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कटनी के विजयराघवगढ़ क्षेत्र के नन्हवारा रोड पर वेअर हाउस के पास कृषि भूमि को आवासीय भूमि परिवर्तित किये। बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के कृषि भूमि पर बीचो बीच कच्ची चुरी की सडक डालकर भू माफिया द्वारा काटे जा रहे अवैध प्लॉट जिम्मेदार अधिकारी मौन स्वीकृति।
विकास श्रीवास्तव
कटनी के विजयराघवगढ़ क्षेत्र के नन्हवारा रोड पर वेअर हाउस के पास कृषि भूमि को आवासीय भूमि परिवर्तित किये। बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के कृषि भूमि पर बीचो बीच कच्ची चुरी की सडक डालकर भू माफिया द्वारा काटे जा रहे अवैध प्लॉट जिम्मेदार अधिकारी मौन स्वीकृति।
- User6475Dhimarkheda, Katni👏2 days ago
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- पोसरा में जनआक्रोश की हुंकार कलश यात्रा से गूंजा गांव, आदिवासियों के दर्द पर पसीजा नेता का दिल कटनी। ग्राम पोसरा में आदिवासी समाज सहित अन्य समाजों के सैकड़ों ग्रामीणों ने समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष डॉ. खान का जोरदार और ऐतिहासिक स्वागत किया। गांव की माता-बहनों ने सिर पर कलश रखकर भव्य कलश यात्रा निकाली, जो वर्षों से उपेक्षित आदिवासी समाज के दर्द और आक्रोश की प्रतीक बन गई। इस दौरान डॉ. खान ने कन्याओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जिससे यह संदेश गया कि यह दौरा राजनीति नहीं, बल्कि पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है। 🩸 “हम भूखे मरने की कगार पर हैं” ग्रामीणों ने एक स्वर में बताया कि आदिवासी समाज के साथ लगातार अन्याय हो रहा है— आदिवासियों की जमीनें दबंगों द्वारा हड़पी जा रही हैं लाड़ली बहना योजना की राशि अब तक नहीं मिल रही बिजली और पानी की गंभीर समस्या, इसके बावजूद ₹3000 तक के बिल थमाए जा रहे हैं गांव में अवैध शराब बिक्री और जुआ खुलेआम, जिससे परिवार बर्बादी की ओर बच्चों को शिक्षा से वंचित रखा जा रहा है, कई बच्चों के पैरों में चप्पल तक नहीं पूरा गांव गरीबी, भुखमरी और बदहाली से जूझ रहा है ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा— 👉 “हम गरीब हैं, लेकिन इंसान हैं… हमारी सुनवाई क्यों नहीं होती?” ⚠️ प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों के बावजूद कोई अधिकारी गांव तक नहीं पहुंचा। फाइलों में सब ठीक है, लेकिन ज़मीनी हकीकत दर्दनाक और शर्मनाक है। ✊ समाजवादी पार्टी का ऐलान – संघर्ष होगा डॉ. खान ने दो टूक कहा— “आदिवासी समाज के साथ हो रहे अत्याचार को समाजवादी पार्टी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सड़क से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक आंदोलन किया जाएगा।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि जमीन हड़पने, योजनाओं का लाभ, बिजली बिलों की अनियमितता और अवैध शराब-जुए के खिलाफ ठोस संघर्ष किया जाएगा। इस अवसर पर देवी दीन गुप्ता, प्रहलाद सिंह ठाकुर सहित समाजवादी पार्टी के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। 🔔 प्रशासन से सीधा सवाल क्या आदिवासी समाज शासन की प्राथमिकता में नहीं? क्या योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? कब जागेगा प्रशासन? यह खबर केवल समाचार नहीं, पोसरा के आदिवासियों की पीड़ा और चेतावनी है। अब देखना यह है कि प्रशासन सुधरता है या फिर आंदोलन की चिंगारी आग बनती है।3
- *सवालों के दायरे में कटनी की राजनीति, प्रदर्शन के दौरान दिखी असंवेदनशील मानसिकता* कटनी – इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 से अधिक लोगों की मौत और इस गंभीर मुद्दे पर कैबिनेट मंत्री द्वारा पत्रकार के सवाल के जवाब में “घंटा” जैसे शब्द के प्रयोग के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे सांकेतिक प्रदर्शन के दौरान कटनी की राजनीति में एक अलग ही तस्वीर सामने आई, जिसने राजनीतिक मर्यादाओं और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस कार्यकर्ता जब मुड़वारा विधायक संदीप जयसवाल के निवास के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे, उसी समय भाजपा विधायक की ओर से पहले से ही समर्थकों को मौके पर बुला लिया गया। आरोप है कि वहां डीजे लगवाकर तेज आवाज में “जय सियाराम” के नारे बजाए गए और भाजपा कार्यकर्ता एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते नजर आए, ताकि कांग्रेस के प्रदर्शन की आवाज दबाई जा सके। आरोप है कि यह पूरा आयोजन जानबूझकर किया गया ताकि इंदौर में दूषित पानी से हुई 15 से अधिक मौतों जैसे गंभीर मुद्दे को कमजोर दिखाया जा सके। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह आचरण न केवल राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है, बल्कि एक संवेदनशील जनहित के विषय पर असंवेदनशीलता को भी दर्शाता है। कहा जा रहा है कि यदि विधायक निवास के सामने ऐसी स्थिति नहीं बनने देना था, तो प्रशासन प्रदर्शनकारियों को पहले ही विधायक निवास से दूर रोक सकता था। वहीं, लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार यह भी अपेक्षित था कि विधायक स्वयं प्रदर्शनकारियों के पास पहुंचकर उनकी बात सुनते। लोगों ने यह भी याद दिलाया कि स्वयं विधायक अपने युवावस्था के राजनीतिक जीवन में ऐसे आंदोलनों और प्रदर्शनों का हिस्सा रह चुके हैं। ऐसे में आज इस तरह का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि लोगों की जान से जुड़े मुद्दे पर संवाद और संवेदनशीलता की आवश्यकता थी, न कि कांग्रेस और बीजेपी की ओर से शोर-शराबा और शक्ति प्रदर्शन की। आरोप लगाया जा रहा है कि सत्ता पक्ष जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इस तरह की राजनीति से न तो सरकार की जवाबदेही तय होगी और न ही सच्चाई को दबाया जा सकेगा।1
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- Post by Ankit Raikwar1
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