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राजकीय इटखोरी महोत्सव–2026: 19से 21 फरवरी तक दिखेगा संस्कृति और तकनीक का संगम 19, 20 एवं 21 फरवरी को आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राजकीय इटखोरी महोत्सव–2026 को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। महोत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए उपायुक्त श्रीमती कीर्तिश्री ने समाहरणालय परिसर से बुधवार को लगभग 3 बजे दो प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों में भ्रमण कर लोगों को कार्यक्रमों की जानकारी देंगे। 19 व 20 फरवरी को इटखोरी के बक्सा डैम में आमजनों के लिए निःशुल्क वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही लक्षणपुर भेड़ी फॉर्म डैम में रोमांचक पैरा-ग्लाइडिंग की व्यवस्था रहेगी, जो युवाओं के लिए विशेष आकर्षण होगी। महोत्सव के तीनों दिन भव्य सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड कलाकारों सहित विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 21 फरवरी को माँ भद्रकाली मंदिर स्थित महाने नदी तट पर भव्य संध्या आरती का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा 500 ड्रोन से सुसज्जित आकर्षक ड्रोन शो महोत्सव की खास पहचान बनेगा। जिला प्रशासन ने लोगों से सपरिवार शामिल होकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है।

5 hrs ago
user_Headline jharkhand
Headline jharkhand
Press-Media Pratappur, Chatra•
5 hrs ago

राजकीय इटखोरी महोत्सव–2026: 19से 21 फरवरी तक दिखेगा संस्कृति और तकनीक का संगम 19, 20 एवं 21 फरवरी को आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राजकीय इटखोरी महोत्सव–2026 को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। महोत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए उपायुक्त श्रीमती कीर्तिश्री ने समाहरणालय परिसर से बुधवार को लगभग 3 बजे दो प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों में भ्रमण कर लोगों को कार्यक्रमों की जानकारी देंगे। 19 व 20 फरवरी को इटखोरी के बक्सा डैम में आमजनों के लिए निःशुल्क वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही लक्षणपुर भेड़ी फॉर्म डैम में रोमांचक पैरा-ग्लाइडिंग की व्यवस्था रहेगी, जो युवाओं के लिए विशेष आकर्षण होगी। महोत्सव के तीनों दिन भव्य सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड कलाकारों सहित विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 21 फरवरी को माँ भद्रकाली मंदिर स्थित महाने नदी तट पर भव्य संध्या आरती का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा 500 ड्रोन से सुसज्जित आकर्षक ड्रोन शो महोत्सव की खास पहचान बनेगा। जिला प्रशासन ने लोगों से सपरिवार शामिल होकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है।

More news from Chatra and nearby areas
  • प्रतापपुर प्रखंड कार्यालय के पुराने भवन में झारखंड सरकार द्वारा आवंटित चीनी और नमक कई वर्षों से रखे-रखे सड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से पड़े इन खाद्य सामग्रियों की सुध लेने की जहमत किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या पदाधिकारी ने नहीं उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त चीनी और नमक वर्षों पहले ही यहां जमा किए गए थे, लेकिन उनका वितरण नहीं किया गया। समय पर वितरण नहीं होने के कारण अब सामग्री खराब हो चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? एक ओर राज्य सरकार गरीबों के लिए खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली सामग्री का इस तरह बर्बाद होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इनका वितरण किया गया होता, तो गरीब परिवारों को इसका लाभ मिल सकता था। इस मामले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) पापु यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी से भी दूरभाष के माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, परंतु संपर्क स्थापित नहीं हो सका। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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    प्रतापपुर प्रखंड कार्यालय के पुराने भवन में झारखंड सरकार द्वारा आवंटित चीनी और नमक कई वर्षों से रखे-रखे सड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से पड़े इन खाद्य सामग्रियों की सुध लेने की जहमत किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या पदाधिकारी ने नहीं उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त चीनी और नमक वर्षों पहले ही यहां जमा किए गए थे, लेकिन उनका वितरण नहीं किया गया। समय पर वितरण नहीं होने के कारण अब सामग्री खराब हो चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? एक ओर राज्य सरकार गरीबों के लिए खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली सामग्री का इस तरह बर्बाद होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इनका वितरण किया गया होता, तो गरीब परिवारों को इसका लाभ मिल सकता था। इस मामले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) पापु यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी से भी दूरभाष के माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, परंतु संपर्क स्थापित नहीं हो सका। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    user_Headline jharkhand
    Headline jharkhand
    Press-Media Pratappur, Chatra•
    3 hrs ago
  • भयमुक्त भ्रष्टाचार बनाम जीरो टॉलरेंस : बिहार में सुशासन का असहज सच बिहार में “सुशासन” अब एक नारा भर रह गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार भयमुक्त होकर फल-फूल रहा है। अगर ऐसा नहीं होता, तो गया नगर प्रखंड के बीडीओ को दिन के उजाले में, अपने ही चेंबर में ₹50,000 रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग की टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा जाना संभव नहीं होता। पटना में सहायक निदेशक का ₹5 लाख रिश्वत लेते पकड़ा जाना भी इसी कड़ी का एक और उदाहरण है। सवाल यह नहीं है कि गिरफ्तारी हुई या नहीं, सवाल यह है कि गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ? क्या भ्रष्टाचार रुका? क्या दोषियों को सजा मिली? गिरफ्तारी की राजनीति, सजा का अकाल बिहार में हर कुछ महीनों में कोई न कोई अधिकारी निगरानी के हत्थे चढ़ता है। प्रेस नोट जारी होता है, फोटो छपती है, सरकार अपनी पीठ थपथपा लेती है। लेकिन फिर वही अधिकारी कुछ समय बाद ज़मानत पर बाहर, कभी निलंबन से मुक्त, तो कभी बहाल होकर फिर उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाता है। यदि यही “जीरो टॉलरेंस” है, तो यह नीति नहीं बल्कि डपोरशंखी घोषणा है। डर किसे नहीं है? आम नागरिक डरा हुआ है— फाइल आगे बढ़ाने से पहले, हक़ माँगने से पहले, शिकायत करने से पहले। लेकिन रिश्वतखोर लोक सेवक निडर है। क्योंकि उसे पता है: सजा की संभावना न्यूनतम है मुकदमे सालों चलेंगे विभागीय संरक्षण मिलेगा और अंततः “सब मैनेज हो जाएगा” निगरानी विभाग पर भी सवाल निगरानी विभाग की भूमिका केवल गिरफ्तारी तक सीमित क्यों है? चार्जशीट में देरी क्यों? दोष सिद्धि की दर इतनी कम क्यों? यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सिस्टम के भीतर सिस्टम भ्रष्टाचार को बचा रहा है? यह आरोप नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आवश्यक संदेह है— जिसका जवाब सरकार को देना होगा। "गिरफ्तारी बनाम मानवाधिकार" यदि कोई निर्दोष व्यक्ति गिरफ्तार होता है, तो वह निस्संदेह मानवाधिकार उल्लंघन है। लेकिन जब कोई अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा जाए तो उसे “निर्दोष” कहना कानून और नैतिकता—दोनों का अपमान है। फिर सवाल उठता है: अगर वह अपराधी नहीं है, तो गिरफ्तारी क्यों? और अगर अपराधी है, तो सजा क्यों नहीं? जब्त राशि और खोखला कानून रिश्वत की जब्त राशि सरकारी खजाने में चली जाती है, लेकिन जनता का भरोसा किस खजाने में जमा होता है? जब तक: समयबद्ध ट्रायल कठोर सजा संपत्ति जब्ती और स्थायी बर्खास्तगी नहीं होगी— तब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं, बल्कि उसे सरकारी संरक्षण मिलता रहेगा। निष्कर्ष भ्रष्टाचार की गिरफ्तारी से सरकार की मंशा साबित नहीं होती, बल्कि भ्रष्टाचार की सजा से सुशासन साबित होता है। आज बिहार के सामने सवाल साफ़ है क्या सुशासन एक ब्रांड है, या फिर न्याय, भय और कानून पर आधारित एक वास्तविक शासन? अगर जवाब नहीं बदला, तो इतिहास लिखेगा— भ्रष्टाचार पकड़ा तो गया, पर सजा से बचा लिया गया।
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    भयमुक्त भ्रष्टाचार बनाम जीरो टॉलरेंस : बिहार में सुशासन का असहज सच
बिहार में “सुशासन” अब एक नारा भर रह गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार भयमुक्त होकर फल-फूल रहा है। अगर ऐसा नहीं होता, तो गया नगर प्रखंड के बीडीओ को दिन के उजाले में, अपने ही चेंबर में ₹50,000 रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग की टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा जाना संभव नहीं होता। पटना में सहायक निदेशक का ₹5 लाख रिश्वत लेते पकड़ा जाना भी इसी कड़ी का एक और उदाहरण है।
सवाल यह नहीं है कि गिरफ्तारी हुई या नहीं, सवाल यह है कि
गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?
क्या भ्रष्टाचार रुका?
क्या दोषियों को सजा मिली?
गिरफ्तारी की राजनीति, सजा का अकाल
बिहार में हर कुछ महीनों में कोई न कोई अधिकारी निगरानी के हत्थे चढ़ता है। प्रेस नोट जारी होता है, फोटो छपती है, सरकार अपनी पीठ थपथपा लेती है। लेकिन फिर वही अधिकारी कुछ समय बाद ज़मानत पर बाहर, कभी निलंबन से मुक्त, तो कभी बहाल होकर फिर उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाता है।
यदि यही “जीरो टॉलरेंस” है, तो यह नीति नहीं बल्कि डपोरशंखी घोषणा है।
डर किसे नहीं है?
आम नागरिक डरा हुआ है—
फाइल आगे बढ़ाने से पहले,
हक़ माँगने से पहले,
शिकायत करने से पहले।
लेकिन रिश्वतखोर लोक सेवक निडर है।
क्योंकि उसे पता है:
सजा की संभावना न्यूनतम है
मुकदमे सालों चलेंगे
विभागीय संरक्षण मिलेगा
और अंततः “सब मैनेज हो जाएगा”
निगरानी विभाग पर भी सवाल
निगरानी विभाग की भूमिका केवल गिरफ्तारी तक सीमित क्यों है?
चार्जशीट में देरी क्यों?
दोष सिद्धि की दर इतनी कम क्यों?
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि
क्या सिस्टम के भीतर सिस्टम भ्रष्टाचार को बचा रहा है?
यह आरोप नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आवश्यक संदेह है—
जिसका जवाब सरकार को देना होगा।
"गिरफ्तारी बनाम मानवाधिकार"
यदि कोई निर्दोष व्यक्ति गिरफ्तार होता है, तो वह निस्संदेह मानवाधिकार उल्लंघन है।
लेकिन जब कोई अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा जाए
तो उसे “निर्दोष” कहना
कानून और नैतिकता—दोनों का अपमान है।
फिर सवाल उठता है:
अगर वह अपराधी नहीं है, तो गिरफ्तारी क्यों?
और अगर अपराधी है, तो सजा क्यों नहीं?
जब्त राशि और खोखला कानून
रिश्वत की जब्त राशि सरकारी खजाने में चली जाती है,
लेकिन जनता का भरोसा
किस खजाने में जमा होता है?
जब तक:
समयबद्ध ट्रायल
कठोर सजा
संपत्ति जब्ती
और स्थायी बर्खास्तगी
नहीं होगी—
तब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं,
बल्कि उसे सरकारी संरक्षण मिलता रहेगा।
निष्कर्ष
भ्रष्टाचार की गिरफ्तारी से सरकार की मंशा साबित नहीं होती,
बल्कि भ्रष्टाचार की सजा से सुशासन साबित होता है।
आज बिहार के सामने सवाल साफ़ है
क्या सुशासन एक ब्रांड है,
या फिर न्याय, भय और कानून पर आधारित एक वास्तविक शासन?
अगर जवाब नहीं बदला,
तो इतिहास लिखेगा—
भ्रष्टाचार पकड़ा तो गया, पर सजा से बचा लिया गया।
    user_Vijay Kumar
    Vijay Kumar
    Photographer शेरघाटी, गया, बिहार•
    6 hrs ago
  • शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में भव्य जलयात्रा निकाली गई डोभी/गया डोभी प्रखंड क्षेत्र के बजौरा पंचायत अंतर्गत साहपुर गांव में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई लिलाजन नदी पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात जलयात्रा पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन मिश्रा द्वारा विधि-विधान एवं पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। आयोजकों ने बताया कि अगले दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जबकि गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दिलीप प्रसाद यादव, रामबली यादव, मोहन यादव, सुनील यादव, धनु यादव, श्रवण मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गांव में पूरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
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    शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर साहपुर में  भव्य जलयात्रा निकाली गई
डोभी/गया
डोभी प्रखंड क्षेत्र के बजौरा पंचायत अंतर्गत साहपुर गांव में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर  भव्य जलयात्रा निकाली गई। जलयात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई लिलाजन नदी पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात जलयात्रा पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन मिश्रा द्वारा विधि-विधान एवं पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। आयोजकों ने बताया कि अगले दिन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जबकि गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर दिलीप प्रसाद यादव, रामबली यादव, मोहन यादव, सुनील यादव, धनु यादव, श्रवण मांझी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गांव में पूरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
    user_महेंद्र शर्मा
    महेंद्र शर्मा
    पत्रकार, # डोभी, गया, बिहार•
    10 hrs ago
  • मुंह छिपाकर दूसरी शादी करने पहुंची महिला को कचहरी के बाहर पहले पति ने दबोच लिया। फिर क्या था तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही... मोरे
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    मुंह छिपाकर दूसरी शादी करने पहुंची महिला को कचहरी के बाहर पहले पति ने दबोच लिया। फिर क्या था तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही... मोरे
    user_Neha Sinha
    Neha Sinha
    Photographer Amas, Gaya•
    12 hrs ago
  • गया जिले के गुरुआ बाजार में सड़क जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और वाहनों के लिए स्थायी स्टैंड की कमी के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन घंटों जाम लगने से स्कूली बच्चों, मरीजों, व्यापारियों और राहगीरों को कठिनाई होती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, गुरुआ बाजार के दोनों ओर फुटपाथों पर दुकानदारों ने लगभग 10-10 फीट तक अतिक्रमण कर लिया है। इसके चलते पैदल चलने वाले लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है
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    गया जिले के गुरुआ बाजार में सड़क जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और वाहनों के लिए स्थायी स्टैंड की कमी के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन घंटों जाम लगने से स्कूली बच्चों, मरीजों, व्यापारियों और राहगीरों को कठिनाई होती है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, गुरुआ बाजार के दोनों ओर फुटपाथों पर दुकानदारों ने लगभग 10-10 फीट तक अतिक्रमण कर लिया है। इसके चलते पैदल चलने वाले लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है
    user_Prem Kr. Mishra
    Prem Kr. Mishra
    Astrologer गुरुआ, गया, बिहार•
    3 hrs ago
  • चतरा जिले के गिद्धौर प्रखंड के सिंदवारी गांव में बड़की नदी पर पुल बनाने की मांग वर्षो से ग्रामीण कर रहे हैं। पुल नहीं बनने से बरसात में कई गांव टापू बन जाते हैं।
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    चतरा जिले के गिद्धौर प्रखंड के सिंदवारी गांव में बड़की नदी पर पुल बनाने की मांग वर्षो से ग्रामीण कर रहे हैं। पुल नहीं बनने से बरसात में कई गांव टापू बन जाते हैं।
    user_Jitendra Tiwari
    Jitendra Tiwari
    पत्रकार पथलगोरा, चतरा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • Post by गौतम चंद्रवंशी जी
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    Post by गौतम चंद्रवंशी जी
    user_गौतम चंद्रवंशी जी
    गौतम चंद्रवंशी जी
    Video Player Repair Service औरंगाबाद, औरंगाबाद, बिहार•
    12 hrs ago
  • 19, 20 एवं 21 फरवरी को आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राजकीय इटखोरी महोत्सव–2026 को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। महोत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए उपायुक्त श्रीमती कीर्तिश्री ने समाहरणालय परिसर से बुधवार को लगभग 3 बजे दो प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों में भ्रमण कर लोगों को कार्यक्रमों की जानकारी देंगे। 19 व 20 फरवरी को इटखोरी के बक्सा डैम में आमजनों के लिए निःशुल्क वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही लक्षणपुर भेड़ी फॉर्म डैम में रोमांचक पैरा-ग्लाइडिंग की व्यवस्था रहेगी, जो युवाओं के लिए विशेष आकर्षण होगी। महोत्सव के तीनों दिन भव्य सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड कलाकारों सहित विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 21 फरवरी को माँ भद्रकाली मंदिर स्थित महाने नदी तट पर भव्य संध्या आरती का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा 500 ड्रोन से सुसज्जित आकर्षक ड्रोन शो महोत्सव की खास पहचान बनेगा। जिला प्रशासन ने लोगों से सपरिवार शामिल होकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है।
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    19, 20 एवं 21 फरवरी को आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राजकीय इटखोरी महोत्सव–2026 को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। महोत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए उपायुक्त श्रीमती कीर्तिश्री ने समाहरणालय परिसर से बुधवार को लगभग 3 बजे दो प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों में भ्रमण कर लोगों को कार्यक्रमों की जानकारी देंगे।
19 व 20 फरवरी को इटखोरी के बक्सा डैम में आमजनों के लिए निःशुल्क वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही लक्षणपुर भेड़ी फॉर्म डैम में रोमांचक पैरा-ग्लाइडिंग की व्यवस्था रहेगी, जो युवाओं के लिए विशेष आकर्षण होगी।
महोत्सव के तीनों दिन भव्य सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड कलाकारों सहित विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 21 फरवरी को माँ भद्रकाली मंदिर स्थित महाने नदी तट पर भव्य संध्या आरती का आयोजन किया जाएगा।
इसके अलावा 500 ड्रोन से सुसज्जित आकर्षक ड्रोन शो महोत्सव की खास पहचान बनेगा। जिला प्रशासन ने लोगों से सपरिवार शामिल होकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है।
    user_Headline jharkhand
    Headline jharkhand
    Press-Media Pratappur, Chatra•
    5 hrs ago
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