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भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार मित्र अमरकंटक में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं। 28 एवं 29 मार्च सभी राज्यों के पत्रकार साथी होंगे शामिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार मित्र अमरकंटक में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं। 28 एवं 29 मार्च सभी राज्यों के पत्रकार साथी होंगे शामिल

2 hrs ago
user_Durgesh Kumar Gupta
Durgesh Kumar Gupta
Electrician Beohari, Shahdol•
2 hrs ago

भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार मित्र अमरकंटक में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं। 28 एवं 29 मार्च सभी राज्यों के पत्रकार साथी होंगे शामिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार मित्र अमरकंटक में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं। 28 एवं 29 मार्च सभी राज्यों के पत्रकार साथी होंगे शामिल

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  • भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार मित्र अमरकंटक में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं। 28 एवं 29 मार्च सभी राज्यों के पत्रकार साथी होंगे शामिल
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    भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार मित्र अमरकंटक में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं। 28 एवं 29 मार्च सभी राज्यों के पत्रकार साथी होंगे शामिल
    user_Durgesh Kumar Gupta
    Durgesh Kumar Gupta
    Electrician Beohari, Shahdol•
    2 hrs ago
  • *मानपुर नगर परिषद में 'जीरो टॉलरेंस' का निकला दीवाला 6 महीने में ही बुझ गई विकास की 'रोशनी', GeM पोर्टल की आड़ में गुणवत्ता से समझौता!* *मानपुर (उमरिया)* मध्य प्रदेश की मोहन सरकार एक ओर प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' और पारदर्शिता का दावा कर रही है, वहीं उमरिया जिले की नगर परिषद मानपुर में भ्रष्टाचार की जड़ें सरकारी दावों को खोखला कर रही हैं। भंडारी नदी से हंचौरा तिराहे तक लगाई गई लाखों की LED स्ट्रीट लाइटें महज 6 महीने में दम तोड़ चुकी हैं। अंधेरी सड़कें अब प्रशासन की कथित 'ईमानदारी' पर सवालिया निशान लगा रही हैं। *भ्रष्टाचार का 'मानपुर मॉडल': कमीशन का खेल?* नगर परिषद द्वारा सड़कों को रोशन करने के नाम पर की गई यह खरीदी अब विवादों के घेरे में है। GeM पोर्टल के माध्यम से हुई इस खरीदी में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं।घटिया गुणवत्ता के कारण खरीदी गई लाइटें, पोल और साइन बोर्ड अपनी तय समय सीमा भी पूरी नहीं कर पाए।वही नगरवासियों और जानकारों का मानना है कि सप्लायर और जिम्मेदारों के बीच साठगांठ के चलते मानकों की बलि दी गई, ताकि 'कमीशन' की राशि सुरक्षित की जा सके। *जांच का 'झुनझुना': 3 महीने बाद भी नतीजा सिफर* भ्रष्टाचार के इस अंधेरे के खिलाफ 08 दिसंबर 2025 को युवक कांग्रेस ने हुंकार भरी थी। SDM मानपुर हरनीत कौर कलसी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। उस दौरान जांच टीम गठित करने का आश्वासन तो मिला, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी फाइल ठंडे बस्ते में है।सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन सा 'सफेदपोश' या 'रसूखदार' है, जिसे बचाने के लिए जांच की कछुआ चाल का सहारा लिया जा रहा है? क्या सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' सिर्फ विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित है? नियमानुसार 1 से 3 साल की वारंटी होने के बावजूद खराब लाइटों को सप्लायर से अभी तक क्यों नहीं बदलवाया गया l भंडारी नदी से हंचौरा तिराहे पर पसरे अंधेरे और लगी हुई एलइडी लाइट के आंख मिचौली के कारण होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या हादसे का जिम्मेदार क्या नगर परिषद प्रबंधन होगा? मानपुर की जनता अब कागजी जांच से थक चुकी है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला कलेक्टर उमरिया स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें। खरीदी प्रक्रिया से लेकर भुगतान की फाइलों तक की सूक्ष्म जांच होनी चाहिए। यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मानपुर में विकास की रोशनी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का अंधेरा ही हावी है।
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    *मानपुर नगर परिषद में 'जीरो टॉलरेंस' का निकला दीवाला 6 महीने में ही बुझ गई विकास की 'रोशनी', GeM पोर्टल की आड़ में गुणवत्ता से समझौता!*
*मानपुर (उमरिया)*
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार एक ओर प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' और पारदर्शिता का दावा कर रही है, वहीं उमरिया जिले की नगर परिषद मानपुर में भ्रष्टाचार की जड़ें सरकारी दावों को खोखला कर रही हैं। भंडारी नदी से हंचौरा तिराहे तक लगाई गई लाखों की LED स्ट्रीट लाइटें महज 6 महीने में दम तोड़ चुकी हैं। अंधेरी सड़कें अब प्रशासन की कथित 'ईमानदारी' पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
*भ्रष्टाचार का 'मानपुर मॉडल': कमीशन का खेल?*
नगर परिषद द्वारा सड़कों को रोशन करने के नाम पर की गई यह खरीदी अब विवादों के घेरे में है। GeM पोर्टल के माध्यम से हुई इस खरीदी में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं।घटिया गुणवत्ता के कारण खरीदी गई लाइटें, पोल और साइन बोर्ड अपनी तय समय सीमा भी पूरी नहीं कर पाए।वही नगरवासियों और जानकारों का मानना है कि सप्लायर और जिम्मेदारों के बीच साठगांठ के चलते मानकों की बलि दी गई, ताकि 'कमीशन' की राशि सुरक्षित की जा सके।
*जांच का 'झुनझुना': 3 महीने बाद भी नतीजा सिफर*
भ्रष्टाचार के इस अंधेरे के खिलाफ 08 दिसंबर 2025 को युवक कांग्रेस ने हुंकार भरी थी। SDM मानपुर हरनीत कौर कलसी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। उस दौरान जांच टीम गठित करने का आश्वासन तो मिला, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी फाइल ठंडे बस्ते में है।सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन सा 'सफेदपोश' या 'रसूखदार' है, जिसे बचाने के लिए जांच की कछुआ चाल का सहारा लिया जा रहा है?
क्या सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' सिर्फ विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित है? नियमानुसार 1 से 3 साल की वारंटी होने के बावजूद खराब लाइटों को सप्लायर से अभी तक क्यों नहीं बदलवाया गया l भंडारी नदी से हंचौरा तिराहे पर पसरे अंधेरे और लगी हुई एलइडी लाइट के आंख मिचौली के कारण होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या हादसे का जिम्मेदार क्या नगर परिषद प्रबंधन होगा?
मानपुर की जनता अब कागजी जांच से थक चुकी है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला कलेक्टर उमरिया स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें। खरीदी प्रक्रिया से लेकर भुगतान की फाइलों तक की सूक्ष्म जांच होनी चाहिए। यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मानपुर में विकास की रोशनी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का अंधेरा ही हावी है।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • जय श्री राम 🙏🌻🌻🌻🌻
    1
    जय श्री राम 🙏🌻🌻🌻🌻
    user_Damodar kushwaha
    Damodar kushwaha
    Farmer Rampur Naikin, Sidhi•
    23 hrs ago
  • == शहडोल 24 मार्च 2026:- जहां आमतौर पर युवा नौकरी की तलाश में शहरों का रुख करते हैं, वहीं शहडोल जिले के सुदूर वनांचल ग्राम टेंघा निवासी युवक पारसमणि सिंह ने पढ़ाई को ताकत बनाकर खेती में इतिहास रच दिया है। तीन-तीन मास्टर डिग्री जूलॉजी, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की है और वर्तमान में एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई भी कर रहे हैं। नौकरी के पीछे भागने की बजाय पारसमणि ने जंगल के बीच हाईटेक हॉर्टिकल्चर फार्मिंग शुरू की और आज लाखों की कमाई कर रहे है। पारसमणी सिंह (36 वर्ष) ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच वैज्ञानिक हो और इरादे मजबूत हों, तो जंगल भी अवसर बन सकता है। पारसमणी सिंह करीब 10 से 15 साल तक अतिथि शिक्षक के रूप में अंग्रेजी विषय के शिक्षक का दायित्व निभाने के बाद उनका मन नौकरी में नहीं लगा। वे कुछ अलग करना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया और गांव में आधुनिक खेती का मॉडल खड़ा कर दिया। 25 से 30 लोगों को रोजगार, 20-25 लाख का कारोबार पारसमणी सिंह 15 से 20 एकड़ भूमि में व्यावसायिक सब्जी खेती कर रहे हैं। उनके फार्म में 25 से 30 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मिला हुआ है। टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, खीरा, भिंडी, बरबटी, गोभी, लौकी, तरोई, कद्दू के साथ-साथ नींबू और गेंदा फूल की खेती भी की जा रही है। गेंदा फूल से उन्हें दोहरा फायदा मिलता है अतिरिक्त आमदनी और कीट नियंत्रण भी होता है। ड्रिप-मल्चिंग से बदली किस्मत शुरुआत में दो साल तक संघर्ष भी रहा, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से मार्गदर्शन मिलने के बाद पारसमणी सिंह ने ड्रिप इरीगेशन और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। आज उनकी सब्जियां शहडोल तक सीमित नहीं, बल्कि अनूपपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रही हैं। सालाना 10 से 15 लाख की शुद्ध कमाई हाईटेक खेती में सालाना 4-5 लाख रुपये की लागत के बाद भी पारसमणी सिंह 10 से 15 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत कर लेते हैं। नर्सरी वे रायपुर और अंबिकापुर जैसी जगहों से मंगवाते हैं, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है। पारसमणी सिंह अब अपने खेती के रकबे को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह सफलता कहानी न सिर्फ शहडोल, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
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शहडोल 24 मार्च 2026:- जहां आमतौर पर युवा नौकरी की तलाश में शहरों का रुख करते हैं, वहीं शहडोल जिले के सुदूर वनांचल ग्राम टेंघा निवासी युवक पारसमणि सिंह ने पढ़ाई को ताकत बनाकर खेती में इतिहास रच दिया है। तीन-तीन मास्टर डिग्री जूलॉजी, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की है और वर्तमान में एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई भी कर रहे हैं। नौकरी के पीछे भागने की बजाय पारसमणि ने जंगल के बीच हाईटेक हॉर्टिकल्चर फार्मिंग शुरू की और आज लाखों की कमाई कर रहे है।
पारसमणी सिंह (36 वर्ष) ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच वैज्ञानिक हो और इरादे मजबूत हों, तो जंगल भी अवसर बन सकता है। 
पारसमणी सिंह करीब 10 से 15 साल तक अतिथि शिक्षक के रूप में अंग्रेजी विषय के शिक्षक का दायित्व निभाने के बाद उनका मन नौकरी में नहीं लगा। वे कुछ अलग करना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया और गांव में आधुनिक खेती का मॉडल खड़ा कर दिया। 
25 से 30 लोगों को रोजगार, 20-25 लाख का कारोबार
पारसमणी सिंह 15 से 20 एकड़ भूमि में व्यावसायिक सब्जी खेती कर रहे हैं। उनके फार्म में 25 से 30 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मिला हुआ है। टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, खीरा, भिंडी, बरबटी, गोभी, लौकी, तरोई, कद्दू के साथ-साथ नींबू और गेंदा फूल की खेती भी की जा रही है। गेंदा फूल से उन्हें दोहरा फायदा मिलता है अतिरिक्त आमदनी और कीट नियंत्रण भी होता है।
ड्रिप-मल्चिंग से बदली किस्मत
शुरुआत में दो साल तक संघर्ष भी रहा, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से मार्गदर्शन मिलने के बाद पारसमणी सिंह ने ड्रिप इरीगेशन और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। आज उनकी सब्जियां शहडोल तक सीमित नहीं, बल्कि अनूपपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रही हैं।
सालाना 10 से 15 लाख की शुद्ध कमाई
हाईटेक खेती में सालाना 4-5 लाख रुपये की लागत के बाद भी पारसमणी सिंह 10 से 15 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत कर लेते हैं। नर्सरी वे रायपुर और अंबिकापुर जैसी जगहों से मंगवाते हैं, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है।
पारसमणी सिंह अब अपने खेती के रकबे को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह सफलता कहानी न सिर्फ शहडोल, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
    user_Angad Tiwari
    Angad Tiwari
    पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • मध्यप्रदेश के सीधी जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक निजी स्कूल के बच्चे वैन को धक्का लगाते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल वैन खराब हो गई थी, जिसके बाद बच्चों से ही उसे धक्का लगवाया गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ बेहद गंभीर मामला है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता
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    मध्यप्रदेश के सीधी जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक निजी स्कूल के बच्चे वैन को धक्का लगाते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल वैन खराब हो गई थी, जिसके बाद बच्चों से ही उसे धक्का लगवाया गया।
वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ बेहद गंभीर मामला है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता
    user_Sumit Singh Chandel
    Sumit Singh Chandel
    Local News Reporter गोहपारू, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    58 min ago
  • उचेहरा नगर के वार्ड 5 निवासी संतोष ताम्रकार के घर हुई लाखो की चोरी करीब 15 लाख की हुई चोरी
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    उचेहरा  नगर के वार्ड 5 निवासी संतोष ताम्रकार के घर हुई लाखो की चोरी करीब 15 लाख की हुई चोरी
    user_रोहित कुमार पाठक
    रोहित कुमार पाठक
    Lawyer अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • रीवा, चाकघाट थाने के डायल-112 के चालक द्वारा भूसा लोड गाड़ी से 300 रुपये मांगने का वीडियो वायरल, अधिकारियों की सख्ती के बाद निडर थाना प्रभारी
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    रीवा, चाकघाट थाने के डायल-112 के चालक द्वारा भूसा लोड गाड़ी से 300 रुपये मांगने का वीडियो वायरल, अधिकारियों की सख्ती के बाद निडर थाना प्रभारी
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Durgesh Kumar Gupta
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    Post by Durgesh Kumar Gupta
    user_Durgesh Kumar Gupta
    Durgesh Kumar Gupta
    Electrician Beohari, Shahdol•
    22 hrs ago
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