राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यभारत प्रांत के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का प्रकटोत्सव कार्यक्रम रविवार को ब्यावरा में भव्यता से आयोजित हुआ, जिसमें स्वयंसेवकों के अनुशासित प्रदर्शन ने हजारों लोगों को प्रभावित किया। इस आयोजन में सामूहिक व्यायाम, दंड संचालन, योग एवं शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया गया, वहीं घोष की मधुर धुन और स्वयंसेवकों की एकरूपता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यह संघ शिक्षा वर्ग 16 मई से ब्यावरा में चल रहा था, जिसका औपचारिक समापन 1 जून को दीक्षांत समारोह के साथ होगा। इस प्रशिक्षण वर्ग में मध्यभारत प्रांत के 31 जिलों के 138 शाखा स्थानों से आए 200 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इनमें किसान, व्यापारी, शिक्षक, अधिवक्ता और इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे, जो सभी अपने स्वयं के व्यय से प्रशिक्षण प्राप्त करने पहुंचे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के चित्र पर पुष्प अर्पण कर किया गया, जिसमें मानस मर्मज्ञ पंडित कपिल शर्मा (नीलगिरि आश्रम), वर्ग सर्वाधिकारी योगेश गौतम, जिला संघ चालक महेश यादव और मुख्य वक्ता प्रांत कार्यवाह हेमंत सेठिया मंच पर उपस्थित रहे। वर्ग कार्यवाह कदम सिंह मीणा ने प्रशिक्षण वर्ग की गतिविधियों एवं उद्देश्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता हेमंत सेठिया ने अपने उद्बोधन में संगठित समाज की शक्ति पर जोर दिया, कहा कि यह हर चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है और सामूहिक शक्ति के बिना बड़े परिवर्तन संभव नहीं हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण है, जहां शाखा के माध्यम से संस्कारित, अनुशासित एवं राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले व्यक्तित्व का निर्माण किया जाता है। सेठिया ने संघ शिक्षा वर्ग को केवल शारीरिक प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि जीवन निर्माण की प्रयोगशाला बताया, जहाँ स्वयंसेवकों को समयपालन, अनुशासन, सेवा, समरसता, आत्मीयता एवं टीम भावना जैसे जीवन मूल्यों का व्यवहारिक प्रशिक्षण मिलता है, जिसे वे समाज जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। उन्होंने विकसित भारत के संकल्प, सामाजिक समरसता, स्वदेशी चिंतन और भारतीय जीवन मूल्यों पर भी विचार रखे, और भारत की विश्व मंच पर बढ़ती भूमिका में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता को आवश्यक बताया। इस कार्यक्रम की एक और विशेषता पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत का संदेश रहा। आयोजन को पूरी तरह से पॉलीथिन मुक्त रखा गया और सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग वर्जित था। भोजन बनाने में गोबर के कंडों और लकड़ी का इस्तेमाल किया गया। इसके अतिरिक्त, बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक परिवहन, साइकिल, पैदल और इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जिससे समाज तक पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश पहुँचा। इस प्रकट कार्यक्रम के माध्यम से संघ ने अनुशासन, संगठन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को समाज के सामने प्रस्तुत किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यभारत प्रांत के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का प्रकटोत्सव कार्यक्रम रविवार को ब्यावरा में भव्यता से आयोजित हुआ, जिसमें स्वयंसेवकों के अनुशासित प्रदर्शन ने हजारों लोगों को प्रभावित किया। इस आयोजन में सामूहिक व्यायाम, दंड संचालन, योग एवं शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया गया, वहीं घोष की मधुर धुन और स्वयंसेवकों की एकरूपता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यह संघ शिक्षा वर्ग 16 मई से ब्यावरा में चल रहा था, जिसका औपचारिक समापन 1 जून को दीक्षांत समारोह के साथ होगा। इस प्रशिक्षण वर्ग में मध्यभारत प्रांत के 31 जिलों के 138 शाखा स्थानों से आए 200 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इनमें किसान, व्यापारी,
शिक्षक, अधिवक्ता और इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे, जो सभी अपने स्वयं के व्यय से प्रशिक्षण प्राप्त करने पहुंचे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के चित्र पर पुष्प अर्पण कर किया गया, जिसमें मानस मर्मज्ञ पंडित कपिल शर्मा (नीलगिरि आश्रम), वर्ग सर्वाधिकारी योगेश गौतम, जिला संघ चालक महेश यादव और मुख्य वक्ता प्रांत कार्यवाह हेमंत सेठिया मंच पर उपस्थित रहे। वर्ग कार्यवाह कदम सिंह मीणा ने प्रशिक्षण वर्ग की गतिविधियों एवं उद्देश्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता हेमंत सेठिया ने अपने उद्बोधन में संगठित समाज की शक्ति पर जोर दिया, कहा कि यह हर चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है और
सामूहिक शक्ति के बिना बड़े परिवर्तन संभव नहीं हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण है, जहां शाखा के माध्यम से संस्कारित, अनुशासित एवं राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले व्यक्तित्व का निर्माण किया जाता है। सेठिया ने संघ शिक्षा वर्ग को केवल शारीरिक प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि जीवन निर्माण की प्रयोगशाला बताया, जहाँ स्वयंसेवकों को समयपालन, अनुशासन, सेवा, समरसता, आत्मीयता एवं टीम भावना जैसे जीवन मूल्यों का व्यवहारिक प्रशिक्षण मिलता है, जिसे वे समाज जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। उन्होंने विकसित भारत के संकल्प, सामाजिक समरसता, स्वदेशी चिंतन और भारतीय जीवन मूल्यों पर भी विचार रखे, और भारत की विश्व
मंच पर बढ़ती भूमिका में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता को आवश्यक बताया। इस कार्यक्रम की एक और विशेषता पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत का संदेश रहा। आयोजन को पूरी तरह से पॉलीथिन मुक्त रखा गया और सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग वर्जित था। भोजन बनाने में गोबर के कंडों और लकड़ी का इस्तेमाल किया गया। इसके अतिरिक्त, बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक परिवहन, साइकिल, पैदल और इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जिससे समाज तक पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश पहुँचा। इस प्रकट कार्यक्रम के माध्यम से संघ ने अनुशासन, संगठन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को समाज के सामने प्रस्तुत किया।
- शाजापुर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए लगभग 388 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। अपने संबोधन के दौरान, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "दो कौड़ी का प्रदेश अध्यक्ष" कहकर संबोधित किया। मुख्यमंत्री यादव ने जीतू पटवारी को "रद्दी" और "दो कौड़ी का अध्यक्ष" भी बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में सियासत गर्मा गई है, जिससे मध्य प्रदेश में सियासी पारा हाई हो गया है।1
- भोपाल संभाग के ब्यूरो चीफ सैफ अली ने 'भारत संवाद' और 'परिवर्तन उदय' नामक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों का परिचय दिया है। 'भारत संवाद' एक लाइव न्यूज चैनल भी है। सैफ अली ने पाठकों से प्रमुख खबरों के लिए इन समाचार पत्रों और न्यूज चैनल के साथ बने रहने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, खबर और विज्ञापन संबंधी जानकारी के लिए एक संपर्क नंबर भी साझा किया गया है।1
- राजगढ़ जिले के केलखेड़ा में एक स्कूल के सामने की गली कई सालों से खराब पड़ी है, जिसमें लगातार पानी भरा रहता है। इस कारण बच्चों सहित राहगीरों को चलने-फिरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत से शिकायत की है और कई सुनवाईयां भी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद पंचायत द्वारा गली की मरम्मत का कार्य नहीं किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने पंचायत पर नियमों का पालन न करने और उनकी सुनवाई न करने का आरोप लगाया है, जिससे वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।1
- मध्य प्रदेश के राजगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर सुझाव और विचार प्राप्त करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक रविवार को जिला पंचायत सभागृह में आयोजित हुई। इस दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को साझा किया गया, जिसमें उन्होंने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून होना चाहिए। उनके अनुसार, यूसीसी का उद्देश्य कानून के समक्ष समानता, महिलाओं को समान अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि एक धर्मनिरपेक्ष और समान नागरिक संहिता से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होगा, जिससे संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी। बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर गोपाल शर्मा ने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर समाज के सभी वर्गों और आमजन की राय लेना तथा उसे विधिवत दर्ज करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समुदायों के विचारों, सुझावों और मतों को संकलित कर उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना है। प्रोफेसर शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी की अवधारणा कोई नई नहीं है, बल्कि इसका उल्लेख भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में किया गया है। संविधान निर्माताओं ने पहले ही यह परिकल्पना की थी कि देश की सामाजिक परिस्थितियों और विकास के अनुरूप समय आने पर समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग नारायण सिंह पंवार, राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव, खिलचीपुर विधायक हजारीलाल दांगी, भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह गुर्जर, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले, अपर कलेक्टर प्रताप सिंह चौहान, और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य एवं भावना वही बनी रहनी चाहिए, जिसकी परिकल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी।1
- मोहन बड़ोदिया के ग्राम बरनावद निवासी किसान सिद्दुलाल पिता दोला ने बरनावद के मालवीय मोहल्ले से बडोदी के काकड़ तक जाने वाले आम रास्ते से अतिक्रमण हटाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि यह मार्ग पहले काफी चौड़ा था, जिससे ग्रामीणों, किसानों, मवेशियों और वाहनों का आवागमन सुगमता से होता था। हालाँकि, समय के साथ रास्ते के दोनों ओर हुए अतिक्रमण के कारण यह मार्ग अब बेहद संकरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में इस रास्ते से ट्रैक्टर सहित बड़े वाहनों को निकलने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर को आवेदन दिए जा चुके हैं। राजस्व विभाग द्वारा पटवारी और ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचनामा कार्रवाई भी की गई, लेकिन इन सभी प्रयासों के बावजूद आज तक अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। रविवार को किसान सिद्दुलाल ने मीडिया से चर्चा करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में हो रही परेशानी से तत्काल राहत मिल सके।1
- मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने मोहन यादव को "पर्ची वाले फर्जी मुख्यमंत्री" कहकर संबोधित किया। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि "पर्ची वाले फर्जी मुख्यमंत्री की भाषा का हल्कापन प्रदेश की जनता देख रही है।" यह बयानबाजी जीतू पटवारी के समर्थन में की गई है, जहाँ कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा है। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में एक नई जंग की शुरुआत का संकेत दिया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है या इसके पीछे कोई गहरा कारण है। कांग्रेस ने इतने कड़े शब्दों में जवाब क्यों दिया, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। पूरा वीडियो देखकर और इस बयानबाजी में किसे सही माना जाए, इस पर जनता से अपनी राय कमेंट में लिखने का आह्वान किया गया है।1
- राजगढ़ में भीषण जल संकट से परेशान होकर स्थानीय लोग, खासकर महिलाएं, अपने हक और अधिकार के लिए सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रही हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सड़क पर बैठकर सीधे सवाल किया है कि क्या वे भारत के लोग नहीं हैं, जिन्हें पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं हो रहा और इसके लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। महिलाओं का यह आंदोलन सरकार की 'जल जीवन मिशन' योजना पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक घर तक नल से जल पहुँचाना है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह योजना या तो सिर्फ कागजों में चल रही है या फिर इसका धरातल पर क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से नहीं हो पाया है। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं पानी की मूलभूत आवश्यकता के लिए अपनी पीड़ा और सरकार से अपनी नागरिकता का अधिकार पूछती दिख रही हैं।1
- एक बेजुबान जानवर के प्रति की गई अत्यधिक क्रूरता पर गहरा रोष व्यक्त किया गया है, जिसके साथ इतनी बेरहमी से व्यवहार किया गया कि यह देखकर दिल दहल उठेगा। पोस्ट में इंसान की निर्दयता पर सवाल उठाया गया है, यह पूछते हुए कि आखिर कोई इतना क्रूर कैसे हो सकता है। एक मार्मिक अपील करते हुए याद दिलाया गया है कि हर कर्म का फल अवश्य मिलता है और पशुओं पर दया करना अनिवार्य है, क्योंकि वे भी दर्द और पीड़ा को महसूस करते हैं।1