किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए
किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए
- किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए1
- सारी उमर1
- जगदलपुर: नगरनार में चाकू लहराकर दहशत फैला रहा आरोपी गिरफ्तार थाना नगरनार पुलिस ने आम रास्ते में धारदार चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। 10 मई को ग्राम चोकावाड़ा में आरोपी चंदन पटेल, 35 वर्ष, निवासी चोकावाड़ा, लोहे का धारदार चाकू लहराकर राहगीरों को डरा-धमका रहा था और गांव का माहौल खराब कर रहा था। पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के निर्देश पर थाना प्रभारी संतोष सिंह के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ा। उसके कब्जे से धारदार चाकू बरामद कर जब्त किया गया। आरोपी के खिलाफ धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया। गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय पेश किया गया। कार्रवाई में निरीक्षक संतोष सिंह, सउनि दिनेश ठाकुर, आरक्षक नेलसन टोप्पो व नरेश कश्यप की अहम भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए असामाजिक तत्वों पर लगातार कार्रवाई जारी है।2
- क्या कलयुग में भी विश्व शांति और आपसी भाईचारा संभव है? 'कलयुग में सतयुग की शुरुआत' श्रंखला के भाग-6 में जानिए इसका समाधान। इस महत्वपूर्ण चर्चा को Factful Debates YouTube चैनल पर देखें।1
- Post by Narend Dewagna1
- कांकेर के एमजी वार्ड में हुई चाकूबाजी की घटना के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। कोतवाली थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन आरोपियों को दबोचा, जिससे इलाके में दहशत कुछ कम हुई है।1
- पशु क्रूरता प्रकरण में फ़रार दो आरोपी गिरफ्तार, अब तक पाँच आरोपी हुए गिरफ्तार राजपुर। अवैध पशु तस्करी एवं पशु क्रूरता प्रकरण में फरार 02 आरोपी गिरफ्तार,पूर्व में 03 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार, कुल 05 आरोपियों पर कार्यवाही। पुलिस द्वारा अवैध पशु तस्करी एवं पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में थाना राजपुर पुलिस ने पूर्व में गिरफ्तार 03 आरोपियों के अतिरिक्त 02 अन्य आरोपी फरार चल रहे थे जिसे पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोपियों के विरुद्ध 2004 कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4, 6, 10 एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(घ) के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई है। जानकारी के अनुसार दिनांक 11.04.2026 को थाना राजपुर के स्टाफ शासकीय वाहन से रात्रि गश्त पर थे। गश्त के दौरान रात्रि लगभग 10:00 बजे मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक सफेद रंग की पिकअप वाहन क्रमांक JH01GN-8143 में मवेशियों को क्रूरता पूर्वक बांधकर तेज गति से अंबिकापुर से राजपुर होते हुए गुमला (झारखण्ड) की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम द्वारा थाना के सामने अंबिकापुर रोड पर घेराबंदी कर उक्त वाहन को रोका गया। प्रारंभिक पूछताछ में वाहन चालक द्वारा भ्रामक जानकारी दी गई, जिस पर संदेह होने से सख्ती से पूछताछ की गई। पूछताछ में वाहन स्वामी ने अपना नाम संदीप बड़ाईक, पिता चमन बड़ाईक, उम्र 27 वर्ष, निवासी टांगरझरिया थाना बसिया जिला गुमला (झारखण्ड) तथा चालक ने अपना नाम संदीप साहू, पिता सोमरा, उम्र 25 वर्ष, निवासी सुरसुरिया थाना गुमला जिला गुमला (झारखण्ड) बताया। पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया कि ग्राम जयनगर थाना जयनगर जिला सूरजपुर निवासी गुड्डू पंडित द्वारा 02 नग गाय एवं 02 नग बछिया को गुमला निवासी अनुज राम के पास पहुंचाने हेतु उक्त वाहन में लोड कराया गया था। मवेशियों को वाहन में अत्यंत अमानवीय एवं क्रूर तरीके से ठूंस-ठूंस कर बांधकर परिवहन किया जा रहा था, जो विधि विरुद्ध पाया गया। पुलिस द्वारा वाहन सहित मवेशियों को जप्त कर आरोपियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। प्रकरण में संलिप्त 03 आरोपियों को पूर्व में गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया जा चुका है। वहीं मामले में फरार आरोपी देवेश मिश्रा एवं सलमान घटना दिनांक से लगातार फरार चल रहे थे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में फरार आरोपी की थाना राजपुर पुलिस एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम द्वारा लगातार पतासाजी की जा रही थी। तकनीकी साक्ष्य एवं मुखबिर सूचना के आधार पर आज दिनांक को दोनों फरार आरोपियो देवेश कुमार मिश्रा उर्फ गुड्डू पंडित पिता तारकेश्वर नाथ मिश्रा उम्र 26 वर्ष निवासी शिवनंदनपुर थाना जयनगर जिला सूरजपुर एवं मोहम्मद सलमान पिता मोहम्मद आरिफ उम्र 24 वर्ष निवासी ग्राम जयनगर थाना जयनगर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ को दिनांक 11.05 .2026 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड हेतु न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बलरामपुर पुलिस की अपील :- बलरामपुर पुलिस द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि पशु तस्करी, अवैध परिवहन अथवा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें। जिले में पशु तस्करों एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सतत एवं कठोर कार्यवाही जारी रहेगी।1
- किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए किरंदुल केवल एक नगर नहीं,बल्कि प्रकृति, संघर्ष,मेहनत और खूबसूरती का ऐसा संगम है,जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं। यह वह धरती है जहाँ एक ओर बैलाडीला खदान की विशाल पहाड़ियों से निकलने वाला लौह अयस्क पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है,तो दूसरी ओर उन्हीं पहाड़ों की गोद में बसी हरी-भरी वादियाँ, बहते झरने,ठंडी हवाएँ और बादलों से ढके नज़ारे किसी स्वर्ग का एहसास कराते हैं, किरंदुल की पहचान सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है,यहाँ की हर सुबह पहाड़ों पर उतरती धुंध के साथ एक नई कहानी लिखती है,जब सूरज की पहली किरणें बैलाडीला की चोटियों को छूती हैं,तब ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस धरती को स्वर्णिम आशीर्वाद दे रही हो,यहाँ के घने जंगल,दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण मन को ऐसी शांति देते हैं,जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिलती यहाँ रहने वाले लोगों की मेहनत भी इस धरती की सबसे बड़ी पहचान है। खदानों में दिन-रात काम करने वाले श्रमिकों की मेहनत से ही यह नगर देश की औद्योगिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इन सबके बीच भी किरंदुल ने अपनी प्राकृतिक आत्मा को जीवित रखा है,बारिश के मौसम में जब पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है, तब यह जगह सचमुच धरती पर जन्नत जैसी दिखाई देती है, कई लोग बैलाडीला को सिर्फ लौह अयस्क की खान के रूप में जानते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ आए हैं, उन्होंने इसकी असली खूबसूरती को महसूस किया है, यह वह जगह है जहाँ प्रकृति और विकास दोनों साथ-साथ चलते हैं यहाँ की वादियाँ, यहाँ की हवा, यहाँ की मिट्टी और यहाँ का शांत वातावरण हर किसी के दिल में अपनी एक अलग जगह बना लेता है, किरंदुल केवल छत्तीसगढ़ का एक नगर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसी वह अनमोल धरोहर है, जो दुनिया को यह बताती है कि असली समृद्धि केवल खनिजों में नहीं, बल्कि उस सुंदरता में भी होती है जिसे देखकर इंसान का मन शांति और गर्व से भर जाए1