संभल जिला प्रशासन ने करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की ग्रामसभा की 38 बीघा सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और फर्जी नामांतरण के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। लेखपाल की तहरीर पर संभल कोतवाली में पूर्व अधिशासी अधिकारी और पूर्व चेयरमैन से जुड़े लोगों समेत 32 नामजद तथा अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन का आरोप है कि वर्ष 1967 के कथित फर्जी पट्टे के आधार पर इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसका व्यावसायिक उपयोग किया गया। इस पूरे मामले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं में स्थित यह करीब 38 बीघा (2.367 हेक्टेयर) नवीन परती भूमि है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 101 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि वर्ष 1967 में एक कथित फर्जी पट्टा तैयार कर इस भूमि का नामांतरण निजी लोगों के नाम करा दिया गया, जबकि नगर पालिका परिषद के पास इस तरह का पट्टा देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। लेखपाल स्पर्श गुप्ता की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त मानचित्रक शाहबुद्दीन, वर्तमान पैरोकार माजिद खान, तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी खेम सिंह खड़क, पूर्व चेयरमैन नुसरत इलाही के दामाद और परिजनों सहित 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2008 में उपसंचालक चकबंदी स्तर पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किए गए, जिसके कारण सरकारी भूमि निजी खातेदारों के नाम दर्ज हो गई। वहीं, नगर पालिका की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका की प्रभावी पैरवी न होने के चलते यह मामला वर्षों तक लंबित रहा, और जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। हाल ही में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मौके का निरीक्षण किया। इसके बाद डीडीसी न्यायालय में पुनर्स्थापना याचिका दाखिल की गई, जिस पर लगातार सुनवाई के बाद न्यायालय ने विवादित भूमि से निजी खातेदारों के नाम हटाकर पूरी जमीन दोबारा राज्य सरकार और ग्रामसभा के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, फर्जीवाड़ा करने और अवैध कब्जे में शामिल किसी भी अधिकारी, कर्मचारी, मूल पट्टेदार या बैनामा कराने वाले व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। एफआईआर के साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
संभल जिला प्रशासन ने करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की ग्रामसभा की 38 बीघा सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और फर्जी नामांतरण के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। लेखपाल की तहरीर पर संभल कोतवाली में पूर्व अधिशासी अधिकारी और पूर्व चेयरमैन से जुड़े लोगों समेत 32 नामजद तथा अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन का आरोप है कि वर्ष 1967 के कथित फर्जी पट्टे के आधार पर इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसका व्यावसायिक उपयोग किया गया। इस पूरे मामले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं में स्थित यह करीब 38 बीघा (2.367 हेक्टेयर) नवीन परती भूमि है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 101 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि वर्ष 1967 में एक
कथित फर्जी पट्टा तैयार कर इस भूमि का नामांतरण निजी लोगों के नाम करा दिया गया, जबकि नगर पालिका परिषद के पास इस तरह का पट्टा देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। लेखपाल स्पर्श गुप्ता की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त मानचित्रक शाहबुद्दीन, वर्तमान पैरोकार माजिद खान, तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी खेम सिंह खड़क, पूर्व चेयरमैन नुसरत इलाही के दामाद और परिजनों सहित 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2008 में उपसंचालक चकबंदी स्तर पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किए गए, जिसके कारण सरकारी भूमि निजी खातेदारों के नाम दर्ज हो गई। वहीं, नगर पालिका की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका की प्रभावी पैरवी न होने के चलते यह मामला वर्षों तक लंबित रहा, और जांच रिपोर्ट में
कई अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। हाल ही में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मौके का निरीक्षण किया। इसके बाद डीडीसी न्यायालय में पुनर्स्थापना याचिका दाखिल की गई, जिस पर लगातार सुनवाई के बाद न्यायालय ने विवादित भूमि से निजी खातेदारों के नाम हटाकर पूरी जमीन दोबारा राज्य सरकार और ग्रामसभा के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, फर्जीवाड़ा करने और अवैध कब्जे में शामिल किसी भी अधिकारी, कर्मचारी, मूल पट्टेदार या बैनामा कराने वाले व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। एफआईआर के साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
- संभल जिला प्रशासन ने करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की ग्रामसभा की 38 बीघा सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और फर्जी नामांतरण के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। लेखपाल की तहरीर पर संभल कोतवाली में पूर्व अधिशासी अधिकारी और पूर्व चेयरमैन से जुड़े लोगों समेत 32 नामजद तथा अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन का आरोप है कि वर्ष 1967 के कथित फर्जी पट्टे के आधार पर इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसका व्यावसायिक उपयोग किया गया। इस पूरे मामले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं में स्थित यह करीब 38 बीघा (2.367 हेक्टेयर) नवीन परती भूमि है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 101 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि वर्ष 1967 में एक कथित फर्जी पट्टा तैयार कर इस भूमि का नामांतरण निजी लोगों के नाम करा दिया गया, जबकि नगर पालिका परिषद के पास इस तरह का पट्टा देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। लेखपाल स्पर्श गुप्ता की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त मानचित्रक शाहबुद्दीन, वर्तमान पैरोकार माजिद खान, तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी खेम सिंह खड़क, पूर्व चेयरमैन नुसरत इलाही के दामाद और परिजनों सहित 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2008 में उपसंचालक चकबंदी स्तर पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किए गए, जिसके कारण सरकारी भूमि निजी खातेदारों के नाम दर्ज हो गई। वहीं, नगर पालिका की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका की प्रभावी पैरवी न होने के चलते यह मामला वर्षों तक लंबित रहा, और जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। हाल ही में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मौके का निरीक्षण किया। इसके बाद डीडीसी न्यायालय में पुनर्स्थापना याचिका दाखिल की गई, जिस पर लगातार सुनवाई के बाद न्यायालय ने विवादित भूमि से निजी खातेदारों के नाम हटाकर पूरी जमीन दोबारा राज्य सरकार और ग्रामसभा के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, फर्जीवाड़ा करने और अवैध कब्जे में शामिल किसी भी अधिकारी, कर्मचारी, मूल पट्टेदार या बैनामा कराने वाले व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। एफआईआर के साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।3
- हाल ही में ओवैसी के पंडित ने एक दमदार भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि अयोध्या राम मंदिर के 'चंदा चोरों' के घरों पर आखिर बुलडोजर क्यों नहीं चलाए गए और उनके खिलाफ गोलियां क्यों नहीं चलाई गईं। उनके इस भाषण ने उन लोगों के प्रति तीखा आक्रोश व्यक्त किया, जिन्हें 'चंदा चोर' बताया गया है, और इस बात पर जोर दिया कि ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, जबकि अन्य मामलों में बुलडोजर और गोलियों का इस्तेमाल देखा जाता है।1
- संभल के नगला गाँव में सरकारी बंजर भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जहाँ महबूल्ला शाह की मजार और सरकारी धन से बना एक शौचालय पाया गया है। कल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी एडवोकेट ने जिलाधिकारी से इस संबंध में शिकायत की थी, जिसके बाद तहसील प्रशासन ने मौके पर पैमाइश (माप) कराई। इस पैमाइश में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई है। मौके पर मौजूद लेखपाल रोहित कुमार ने पुष्टि की कि गाटा संख्या 68/3 की 0.117 हेक्टेयर बंजर भूमि की माप की गई है और यह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला प्रतीत होता है। वहीं, स्थानीय निवासी हाजी नूर मौहम्मद ने बताया कि यह मजार उनके होश संभालने से पहले से मौजूद है। उन्होंने पहले इसे मजार की जमीन बताया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि इसका कुछ हिस्सा ग्राम सभा की जमीन भी है। पैमाइश पूरी होने के बाद रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंप दी गई है। अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुसार होगी। यदि कोर्ट अवैध कब्जे की पुष्टि करता है, तो सरकारी बंजर भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जा सकती है।4
- अमरोहा जिला मुख्यालय पर बुधवार को संचारी रोग नियंत्रण अभियान माह जुलाई 2026 का शुभारंभ एक जनजागरूकता रैली और शपथ ग्रहण कार्यक्रम के साथ किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रैली को रवाना किया, जिसमें नगर पालिका परिषद अमरोहा, जिला संयुक्त चिकित्सालय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम जनता को संचारी रोगों की रोकथाम, साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, मच्छरों से बचाव और स्वास्थ्य संबंधी अन्य सावधानियों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मलेरिया इंस्पेक्टर और जनपदीय एपिडेमियोलॉजिस्ट सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। झमाझम वर्षा के बावजूद यह कार्यक्रम पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने तथा जन-जन को जागरूक करने की शपथ दिलाई। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण केवल जनसहभागिता और जागरूकता के माध्यम से ही संभव है।4
- उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई धारा 170 बीएनएसएस के तहत की गई है।1
- बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने राम मंदिर के लिए इकट्ठा किए गए चंदे में कथित चोरी के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को इस मामले में घेरा है।1
- उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित एक सरकारी अस्पताल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला सफाईकर्मी कथित तौर पर एक मानसिक रूप से कमजोर बताए जा रहे युवक को लात मारती और उसके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह वीडियो सही पाया जाता है, तो इस कृत्य को बेहद अमानवीय और संवेदनहीन व्यवहार माना जाएगा। इस मामले में अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वीडियो के वायरल होने के बाद से लोगों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है, जिसके चलते मामले की गहन जांच की मांग जोर पकड़ रही है।1