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लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड परिसर में बुधवार को बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत आम उत्सव सह मेला का आयोजन किया गया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रखंड और पंचायत स्तर पर किसानों को योजना का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना और उन्हें अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में स्थापित करना है। आम उत्सव सह बागवानी मेला के दौरान, किसानों ने अपनी आवाज़ उठाते हुए उचित फल और बाज़ार उपलब्ध कराने की मांग की।
आलोक कुमार
लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड परिसर में बुधवार को बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत आम उत्सव सह मेला का आयोजन किया गया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रखंड और पंचायत स्तर पर किसानों को योजना का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना और उन्हें अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में स्थापित करना है। आम उत्सव सह बागवानी मेला के दौरान, किसानों ने अपनी आवाज़ उठाते हुए उचित फल और बाज़ार उपलब्ध कराने की मांग की।
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- लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड परिसर में बुधवार को बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत आम उत्सव सह मेला का आयोजन किया गया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रखंड और पंचायत स्तर पर किसानों को योजना का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना और उन्हें अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में स्थापित करना है। आम उत्सव सह बागवानी मेला के दौरान, किसानों ने अपनी आवाज़ उठाते हुए उचित फल और बाज़ार उपलब्ध कराने की मांग की।1
- झारखंड के गुमला जिले में एक व्यक्ति को 40 साल के लंबे इंतजार के बाद अपनी ज़मीन के हक में फैसला मिला है, लेकिन अब उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है। इस मामले में पुलिस के ढुलमुल रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि उसे लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जिससे वह भयभीत है।1
- झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की हालत बेहद जर्जर है। इन सड़कों की स्थिति इतनी खराब है कि इसे देखकर कोई भी व्यक्ति दंग रह जाएगा।1
- एक गांव में सरकारी योजनाएं आज तक नहीं पहुंच पाई हैं। इस गांव में अभी तक बिजली, पानी और सड़क जैसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण आज भी रात के समय उजाले के लिए लकड़ियां जलाकर काम चलाते हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों ऐसे गांवों तक सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।1
- गुमला में खाद्य सुरक्षा विभाग के पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुगी ने बुधवार को बिरसा मुंडा पार्क के समीप स्थित ठेलों, दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दुकानदारों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए ज़रूरी निर्देश दिए गए। निरीक्षण के क्रम में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने सभी दुकानदारों को अपनी दुकानों के सामने प्लास्टिक या शीशे की सुरक्षा व्यवस्था लगाने का निर्देश दिया, ताकि खाद्य सामग्री धूल, गंदगी और अन्य बाहरी प्रदूषण से सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि खुले में खाद्य पदार्थ बेचने से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके साथ ही, दुकानदारों को खाद्य सामग्री और पकवानों को अख़बार में लपेटकर बेचने पर भी सख्त रोक लगाने का निर्देश दिया गया। अधिकारी ने बताया कि अख़बार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही और रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रकाश चंद्र गुगी ने सभी दुकानदारों को रविवार तक विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के बाद दोबारा निरीक्षण किया जाएगा और यदि किसी दुकान में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि आम जनता को सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र के दुकानदारों में जागरूकता बढ़ी है और स्वच्छता मानकों के पालन पर ज़ोर दिया गया है।3
- झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड अंतर्गत शंख मोड़ मांझाटोली में बुधवार दोपहर करीब दो बजे तेज आंधी-तूफान आया। इस तूफान के कारण नेशनल हाईवे 43 पर मां आशा पूरा फ्यूल सेंटर के पास एक विशाल फुटकल का पेड़ गिर गया, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग एक घंटे तक जाम रहा। हाईवे के दोनों ओर छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत मदद की पहल करते हुए गिरे हुए विशाल पेड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा और हाईवे को आवागमन के लिए सुचारू किया। ग्रामीणों के इस सराहनीय सहयोग से राहगीरों और वाहन चालकों को काफी राहत मिली। आंधी-तूफान ने शंखमोड़ मांझाटोली में छोटे दुकानदारों और घरों के बाहर लगी एस्बेस्टस की चादरों और विभिन्न पेड़ों की डालियों को भी गिरा दिया, जिससे घरों को नुकसान पहुंचा है।1
- झारखंड के चंदवा प्रखंड स्थित एस्सार पावर प्लांट क्षेत्र में बुधवार को हजारों ग्रामीण ट्रैक्टर और हल लेकर उन खेतों में उतर आए, जिनकी जमीन पहले प्लांट को दी गई थी। अनगड़ा, चतरो, अरधे, तुपी और चकला गांव की संयुक्त ग्राम सभा ने पेसा कानून 2025 के तहत मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए उड़ीसा एलॉय स्टील प्राइवेट लिमिटेड को दी गई 540 एकड़ जमीन वापस लेने की घोषणा की है। ग्रामीणों के अनुसार, यह जमीन 2005-06 में एस्सार पावर झारखंड लिमिटेड को 21 सूत्री इकरारनामे के तहत दी गई थी। 2014 में कोल ब्लॉक रद्द होने के बाद कंपनी बंद हो गई। एनसीएलटी के आदेश पर 3 मार्च 2025 को यह प्लांट उड़ीसा एलॉय स्टील को सौंपा गया, लेकिन नई कंपनी ने पुराने इकरारनामे को मानने से इनकार कर दिया और 31 मार्च 2025 से रैयतों का गुजारा भत्ता भी रोक दिया। इसके बाद 17 जून 2025 को लातेहार प्रशासन ने कंपनी को 15 दिन में नौकरी और वेतन बहाल करने का निर्देश दिया था, जिसे कंपनी ने ठुकरा दिया, जिससे सैकड़ों परिवार भुखमरी के कगार पर पहुँच गए। इन परिस्थितियों में, 27 मई 2026 को सरहुलिया महुआ में पांचों गांव के ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में एक संयुक्त ग्राम सभा हुई, जिसमें सर्वसम्मति से तीन प्रमुख फैसले लिए गए: इकरारनामा स्थगित कर कंपनी को जमीन से बेदखल किया जाए; प्लांट की सभी संपत्तियां ग्राम सभा के नियंत्रण में ली जाएं; और जब्त जमीन-संसाधनों से ग्राम कोष बनाकर रैयतों को रोजगार दिया जाए। ग्राम प्रधानों ने उपायुक्त लातेहार को एक स्मार पत्र सौंपकर 10 दिनों के भीतर हस्तक्षेप की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण स्वयं खेती शुरू कर देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन और नौकरी, दोनों चली गई हैं, अब खेती ही उनका आखिरी सहारा है। प्रशासन और कंपनी की चुप्पी से क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है।4
- झारखंड के लोहरदगा में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण किसी भी समय एक बड़ा हादसा हो सकता है। शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या के बावजूद पार्किंग के लिए समुचित स्थान उपलब्ध नहीं है, जिससे सड़कों पर भीड़ और अव्यवस्था का माहौल बना रहता है। यह स्थिति राहगीरों और वाहन चालकों, दोनों के लिए खतरा बनी हुई है।1