मछली पालन में मिसाल बने डंडई के नरेश प्रजापति, 50 तालाबों में तैयार कर रहे मछली के बच्चे; मछली पालन में मिसाल बने डंडई के नरेश प्रजापति, 50 तालाबों में तैयार कर रहे मछली के बच्चे; किसानों को भी दिखा रहे आत्मनिर्भरता की राह 2014 से मत्स्य पालन के क्षेत्र में सक्रिय डंडई प्रखंड अंतर्गत पचौर पंचायत के सूअरजंघा गांव निवासी नरेश प्रजापति ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में वर्ष 2014 से मछली पालन और मछली के बच्चों के उत्पादन एवं बिक्री के कार्य में जुटे हुए हैं। नरेश आज न केवल अपनी आजीविका को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी मत्स्य पालन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नरेश प्रजापति का कार्य केवल मछली पालन तक सीमित नहीं है। वह मछली के बच्चों का उत्पादन कर आसपास के मत्स्य पालकों को उनकी आपूर्ति भी करते हैं। उनके अनुसार, वह लगभग 50 तालाबों में मछली के बच्चों का पालन कर रहे हैं। इनमें 20 सदाबहार तालाब और करीब 30 मौसमी तालाब शामिल हैं। इन तालाबों के माध्यम से वह मछली के बच्चों को तैयार कर बाजार में बिक्री तथा अन्य मत्स्य पालकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। नरेश बताते हैं कि मछली के बच्चों का उत्पादन और उनकी आपूर्ति उनके व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए वह लगातार मेहनत करते हैं, ताकि क्षेत्र के मछली पालने वाले किसानों को समय पर मछली के बच्चे उपलब्ध हो सकें और उनका व्यवसाय आगे बढ़ सके।नरेश का अनुभव बताता है कि तालाबों का बेहतर उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। जरूरत है तो केवल सही जानकारी, मेहनत और इस क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति की। नरेश प्रजापति की पहचान केवल एक मत्स्य पालक के रूप में नहीं, बल्कि किसानों को जागरूक करने वाले व्यक्ति के रूप में भी बनी है। वह गांव-गांव घूमकर तालाबों की जानकारी जुटाते हैं और किसानों को मछली पालन के प्रति जागरूक करते हैं। उनके प्रयासों से अब तक करीब 45 किसान मत्स्य विभाग से जुड़कर इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित हुए हैं। नरेश ने बताया कि धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात तालाबों का निर्माण कराया गया है। इन तालाबों के माध्यम से भी अब मछली पालन की संभावनाएं विकसित होंगी। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार का अवसर मिलने और उनकी आय बढ़ाने की उम्मीद है। तालाबों का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि इन तालाबों में योजनाबद्ध तरीके से मछली पालन किया जाए और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो यह पहल क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी योगदान दे सकती है। छह क्विंटल मछली के बच्चों का उत्पादन, लाखों की कमाई का आधार नरेश प्रजापति के अनुसार, वह वर्तमान में करीब छह क्विंटल मछली के बच्चों को तैयार कर रहे हैं, जिनकी बिक्री और आपूर्ति से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है। उनका कहना है कि मछली के बच्चों के उत्पादन और बिक्री के काम से पिछले कई वर्षों से वह जुड़े हुए हैं। इस व्यवसाय से उनकी सालाना आमदनी लगभग छह लाख रुपये तक होने का अनुमान है।
मछली पालन में मिसाल बने डंडई के नरेश प्रजापति, 50 तालाबों में तैयार कर रहे मछली के बच्चे; मछली पालन में मिसाल बने डंडई के नरेश प्रजापति, 50 तालाबों में तैयार कर रहे मछली के बच्चे; किसानों को भी दिखा रहे आत्मनिर्भरता की राह 2014 से मत्स्य पालन के क्षेत्र में सक्रिय डंडई प्रखंड अंतर्गत पचौर पंचायत के सूअरजंघा गांव निवासी नरेश प्रजापति ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में वर्ष 2014 से मछली पालन और मछली के बच्चों के उत्पादन एवं बिक्री के कार्य में जुटे हुए हैं। नरेश आज न केवल अपनी आजीविका को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी मत्स्य पालन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नरेश प्रजापति का कार्य केवल मछली पालन तक सीमित नहीं है। वह मछली के बच्चों का उत्पादन कर आसपास के मत्स्य पालकों को उनकी आपूर्ति भी करते हैं। उनके अनुसार, वह लगभग 50 तालाबों में मछली के बच्चों का पालन कर रहे हैं। इनमें 20 सदाबहार तालाब और करीब 30 मौसमी तालाब शामिल हैं। इन तालाबों के माध्यम से वह मछली के बच्चों को तैयार कर बाजार में बिक्री तथा अन्य मत्स्य पालकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। नरेश बताते हैं कि मछली के बच्चों का उत्पादन और उनकी आपूर्ति उनके व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए वह लगातार मेहनत करते हैं, ताकि क्षेत्र के मछली पालने वाले किसानों को समय पर मछली के बच्चे उपलब्ध हो सकें और उनका व्यवसाय आगे बढ़ सके।नरेश का अनुभव बताता है कि तालाबों का बेहतर उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। जरूरत है तो केवल सही जानकारी, मेहनत और इस क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति की। नरेश प्रजापति की पहचान केवल एक मत्स्य पालक के रूप में नहीं, बल्कि किसानों को जागरूक करने वाले व्यक्ति के रूप में भी बनी है। वह गांव-गांव घूमकर तालाबों की जानकारी जुटाते हैं और किसानों को मछली पालन के प्रति जागरूक करते हैं। उनके प्रयासों से अब तक करीब 45 किसान मत्स्य विभाग से जुड़कर इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित हुए हैं। नरेश ने बताया कि धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात तालाबों का निर्माण कराया गया है। इन तालाबों के माध्यम से भी अब मछली पालन की संभावनाएं विकसित होंगी। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार का अवसर मिलने और उनकी आय बढ़ाने की उम्मीद है। तालाबों का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि इन तालाबों में योजनाबद्ध तरीके से मछली पालन किया जाए और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो यह पहल क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी योगदान दे सकती है। छह क्विंटल मछली के बच्चों का उत्पादन, लाखों की कमाई का आधार नरेश प्रजापति के अनुसार, वह वर्तमान में करीब छह क्विंटल मछली के बच्चों को तैयार कर रहे हैं, जिनकी बिक्री और आपूर्ति से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है। उनका कहना है कि मछली के बच्चों के उत्पादन और बिक्री के काम से पिछले कई वर्षों से वह जुड़े हुए हैं। इस व्यवसाय से उनकी सालाना आमदनी लगभग छह लाख रुपये तक होने का अनुमान है।
- चिनियां में जंगली हाथियों के झुंड को लेकर रेड अलर्ट जारी, सात गांवों के ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील चिनिया थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों और आसपास के जंगलों में जंगली हाथियों के एक झुंड के विचरण की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने शुक्रवार रात 7 बजे से रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने ग्रामीणों से विशेष सतर्कता बरतने और सुरक्षित रहने की अपील की है। वन विभाग के अनुसार, खुर्री, मसरा, नग्सिली, रनपुरा, परशुखांड़, बेता सहित आसपास के जंगलों में हाथियों के झुंड की मौजूदगी हो सकती है। ऐसे में संबंधित गांवों के ग्रामीणों को सावधान रहने की जरूरत है। विभाग ने अपील की है कि ग्रामीण जंगल की ओर जाने में सावधानी बरतें और हाथियों के नजदीक जाने, उन्हें छेड़ने या घेरने की कोशिश न करें। यदि किसी अन्य स्थान पर भी हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलती है, तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।1
- मछली पालन में मिसाल बने डंडई के नरेश प्रजापति, 50 तालाबों में तैयार कर रहे मछली के बच्चे; मछली पालन में मिसाल बने डंडई के नरेश प्रजापति, 50 तालाबों में तैयार कर रहे मछली के बच्चे; किसानों को भी दिखा रहे आत्मनिर्भरता की राह 2014 से मत्स्य पालन के क्षेत्र में सक्रिय डंडई प्रखंड अंतर्गत पचौर पंचायत के सूअरजंघा गांव निवासी नरेश प्रजापति ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में वर्ष 2014 से मछली पालन और मछली के बच्चों के उत्पादन एवं बिक्री के कार्य में जुटे हुए हैं। नरेश आज न केवल अपनी आजीविका को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी मत्स्य पालन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नरेश प्रजापति का कार्य केवल मछली पालन तक सीमित नहीं है। वह मछली के बच्चों का उत्पादन कर आसपास के मत्स्य पालकों को उनकी आपूर्ति भी करते हैं। उनके अनुसार, वह लगभग 50 तालाबों में मछली के बच्चों का पालन कर रहे हैं। इनमें 20 सदाबहार तालाब और करीब 30 मौसमी तालाब शामिल हैं। इन तालाबों के माध्यम से वह मछली के बच्चों को तैयार कर बाजार में बिक्री तथा अन्य मत्स्य पालकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। नरेश बताते हैं कि मछली के बच्चों का उत्पादन और उनकी आपूर्ति उनके व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए वह लगातार मेहनत करते हैं, ताकि क्षेत्र के मछली पालने वाले किसानों को समय पर मछली के बच्चे उपलब्ध हो सकें और उनका व्यवसाय आगे बढ़ सके।नरेश का अनुभव बताता है कि तालाबों का बेहतर उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। जरूरत है तो केवल सही जानकारी, मेहनत और इस क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति की। नरेश प्रजापति की पहचान केवल एक मत्स्य पालक के रूप में नहीं, बल्कि किसानों को जागरूक करने वाले व्यक्ति के रूप में भी बनी है। वह गांव-गांव घूमकर तालाबों की जानकारी जुटाते हैं और किसानों को मछली पालन के प्रति जागरूक करते हैं। उनके प्रयासों से अब तक करीब 45 किसान मत्स्य विभाग से जुड़कर इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित हुए हैं। नरेश ने बताया कि धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात तालाबों का निर्माण कराया गया है। इन तालाबों के माध्यम से भी अब मछली पालन की संभावनाएं विकसित होंगी। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार का अवसर मिलने और उनकी आय बढ़ाने की उम्मीद है। तालाबों का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि इन तालाबों में योजनाबद्ध तरीके से मछली पालन किया जाए और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो यह पहल क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी योगदान दे सकती है। छह क्विंटल मछली के बच्चों का उत्पादन, लाखों की कमाई का आधार नरेश प्रजापति के अनुसार, वह वर्तमान में करीब छह क्विंटल मछली के बच्चों को तैयार कर रहे हैं, जिनकी बिक्री और आपूर्ति से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है। उनका कहना है कि मछली के बच्चों के उत्पादन और बिक्री के काम से पिछले कई वर्षों से वह जुड़े हुए हैं। इस व्यवसाय से उनकी सालाना आमदनी लगभग छह लाख रुपये तक होने का अनुमान है।1
- मुखिया रीमा देवी ने फीता काटकर किया नीलांबर-पीतांबर फुटबॉल टूर्नामेंट का शुभारंभ,खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह रंका। प्रखंड के सोनदाग पंचायत अंतर्गत भलुआनी हरदी खुटा मैदान में नीलांबर-पीतांबर फुटबॉल टूर्नामेंट का शुभारंभ पंचायत की मुखिया रीमा देवी ने फीता काटकर किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनका उत्साह बढ़ाते हुए खेल को खेल भावना से खेलने की अपील की। इस संबंध में शुक्रवार दोपहर तीन बजे पंचायत के उप मुखिया सतनारायण सिंह ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी स्थानीय एवं क्षेत्रीय खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से टूर्नामेंट का आयोजन किया गया है। प्रतियोगिता को लेकर ग्रामीणों और खेल प्रेमियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। उद्घाटन के अवसर पर मुखिया रीमा देवी ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल को आपसी भाईचारे, अनुशासन और खेल भावना के साथ खेलें। अपनी प्रतिभा के दम पर बेहतर प्रदर्शन करें तथा अपने गांव और पंचायत का नाम रोशन करें। मुखिया रीमा देवी की इस पहल की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि खेलकूद के आयोजन से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और उनमें एकता, अनुशासन तथा प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। टूर्नामेंट के दौरान दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोजन समिति की ओर से बैठने की व्यवस्था भी की गई है। स्थानीय एवं क्षेत्रीय मैच होने के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने की उम्मीद है।1
- तालाब में मछली मारने गया अधेड़ मिला शव, परिजनों में कोहराम दुद्धी (सोनभद्र)। स्थानीय थाना क्षेत्र के झारोकला गांव निवासी 57 वर्षीय रामकरन गोंड़ पुत्र स्व. बृजमोहन, की शुक्रवार सुबह गांव से लगभग 300 मीटर दूर स्थित तालाब में उतराता हुआ शव मिलने से परिवार में कोहराम मच गया। मृतक गुरुवार शाम साढ़े पांच बजे मछली मारने के लिए तालाब की ओर गया था, लेकिन रात भर घर नहीं लौटा। परिजनों के अनुसार, रात भर उसके घर न लौटने पर सबको लगा कि वह देर से आ जाएगा और सभी सो गए। सुबह तक भी जब वह घर नहीं पहुंचा, तो परिजन और ग्रामीण तालाब की ओर खोजने निकले। तालाब पहुंचने पर रामकरन का शव पानी के ऊपर उतरा हुआ देखा गया। सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को पानी से बाहर निकलवाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कराया और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के चार पुत्र हैं, जो सभी विवाहित हैं। सबसे छोटे पुत्र सिद्धि सिंह गोड़ ने बताया कि पिता हिंडाल्को में ठेकदार के माध्यम से मजदूरी करते थे। मृतक के तालाब में डूबने के बारे में अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी ।1
- विधान परिषद निर्वाचन-2026 के मतदान के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा की बाइट। विधान परिषद निर्वाचन-2026 के मतदान के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा की बाइट।1
- कौन गाना था की बिदाई पर रोने लगे देखिए वीडियो में और भी गढ़वा जिला के कांडी प्रखंड अंतर्गत ग्राम घोड़दाग का यह मामला है जिसे दुर्गा मां के बिदाई गीत पर बाबा ने रो दिए1
- बलरामपुर जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में जनरल परेड के साथ पुलिस जवानों को आपदा प्रबंधन आपत् परि स्थिति निपटने के लिए ट्रेंनिग देने के लिए माँक ड्रिल का आयोजन किया गया बलरामपुर पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के द्वरा सलामी ली गई साथ ही पुलिस बल के अनुसाशन बनाये रखने तथा अपने कर्तब्यों का जिमेदारी के साथ करने का निर्देश दिए1
- कटे तार की चपेट में आया बक्से का ढक्कन, करंट लगने से महिला अचेत,सीएचसी दुद्धी में इलाज जारी दुद्धी (सोनभद्र) क्षेत्र के टेढ़ा गांव में शुक्रवार सुबह घर के अंदर बक्सा खोल रही एक महिला बिजली की चपेट में आने से अचेत हो गई। परिजनों द्वारा समय पर अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण महिला की जान बच गई, और फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घटना का विवरण प्राप्त जानकारी के अनुसार, टेढ़ा गांव निवासी रामनाथ की 23 वर्षीय पत्नी रेशमा देवी शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे अपने घर के अंदर बक्से में सामान रखने के लिए उसे खोल रही थीं। इसी दौरान बक्से के ऊपर से गुजर रहे कटे हुए बिजली के तार से बक्से का ढक्कन छू गया। ढक्कन में करंट उतर आने से महिला को तेज झटका लगा और वह दूर जा गिरीं। बिजली का झटका लगते ही वह मौके पर ही अचेत हो गईं। घटना के समय पास ही मौजूद परिवार के अन्य सदस्यों ने तुरंत इसकी सूचना बाकी परिजनों सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस की टीम ईएमटी पंकज कुमार और चालक शनि मौके पर पहुंची और अचेत महिला को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी पहुंचाया। सीएचसी दुद्धी में चिकित्सक डॉ. मनोहर सिंह की देखरेख में महिला का तुरंत इलाज शुरू किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, रेशमा देवी की स्थिति स्थिर बनी हुई है और उनका उपचार जारी है।4