*नए अस्पताल निर्माण का ग्रामीणों ने किया विरोध, भूमि सीमांकन करने पहुंचे JE को लौटाया* (लातेहार) महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ग्राम सेमरबुढ़नी में प्रस्तावित नए अस्पताल निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। भूमि सीमांकन के लिए पहुंचे विभागीय जेई को ग्रामीणों के विरोध के कारण बिना काम किए ही वापस लौटना पड़ा। ग्राम प्रधान विजय खलखो ने बताया कि गांव में कुछ वर्ष पूर्व ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन बनाया गया था, लेकिन आज तक वहां से ग्रामीणों को कोई भी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस कारण लोगों में सरकार की योजनाओं के प्रति विश्वास लगातार कम होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पहले से निर्मित स्वास्थ्य केंद्र ही निष्क्रिय पड़ा है, तो नए अस्पताल के निर्माण का कोई औचित्य नहीं है। उनका आरोप है कि केवल भवन निर्माण के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं तक नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की कि पहले से बने उप स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) को चालू कर उसमें डॉक्टर, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके बाद ही नए स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर विचार किया जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक वे नए अस्पताल निर्माण कार्य का विरोध जारी रखेंगे। मौके पर बिनोद प्रसाद, भुषण तिर्की, बिनोद महली, मिखाईल लकड़ा समेत अन्य कई ग्रामीण उपस्थित थे।
*नए अस्पताल निर्माण का ग्रामीणों ने किया विरोध, भूमि सीमांकन करने पहुंचे JE को लौटाया* (लातेहार) महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ग्राम सेमरबुढ़नी में प्रस्तावित नए अस्पताल निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। भूमि सीमांकन के लिए पहुंचे विभागीय जेई को ग्रामीणों के विरोध के कारण बिना काम किए ही वापस लौटना पड़ा। ग्राम प्रधान विजय खलखो ने बताया कि गांव में कुछ वर्ष पूर्व ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन बनाया गया था, लेकिन आज तक वहां से ग्रामीणों को कोई भी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस कारण लोगों में सरकार की योजनाओं के प्रति विश्वास लगातार कम होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पहले से निर्मित स्वास्थ्य केंद्र ही निष्क्रिय पड़ा है, तो नए अस्पताल के निर्माण का कोई औचित्य नहीं है। उनका आरोप है कि केवल भवन निर्माण के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं तक नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की कि पहले से बने उप स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) को चालू कर उसमें डॉक्टर, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके बाद ही नए स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर विचार किया जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक वे नए अस्पताल निर्माण कार्य का विरोध जारी रखेंगे। मौके पर बिनोद प्रसाद, भुषण तिर्की, बिनोद महली, मिखाईल लकड़ा समेत अन्य कई ग्रामीण उपस्थित थे।
- महुआडांड़ प्रखंड के अक्सी पंचायत के चेतमा सहित पूरे प्रखंड में जल नल योजना की हकीकत कुछ ऐसी है, जहां टंकियां तो आसमान छूती नजर आती हैं, लेकिन उनमें पानी का नामोनिशान नहीं है। पाइपलाइन बिछी है, नल लगे हैं, पर उनमें से बूंद तक नहीं गिरती। करीब तीन हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी पुराने जमाने की तरह कुआं और नदी के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर है। *हर दिन पानी के लिए जंग* गांव के लोगों के लिए हर दिन पानी जुटाना किसी जंग से कम नहीं है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे बाल्टी और बर्तन लेकर निकल पड़ते हैं। कई बार दूर-दराज के कुओं और नदी तक जाना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ जाते हैं। नदी सिकुड़ने लगती है और कुएं भी जवाब देने लगते हैं। ऐसे में एक-एक बूंद पानी की कीमत समझ में आती है। *जल मीनारें बनीं बेकार ढांचा* गांव में जल नल योजना के तहत लगाए गए सभी जल मीनार खराब पड़े हैं। कहीं मोटर जल चुकी है, कहीं पाइपलाइन टूट गई है, तो कहीं देखरेख के अभाव में पूरी व्यवस्था जाम हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना तो आई, लेकिन उसका रखरखाव और जिम्मेदारी कहीं रास्ते में ही छूट गई। अब ये टंकियां सिर्फ यह याद दिलाती हैं कि कभी यहां पानी आने का वादा किया गया था। *आश्वासन की वर्षा, लेकिन पानी नहीं* पुल्सी देवी,अब्राहम मिंज, केल्टुस कुजूर,अगापित मिंज,अग्नासीयश मिंज,अंजुलुश कुजूर, कोरनेल्यूस मिंज समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार विभाग को इसकी सूचना दे चुके हैं। हर बार अधिकारी आते हैं, देखते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। गांव में यह चर्चा आम है कि यहां पाइपलाइन से ज्यादा वादे बहते हैं, लेकिन पानी नहीं।1
- लातेहार भाजपा जिलाध्यक्ष बंशी यादव ने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर आम जनता का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे बिजली बिल में अनियमित बढ़ोतरी हो रही है और गरीब व मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।1
- चंदवा में ओवरब्रिज का निर्माण जल्द हो नहीं तो होगा ट्रैक जाम - आजसू1
- गुरुकुल इंटरनेशनल आवासीय विद्यालय मनिका के प्रधानाध्यापक दीपक यादव ने बताया कि हमारे विद्यालय में अनुभवी शिक्षकों के द्वारा नेतरहाट, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक विद्यालय, एकलव्य विद्यालय , समेत विभिन्न विद्यालय का प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जाती है सफलता 100% प्रतिशत1
- पांकी में गो सम्मान आह्वान अभियान ने पकड़ी रफ्तार। प्रखंड कार्यालय और थाना को सौंपा गया ज्ञापन, जागरूकता वैन से गांव-गांव पहुंचा संदेश। #पांकी #पलामू #झारखंड #जनसंवाद_न्यूज़ #GoSammanAbhiyan1
- getha bazar se dabra road best hai 👍1
- यह प्राचीन शिव मंदिर लोहरदगा जिला का किस्को प्रखंड का देवदरिया पंचायत का देवदरिया गांव में हैं1
- महुआडांड़ अनुमंडल के जंगलों में पिछले एक हफ्ते से आग का ऐसा तांडव मचा है कि हर तरफ सिर्फ धुआं, लपटें और तबाही नजर आ रही है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जिम्मेदार महकमा अब भी गहरी नींद में है।जंगल धू-धू कर जल रहा है पेड़ राख बन रहे हैं और बेजुबान जानवर अपनी जान बचाने के लिए गांवों की ओर भाग रहे हैं। हालात इतने खौफनाक हैं कि आसमान में काले धुएं की मोटी चादर छा गई है ग्रामीणों को सांस लेना मुश्किल हो गया है तापमान अचानक कई डिग्री बढ़ गया है छोटे जीव-जंतु, पक्षी और उनके अंडे जलकर खत्म हो चुके हैं स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी एक हफ्ते से आग लगी है, लेकिन वन विभाग गहरी नींद में है कोई सुनने वाला नहीं! तेज हवाएं और सूखे पत्ते आग को और विकराल बना रहे हैं। हर दिन नया इलाका इसकी चपेट में आ रहा है, लेकिन जमीन पर असरदार कार्रवाई कहीं नजर नहीं आ रही। ये सिर्फ आग नहीं है यह सिस्टम की नाकामी, लापरवाही और संवेदनहीनता की जलती हुई मिसाल है।1