुलिस को गुमराह करने के लिए बोरदेही थाने में पति की झूठी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के निर्देश पर आमला पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आधार पर इस मामले को सुलझाया। 25 जून 2026 को कुड़मुड नदी के पास एक अज्ञात शव मिला था, जिसकी पहचान बाद में ग्राम शंभूढाना बड़ाखारी निवासी लब्बू यादव के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने गला घोंटने से मौत की पुष्टि की, जिससे यह हत्या का मामला सिद्ध हुआ। जांच में पता चला कि मृतक का 19 वर्षीय पुत्र संदीप यादव अपने पिता से खेती न करने देने, खर्च के लिए पैसे न देने और आए दिन के विवादों से परेशान था। उसने अपनी मां सुनीता यादव के साथ मिलकर 22-23 जून की रात रेलवे स्टेशन से लौटते समय गमछे से पिता का गला घोंट दिया और शव को नदी में छिपा दिया। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी की मां सुनीता यादव को पूरी घटना की जानकारी थी। उसने न केवल बेटे का साक्ष्य छिपाने में साथ दिया, बल्कि पति की झूठी गुमशुदगी दर्ज कराकर पुलिस को भटकाने का भी प्रयास किया। यह भी पाया गया कि वह लगातार अपने पुत्र को मृतक के विरुद्ध उकसाती रहती थी। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर थाना आमला में अपराध क्रमांक 277/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238(ए) एवं 3(5) के तहत दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस अंधे हत्याकांड के सफल खुलासे में निरीक्षक मुकेश ठाकुर के नेतृत्व में उपनिरीक्षक बलराम यादव, सहायक उपनिरीक्षक मूलचंद अनंत, प्रधान आरक्षक बसंत उईके, कमल पांसे, आरक्षक रोहित कुशवाह, नागेंद्र सिंह, विवेक पाल, तिलक कुडापे, महिला आरक्षक विनिता नागवंशी एवं प्रियांशी पटेल सहित आमला पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पारिवारिक विवादों का समाधान बातचीत और कानूनी माध्यमों से करें, कानून अपने हाथ में न लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या डायल 112 पर दें।
    3
    बेटूल जिले के आमला थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक अंधे हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा करते हुए मृतक के पुत्र और पत्नी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि खेती और पैसों को लेकर विवाद से नाराज बेटे ने अपनी मां के साथ मिलकर पिता का गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को कुड़मुड नदी के सूखे हिस्से में छिपा दिया गया, वहीं मां ने पुलिस को गुमराह करने के लिए बोरदेही थाने में पति की झूठी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।

पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के निर्देश पर आमला पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आधार पर इस मामले को सुलझाया। 25 जून 2026 को कुड़मुड नदी के पास एक अज्ञात शव मिला था, जिसकी पहचान बाद में ग्राम शंभूढाना बड़ाखारी निवासी लब्बू यादव के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने गला घोंटने से मौत की पुष्टि की, जिससे यह हत्या का मामला सिद्ध हुआ। जांच में पता चला कि मृतक का 19 वर्षीय पुत्र संदीप यादव अपने पिता से खेती न करने देने, खर्च के लिए पैसे न देने और आए दिन के विवादों से परेशान था। उसने अपनी मां सुनीता यादव के साथ मिलकर 22-23 जून की रात रेलवे स्टेशन से लौटते समय गमछे से पिता का गला घोंट दिया और शव को नदी में छिपा दिया।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी की मां सुनीता यादव को पूरी घटना की जानकारी थी। उसने न केवल बेटे का साक्ष्य छिपाने में साथ दिया, बल्कि पति की झूठी गुमशुदगी दर्ज कराकर पुलिस को भटकाने का भी प्रयास किया। यह भी पाया गया कि वह लगातार अपने पुत्र को मृतक के विरुद्ध उकसाती रहती थी। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर थाना आमला में अपराध क्रमांक 277/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238(ए) एवं 3(5) के तहत दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

इस अंधे हत्याकांड के सफल खुलासे में निरीक्षक मुकेश ठाकुर के नेतृत्व में उपनिरीक्षक बलराम यादव, सहायक उपनिरीक्षक मूलचंद अनंत, प्रधान आरक्षक बसंत उईके, कमल पांसे, आरक्षक रोहित कुशवाह, नागेंद्र सिंह, विवेक पाल, तिलक कुडापे, महिला आरक्षक विनिता नागवंशी एवं प्रियांशी पटेल सहित आमला पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पारिवारिक विवादों का समाधान बातचीत और कानूनी माध्यमों से करें, कानून अपने हाथ में न लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या डायल 112 पर दें।
    user_Dabang kesari amla mohd. asif
    Dabang kesari amla mohd. asif
    Local News Reporter आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • बैतूल जिले के आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में ₹15 लाख की लागत से बनाया गया घाट पहली ही बारिश का सामना नहीं कर सका और ध्वस्त हो गया। नदी के तेज बहाव ने घाट के दोनों किनारों की मिट्टी और निर्माण को बहा दिया, जिससे इस पूरे कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। उन्होंने बताया कि बिना किसी मजबूत आधार के सीधे बसवा रेत पर कंक्रीट की ढलाई कर दी गई, और न ही जमीन को कंप्रेसर से दबाया गया, न ही उसे रोलर चलाकर मजबूत बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, इसी का परिणाम है कि पहली बारिश ने ही पूरे निर्माण की असलियत सामने ला दी। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के साथ किया गया खुला खिलवाड़ है; यदि निर्माण मानकों के अनुरूप होता तो पहली बारिश में घाट की ऐसी दयनीय स्थिति नहीं होती। लोगों का यह भी आरोप है कि पंचायत स्तर पर गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम किया गया, और जिम्मेदार अधिकारी भी सब कुछ देखते हुए मौन बने रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹15 लाख की राशि आखिर खर्च कहाँ हुई। यदि निर्माण शुरू से ही मानकों के विपरीत था, तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए? ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या निरीक्षण केवल कागजों तक ही सीमित था, या फिर इस पूरे मामले को किसी का संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, और गुणवत्ता की निष्पक्ष पड़ताल हो। यदि अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो सरपंच, सचिव और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने पूरे निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप दोबारा कराने की भी मांग की है, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके और ग्रामीणों को एक सुरक्षित घाट मिल सके। जनता अब पूछ रही है कि यह ₹15 लाख का घाट है या सरकारी खजाने पर पड़ा भ्रष्टाचार का एक और घाट? पहली बारिश ने जो सच्चाई दिखाई है, उसके बाद क्या प्रशासन अब भी आँखें मूंदे रहेगा या दोषियों पर कार्रवाई करेगा?
    4
    बैतूल जिले के आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में ₹15 लाख की लागत से बनाया गया घाट पहली ही बारिश का सामना नहीं कर सका और ध्वस्त हो गया। नदी के तेज बहाव ने घाट के दोनों किनारों की मिट्टी और निर्माण को बहा दिया, जिससे इस पूरे कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। उन्होंने बताया कि बिना किसी मजबूत आधार के सीधे बसवा रेत पर कंक्रीट की ढलाई कर दी गई, और न ही जमीन को कंप्रेसर से दबाया गया, न ही उसे रोलर चलाकर मजबूत बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, इसी का परिणाम है कि पहली बारिश ने ही पूरे निर्माण की असलियत सामने ला दी। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के साथ किया गया खुला खिलवाड़ है; यदि निर्माण मानकों के अनुरूप होता तो पहली बारिश में घाट की ऐसी दयनीय स्थिति नहीं होती। लोगों का यह भी आरोप है कि पंचायत स्तर पर गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम किया गया, और जिम्मेदार अधिकारी भी सब कुछ देखते हुए मौन बने रहे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹15 लाख की राशि आखिर खर्च कहाँ हुई। यदि निर्माण शुरू से ही मानकों के विपरीत था, तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए? ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या निरीक्षण केवल कागजों तक ही सीमित था, या फिर इस पूरे मामले को किसी का संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, और गुणवत्ता की निष्पक्ष पड़ताल हो। यदि अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो सरपंच, सचिव और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने पूरे निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप दोबारा कराने की भी मांग की है, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके और ग्रामीणों को एक सुरक्षित घाट मिल सके।

जनता अब पूछ रही है कि यह ₹15 लाख का घाट है या सरकारी खजाने पर पड़ा भ्रष्टाचार का एक और घाट? पहली बारिश ने जो सच्चाई दिखाई है, उसके बाद क्या प्रशासन अब भी आँखें मूंदे रहेगा या दोषियों पर कार्रवाई करेगा?
    user_जिला ब्यूरो बैतूल
    जिला ब्यूरो बैतूल
    Salesperson बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.