मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के चिरमिरी स्थित हल्दीबाड़ी में युवा कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष हाफिज़ मेमन के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जताया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनहित के मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी की तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्ष की आवाज़ दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका कांग्रेस लगातार विरोध करती रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी संविधान और जनाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा अन्याय और दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन में युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के चिरमिरी स्थित हल्दीबाड़ी में युवा कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष हाफिज़ मेमन के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जताया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनहित के मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी की तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्ष की आवाज़ दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका कांग्रेस लगातार विरोध करती रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी संविधान और जनाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा अन्याय और दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन में युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
- कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने दिल्ली के जंतर-मंतर में 20 जुलाई को आयोजित सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान सामने आए कथित घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। सांसद ने पत्र के जरिए इस पूरे मामले की तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सांसद महंत ने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो और दृश्य सामग्री से यह प्रतीत होता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान निहत्थे नागरिकों, विशेषकर छात्रों और युवाओं के साथ कथित रूप से मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने महिलाओं और छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार को अत्यंत चिंताजनक बताया और कहा कि वायरल वीडियो में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट किए जाने तथा घटना के बाद कुछ अधिकारियों के हंसते हुए दिखाई देने के दृश्य पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान बिना किसी स्पष्ट पहचान या वर्दी के सादे कपड़ों में हाथों में डंडे लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते दिखे लोगों की मौजूदगी पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं। सांसद ज्योत्सना महंत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से मांग की है कि महिलाओं के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह जांच करने की भी मांग की है कि सादे कपड़ों में व्यक्तियों की तैनाती किसके आदेश से की गई थी और उससे संबंधित आदेश सार्वजनिक किए जाएं। इसके साथ ही, वीडियो में हिंसा करते दिखाई देने वाले सभी लोगों पर विधिसम्मत कार्रवाई करने और भविष्य में प्रदर्शनों के दौरान बिना पहचान वाले व्यक्तियों की तैनाती पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों का शांतिपूर्ण प्रयोग करते समय नागरिकों का असुरक्षित महसूस करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।1
- लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध और अराजकता के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध मर्यादा की सीमाओं को पार कर जाता है, तो वह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत माना जाता है। आज प्रधानमंत्री के आवास के बाहर जिस प्रकार का घटनाक्रम देखने को मिला, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। जिन मुद्दों पर चर्चा की मांग की गई थी, उन्हें स्वीकार किए जाने के बाद भी यदि संवाद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो इससे गंभीर राजनीतिक प्रश्न खड़े होते हैं। लोकतंत्र में संवाद, बहस और चर्चा ही समस्याओं के समाधान का सर्वोत्तम माध्यम हैं। संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों का दायित्व है कि वे उसकी गरिमा बनाए रखें। देश की जनता अपने जनप्रतिनिधियों से जिम्मेदार, संयमित और मर्यादित आचरण की अपेक्षा करती है। इस बीच, आज राहुल गांधी का आचरण पूरी तरह से अशोभनीय और निंदनीय रहा। नेता प्रतिपक्ष जैसा गरिमामय पद होने के बावजूद उन्होंने उस पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं किया।1
- देश में कोर्ट के जजों की मौजूदा स्थिति और हाल को लेकर भारी निराशा व्यक्त की गई है। इस तरह के हालातों को देखकर देश की पूरी कोर्ट व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास पूरी तरह उठता जा रहा है।1
- सूरजपुर जिले के प्रेमनगर क्षेत्र में आज काफी दिनों के बाद झींक नाला का रौद्र नजारा देखने को मिला है। लंबे समय के अंतराल के बाद नाले का यह रौद्र रूप और भयानक दृश्य लोगों के सामने आया है।1
- 'किसान, मजदूर बचाओ अभियान, फेस-3' का पूरा वीडियो देखने की अपील की गई है। इस अभियान से संबंधित पूरा वीडियो 'AnnaPurna Muhim' यूट्यूब चैनल पर देखने के लिए कहा गया है।1
- तिल्दा के ग्राम सिनोधा में आयोजित बाल चौपाल में बाल विवाह की रोकथाम, बच्चों के अधिकार, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को लेकर सार्थक चर्चा की गई। चर्चा के दौरान यह बात सामने रखी गई कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा है। इस कुप्रथा के दुष्परिणामों को देखते हुए सभी से एकजुट होकर जागरूकता फैलाने और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया गया, ताकि इस पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।1
- छत्तीसगढ़ सीमा पार कर अनूपपुर जिले में दाखिल हुए तीन हाथियों का समूह जैतहरी से अनूपपुर क्षेत्र में विचरण करते हुए पिछले 17 दिनों से जिला मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर बरबसपुर के भोलगढ़ वन बीट, वनी तालाब और कुरियारी जंगल में डेरा डाले हुए था। मंगलवार की देर रात हाथियों ने भोलगढ़ के सोन टोला से सोन नदी पार की और बुधवार सुबह भगतबांध के जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहे हैं। इस दौरान हाथियों ने भोलगढ़ के जंगल और कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लगे रामबांस, कटंग बांस, तेंदू, जामुन, गुंजा, पीपल और बर के पेड़ों को तोड़कर अपना आहार बनाया। राजमार्ग के किनारे दिन-रात हाथियों की मौजूदगी से राहगीरों की भीड़ जुटती रही, जिससे वन विभाग, यातायात और कोतवाली पुलिस को आवागमन सुचारू रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पोड़ी के सांधा तिराहा से पिंजरहा धार के बीच हाथियों के अचानक मुख्य मार्ग पर आने से वाहनों से दुर्घटना की आशंका बनी रही। इसके अलावा, हाथियों ने पोंड़ी, मानपुर, बरबसपुर, खांड़ा और भोलगढ़ के टोलों में पहुंचकर ग्रामीणों के मकानों में तोड़फोड़ की, बाड़ियों में लगे फसलों और घर में रखे अनाज को खा लिया। हाथियों ने भोलगढ़ बस स्टैंड के हैंडपंप का हैंडल टेढ़ा कर दिया और भोलगढ़ वन चौकी की बाउंड्री तोड़कर खिड़की उखाड़ने का प्रयास किया। हाथियों के डर से ग्रामीण रात-रात भर जागकर बिता रहे हैं। वर्षा काल के दौरान कच्चे मकान टूटने से जहरीले जीव-जंतुओं के घरों में घुसने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों और वन विभाग के गश्ती दल द्वारा भगाने की कोशिश करने पर हाथियों ने कई बार उन्हें ही दौड़ा लिया। हाथियों के उत्पाद और नुकसान से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, वन विभाग, जनप्रतिनिधियों और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत दर्ज कराई है तथा मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन तक की चेतावनी दी है।1
- पानी में डूबे या फंसे ट्रैक्टर को लकड़ी या डंडा लगाकर बाहर निकालने की कोशिश बेहद खतरनाक साबित हो सकती है और इससे दुर्घटना होने की पूरी संभावना बनी रहती है। सरगुजा के उदयपुर क्षेत्र में ट्रैक्टर का एक हिस्सा पूरी तरह पानी में डूब चुका है, जिसे निकालने के लिए लोग उसमें डंडा और बाली फंसाकर प्रयास कर रहे हैं। इस तरह का जोखिम भरा तरीका अपनाते समय हर पल बड़े हादसे का डर बना रहता है। ट्रैक्टर में इस तरह जबरन डंडा या बाली फंसाकर निकालने के चक्कर में गाड़ियां पीछे की तरफ से आपस में टकरा जाती हैं। ऐसी स्थिति में जोखिम उठाने के बजाय यदि ट्रैक्टर पानी या कीचड़ में डूब जाए, तो दूसरा ट्रैक्टर मंगाकर टोचन (टोइंग) के जरिए ही उसे सुरक्षित बाहर निकाला जाना चाहिए।1
- पुलिस अधिकारियों के कारनामे को लेकर भारी विरोध जताया गया है। अधिकारियों की इस तरह की हरकत के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए इसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है।1