उद्रंगी गांव की उड़ान की डोगरी टोली में मुमताज अंसारी के घर से लेकर स्वर्गीय कयूम अंसारी के घर तक का नाला पूरी तरह से जाम हो गया है, जिससे गंदा पानी रास्ते पर बह रहा है। इस कारण आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह नाला लगभग आधा किलोमीटर तक जाम है। ग्रामीणों ने मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है, क्योंकि गर्मी के मौसम में ही ऐसी हालत है, तो बरसात में स्थिति और भी खराब होने की आशंका है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए, कुछ दिन पहले एक ग्रामीण ने बीडीओ मैडम को एक आवेदन दिया था, जिसमें नाले को खुलवाने का अनुरोध किया गया था। इस आवेदन पर मुखिया साहब ने भी हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, आवेदन दिए जाने और मुखिया के हस्ताक्षर होने के बावजूद, अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोग खासे परेशान हैं।
उद्रंगी गांव की उड़ान की डोगरी टोली में मुमताज अंसारी के घर से लेकर स्वर्गीय कयूम अंसारी के घर तक का नाला पूरी तरह से जाम हो गया है, जिससे गंदा पानी रास्ते पर बह रहा है। इस कारण आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह नाला लगभग आधा किलोमीटर तक जाम है। ग्रामीणों ने मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है, क्योंकि गर्मी के मौसम में ही ऐसी हालत है, तो बरसात में स्थिति और भी खराब होने की आशंका है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए, कुछ दिन पहले एक ग्रामीण ने बीडीओ मैडम को एक आवेदन दिया था, जिसमें नाले को खुलवाने का अनुरोध किया गया था। इस आवेदन पर मुखिया साहब ने भी हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, आवेदन दिए जाने और मुखिया के हस्ताक्षर होने के बावजूद, अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोग खासे परेशान हैं।
- उद्रंगी गांव की उड़ान की डोगरी टोली में मुमताज अंसारी के घर से लेकर स्वर्गीय कयूम अंसारी के घर तक का नाला पूरी तरह से जाम हो गया है, जिससे गंदा पानी रास्ते पर बह रहा है। इस कारण आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह नाला लगभग आधा किलोमीटर तक जाम है। ग्रामीणों ने मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है, क्योंकि गर्मी के मौसम में ही ऐसी हालत है, तो बरसात में स्थिति और भी खराब होने की आशंका है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए, कुछ दिन पहले एक ग्रामीण ने बीडीओ मैडम को एक आवेदन दिया था, जिसमें नाले को खुलवाने का अनुरोध किया गया था। इस आवेदन पर मुखिया साहब ने भी हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, आवेदन दिए जाने और मुखिया के हस्ताक्षर होने के बावजूद, अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोग खासे परेशान हैं।1
- लोहरदगा जिले के सेन्हा अंचल के उगरा पंचायत स्थित टेंगरिया ग्राम में एक विवादित मामला सामने आया है। वर्ष 2025 से आदिवासी समाज का एक परिवार समाज के अगुआ की अगुआई में धार्मिक स्थल पर बिना पहान पुजार की पूजा-अर्चना के बाद भी झंडा लगा रहा था। इस कार्रवाई को लेकर समस्त आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई। समाज ने उस परिवार के प्रति रोष प्रकट करते हुए धार्मिक स्थल से झंडा हटा दिया। समस्त आदिवासी समाज द्वारा उस परिवार को कड़ी चेतावनी भी दी गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि धार्मिक स्थल पर झंडा लगाने को लेकर समाज को आपत्ति है।1
- शहर के एक क्षेत्र में लंबे समय से खराब और गंदगी से भरे नाले की समस्या से स्थानीय लोग परेशान थे। इस समस्या को उजागर करते हुए एक स्थानीय युवक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें नाले की बदहाल स्थिति और नागरिकों को हो रही कठिनाइयों को स्पष्ट रूप से दिखाया गया था। वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने के बाद, नगर पालिका प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और बिना देर किए नाले की सफाई का अभियान शुरू कराया। नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची और नाले में जमा कचरे तथा गाद को हटाकर उसकी पूर्ण सफाई की। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि सोशल मीडिया अब जनसमस्याओं को प्रभावी ढंग से उजागर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। इस सफाई अभियान में "कॉकरोच जनता पार्टी" के सदस्यों ने भी सक्रिय सहयोग दिया, उन्होंने समस्या को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नाले की सफाई से अब क्षेत्र में जलभराव, दुर्गंध और गंदगी जैसी समस्याओं से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन और सभी सहयोगी संगठनों का आभार व्यक्त किया है। यह पूरी घटना नागरिक जागरूकता, सोशल मीडिया की शक्ति और प्रशासनिक तत्परता के सफल समन्वय का उदाहरण पेश करती है, जो यह दर्शाता है कि स्थानीय समस्याओं का समाधान इस प्रकार से अपेक्षाकृत कम समय में संभव है।1
- झारखंड में सड़कों की बदहाल स्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है, जहाँ यह दावा किया गया है कि राज्य में सड़कें बनाने के बजाय केवल तालाब ही बनते हैं। पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड की सड़कें गड्ढों से इतनी भरी हुई हैं कि वे किसी तालाब से कम नहीं दिखतीं। इसके साथ ही, नेताओं पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जहाँ नेताओं की जेबें भरती रहती हैं, वहीं राज्य की सड़कों के गड्ढे कभी नहीं भरते।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में घर के भीतर उपयोग के लिए लकड़ी के बजाय पत्थर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। यह पोस्ट घर में पत्थर के उपयोग को प्राथमिकता देने के अनोखे सुझाव पर आश्चर्य व्यक्त करता है।1
- गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र अंतर्गत लकेया गांव स्थित गौझीन डोभा में गाय के कटे हुए सिर की खोपड़ी, जबड़ा, खाल, सींग और पैर सहित अन्य अवशेष मिलने से हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सोमवार सुबह शौच के लिए डोभा के पास गए ग्रामीणों ने पानी में तैरते इन अंगों को देखा, जिसके बाद यह खबर पूरे प्रखंड क्षेत्र में तेजी से फैल गई। सूचना मिलते ही सिसई भरनो थाना प्रभारी, अंचलाधिकारी, मुखिया, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता, तथा भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुँचे। ग्रामीणों और हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी को हस्ताक्षर युक्त आवेदन देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज सेवी संजय वर्मा ने गुमला डीसी समेत कई नेता और मंत्री को फोन कर इस घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सिसई में बूचड़खाना चलाए जाने के कारण ऐसी घटनाएँ हो रही हैं। प्रशासन ने जेसीबी मशीन की सहायता से नाला बनाकर डोभा का पानी बाहर निकाला और फिर बोरे में सभी अवशेषों को उठाकर दफन करने के लिए ले गए। अंचलाधिकारी अशोक बड़ाईक ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बकरीद पर्व से पूर्व सिसई थाना परिसर में शांति समिति की बैठक हुई थी, जहाँ सभी समुदाय के लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से नियमों का पालन करते हुए त्योहार मनाने को कहा गया था, इसके बावजूद नियम कानून को ताक पर रखकर ऐसा कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। थाना प्रभारी ने भी गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।3
- एक मुस्लिम महिला को गांव के लोगों ने उसके घर से निकाल दिया है। महिला ने दावा किया है कि वह पिछले 30 सालों से उसी घर में रह रही थी, जिससे उसे बेदखल किया गया है।1
- एक तीखी और विवादास्पद टिप्पणी में यह दावा किया गया है कि जो व्यक्ति विदेशी धर्म अपना लेता है, उसे आदिवासी नहीं माना जा सकता है। इस बयान में ऐसे लोगों को बेहद अपमानजनक तरीके से ‘रंगवा सियार’ कहकर संबोधित किया गया है।1