सफलता की कहानी ... तीन मास्टर डिग्रीधारी नौकरी की जगह खेती एवं उद्यानिकी में चुनी अपनी राह === किसान पारसमणि ने नाम को किया सार्थक == शहडोल 24 मार्च 2026:- जहां आमतौर पर युवा नौकरी की तलाश में शहरों का रुख करते हैं, वहीं शहडोल जिले के सुदूर वनांचल ग्राम टेंघा निवासी युवक पारसमणि सिंह ने पढ़ाई को ताकत बनाकर खेती में इतिहास रच दिया है। तीन-तीन मास्टर डिग्री जूलॉजी, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की है और वर्तमान में एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई भी कर रहे हैं। नौकरी के पीछे भागने की बजाय पारसमणि ने जंगल के बीच हाईटेक हॉर्टिकल्चर फार्मिंग शुरू की और आज लाखों की कमाई कर रहे है। पारसमणी सिंह (36 वर्ष) ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच वैज्ञानिक हो और इरादे मजबूत हों, तो जंगल भी अवसर बन सकता है। पारसमणी सिंह करीब 10 से 15 साल तक अतिथि शिक्षक के रूप में अंग्रेजी विषय के शिक्षक का दायित्व निभाने के बाद उनका मन नौकरी में नहीं लगा। वे कुछ अलग करना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया और गांव में आधुनिक खेती का मॉडल खड़ा कर दिया। 25 से 30 लोगों को रोजगार, 20-25 लाख का कारोबार पारसमणी सिंह 15 से 20 एकड़ भूमि में व्यावसायिक सब्जी खेती कर रहे हैं। उनके फार्म में 25 से 30 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मिला हुआ है। टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, खीरा, भिंडी, बरबटी, गोभी, लौकी, तरोई, कद्दू के साथ-साथ नींबू और गेंदा फूल की खेती भी की जा रही है। गेंदा फूल से उन्हें दोहरा फायदा मिलता है अतिरिक्त आमदनी और कीट नियंत्रण भी होता है। ड्रिप-मल्चिंग से बदली किस्मत शुरुआत में दो साल तक संघर्ष भी रहा, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से मार्गदर्शन मिलने के बाद पारसमणी सिंह ने ड्रिप इरीगेशन और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। आज उनकी सब्जियां शहडोल तक सीमित नहीं, बल्कि अनूपपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रही हैं। सालाना 10 से 15 लाख की शुद्ध कमाई हाईटेक खेती में सालाना 4-5 लाख रुपये की लागत के बाद भी पारसमणी सिंह 10 से 15 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत कर लेते हैं। नर्सरी वे रायपुर और अंबिकापुर जैसी जगहों से मंगवाते हैं, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है। पारसमणी सिंह अब अपने खेती के रकबे को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह सफलता कहानी न सिर्फ शहडोल, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
सफलता की कहानी ... तीन मास्टर डिग्रीधारी नौकरी की जगह खेती एवं उद्यानिकी में चुनी अपनी राह === किसान पारसमणि ने नाम को किया सार्थक == शहडोल 24 मार्च 2026:- जहां आमतौर पर युवा नौकरी की तलाश में शहरों का रुख करते हैं, वहीं शहडोल जिले के सुदूर वनांचल ग्राम टेंघा निवासी युवक पारसमणि सिंह ने पढ़ाई को ताकत बनाकर खेती में इतिहास रच दिया है। तीन-तीन मास्टर डिग्री जूलॉजी, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की है और वर्तमान में एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई भी कर रहे हैं। नौकरी के पीछे भागने की बजाय पारसमणि ने जंगल के बीच हाईटेक हॉर्टिकल्चर फार्मिंग शुरू की और आज लाखों की कमाई कर रहे है। पारसमणी सिंह (36 वर्ष) ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच वैज्ञानिक हो और इरादे मजबूत हों, तो जंगल भी अवसर बन सकता है। पारसमणी सिंह करीब 10 से 15 साल तक अतिथि शिक्षक के रूप में अंग्रेजी विषय के शिक्षक का दायित्व निभाने के बाद उनका मन नौकरी में नहीं लगा। वे कुछ अलग करना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया और गांव में आधुनिक खेती का मॉडल खड़ा कर दिया। 25 से 30 लोगों को रोजगार, 20-25 लाख का कारोबार पारसमणी सिंह 15 से 20 एकड़ भूमि में व्यावसायिक सब्जी खेती कर रहे हैं। उनके फार्म में 25 से 30 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मिला हुआ है। टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, खीरा, भिंडी, बरबटी, गोभी, लौकी, तरोई, कद्दू के साथ-साथ नींबू और गेंदा फूल की खेती भी की जा रही है। गेंदा फूल से उन्हें दोहरा फायदा मिलता है अतिरिक्त आमदनी और कीट नियंत्रण भी होता है। ड्रिप-मल्चिंग से बदली किस्मत शुरुआत में दो साल तक संघर्ष भी रहा, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से मार्गदर्शन मिलने के बाद पारसमणी सिंह ने ड्रिप इरीगेशन और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। आज उनकी सब्जियां शहडोल तक सीमित नहीं, बल्कि अनूपपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रही हैं। सालाना 10 से 15 लाख की शुद्ध कमाई हाईटेक खेती में सालाना 4-5 लाख रुपये की लागत के बाद भी पारसमणी सिंह 10 से 15 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत कर लेते हैं। नर्सरी वे रायपुर और अंबिकापुर जैसी जगहों से मंगवाते हैं, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है। पारसमणी सिंह अब अपने खेती के रकबे को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह सफलता कहानी न सिर्फ शहडोल, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
- == शहडोल 24 मार्च 2026:- जहां आमतौर पर युवा नौकरी की तलाश में शहरों का रुख करते हैं, वहीं शहडोल जिले के सुदूर वनांचल ग्राम टेंघा निवासी युवक पारसमणि सिंह ने पढ़ाई को ताकत बनाकर खेती में इतिहास रच दिया है। तीन-तीन मास्टर डिग्री जूलॉजी, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की है और वर्तमान में एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई भी कर रहे हैं। नौकरी के पीछे भागने की बजाय पारसमणि ने जंगल के बीच हाईटेक हॉर्टिकल्चर फार्मिंग शुरू की और आज लाखों की कमाई कर रहे है। पारसमणी सिंह (36 वर्ष) ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच वैज्ञानिक हो और इरादे मजबूत हों, तो जंगल भी अवसर बन सकता है। पारसमणी सिंह करीब 10 से 15 साल तक अतिथि शिक्षक के रूप में अंग्रेजी विषय के शिक्षक का दायित्व निभाने के बाद उनका मन नौकरी में नहीं लगा। वे कुछ अलग करना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया और गांव में आधुनिक खेती का मॉडल खड़ा कर दिया। 25 से 30 लोगों को रोजगार, 20-25 लाख का कारोबार पारसमणी सिंह 15 से 20 एकड़ भूमि में व्यावसायिक सब्जी खेती कर रहे हैं। उनके फार्म में 25 से 30 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मिला हुआ है। टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन, खीरा, भिंडी, बरबटी, गोभी, लौकी, तरोई, कद्दू के साथ-साथ नींबू और गेंदा फूल की खेती भी की जा रही है। गेंदा फूल से उन्हें दोहरा फायदा मिलता है अतिरिक्त आमदनी और कीट नियंत्रण भी होता है। ड्रिप-मल्चिंग से बदली किस्मत शुरुआत में दो साल तक संघर्ष भी रहा, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से मार्गदर्शन मिलने के बाद पारसमणी सिंह ने ड्रिप इरीगेशन और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। आज उनकी सब्जियां शहडोल तक सीमित नहीं, बल्कि अनूपपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रही हैं। सालाना 10 से 15 लाख की शुद्ध कमाई हाईटेक खेती में सालाना 4-5 लाख रुपये की लागत के बाद भी पारसमणी सिंह 10 से 15 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत कर लेते हैं। नर्सरी वे रायपुर और अंबिकापुर जैसी जगहों से मंगवाते हैं, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है। पारसमणी सिंह अब अपने खेती के रकबे को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह सफलता कहानी न सिर्फ शहडोल, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।1
- Post by Sumit Singh Chandel1
- *मानपुर नगर परिषद में 'जीरो टॉलरेंस' का निकला दीवाला 6 महीने में ही बुझ गई विकास की 'रोशनी', GeM पोर्टल की आड़ में गुणवत्ता से समझौता!* *मानपुर (उमरिया)* मध्य प्रदेश की मोहन सरकार एक ओर प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' और पारदर्शिता का दावा कर रही है, वहीं उमरिया जिले की नगर परिषद मानपुर में भ्रष्टाचार की जड़ें सरकारी दावों को खोखला कर रही हैं। भंडारी नदी से हंचौरा तिराहे तक लगाई गई लाखों की LED स्ट्रीट लाइटें महज 6 महीने में दम तोड़ चुकी हैं। अंधेरी सड़कें अब प्रशासन की कथित 'ईमानदारी' पर सवालिया निशान लगा रही हैं। *भ्रष्टाचार का 'मानपुर मॉडल': कमीशन का खेल?* नगर परिषद द्वारा सड़कों को रोशन करने के नाम पर की गई यह खरीदी अब विवादों के घेरे में है। GeM पोर्टल के माध्यम से हुई इस खरीदी में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं।घटिया गुणवत्ता के कारण खरीदी गई लाइटें, पोल और साइन बोर्ड अपनी तय समय सीमा भी पूरी नहीं कर पाए।वही नगरवासियों और जानकारों का मानना है कि सप्लायर और जिम्मेदारों के बीच साठगांठ के चलते मानकों की बलि दी गई, ताकि 'कमीशन' की राशि सुरक्षित की जा सके। *जांच का 'झुनझुना': 3 महीने बाद भी नतीजा सिफर* भ्रष्टाचार के इस अंधेरे के खिलाफ 08 दिसंबर 2025 को युवक कांग्रेस ने हुंकार भरी थी। SDM मानपुर हरनीत कौर कलसी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। उस दौरान जांच टीम गठित करने का आश्वासन तो मिला, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी फाइल ठंडे बस्ते में है।सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन सा 'सफेदपोश' या 'रसूखदार' है, जिसे बचाने के लिए जांच की कछुआ चाल का सहारा लिया जा रहा है? क्या सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' सिर्फ विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित है? नियमानुसार 1 से 3 साल की वारंटी होने के बावजूद खराब लाइटों को सप्लायर से अभी तक क्यों नहीं बदलवाया गया l भंडारी नदी से हंचौरा तिराहे पर पसरे अंधेरे और लगी हुई एलइडी लाइट के आंख मिचौली के कारण होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या हादसे का जिम्मेदार क्या नगर परिषद प्रबंधन होगा? मानपुर की जनता अब कागजी जांच से थक चुकी है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला कलेक्टर उमरिया स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें। खरीदी प्रक्रिया से लेकर भुगतान की फाइलों तक की सूक्ष्म जांच होनी चाहिए। यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मानपुर में विकास की रोशनी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का अंधेरा ही हावी है।3
- निषादराज जयंती पर कार्यक्रम सम्पन्न उमरिया//जिला मुख्यालय स्थित होटल चंदेल में निषादराज जयंती के अवसर पर मांझी बर्मन उत्थान समिति उमरिया के द्वारा भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के महिला एवं पुरुषों की भारी संख्या में सहभागिता रही, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और एकता का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों एवं समाजजनों ने निषादराज जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर वक्ताओं ने निषादराज के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे भगवान भगवान श्रीराम के परम मित्र और अनन्य भक्त थे तथा उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सच्ची मित्रता, सेवा और समर्पण ही मनुष्य को महान बनाते हैं। कार्यक्रम में रामकरण केवट, शंकर लाल बर्मन एवं राम सिया रायकवार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज को एकजुट रहने, शिक्षा को बढ़ावा देने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा, तभी समाज का सर्वांगीण विकास संभव है। कार्यक्रम के दौरान युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला, वहीं महिलाओं की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को और भी सफल बनाया। उपस्थित जनों ने निषाद समाज की एकता एवं उन्नति के लिए संकल्प लिया। इस कार्यक्रम के आयोजन में सचिन मांझी, संदीप सोधिया, नीरज बर्मन एवं राहुल बर्मन की विशेष भूमिका रही। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया गया तथा कार्यक्रम संपन्न हुआ।1
- *उचेहरा - जनपद के रगला पंचायत में करीब 8 माह पूर्व बनी पी सी रोड के उड़े परखच्चे, रोड पंचायत के 10 वार्ड में बनी थी।*1
- Post by Durgesh Kumar Gupta1
- 2026 को माँ नर्मदा के पावन उद्गम स्थल स्थित नर्मदा उद्गम क्षेत्र में आयोजित होने जा रही है। 🙏🌊 इस भव्य राष्ट्रीय आयोजन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को में आयोजक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में संगठन प्रभारी, जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। 🔸 आवास, भोजन, परिवहन एवं अतिथि सत्कार जैसी व्यवस्थाओं पर गहन चर्चा 🔸 सभी पदाधिकारियों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारियाँ 🔸 आयोजन को ऐतिहासिक एवं यादगार बनाने का संकल्प 🌿 माँ नर्मदा की पावन धरा पर देशभर के पत्रकार साथियों का यह संगम न सिर्फ संगठन की मजबूती का प्रतीक बनेगा, बल्कि पत्रकारिता के उज्ज्वल भविष्य की नई दिशा भी तय करेगा। 🤝 एकता • शक्ति • पत्रकारिता का स्वाभिमान1
- उज्जैन पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि शहर में पेट्रोल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें और बेवजह घबराकर पेट्रोल जमा करने से बचें। 👉 पुलिस ने खास तौर पर चेतावनी दी है कि पेट्रोल को डिब्बों या बोतलों में स्टोर करना खतरनाक हो सकता है, जिससे आग जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। ✔️ शांति बनाए रखें ✔️ जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल लें ✔️ अफवाहों से दूर रहें सुरक्षा और सतर्कता ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है1