निजामडीह में अब भी अंधेरा, बिजली पानी से वंचित ग्रामीणों ने दी चेतावनी, निजामडीह में अब भी अंधेरा, बिजली पानी से वंचित ग्रामीणों ने दी चेतावनी, 3 मई रविवार को दोपहर 12 बजे मिली जानकारी अनुसार साल्हेवारा वनांचल क्षेत्रों में विकास के दावों के बीच खैरागढ़ विकासखंड के साल्हेवारा बकरकट्टा क्षेत्र) अंतर्गत ग्राम निजामडीह की जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और रात के समय जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। वहीं, पीने के साफ पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे महिलाओं को दूर-दराज तक पानी लाना पड़ता है या दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हाल ही में क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय के दौरे से ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी, लेकिन उनका आरोप है कि केवल आश्वासन देकर वापस लौट गए। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। गांव के लोगों ने साफ कहा है कि अब वे सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। यदि जल्द ही बिजली और पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे आगे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है।
निजामडीह में अब भी अंधेरा, बिजली पानी से वंचित ग्रामीणों ने दी चेतावनी, निजामडीह में अब भी अंधेरा, बिजली पानी से वंचित ग्रामीणों ने दी चेतावनी, 3 मई रविवार को दोपहर 12 बजे मिली जानकारी अनुसार साल्हेवारा वनांचल क्षेत्रों में विकास के दावों के बीच खैरागढ़ विकासखंड के साल्हेवारा बकरकट्टा क्षेत्र) अंतर्गत ग्राम निजामडीह की जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और रात के समय जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। वहीं, पीने के साफ पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे महिलाओं को दूर-दराज तक पानी लाना पड़ता है या दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हाल ही में क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय के दौरे से ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी, लेकिन उनका आरोप है कि केवल आश्वासन देकर वापस लौट गए। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। गांव के लोगों ने साफ कहा है कि अब वे सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। यदि जल्द ही बिजली और पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे आगे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है।
- निजामडीह में अब भी अंधेरा, बिजली पानी से वंचित ग्रामीणों ने दी चेतावनी, 3 मई रविवार को दोपहर 12 बजे मिली जानकारी अनुसार साल्हेवारा वनांचल क्षेत्रों में विकास के दावों के बीच खैरागढ़ विकासखंड के साल्हेवारा बकरकट्टा क्षेत्र) अंतर्गत ग्राम निजामडीह की जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और रात के समय जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। वहीं, पीने के साफ पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे महिलाओं को दूर-दराज तक पानी लाना पड़ता है या दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हाल ही में क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय के दौरे से ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी, लेकिन उनका आरोप है कि केवल आश्वासन देकर वापस लौट गए। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। गांव के लोगों ने साफ कहा है कि अब वे सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। यदि जल्द ही बिजली और पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे आगे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है।1
- राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह लंबे समय बाद राजनांदगांव पहुंचे। उनके आगमन पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। इस दौरान डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव से अपने भावनात्मक जुड़ाव को लेकर बड़ा बयान दिया। राजनांदगांव लंबे समय तक डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि रहा है। लंबे अंतराल के बाद शहर पहुंचने पर उन्होंने राजनांदगांव नहीं आ पाने का कारण भी बताया। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि उनका ऑपरेशन हुआ था, जिसके कारण आने में विलंब हुआ। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “रमन कहीं भी रहे, मन राजनांदगांव में ही रहता है। यहां से कहीं जाता नहीं।” उनके इस बयान ने मौजूद लोगों का ध्यान खींचा और समर्थकों ने इसे राजनांदगांव के प्रति उनके लगाव से जोड़कर देखा। डॉ. रमन सिंह के इस दौरे को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह नजर आया। लंबे समय बाद उनके राजनांदगांव पहुंचने से राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।6
- घोटवानी में फिर धधकी आग: दो पैरावट जलकर खाक, 2 घंटे बाद भी नहीं पहुंची फायर ब्रिगेड दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत घोटवानी में एक बार फिर आगजनी की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी। गांव में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और दो किसानों के पैरावट जलकर खाक हो गए। बताया जा रहा है कि आग की लपटें पास में रखे सुरेश वर्मा के पैरावट तक पहुंच गईं। कुछ ही देर में आग ने दोनों पैरावट को अपनी चपेट में ले लिया। आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार देखकर गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बाल्टी, पाइप और अन्य संसाधनों के जरिए आग बुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। घटना के करीब दो घंटे बीत जाने के बाद भी फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंच सकी, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। सूचना मिलते ही 112 की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं ने गांव में दहशत का माहौल बना दिया है।1
- पुराना पुलिस थाना लांजी भवन स्थित हनुमान मंदिर में अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया जिस पश्चात महाप्रसाद की गई1
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- सुशासन तिहार में रेत माफियाओं पर तहसीलदार की ताबडतोड कार्रवाई, RTO-खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल.! गोबरा नवापारा। महानदी का सीना छलनी कर शासन के राजस्व को करोड़ों का चूना लगा रहे रेत माफियाओं पर राजस्व विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। सुशासन तिहार के दौरान बेखौफ होकर अवैध रेत परिवहन कर रहे दर्जनों हाइवा तहसीलदार की टीम ने धर दबोचे। लेकिन इस कार्रवाई ने RTO और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार सुबह से ही गोबरा नवापारा तहसीलदार विक्रांत सिंह राठौर एक्शन मोड में थे। सूचना मिलते ही टीम ने मुख्य मार्गों पर घेराबंदी कर बिना रॉयल्टी पर्ची के अवैध रेत लेकर भाग रहे दर्जनों हाइवा पकड़े। अचानक हुई कार्रवाई से माफियाओं में हड़कंप मच गया। सवाल यह है कि रोजाना सैकड़ों ओवरलोड रेत हाइवा नेशनल हाईवे और शहर से गुजरते हैं, फिर भी जिम्मेदार RTO और खनिज विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते हैं। न तो नियमित जांच होती है, न ही नाकेबंदी। विभाग की इसी ढिलाई के चलते रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि सुशासन तिहार जैसे सरकारी अभियान के दौरान भी अवैध परिवहन बेरोकटोक जारी था।स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और परिवहन संभव ही नहीं है। महानदी से अवैध खनन के कारण नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है और शासन को हर महीने लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। फिलहाल जब्त हाइवा पर खनिज अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है।2
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