अनूपपुर जिले में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय मास्टर वॉलिंटियर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला पंचायत सभागार में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को नशामुक्त बनाने के प्रयासों को गति देना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत की सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी ने नशा मुक्ति के लिए सघन प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शासकीय उत्तरदायित्व नहीं है, बल्कि सर्व समाज के लोगों को भी इसमें शामिल कर सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए ताकि नशा ग्रस्त लोगों को नया जीवन मिल सके। श्रीमती कुमारी ने निचले स्तर तक नशा मुक्ति के प्रयासों, नशा मुक्त केंद्रों और सहायता केंद्रों के नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) भोपाल के मास्टर ट्रेनर ने नशा छोड़ने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के लिए टोल फ्री नंबर 14446 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, नशे से संबंधित सामग्री बेचने वालों की जानकारी एनसीबी हेल्पलाइन नंबर 1933 पर दी जा सकती है, और खुशी हेल्पलाइन 14416 का उपयोग कर नशा मुक्त समाज की स्थापना में सहयोग देने की अपेक्षा की गई। ट्रेनर ने वॉलिंटियर्स तथा उपस्थित विभिन्न विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को नशा से संबंधित अनेक मुद्दों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। यह प्रशिक्षण नशा मुक्त भारत अभियान के मास्टर वॉलिंटियर्स को समाज में नशा मुक्ति के संदेश को प्रभावी ढंग से फैलाने और लोगों को जागरूक करने के लिए तैयार करने हेतु दिया गया था।
अनूपपुर जिले में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय मास्टर वॉलिंटियर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला पंचायत सभागार में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को नशामुक्त बनाने के प्रयासों को गति देना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत की सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी ने नशा मुक्ति के लिए सघन प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शासकीय उत्तरदायित्व नहीं है, बल्कि सर्व समाज के लोगों को भी इसमें शामिल कर सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए ताकि नशा ग्रस्त लोगों को नया जीवन मिल सके। श्रीमती कुमारी ने निचले स्तर तक नशा मुक्ति के प्रयासों, नशा मुक्त केंद्रों और सहायता केंद्रों के नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) भोपाल के मास्टर ट्रेनर ने नशा छोड़ने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के लिए टोल फ्री नंबर 14446 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, नशे से संबंधित सामग्री बेचने वालों की जानकारी एनसीबी हेल्पलाइन नंबर 1933 पर दी जा सकती है, और खुशी हेल्पलाइन 14416 का उपयोग कर नशा मुक्त समाज की स्थापना में सहयोग देने की अपेक्षा की गई। ट्रेनर ने वॉलिंटियर्स तथा उपस्थित विभिन्न विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को नशा से संबंधित अनेक मुद्दों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। यह प्रशिक्षण नशा मुक्त भारत अभियान के मास्टर वॉलिंटियर्स को समाज में नशा मुक्ति के संदेश को प्रभावी ढंग से फैलाने और लोगों को जागरूक करने के लिए तैयार करने हेतु दिया गया था।
- अनूपपुर पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ थाना बिजुरी पुलिस ने बिजुरी अस्पताल के पास बाइक की डिग्गी से ₹50,000 चुराने वाले अंतर्राज्यीय शातिर आरोपी ओमप्रकाश सिसोदिया उर्फ बच्चा कंजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी किए गए ₹47,500 नकद और घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद कर ली है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बिजुरी के अलावा थाना रामनगर क्षेत्र में भी इसी तरह की वारदातें करने की बात कबूल की है। आरोपी ओमप्रकाश सिसोदिया के खिलाफ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चोरी, लूट, नकबजनी और आर्म्स एक्ट के तहत 15 से अधिक मामले दर्ज हैं। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी विकास सिंह और उनकी टीम की भूमिका सराहनीय रही है। अनूपपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे वाहनों में नकदी, कीमती सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को असुरक्षित न छोड़ें, और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।1
- कोरिया कलेक्टर ने हाल ही में एक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि स्वयं बच्चों को पढ़ाकर उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा।1
- उमरिया जिले की जनपद पंचायत करकेली की ग्राम पंचायत देवरा में शासकीय सड़क निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की गई है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत देवरा के हरिजन मोहल्ला वार्ड क्रमांक 2 में पहले कभी सड़क नहीं थी और लोग खेतों की मेड़ से आवागमन करते थे। स्थानीय निवासियों द्वारा अपनी निजी भूमि शपथ पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराने के बाद, पंचायत ने 115 मीटर लंबी और 03 मीटर चौड़ी कंक्रीट सड़क के निर्माण को ₹4,18,000 की लागत से स्वीकृति दी थी। श्रमिकों द्वारा लगभग ₹60,000 का कार्य कराते हुए जैसे ही मिट्टी डालकर सड़क को आकार दिया गया, कुछ शपथ कर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कार्य को रुकवा दिया। इस पूरे मामले की शिकायत आज दर्ज कराई गई है।3
- डिंडोरी में जनसुनवाई के दौरान, बजाग ब्लॉक के घोपतपुर स्थित डुमर टोला से करीब आधा सैकड़ा लोग पीने के पानी की गंभीर समस्या को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इन ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी यह महत्वपूर्ण मांग रखी।4
- उमरिया स्थित इमामबाड़ा में रात्रि पहर उमरिया वाले बाबा हुजूर की तशरीफ आमद हुई। बाबा हुजूर की यह सवारी इमामबाड़ा से जियारत करने के बाद भारी जनसैलाब के साथ शहर के विभिन्न इलाकों के लिए रवाना हुई। यात्रा के दौरान, बाबा हुजूर ने रमपुरी और मोहनपुरी स्थित अखाड़ों में जियारत की, जिसके बाद जामा मस्जिद में भी जियारत की। उनके चाहने वालों ने दीदार कर अपने और परिवार की खुशहाली के लिए मन ही मन दुआएं मांगीं। बाबा हुजूर ने बखरी और खलेशर स्थित विभिन्न अखाड़ा चौकों तथा ताबूतों की जियारत करते हुए, साथ चल रहे अकीदतमंद जनसैलाब के हक में दुआएं कीं। उन्होंने नगर के सभी अखाड़ा चौक और ताबूतों में जियारत कर अकीदतमंदों को अपनी दुआओं से नवाजा। बाबा हुजूर की सवारी फिर कैम्प अखाड़ा पहुंची, जहाँ उन्होंने अपनी तकरीर में लोगों को खुदा की इबादत कर सबसे पहले नेक इंसान बनने और नफरत करने वालों को ताकीद करने का संदेश दिया। इसके बाद, मस्जिद कैम्प में उन्होंने उमरिया वाले बाबा के कैम्प के लोगों को अपने फैज से नेक राह पर चलने की दुआएं दीं। अंत में, बाबा हुजूर ने इमामबाड़ा जाकर कयाम किया और सभी इमामबाड़ा के खादिमों को हिदायतें देकर सजदा किया। इस पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन का कार्य सराहनीय रहा।1
- रात्रि पहर उमरिया के इमामबाड़ा में उमरिया वाले बाबा हुजूर की तशरीफ आमद हुई, जहाँ उन्होंने अकीदतमंदों को अपनी दुआओं से नवाजा और उनकी खुशहाली की कामना की। बाबा हुजूर की सवारी इमामबाड़ा से निकलकर, जियारत करने के बाद, भारी जन सैलाब के साथ रवाना हुई। उनकी सवारी शहर के रमपुरी और मोहनपुरी स्थित अखाड़ों में जियारत करने के बाद जामा मस्जिद पहुँची, जहाँ बाबा हुजूर ने जियारत की। बाबा हुजूर के चाहने वालों ने उनका दीदार कर मन ही मन अपने और अपने परिवार की खुशहाली के लिए दुआएं कीं। जगह-जगह अपनी नजरे इनायत करते हुए, बाबा हुजूर ने उमरिया के बखरी और खलेशर स्थित विभिन्न अखाड़ा चौकों और ताबूतों की जियारत की, साथ ही साथ चल रहे अकीदतमंदों के हक में भी दुआएं कीं। उन्होंने नगर के सभी अखाड़ा चौक और ताबूतों में जियारत की एवं अकीदतमंदों को अपनी दुआओं से नवाजा। इसके बाद बाबा हुजूर की सवारी कैम्प अखाड़ा पहुँची, जहाँ उन्होंने अपनी तकरीर में लोगों को खुदा की इबादत कर सबसे पहले नेक इंसान बनने की सीख दी और नफरत करने वालों को ताकीद किया। कैम्प अखाड़े से वे मस्जिद कैम्प गए और वहाँ के लोगों को अपने फैज से नेक राह पर चलने की दुआएं दीं। अंत में, बाबा हुजूर ने इमामबाड़ा जाकर कयाम किया और सभी इमामबाड़ा के खादिमों को हिदायतें देकर सजदा किया। इस पूरी यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन का कार्य सराहनीय रहा, जिसने रामपुरी, मोहनपुरी, बखरी, खलेसर और कैंप मोहल्ला में गस्त की सवारी के साथ सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।2
- अनूपपुर जिले में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय मास्टर वॉलिंटियर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला पंचायत सभागार में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को नशामुक्त बनाने के प्रयासों को गति देना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत की सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी ने नशा मुक्ति के लिए सघन प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शासकीय उत्तरदायित्व नहीं है, बल्कि सर्व समाज के लोगों को भी इसमें शामिल कर सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए ताकि नशा ग्रस्त लोगों को नया जीवन मिल सके। श्रीमती कुमारी ने निचले स्तर तक नशा मुक्ति के प्रयासों, नशा मुक्त केंद्रों और सहायता केंद्रों के नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) भोपाल के मास्टर ट्रेनर ने नशा छोड़ने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के लिए टोल फ्री नंबर 14446 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, नशे से संबंधित सामग्री बेचने वालों की जानकारी एनसीबी हेल्पलाइन नंबर 1933 पर दी जा सकती है, और खुशी हेल्पलाइन 14416 का उपयोग कर नशा मुक्त समाज की स्थापना में सहयोग देने की अपेक्षा की गई। ट्रेनर ने वॉलिंटियर्स तथा उपस्थित विभिन्न विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को नशा से संबंधित अनेक मुद्दों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। यह प्रशिक्षण नशा मुक्त भारत अभियान के मास्टर वॉलिंटियर्स को समाज में नशा मुक्ति के संदेश को प्रभावी ढंग से फैलाने और लोगों को जागरूक करने के लिए तैयार करने हेतु दिया गया था।1
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।4
- लखनऊ के एक अस्पताल में हुए अग्निकांड में जेलिन चक्रवर्ती नामक एक युवा की दम घुटने से हुई दर्दनाक मौत पूरे सिस्टम के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सिस्टम की लापरवाही का परिणाम बताई गई है, जिसने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या हम ऐसी घटनाओं से वाकई सबक सीख रहे हैं। कई जिलों में प्रशासन द्वारा अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, होटलों और अन्य व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी की जांच के लिए छापेमारी की जा रही है, और नियमों का पालन न करने वाले कई प्रतिष्ठानों को सील भी किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि केवल कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि भवन निर्माण से लेकर उसके संचालन तक अग्नि सुरक्षा के सभी नियमों का कड़ाई से पालन हो। संकरी सीढ़ियाँ, आपातकालीन निकास का अभाव, अग्निशमन उपकरणों की कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई तो होती है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ही न हो। एक युवा की जान जाने के बाद अब कम से कम उसकी कुर्बानी से व्यवस्था और समाज दोनों को गंभीरता से सीख लेनी चाहिए।1