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आपने मोदी जी के नाम पर वोट दिया तो वो बिहार में आपके पसंद का नहीं, अपने पसंद का सीएम चुनने में लगे ही हैं। नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया तो उनका बेटा राजा बन ही रहा है। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिस पर वोट दीजिएगा वही मिलेगा। आपने मोदी जी के नाम पर वोट दिया तो वो बिहार में आपके पसंद का नहीं, अपने पसंद का सीएम चुनने में लगे ही हैं। नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया तो उनका बेटा राजा बन ही रहा है। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिस पर वोट दीजिएगा वही मिलेगा।
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आपने मोदी जी के नाम पर वोट दिया तो वो बिहार में आपके पसंद का नहीं, अपने पसंद का सीएम चुनने में लगे ही हैं। नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया तो उनका बेटा राजा बन ही रहा है। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिस पर वोट दीजिएगा वही मिलेगा। आपने मोदी जी के नाम पर वोट दिया तो वो बिहार में आपके पसंद का नहीं, अपने पसंद का सीएम चुनने में लगे ही हैं। नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया तो उनका बेटा राजा बन ही रहा है। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिस पर वोट दीजिएगा वही मिलेगा।
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- आपने मोदी जी के नाम पर वोट दिया तो वो बिहार में आपके पसंद का नहीं, अपने पसंद का सीएम चुनने में लगे ही हैं। नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया तो उनका बेटा राजा बन ही रहा है। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिस पर वोट दीजिएगा वही मिलेगा।1
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- आपने मोदी जी के नाम पर वोट दिया तो वो बिहार में आपके पसंद का नहीं, अपने पसंद का सीएम चुनने में लगे ही हैं। नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया तो उनका बेटा राजा बन ही रहा है। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिस पर वोट दीजिएगा वही मिलेगा- प्रशांत किशोर1
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- पड़रौना/कुशीनगर। जटहां बाजार थाना क्षेत्र में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का कारोबार खुलेआम जारी है। क्षेत्र के हरपुर गांव में बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई कर सैकड़ों ट्रॉलियों के माध्यम से प्रतिदिन ढुलाई की जा रही है। खनन माफिया बेखौफ होकर दिन-रात मिट्टी निकालकर उसे महंगे दामों पर बेच रहे हैं, जिससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल खनन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार चल रहे इस अवैध खनन की जानकारी संबंधित अधिकारियों को होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मिट्टी खनन के कारण खेतों की उर्वरता प्रभावित हो रही है और कई स्थानों पर गड्ढे बन जाने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। इसके अलावा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की हालत भी खराब होती जा रही है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।2
- गाजियाबाद के वैशाली (UP) में एक चोर रात के अंधेरे में क्लीनिक का शटर फैला कर अंदर घुसने चला था। शटर थोड़ा फैला, चोर पहले मुर्गी घुसाई। शटर और दीवार के बीच चोर की गर्दन ऐसी फंसी कि पूरी रात उसे “योग मुद्रा” में लटककर बितानी पड़ी। सुबह क्लीनिक वाले पहुंचे तो नज़ारा देख दंग रह गए।शटर में "ताला" की जगह "मानव लटका" हुआ था। दुकानदार सूचना देकर पुलिस बुला लिया और चोर का गर्दन बाहर निकाला गया और चोर मारे शर्म के रोने लगा।1
- पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित बलिराम भवन में रविवार को बिहार राज्य विद्यालय रसोईया यूनियन (एटक) की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में रसोइया बहनों ने हिस्सा लिया। बैठक में रसोइयों की समस्याओं, अधिकारों और भविष्य की रणनीति को लेकर गंभीर चर्चा की गई। बैठक के दौरान रसोईया संघ की सक्रिय सदस्य गोदावरी देवी ने सरकार के सामने जोरदार तरीके से अपनी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि राज्यभर की रसोइया बहनों को अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस अधिकार चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी रसोइयों को राज्य कर्मी का दर्जा दिया जाए, साथ ही 12 माह का नियमित वेतन सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा सेवा समाप्ति के बाद पेंशन व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई गई, ताकि रसोइयों का भविष्य सुरक्षित हो सके। गोदावरी देवी ने महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में रसोइयों के लिए कम से कम 18 हजार रुपये मासिक मानदेय तय किया जाना चाहिए, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। बैठक में मौजूद रसोइया बहनों ने एक स्वर में कहा कि वे वर्षों से बच्चों के लिए भोजन बनाकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन बदले में उन्हें न तो पर्याप्त वेतन मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा। अब वे अपने हक के लिए पीछे हटने वाली नहीं हैं। संघ की ओर से सरकार को साफ चेतावनी दी गई कि अगर उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्यभर की रसोइया सड़कों पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेंगी और अपनी आवाज बुलंद करेंगी। इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब रसोइया बहनें अपने अधिकारों के लिए पूरी तरह संगठित हो चुकी हैं और आने वाले समय में यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।1
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