*फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में हाईकोर्ट जाएंगे आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी, जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी* *एससी-एसटी प्रमाणपत्रों में उपजाति जोड़कर जारी करने पर उठाए सवाल, बोले- पात्रों के अधिकारों पर पड़ रहा असर* *नीट यूजी दाखिलों में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, प्रमाणपत्र जारी करने वाले तंत्र की उच्चस्तरीय जांच की मांग* देहरादून। उत्तराखंड में नीट यूजी के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले को लेकर फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का कथित फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर दाखिला लेने वाले चार अभ्यर्थियों के प्रवेश निरस्त कर दिए गए हैं। मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। जाति और क्षेत्र के आधार पर जारी किये जा रहे मामलों को उजागर करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने कहा है कि वो इस मामले को लंबे समय से उठा रहे हैं। शासन-प्रशासन ने उनकी शिकायत नहीं सुनी। अपात्र लोगों को आरक्षण का लाभ मिलने से प्रदेश के पात्र छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों पर डाका पड़ रहा है। इन दिनों देश भर में नीट यूजी के तहत एमबीबीएस के दाखिले चल रहे हैं। उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी के माध्यम से काउंसिलिंग हो रही है। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी कोटे से जारी फर्जी प्रमाणपत्र पर सीट का मामला उजागर हुआ है। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश जारी किये हैं। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्रों को जारी करने का खुलासा करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने कहा कि पिछले 26 साल से यह खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीएम और समाज कल्याण विभाग को भी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने का एक बड़ा गिरोह खेल कर रहा है। इसमें शासन-प्रशासन के अधिकारी, पटवारी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 28 नवम्बर 2000 के बाद पहले से आरक्षित जातियों में उपजाति को जोड़कर प्रमाणपत्र जारी करना पूरी तरह से अवैध है। यह गैरकानूनी है। इसके अलावा क्षेत्र के नाम पर भी आरक्षण का लाभ लेना अवैध है। शासन को इन सभी प्रमाणपत्रों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे। गौरतलब है कि नीट यूजी मामले में फर्जीवाड़े को लेकर जांच में सामने आया कि चारों अभ्यर्थियों ने एक ही व्यक्ति के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल किया था, जबकि जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका में उस नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। सत्यापन के दौरान आवेदन में दिए गए पते पर भी अभ्यर्थी अथवा उनके परिजन नहीं मिले। इसके अलावा शपथपत्रों और अन्य दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां पाई गईं। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने चारों डठठै दाखिले रद्द कर दिए। पुलिस ने अब मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय ने भविष्य में आरक्षित श्रेणी और मूल निवास जैसे प्रमाणपत्रों के आधार पर होने वाले दाखिलों को जिला प्रशासन से सत्यापन के बाद ही स्थायी करने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं।
*फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में हाईकोर्ट जाएंगे आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी, जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी* *एससी-एसटी प्रमाणपत्रों में उपजाति जोड़कर जारी करने पर उठाए सवाल, बोले- पात्रों के अधिकारों पर पड़ रहा असर* *नीट यूजी दाखिलों में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, प्रमाणपत्र जारी करने वाले तंत्र की उच्चस्तरीय जांच की मांग* देहरादून। उत्तराखंड में नीट यूजी के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले को लेकर फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का कथित फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर दाखिला लेने वाले चार अभ्यर्थियों के प्रवेश निरस्त कर दिए गए हैं। मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। जाति और क्षेत्र के आधार पर जारी किये जा रहे मामलों को उजागर करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने कहा है कि वो इस मामले को लंबे समय से उठा रहे हैं। शासन-प्रशासन ने उनकी शिकायत नहीं सुनी। अपात्र लोगों को आरक्षण का लाभ मिलने से प्रदेश के पात्र छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों पर डाका पड़ रहा है। इन दिनों देश भर में नीट यूजी के तहत एमबीबीएस के दाखिले चल रहे हैं। उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी के माध्यम से काउंसिलिंग हो रही है। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी कोटे से जारी फर्जी प्रमाणपत्र पर सीट का मामला उजागर हुआ है। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश जारी किये हैं। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्रों को जारी करने का खुलासा करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने कहा कि पिछले 26 साल से यह खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीएम और समाज कल्याण विभाग को भी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने का एक बड़ा गिरोह खेल कर रहा है। इसमें शासन-प्रशासन के अधिकारी, पटवारी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 28 नवम्बर 2000 के बाद पहले से आरक्षित जातियों में उपजाति को जोड़कर प्रमाणपत्र जारी करना पूरी तरह से अवैध है। यह गैरकानूनी है। इसके अलावा क्षेत्र के नाम पर भी आरक्षण का लाभ लेना अवैध है। शासन को इन सभी प्रमाणपत्रों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे। गौरतलब है कि नीट यूजी मामले में फर्जीवाड़े को लेकर जांच में सामने आया कि चारों अभ्यर्थियों ने एक ही व्यक्ति के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल किया था, जबकि जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका में उस नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। सत्यापन के दौरान आवेदन में दिए गए पते पर भी अभ्यर्थी अथवा उनके परिजन नहीं मिले। इसके अलावा शपथपत्रों और अन्य दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां पाई गईं। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने चारों डठठै दाखिले रद्द कर दिए। पुलिस ने अब मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय ने भविष्य में आरक्षित श्रेणी और मूल निवास जैसे प्रमाणपत्रों के आधार पर होने वाले दाखिलों को जिला प्रशासन से सत्यापन के बाद ही स्थायी करने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं।
- *फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में हाईकोर्ट जाएंगे आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी, जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी* *एससी-एसटी प्रमाणपत्रों में उपजाति जोड़कर जारी करने पर उठाए सवाल, बोले- पात्रों के अधिकारों पर पड़ रहा असर* *नीट यूजी दाखिलों में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, प्रमाणपत्र जारी करने वाले तंत्र की उच्चस्तरीय जांच की मांग* देहरादून। उत्तराखंड में नीट यूजी के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले को लेकर फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का कथित फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर दाखिला लेने वाले चार अभ्यर्थियों के प्रवेश निरस्त कर दिए गए हैं। मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। जाति और क्षेत्र के आधार पर जारी किये जा रहे मामलों को उजागर करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने कहा है कि वो इस मामले को लंबे समय से उठा रहे हैं। शासन-प्रशासन ने उनकी शिकायत नहीं सुनी। अपात्र लोगों को आरक्षण का लाभ मिलने से प्रदेश के पात्र छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों पर डाका पड़ रहा है। इन दिनों देश भर में नीट यूजी के तहत एमबीबीएस के दाखिले चल रहे हैं। उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी के माध्यम से काउंसिलिंग हो रही है। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी कोटे से जारी फर्जी प्रमाणपत्र पर सीट का मामला उजागर हुआ है। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश जारी किये हैं। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्रों को जारी करने का खुलासा करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने कहा कि पिछले 26 साल से यह खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीएम और समाज कल्याण विभाग को भी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने का एक बड़ा गिरोह खेल कर रहा है। इसमें शासन-प्रशासन के अधिकारी, पटवारी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 28 नवम्बर 2000 के बाद पहले से आरक्षित जातियों में उपजाति को जोड़कर प्रमाणपत्र जारी करना पूरी तरह से अवैध है। यह गैरकानूनी है। इसके अलावा क्षेत्र के नाम पर भी आरक्षण का लाभ लेना अवैध है। शासन को इन सभी प्रमाणपत्रों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे। गौरतलब है कि नीट यूजी मामले में फर्जीवाड़े को लेकर जांच में सामने आया कि चारों अभ्यर्थियों ने एक ही व्यक्ति के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल किया था, जबकि जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका में उस नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। सत्यापन के दौरान आवेदन में दिए गए पते पर भी अभ्यर्थी अथवा उनके परिजन नहीं मिले। इसके अलावा शपथपत्रों और अन्य दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां पाई गईं। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने चारों डठठै दाखिले रद्द कर दिए। पुलिस ने अब मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय ने भविष्य में आरक्षित श्रेणी और मूल निवास जैसे प्रमाणपत्रों के आधार पर होने वाले दाखिलों को जिला प्रशासन से सत्यापन के बाद ही स्थायी करने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं।1
- रुपयों के विवाद में हत्या का खुलासा, आरोपी दंपत्ति गिरफ्तार The Aman Times। 🔴 रुपयों के विवाद में हत्या का खुलासा, आरोपी दंपत्ति गिरफ्तार काशीपुर/उधम सिंह नगर ग्राम गुलजारपुर में 13 सितंबर को हुई हरदीप सिंह की हत्या का पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी दंपत्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, रुपयों के लेन-देन के विवाद में संदीप सिंह उर्फ सोना ने हरदीप को गोली मार दी। आरोप है कि वारदात के बाद उसकी पत्नी संदीप कौर ने भी साक्ष्य छिपाने में सहयोग किया। एसएसपी ऊधम सिंह नगर अजय गणपति के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने करीब 48 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त लाइसेंसी पिस्टल, खोखा कारतूस और कार बरामद की गई है।1
- हरिद्वार पुलिस की नशे के खिलाफ बड़ी कामयाबी 400 ग्राम अवैध चरस के साथ टाटवाला श्यामपुर निवासी राकेश को किया गिरफ्तार। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देशों के क्रम में जनपद में मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध नशे के कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना श्यामपुर पुलिस द्वारा दिनांक 15.09.2026 को पुलिस बल के संदिग्ध व्यक्ति/वाहन चेकिंग एवं अपराध की रोकथाम हेतु क्षेत्र में भ्रमणशील थे। इसी दौरान गैण्डीखाता बाजार से टाटवाला जाने वाले नहर पटरी मार्ग पर रवासन नदी पुल पार करने के बाद पुलिस टीम द्वारा चैकिंग की जा रही थी, टाटवाला की ओर से एक मोटरसाइकिल आती दिखाई दी,पुलिस टीम को देखकर मोटरसाइकिल सवार अचानक वापस मुड़कर भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन जल्दबाजी में मोटरसाइकिल अनियंत्रित हो गई। संदेह होने पर पुलिस टीम द्वारा घेराबंदी कर मोटरसाइकिल सवार को पकड़ लिया गया। पुलिस टीम द्वारा पूछताछ किए जाने पर मोटरसाइकिल सवार ने अपनी पहचान राकेश पुत्र कालू सिंह, निवासी दूधियावाला/टाटवाला, थाना श्यामपुर, जनपद हरिद्वार, बताया,चरस परिवहन में प्रयुक्त मोटरसाइकिल व ओप्पो कंपनी का मोबाइल फोन एवं अन्य दस्तावेज भी बरामद हुए, जिन्हें नियमानुसार कब्जे में लिया गया है। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसने चरस को गांव से थोड़ा-थोड़ा करके एकत्र किया था और इसे गैण्डीखाता मार्केट में बेचने के उद्देश्य से ले जा रहा था। आरोपित के विरुद्ध अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। *नाम पता आरोपित* राकेश पुत्र कालू सिंह, निवासी दूधियावाला/टाटवाला, थाना श्यामपुर , जनपद हरिद्वार। *पुलिस टीम* उ0नि0 गगन मैठाणी, चौकी प्रभारी लालढांग हे0का0 शेर सिंह का0 गजेन्द्र प्रसाद का0 मनमोहन सैनी हरिद्वार पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध अभियान लगातार जारी है।1
- प्राइवेट कंपनियों में मजदूरों के शोषण का मुद्दा उठा, ललित कुमार ने उठाई आवाज हरिद्वार। प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले मजदूरों के साथ कथित शोषण और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर ललित कुमार ने आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि कई श्रमिक लंबे समय तक काम करने के बावजूद वेतन, काम के घंटे, छुट्टी और अन्य सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ललित कुमार ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों को नियमानुसार वेतन, सुरक्षित कार्य वातावरण और अन्य वैधानिक सुविधाएं मिलना जरूरी है। उन्होंने संबंधित विभागों से ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मजदूर अपनी मेहनत से उद्योगों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने श्रमिकों से भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और समस्या होने पर संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराने की अपील की।1
- हरिद्वार में रामलीलाओं का इतिहास डेढ़ दशक से भी अधिक पुराना है। आजादी से पूर्व रामलीला के मंचन के लिए अंग्रेजी हुकूमत से अनुमति लेनी पड़ती थी लेकिन धर्मनगरी में अब दर्जनों स्थानों पर रामलीलाओं का आयोजन होता है। आमतौर पर रक्षाबंधन के बाद रामलीलाओं की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और लीला के पात्रों को मंचन का पूर्वाभ्यास कराना शुरू कर दिया जाता है। हालांकि एक वक्त तक हरिद्वार में रामलीलाएं पूरी तरह से रामायण चौपाईयों से जुड़ी रही लेकिन अब बदलते वक्त के साथ उन्हें फिल्मी गीतों की धुनों के साथ जोड़ दिया गया। अब धर्मनगरी में अनेक स्थानों पर रामलीलाओं की रिहर्सल शुरू हो चुकी हैं। रामलीलाओं में रुचि रखने वाले इन रिहर्सलों का भी आनंद लेने के लिए पहुंचते हैं। (_कुमार दुष्यंत_)1
- क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड CAU आयोजित कर रहा है उत्तराखंड प्रीमियर लीग UPL 2026, जानिए क्या कुछ है विशेष ❓। NIU #CAU #UPL #CricketAssociationOfUttarakhand #UttarakhandPremiereLeague उत्तराखंड प्रीमियर लीग UPL प्रदेश की प्रमुख टी20 क्रिकेट लीग है, जिसका आयोजन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड CAU करता है। इस लीग का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने, अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेलने और बड़े स्तर पर आगे बढ़ने का मौका देना है। UPL का आयोजन IPL की नीलामी से पहले होता है। इसलिए यह उत्तराखंड के खिलाड़ियों के लिए बहुत अच्छा मौका है कि वे टी20 क्रिकेट में अपना प्रदर्शन दिखाएँ और क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचें। बड़े स्टेडियम, अच्छी प्रतिस्पर्धा और प्रसारण के कारण खिलाड़ियों को बड़े मैचों जैसा अनुभव भी मिलता है।1
- 19 सितंबर 2026 को इंदौर में होगा छात्रों की गूंज कार्यक्रम! छात्रों से मिलने, आपको सुनने, आपसे बात करने। 19 सितंबर को इंदौर में होंगे आप सबके समक्ष (राहुल गांधी) अगर आप या आपके अपने education system के सताए हुए हैं और चाहते हैं कि ये हालात बदलें, तो आप जानते हैं - ‘छात्रों की गूंज’ आपकी सामूहिक आवाज़ है, बदलाव की शुरुआत करने का एक मौका है। शिक्षा के हर पहलू और आपके संघर्षों पर इंदौर में विस्तार से चर्चा करेंगे।1
- दिव्यांग बालिकाओं के स्नेह से भावुक हुए मुख्यमंत्री धामी, नम हुईं आंखें देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी अपने जन्मदिवस के अवसर पर राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान पहुंचे। यहां अध्ययनरत दिव्यांग बालिकाओं ने आत्मीयता और स्नेह के साथ मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। बालिकाओं द्वारा व्यक्त किए गए प्रेम और भावनाओं को देखकर मुख्यमंत्री धामी भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि बच्चों से मिला यह स्नेह उनके लिए बेहद खास और अविस्मरणीय है। उन्होंने इसे अपने जन्मदिवस का सबसे अनमोल उपहार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बेटियों का आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और दृढ़ इच्छाशक्ति समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रत्येक बच्चे में अपार प्रतिभा और संभावनाएं होती हैं। जरूरत है कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर, उचित प्रोत्साहन और विश्वास दिया जाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों के सपनों और प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जन्मदिवस के अवसर पर बच्चों के बीच बिताया गया यह भावुक पल कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए भी विशेष बन गया।4