मध्य प्रदेश के कारंजा-बापड़ी रोड पर फीडर सेपरेशन योजना के तहत लगाए गए कई बिजली के खंभे पहली ही बारिश में खेतों और सड़क किनारे गिर गए। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई किसान या राहगीर मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नए खंभों का गिरना घटिया काम का परिणाम है और कई अन्य खंभे अब भी झुकी हुई अवस्था में हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने पूरे फीडर सेपरेशन कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। संबंधित एजेंसी के कर्मचारी अभिषेक राणा ने बताया कि यह स्थिति मिट्टी के कटाव के कारण पैदा हुई है और आश्वासन दिया कि सभी प्रभावित खंभों को जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। वहीं, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बिजली के जीवित तारों को सुरक्षित रूप से हटा दिया है।
मध्य प्रदेश के कारंजा-बापड़ी रोड पर फीडर सेपरेशन योजना के तहत लगाए गए कई बिजली के खंभे पहली ही बारिश में खेतों और सड़क किनारे गिर गए। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई किसान या राहगीर मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नए खंभों का गिरना घटिया काम का परिणाम है और कई अन्य खंभे अब भी झुकी हुई अवस्था में हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने पूरे फीडर सेपरेशन कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। संबंधित एजेंसी के कर्मचारी अभिषेक राणा ने बताया कि यह स्थिति मिट्टी के कटाव के कारण पैदा हुई है और आश्वासन दिया कि सभी प्रभावित खंभों को जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। वहीं, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बिजली के जीवित तारों को सुरक्षित रूप से हटा दिया है।
- मध्य प्रदेश के कारंजा-बापड़ी रोड पर फीडर सेपरेशन योजना के तहत लगाए गए कई बिजली के खंभे पहली ही बारिश में खेतों और सड़क किनारे गिर गए। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई किसान या राहगीर मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नए खंभों का गिरना घटिया काम का परिणाम है और कई अन्य खंभे अब भी झुकी हुई अवस्था में हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने पूरे फीडर सेपरेशन कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। संबंधित एजेंसी के कर्मचारी अभिषेक राणा ने बताया कि यह स्थिति मिट्टी के कटाव के कारण पैदा हुई है और आश्वासन दिया कि सभी प्रभावित खंभों को जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। वहीं, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बिजली के जीवित तारों को सुरक्षित रूप से हटा दिया है।1
- बालाघाट जिले की ग्राम पंचायत मिरिया के स्कूल ग्राउंड और सड़कों पर पानी भर गया है। यह जलभराव नालियों की सफाई न होने के कारण उत्पन्न हुआ है। ग्राम पंचायत मिरिया में नालियों की सफाई नहीं होने के चलते, अब गाँव के घरों में भी पानी घुसता जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।3
- 06 जुलाई को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित टीएल बैठक में कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने विभिन्न विभागों के समय-सीमा संबंधी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक सराफ, अपर कलेक्टर श्री डी.पी. बर्मन सहित कई अधिकारी मौजूद थे, वहीं जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। कलेक्टर ने जर्जर शासकीय भवनों और इमारतों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि मरम्मत योग्य न होने वाले भवनों या दीवारों को सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल हटाया जाए। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी और महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी को सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी स्कूल या आंगनवाड़ी केंद्र का संचालन जर्जर भवन में न हो, तथा मरम्मत आवश्यक भवनों को प्राथमिकता पर पूरा कराया जाए। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के अधीक्षण अभियंता को बारिश और आंधी-तूफान के दौरान विद्युत व्यवस्था सुचारु रखने तथा झूलते बिजली के तारों की शिकायतें न मिलने के निर्देश दिए गए। साथ ही, लोक निर्माण विभाग एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों को मानसून को देखते हुए सड़कों, पुलों और पुल-पुलियों पर जलभराव की स्थिति का तत्काल निरीक्षण करने और शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त को जनजातीय क्षेत्रों के छात्रावासों एवं विद्यालयों का निरीक्षण कर छत टपकने जैसी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान किसानों को निर्धारित दर पर पर्याप्त उर्वरक और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर श्री मीना ने वनाधिकार अधिनियम (एफआरए) के सभी पट्टाधारियों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने, पात्र हितग्राहियों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनवाने तथा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में पंजीयन सुनिश्चित करने को कहा। समग्र ई-केवाईसी की समीक्षा में 92 हजार के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 31 हजार हितग्राहियों की ई-केवाईसी पूरी होने की जानकारी दी गई, जिस पर कलेक्टर ने शेष ई-केवाईसी को 25 जुलाई तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी एसडीएम को संबल योजना के 50 दिन से अधिक पुराने प्रकरणों को लंबित न रखने तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। श्रमयोगी मानधन योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के ऋण प्रकरणों में तेजी लाने को भी कहा गया। कटंगी एवं खैरलांजी जनपदों से सर्वाधिक समग्र आईडी संशोधन शिकायतों को देखते हुए, संबंधित अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर इन प्रकरणों का निराकरण करने के निर्देश दिए गए। बैठक में सीएम हेल्पलाइन के लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई, जिसमें कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने सभी अधिकारियों को 50 दिन से अधिक पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी, और सभी विभागों को अपनी ग्रेडिंग प्रदेश स्तर पर 'ए' ग्रेड बनाए रखने के लिए गंभीरता एवं तत्परता से कार्य करने पर जोर दिया।1
- रायपुर के माना स्थित ग्राम नकटी में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए लगभग 85 परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में 4 जुलाई शनिवार को खैरागढ़ में जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने टैंपो चौक पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पुतला फूंका, जिसे रोकने की कोशिश के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझटकी भी हुई। यह जानकारी 5 जुलाई रविवार सुबह 9 बजे मिली। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बारिश के बीच गरीब परिवारों के मकान, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने कई घर भी शामिल थे, बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्त कर दिए गए। पार्टी ने इस कार्रवाई को 'अमानवीय' बताया और प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास, उचित मुआवजे और न्याय की मांग की। जिला कांग्रेस अध्यक्ष कोमल साहू ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों को जल्द न्याय और उचित मुआवजा नहीं मिला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अरुण भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे गरीब विरोधी करार दिया। प्रदर्शन में कांग्रेस के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- स्थानीय मुस्लिम कब्रिस्तान में 'एक पेड़ अपने बुजुर्गों के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर एसडीएम गोपाल सोनी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह पहल बुजुर्गों की स्मृति में पेड़ लगाने और पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से की गई।1
- रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान, सीएम साय ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और राष्ट्रहित में उनके अमूल्य योगदान को याद किया। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता और अखंडता के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डॉ. मुखर्जी के विचार और आदर्श वर्तमान में भी विकसित भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरणा प्रदान करते हैं। सीएम साय ने स्पष्ट किया कि डॉ. मुखर्जी द्वारा राष्ट्रहित में किए गए कार्य देशवासियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।1
- खैरागढ़ जिले में शनिवार रात से जारी मूसलाधार बारिश के कारण आमनेर नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया। नदी के तेज बहाव में खैरागढ़ बाईपास परियोजना के तहत निर्माणाधीन पुल की सेंट्रिंग (शटरिंग) बह गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय पुल पर कोई भी मजदूर काम नहीं कर रहा था, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। इस घटना से पिछले कई वर्षों से अधूरी पड़ी खैरागढ़ बाईपास परियोजना को एक और गंभीर झटका लगा है। इस हादसे के कारण क्षेत्र के जनजीवन के साथ-साथ परियोजना का निर्माण कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।1